सीपेक को बंद करके पाकिस्तान ने चीन को दिया धोखा!!



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Reference -
https://www.thenews.com.pk/print/528615-cpec-shelved
https://www.dawn.com/news/1502307

नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

यह कोई पुरानी बात नहीं थी, जब पाकिस्तान के सभी लीडर्स एक सुर में कहते थे, की सीपेक पाकिस्तान का काया कल्प कर देगा.



आज कल सीपेक को लेकर पाकिस्तान में अनाउंसमेंट तो होते रहते हैं, खास तौर पर चीन के अधिकारिओं की पाकिस्तान यात्रा के दौरान उनका मन बहलाने के लिए ऐसे ही स्टेटमेंट जारी कर दिए जाते हैं.



पाकिस्तान के ही अख़बार The News में छपी खबर के मुताबिक, पिछले एक साल में सीपेक के अंतर्गत किसी भी प्रोजेक्ट ने कम से कम बलोचिस्तान में कोई प्रगति नहीं करि है. जहाँ तक ग्वादर पोर्ट का सवाल है, वह भी समुद्री हवाएं ही खा रहा है.



लेकिन पिछले महीने ही पाकिस्तान सर्कार ने वर्ष 2039 तक ग्वादर बंदरगाह और उसके आस पास के इकनोमिक जोन को सभी प्रकार के टैक्स से राहत दे दी है, पाकिस्तान के इस कदम से ग्वादर बंदरगाह पर विकास तेजी से होगा, ऐसा पाकिस्तानी हुक्मरानो को उम्मीद है.



लेकिन बिना शांति और सुरक्षा के यदि विकास संभव हो पता, तो आज अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया दुनिआ के सबसे विकसित इलाके होते.



कोई बात नहीं है, पाकिस्तानियों को अपने आपको ही धोखा देने में अब सायद मजा सा आने लगा है.



पाकिस्तान चीन की दोस्ती कितनी गहरी है, यह तो आप सभी को पता है, लेकिन पाकिस्तान ने चीन से आये पैसे में भी लूट मचा दी है.



पहले चीन पाकिस्तान को पैसा दे देता था, और अपेक्षा करता था, की पाकिस्तान उस पैसे से चीन से माल खरीदेगा. लेकिन पाकिस्तानी भ्रस्टाचार ने चीन की नाक में दम कर दिया है.



आप तो जानते हैं, सेना की अनुमति के बिना पाकिस्तान में पत्ता तक नहीं हिलता है, तो पाकिस्तान की सेना की नाक के नीचे से चीन का पैसा कैसे उड़ा दिया गया?



अब चीन पहले पाकिस्तान से चीनी माल खरीदने को कहता है, और उसके बाद ही चीन पाकिस्तान को पैसा रिलीज़ करता है.



IMF के ICU में भर्ती पाकिस्तान के पास तेल खरीदने तक के तो पैसे हैं नहीं, वह चीन से कैसे माल खरीदेगा, इसका जवाब चीन के राजा को ही ज्यादा अच्छे से पता होगा.



आप सभी को पता है, चीन को चम्पू बनाने की हिम्मत केवल पाकिस्तान में है. आजकल पाकिस्तान अमेरिका के भी करीब जा रहा है.



पाकिस्तान ने अमेरिका के करीब जाकर अपने IMF बेलआउट का तो जुगाड़ कर लिया. लेकिन अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान बेलआउट फिर लटक गया है.



IMF बेलआउट के लिए पाकिस्तान ने चीन के हितों को भी दाव पर  लगाते हुए, सीपेक को ठन्डे बस्ते में दाल दिया है, लेकिन अभी भी सेपक को लेकर पाकिस्तान के नेता गरमा गरम बातें चीन को देते ही रहते हैं.



दुनिया भर के विद्वान कहते हैं, की अमेरिका पाकिस्तान पर निर्भर इसलिए करता है, क्योकि उसका अफ़ग़ानिस्तान तक का रास्ता पाकिस्तान से होकर जाता है. लेकिन जबकि IMF बेलआउट लेने के लिए पाकिस्तान अमेरिका पर निर्भर करता है, तो भी अमेरिका इसका लाभ उठाने में पूरी तरह से नाकाम हो गया है.



पाकिस्तान हर तीन साल में बेलआउट लेकर अपना काम निकाल लेता है, और अमेरिका पिछले 20 सालों से अफ़ग़ानिस्तान से निकलने के लिए  फड़ फड़ा रहा है.



वैसे तो राष्ट्रपति ट्रम्प को अपनी डील करने में महारत पर बड़ा गर्व है, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश के खिलाफ उनकी आर्ट ऑफ़ डील काम नहीं कर पा रही है.



देखा जाये तो दुनिया में पाकिस्तान से निपटने की तागत ना तो चीन में है, और ना ही अमेरिका में, केवल भारत की मोदी शाह की जोड़ी ने पाकिस्तान को आइना दिखाने में सफलता पाई है.



फिर से सीपेक पर लौटते हुए, पाकिस्तान खुले में कभी यह स्वीकार नहीं करेगा, की सीपेक की लुटिया डूब गयी है. क्योकि पाकिस्तान को पता है, IMF बेलआउट के लिए अमेरिका को हलाल करने के बाद, फिर से चीनी मुर्गे का नंबर आएगा.


कभी कभी तो ऐसा लगता है, चीन पाकिस्तान की इस दोस्ती में दोनों ही दोस्त एक दूसरे को उल्लू बनाने में लगे हैं, लेकिन इस उल्लू बनाओ अभियान में अभी चीन से पाकिस्तान आगे निकलता नजर आ रहा है.



आज का बेहद आसान सवाल है, सीपेक में हुए भ्रस्टाचार का जिम्मेदार कौन है?



पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, Yashomati Sheth  .




और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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