चालक मोदी जी ने राष्ट्रपति ट्रंप को गणतंत्र दिवस का न्योता क्यों दिया ??
इस वीडियो में हम भारत के द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प को दिए न्योते के चर्चा करेंगे.
Why clever PM Modi invited President Trump for Republic Day??
In this video, we will discuss about Indian invitation to President Trump.
Reference -
https://www.reuters.com/article/us-usa-crude-india/u-s-oil-exports-to-india-soar-ahead-of-sanctions-on-iran-idUSKBN1K20AS
https://economictimes.indiatimes.com/industry/energy/oil-gas/indias-oil-import-bill-to-jump-by-25-in-fy18/articleshow/63464408.cms
https://timesofindia.indiatimes.com/india/india-invites-donald-trump-to-be-chief-guest-for-next-years-republic-day-parade/articleshow/64968372.cms
https://www.census.gov/foreign-trade/balance/c5700.html
https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_the_largest_trading_partners_of_India
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
आपने पढ़ा होगा, अगले गणतंत्र दिवस में भाग लेने के लिए, भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप को आमंत्रण दिया है.
भारत यात्रा के संदर्भ में राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है, अगर भारत ने कोई अच्छी deal offer की, तो deal maker राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा पर जरूर आएंगे. ताकि वह इस विजय को अपनी घरेलू जनता के सामने एक उपलब्धि के रूप में दिखा सके.
इसलिए सवाल यह उठता है, क्या America First का मतलब India Second है.
Global Trade War में शुरुआती गोलाबारी के बाद, अब ऐसा लगता है, हमें और firework मतलब तमाशा देखने को मिलेगा.
सार्वजनिक तौर पर तो सभी देश राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जवाबी कार्यवाही करने की घोषणा करते रहते हैं, लेकिन Private में यह सभी देश लगातार white house फोन लगाते रहते हैं, और अमेरिका से deal करने को कहते हैं.
आप को यह बात पसंद हो या ना हो, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है. राष्ट्रपति ट्रंप ने all out Global Trade war इसलिए छेड़ रखी है, क्योंकि वह मूलभूत रूप से वर्तमान वैश्विक व्यापार की व्यवस्था को बदलना चाहते हैं.
देर-सवेर आपको ऐसी खबर पढ़ने को मिलेगी, की अकेले किसी देश ने अमेरिका के साथ Trade deal कर ली.
यहां पर हमें एक बात समझनी होगी, अमेरिका में जितने सामान की खपत होती है, वह उतने सामान का उत्पादन नहीं कर सकता है. इसलिए, अगर अमेरिका का चीन से आयात कम होता है, तो अमेरिका को किसी अन्य देश से आयात बढ़ाना होगा.
पिछले साल अकेले अमेरिका ने चीन से 500 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था.
अमेरिका के द्वारा लगाए गए आयात शुल्क के कारण, चीन का माल महंगा हो जाएगा, इसलिए कोई ना कोई देश कम से कम इतना अकलमंद जरूर होगा, कि वह चीन से अमेरिकी बाजार को छीन लेने का अवसर नहीं छोड़ेगा.
निश्चित रूप से अमेरिका उत्पादन बढ़ा सकता है, तो अन्य देश भी अपना उत्पादन बढ़ा कर अमेरिका की मांग की सस्ती कीमत पर पूर्ति कर सकते हैं.
बात बहुत साफ है, Global Trade War हमारे लिए कोई खतरा नहीं हैं, हमें तो इसे एक अवसर के रूप में देखना होगा.
भारत के सामने दो विकल्प हैं, या तो हम चीन के द्वारा दी गई मूंगफलियों को खाकर संतुष्ट हो सकते हैं, अथवा राष्ट्रपति ट्रंप के साथ Deal करके भारत Jackpot जीत सकता है.
आपको पता होगा, भारत के साथ व्यापार होने पर अमेरिका को 22 बिलियन डॉलर का पिछले साल घाटा हुआ था. फिर भी विशेष तौर पर भारत के खिलाफ अमेरिका ने Trade War चालू नहीं की है.
अमेरिका ने स्टील और एलुमिनियम पर जो आयात शुल्क लगाए हैं, वह पूरी दुनिया के लिए हैं. और वैसे भी हम स्टील और एलुमिनियम का अमेरिका को निर्यात बहुत कम करते हैं.
दोस्तों हमारा कहना यह है, प्रधानमंत्री मोदी के पास प्रधानमंत्री नेहरु के द्वारा की गई गलती को सुधारने का एक मौका आ गया है.
भारत में ऐसे कई लोग हैं, जो दिन-रात अमेरिका को गाली देते रहते हैं. ऐसे लोग सुविधा पूर्ण तरीके से यह भूल जाते हैं, साल-दर-साल व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है. और ध्यान दीजिए, इस व्यापार से भारत को भारी लाभ हो रहा है .
अभी तक अमेरिका को हमारा निर्यात IT services तक सीमित है, क्या हम अमेरिका के लिए manufacturing hub नहीं बन सकते हैं.
आप जानते हैं, राष्ट्रपति ट्रंप को भारत से और अधिक माल आयात करने में दिक्कत नहीं होगी, जब तक द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिका को होने वाली हानि नहीं बढ़ती है.
दोस्तों, Deal यह है, अमेरिका भारत से अधिक मात्रा में IT Services और Goods आयात कर सकता है. और भरत बड़ी मात्रा में अमेरिका से Oil ,gas और कोयला आयात कर सकता है.
इस साल अकेले भारत ने 88 बिलियन डॉलर की कीमत पर कच्चा तेल और गैस आयात किया है.
हम सऊदी अरब और ईरान से कच्चा तेल मुख्य रूप से खरीदते हैं. और इन दोनों देशों के साथ व्यापार करने से भारत को 18 बिलियन डॉलर का व्यापार में घाटा होता है.
दोस्तों, हम अरब की खाड़ी में पैसा फेंक रहे हैं, और उसके लौटने की कोई संभावना नहीं है.
तो दूसरी ओर, अगर हमारी अमेरिका के साथ डील हो जाती है, तो अमेरिका को दिया पैसा भारत में लौट कर आ सकता है. अगर अमेरिका भारत से अधिक मात्रा में माल खरीदता है, और भारत बड़ी मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल-गैस और कोयला खरीदता है. तो दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ेगा, लेकिन अमेरिका को होने वाला व्यापारिक घाटा नहीं बढ़ेगा. अपने वोटर्स के सामने राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी एक विजय के रूप में दिखा सकते हैं.
तो दूसरी ओर, खाड़ी के देशों से गैस और कच्चा तेल कम खरीदने से, भारत को व्यापार में होने वाला घाटा कम हो सकता है.
परिणाम यह होगा, अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने से, भारत को व्यापार में होने वाला कुल लाभ बढ़ेगा, और कुल मिलाकर घाटा कम होगा. क्या यह एक अच्छी डील नहीं होगी?
वास्तव में, Global Trade War के दौरान , चीन के द्वारा जवाबी कार्यवाही करने से, अमेरिका की कंपनियों का चीन में व्यापार करना और उत्पादन करना मुश्किल हो जाएगा.
थोड़ी अधिक मात्रा में चीन को सोयाबीन और दवाइयों का निर्यात बढ़ाकर खुश होने के बजाय, भारत को अमेरिकी कंपनियों का स्वागत करना चाहिए, ताकि वह भारत में उत्पादन करने के लिए फैक्ट्री लगाएं.
इसके अलावा, चीन की जवाबी कार्यवाही के कारण, वह अमेरिका से कच्चा तेल और गैस खरीदना कम कर देगा. जिसके कारण अमेरिका भारत को कच्चे तेल और गैस की बेहतर कीमत दे सकता है.
जैसा की हमने अपने वीडियोस में पहले चर्चा की है, Global Trade War एक सच्चाई बन चुकी है. वैश्विक व्यापार व्यवस्था अब बदलेगी. जो देश अपने आपको पहले बदल लेंगे, वही इस लड़ाई के अंत में विजई होंगे.
भारत को परिवर्तन का स्वागत करना चाहिए, और अमेरिका के साथ डील कर लेनी चाहिए.
अगर भारत ने इस अवसर का लाभ नहीं उठाया, तो निश्चित मानिये कोई ना कोई अन्य देश जरूर लाभ उठाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी जी के सामने भारत में नौकरियां पैदा करना सबसे बड़ी समस्या है. राष्ट्रपति ट्रंप के पास इस समस्या का समाधान मौजूद है.
अगर अमेरिका के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी कम होती है, तो भारत की हिस्सेदारी अमेरिका के आयात में बढ़नी चाहिए. हम यहां पर 500 बिलियन डॉलर के अवसर की बात कर रहे हैं. अभी भारत अमेरिका को सिर्फ 49 बिलियन डॉलर का सामान और सर्विस निर्यात करता है.
देखा जाए, तो भारत ने पहले ही इस दिशा में काम करना चालू कर दिया है. पिछले 1 वर्ष के दौरान भारत ने अमेरिका से कच्चा तेल आयात करने की मात्रा में 2 गुना इजाफा किया है.
चीन ने भारत का शोषण किया है, अब वक्त आ गया है, कि चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए. जब राष्ट्रपति ट्रंप भारत को Jackpot दिला सकते हैं, तो हमें चीन के द्वारा दी जा रही मूंगफलियों को ना कहना होगा.
किसी भी युद्ध में, वास्तव में केवल उसी देश की जीत होती है. जो हथियार बेचता है. जो देश युद्ध लड़ते हैं और खून बहाते हैं, जीत उनकी नहीं होती है. आप तो जानते हैं, इसी रणनीति ने अमेरिका को इस मुकाम पर स्थापित किया है.
तथाकथित Global Trade War एक ऐसी लड़ाई है, जिस से हमारा कोई लेना देना नहीं है. जब हम बिना लड़े जीत सकते हैं, तो हमें ऐसी लड़ाई में क्यों लड़ना चाहिए?
अगर राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ Deal चाहते हैं, तो भारत को मोल भाव करके ऐसी डील कर लेनी चाहिए. इसलिए America first और India First दोनों साथ में संभव हो सकता है.
वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था जिसने चीन जैसे राक्षस को जन्म दिया है, उसको बचाए रखने में हमें चीन की मदद बिल्कुल नहीं करनी चाहिए.
अगर भारत ने इस ग्लोबल ट्रेड war में Smartly लड़ाई लड़ी, तो इसमें चीन की होने वाली हार को जल्दी लाया जा सकता है.
भारत को तो केवल मूंगफली और jackpot में से किसी एक को चुनना है.
आपके विचार से, क्या इस ग्लोबल ट्रेड War में भारत को चीन का साथ देते रहना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
आपने पढ़ा होगा, अगले गणतंत्र दिवस में भाग लेने के लिए, भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप को आमंत्रण दिया है.
भारत यात्रा के संदर्भ में राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है, अगर भारत ने कोई अच्छी deal offer की, तो deal maker राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा पर जरूर आएंगे. ताकि वह इस विजय को अपनी घरेलू जनता के सामने एक उपलब्धि के रूप में दिखा सके.
इसलिए सवाल यह उठता है, क्या America First का मतलब India Second है.
Global Trade War में शुरुआती गोलाबारी के बाद, अब ऐसा लगता है, हमें और firework मतलब तमाशा देखने को मिलेगा.
सार्वजनिक तौर पर तो सभी देश राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जवाबी कार्यवाही करने की घोषणा करते रहते हैं, लेकिन Private में यह सभी देश लगातार white house फोन लगाते रहते हैं, और अमेरिका से deal करने को कहते हैं.
आप को यह बात पसंद हो या ना हो, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है. राष्ट्रपति ट्रंप ने all out Global Trade war इसलिए छेड़ रखी है, क्योंकि वह मूलभूत रूप से वर्तमान वैश्विक व्यापार की व्यवस्था को बदलना चाहते हैं.
देर-सवेर आपको ऐसी खबर पढ़ने को मिलेगी, की अकेले किसी देश ने अमेरिका के साथ Trade deal कर ली.
यहां पर हमें एक बात समझनी होगी, अमेरिका में जितने सामान की खपत होती है, वह उतने सामान का उत्पादन नहीं कर सकता है. इसलिए, अगर अमेरिका का चीन से आयात कम होता है, तो अमेरिका को किसी अन्य देश से आयात बढ़ाना होगा.
पिछले साल अकेले अमेरिका ने चीन से 500 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था.
अमेरिका के द्वारा लगाए गए आयात शुल्क के कारण, चीन का माल महंगा हो जाएगा, इसलिए कोई ना कोई देश कम से कम इतना अकलमंद जरूर होगा, कि वह चीन से अमेरिकी बाजार को छीन लेने का अवसर नहीं छोड़ेगा.
निश्चित रूप से अमेरिका उत्पादन बढ़ा सकता है, तो अन्य देश भी अपना उत्पादन बढ़ा कर अमेरिका की मांग की सस्ती कीमत पर पूर्ति कर सकते हैं.
बात बहुत साफ है, Global Trade War हमारे लिए कोई खतरा नहीं हैं, हमें तो इसे एक अवसर के रूप में देखना होगा.
भारत के सामने दो विकल्प हैं, या तो हम चीन के द्वारा दी गई मूंगफलियों को खाकर संतुष्ट हो सकते हैं, अथवा राष्ट्रपति ट्रंप के साथ Deal करके भारत Jackpot जीत सकता है.
आपको पता होगा, भारत के साथ व्यापार होने पर अमेरिका को 22 बिलियन डॉलर का पिछले साल घाटा हुआ था. फिर भी विशेष तौर पर भारत के खिलाफ अमेरिका ने Trade War चालू नहीं की है.
अमेरिका ने स्टील और एलुमिनियम पर जो आयात शुल्क लगाए हैं, वह पूरी दुनिया के लिए हैं. और वैसे भी हम स्टील और एलुमिनियम का अमेरिका को निर्यात बहुत कम करते हैं.
दोस्तों हमारा कहना यह है, प्रधानमंत्री मोदी के पास प्रधानमंत्री नेहरु के द्वारा की गई गलती को सुधारने का एक मौका आ गया है.
भारत में ऐसे कई लोग हैं, जो दिन-रात अमेरिका को गाली देते रहते हैं. ऐसे लोग सुविधा पूर्ण तरीके से यह भूल जाते हैं, साल-दर-साल व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है. और ध्यान दीजिए, इस व्यापार से भारत को भारी लाभ हो रहा है .
अभी तक अमेरिका को हमारा निर्यात IT services तक सीमित है, क्या हम अमेरिका के लिए manufacturing hub नहीं बन सकते हैं.
आप जानते हैं, राष्ट्रपति ट्रंप को भारत से और अधिक माल आयात करने में दिक्कत नहीं होगी, जब तक द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिका को होने वाली हानि नहीं बढ़ती है.
दोस्तों, Deal यह है, अमेरिका भारत से अधिक मात्रा में IT Services और Goods आयात कर सकता है. और भरत बड़ी मात्रा में अमेरिका से Oil ,gas और कोयला आयात कर सकता है.
इस साल अकेले भारत ने 88 बिलियन डॉलर की कीमत पर कच्चा तेल और गैस आयात किया है.
हम सऊदी अरब और ईरान से कच्चा तेल मुख्य रूप से खरीदते हैं. और इन दोनों देशों के साथ व्यापार करने से भारत को 18 बिलियन डॉलर का व्यापार में घाटा होता है.
दोस्तों, हम अरब की खाड़ी में पैसा फेंक रहे हैं, और उसके लौटने की कोई संभावना नहीं है.
तो दूसरी ओर, अगर हमारी अमेरिका के साथ डील हो जाती है, तो अमेरिका को दिया पैसा भारत में लौट कर आ सकता है. अगर अमेरिका भारत से अधिक मात्रा में माल खरीदता है, और भारत बड़ी मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल-गैस और कोयला खरीदता है. तो दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ेगा, लेकिन अमेरिका को होने वाला व्यापारिक घाटा नहीं बढ़ेगा. अपने वोटर्स के सामने राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी एक विजय के रूप में दिखा सकते हैं.
तो दूसरी ओर, खाड़ी के देशों से गैस और कच्चा तेल कम खरीदने से, भारत को व्यापार में होने वाला घाटा कम हो सकता है.
परिणाम यह होगा, अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने से, भारत को व्यापार में होने वाला कुल लाभ बढ़ेगा, और कुल मिलाकर घाटा कम होगा. क्या यह एक अच्छी डील नहीं होगी?
वास्तव में, Global Trade War के दौरान , चीन के द्वारा जवाबी कार्यवाही करने से, अमेरिका की कंपनियों का चीन में व्यापार करना और उत्पादन करना मुश्किल हो जाएगा.
थोड़ी अधिक मात्रा में चीन को सोयाबीन और दवाइयों का निर्यात बढ़ाकर खुश होने के बजाय, भारत को अमेरिकी कंपनियों का स्वागत करना चाहिए, ताकि वह भारत में उत्पादन करने के लिए फैक्ट्री लगाएं.
इसके अलावा, चीन की जवाबी कार्यवाही के कारण, वह अमेरिका से कच्चा तेल और गैस खरीदना कम कर देगा. जिसके कारण अमेरिका भारत को कच्चे तेल और गैस की बेहतर कीमत दे सकता है.
जैसा की हमने अपने वीडियोस में पहले चर्चा की है, Global Trade War एक सच्चाई बन चुकी है. वैश्विक व्यापार व्यवस्था अब बदलेगी. जो देश अपने आपको पहले बदल लेंगे, वही इस लड़ाई के अंत में विजई होंगे.
भारत को परिवर्तन का स्वागत करना चाहिए, और अमेरिका के साथ डील कर लेनी चाहिए.
अगर भारत ने इस अवसर का लाभ नहीं उठाया, तो निश्चित मानिये कोई ना कोई अन्य देश जरूर लाभ उठाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी जी के सामने भारत में नौकरियां पैदा करना सबसे बड़ी समस्या है. राष्ट्रपति ट्रंप के पास इस समस्या का समाधान मौजूद है.
अगर अमेरिका के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी कम होती है, तो भारत की हिस्सेदारी अमेरिका के आयात में बढ़नी चाहिए. हम यहां पर 500 बिलियन डॉलर के अवसर की बात कर रहे हैं. अभी भारत अमेरिका को सिर्फ 49 बिलियन डॉलर का सामान और सर्विस निर्यात करता है.
देखा जाए, तो भारत ने पहले ही इस दिशा में काम करना चालू कर दिया है. पिछले 1 वर्ष के दौरान भारत ने अमेरिका से कच्चा तेल आयात करने की मात्रा में 2 गुना इजाफा किया है.
चीन ने भारत का शोषण किया है, अब वक्त आ गया है, कि चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए. जब राष्ट्रपति ट्रंप भारत को Jackpot दिला सकते हैं, तो हमें चीन के द्वारा दी जा रही मूंगफलियों को ना कहना होगा.
किसी भी युद्ध में, वास्तव में केवल उसी देश की जीत होती है. जो हथियार बेचता है. जो देश युद्ध लड़ते हैं और खून बहाते हैं, जीत उनकी नहीं होती है. आप तो जानते हैं, इसी रणनीति ने अमेरिका को इस मुकाम पर स्थापित किया है.
तथाकथित Global Trade War एक ऐसी लड़ाई है, जिस से हमारा कोई लेना देना नहीं है. जब हम बिना लड़े जीत सकते हैं, तो हमें ऐसी लड़ाई में क्यों लड़ना चाहिए?
अगर राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ Deal चाहते हैं, तो भारत को मोल भाव करके ऐसी डील कर लेनी चाहिए. इसलिए America first और India First दोनों साथ में संभव हो सकता है.
वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था जिसने चीन जैसे राक्षस को जन्म दिया है, उसको बचाए रखने में हमें चीन की मदद बिल्कुल नहीं करनी चाहिए.
अगर भारत ने इस ग्लोबल ट्रेड war में Smartly लड़ाई लड़ी, तो इसमें चीन की होने वाली हार को जल्दी लाया जा सकता है.
भारत को तो केवल मूंगफली और jackpot में से किसी एक को चुनना है.
आपके विचार से, क्या इस ग्लोबल ट्रेड War में भारत को चीन का साथ देते रहना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss about today's topic.
You might have read India has invited president Trump as Chief guest of next Republic Day.
President Trump is yet to take final decision about visiting India. But its more than likely that deal maker president will come India, only when India offers a deal to him, which he can showcase as an achievement to his domestic audience.
Therefore the question is, Does this mean America first and India second for India??
After the first shots have been fired in global trade war, it appears, there will be more firework in the days to come.
Though all nations in public vow to retaliate against President Trump, yet in private they all ring phones in white-house asking 'Lets make a deal'.
You like it or not , America is the largest market in the world. The only reason President trump has started all out war, only because he is fundamentally against current global trade system.
Sooner or later, you will hear, individual nations entering into trade deals with America.
We need to understand one thing here, America consumes more than it produces. If America imports less from China, it will have to import more from some other countries.
Last year, America imported goods worth more than 500 Billion dollars from China.
Due to US tariffs, Chinese goods would be costly, wise nation would obviously want to snatch american market share from China.
America can increase production, but other countries can also increase production and sell more to America.
The point is rather simple, Trade war offers opportunity rather than threat to India.
The choice before India is, we can remain content by peanuts offered by China, or we can win a jackpot here by having deal with America.
Please note, America has trade deficit worth 22 Billion dollar with India, still Trump has not imposed India specific tariffs.
US Steel and Aluminum tariffs are global in nature. they are not India specific. and we are any ways not big exporter of these metals for America.
The point is, Prime Minister Modi now has the opportunity to correct the grand blunder of Prime Minister Neharu.
We have many people in India, who prefer abusing America. these very people conveniently forget, that year after Year America is India's second largest trading partner, and Please mind it, with net Indian trade surplus.
Till now, we have been limited to IT services. Can we not become manufacturing hub for America?
you know, we can. The point is, president Trump would be more than happy to import more goods from India as long as American trade deficit does not grow.
Friends, here is the deal, America can import more goods and services from India, and India can import more oil, gas and coal from America.
This year alone, we are about to import crude oil worth 88 Billion Dollars.
We buy crude oil from Saudi Arabia and Iran, and we have total 18 Billion dollar trade deficit with both of them.
Friends, We are just throwing our money in Gulf, without any hope for it to return back.
On the other hand, if we cut a deal with President trump, this money may end up coming back to India. if America buys More Indian goods, and India buys More American oil, gas and coal, the America India total trade will go up but American trade deficit will not, Making President Trump winner in front of his voters.
On the other hand, Indian trade deficit due to buying oil and gas from Gulf countries will decrease more.
The result will be, With Growing American Trade, Net India trade deficit will reduce with net Increase in Trade surplus. Is it not a good deal?
In fact, Latest Chinese retaliation will make it harder for American companies to do business and manufacture in China.
Rather than being happy by exporting more soybean and medicine to china, we should rather welcome American companies to set up manufacturing base in India.
In addition, As a retaliation, China will reduce oil import from America. That's why America will offer us better price for its oil and gas.
As we have argued in a number of our videos, Trade war is reality now. the global trade order is about to change. Those countries, which will adapt first, will emerge victorious in the end.
India should welcome change, and cut a deal with president Trump.
Make no mistake here, this is an opportunity, if India does not take advantage, someone else will for sure.
Prime Minister Modi has problem to create jobs in India. and President Trump has solution to create jobs in India.
If Chinese share in US export declines, Indian share in US export must go up. We are talking about very huge 500 Billion dollar opportunity here. Right now, we export goods and services worth only 49 Billion dollars to America.
In fact, India has already started this move, in last one year, India has doubled oil import from America.
China has only exploited India. This is the time to return the favor to China and say No to Chinese pea nuts, when President trump can offer a jack pot to India.
In war, only those countries win, who sell weapons, not those who fight and bleed in the war. In fact, this is the strategy, which has made America, what it is today.
It would be foolish if India fights this so called global trade war, to which we are not even a party. Why Should we fight a war, if we can win it, even without fighting?
If President trump wants a deal, India should make it. and that's why American first will mean India first also.
We must not help China in preserving the flawed global trade system, which has created a monster, namely China.
If India plays smartly, we can accelerate eventual Chinese defeat in this global trade war.
For India, Its obvious choice in between peanuts and jackpot.
As per your views, should India support China in this global trade war?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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