चीन के होश उड़ाने वाले स्ट्रेटेजिक ब्रिज का लद्दाख में हुआ उद्घाटन!!


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
यह कड़वा सच हम सभी को मालूम है, की जबकि चीन लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल के उस तरफ धड़ल्ले से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा था, इस मामले में भारत चीन से पिछड़ गया, इसका एक प्रमुख कारण यह भी था, की वर्ष 2005 तक भारत की पालिसी यह थी, की हम LAC के आस पास कोई रोड नहीं बनाएंगे.

हलाकि इस स्ट्रेटेजिक डिसिशन का कोई न कोई कारण जरूर हो सकता है, लेकिन यदि आम आदमी की नजर से देखें, तो ऐसा करके भारत चीन का तुस्टी करण करने की कोसिस कर रहा था, जबकि चीन लगातार अपनी और यही काम करता रहा, और दिल्ली में लिए गए इस निर्णय के कारण हमारे सिपाही  खड़े खड़े यह सब देखते रहे.

फिर भी हमें यह सच्चाई स्वीकार करनी ही होगी, की चीन के मुकावले LAC के इस और हमारा इंस्फ्रास्ट्रक्टर आज भी कमजोर है, लेकिन ऐसा नहीं है, की इस और काम नहीं चल रहा है.

कल ही बॉर्डर रोड्स आर्गेनाइजेशन की तरफ से स्टेटमेंट आया है, की उसने चीन की सीमा से सटे इलाकों में प्रस्ताबित 61 रोड्स में से दो तिहाई यानि की अराउंड 40 रोड का कंस्ट्रक्शन पूरा कर लिया है.

अब आप देखिये, पिछले कुछ बर्षो में भारत ने टैंक्स को पूर्वी लद्दाख में तैनात कर दिया था, लेकिन इन को उत्तर पूर्वी लद्दाक में डेप्लॉय नहीं किया जा सका था.

इसका कारण यह था, की श्योक रिवर पर ऐसा पुल ही नहीं था, जो टैंक का भार वहन कर पाए.

लेकिन कल हमारी यह कमजोरी शक्ति में तब्दील हो गयी, जब दुनिया के सबसे उचाई वाले इलाके में  परमानेंट पुल का उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री जी ने कर दिया है.

यह पुल दरबुक सहायक दौलत बेग ओल्डी सेक्शन पर बनाया गया है. और ध्यान रखने वाली बात यह है, इस ब्रिज का नाम कर्नल चेवांग रिंचेन सेतु रखा गया है.

कर्नल चेवांग रिंचेन उन छह महान योद्धाओं में शामिल हैं, जिनको एक जिंदगी में दो बार महा वीर चक्र से सम्मानित किया गया है. आपको जानकारी होगी, महा वीर चक्र परम वीर चक्र के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरूस्कार है.

कर्नल चेवांग रिंचेन ने भारत और पाकिस्तान की 1948 और 1971 की लड़ाई में यह वीरता सम्मान प्राप्त किया, और 1962 की चीन के साथ लड़ाई में भी इन्हे सेना मैडल प्राप्त हुआ.

इसलिए इस नयी ब्रिज का नाम और अच्छा नहीं हो सकता था.

अब जबकि यह रोड लद्दाख में चीन के खिलाफ भारत की टैंक को मूव करने की शक्ति को कई गुना बड़ा देगी, यह कहना स्वाभाविक है, की इस ब्रिज के इनॉग्रेशन के बाद इस महीने के अंत में लद्दाक का फोर्मल्ली यूनियन टेरिटरी बनना सोने पर सुहागा होने के सामान है.

इसी बीच, LAC के उस और बैठे हुए चीन के राजा केवल मिस मीसा ही सकते हैं.

आगे बढ़ते हुए, चीन को लेकर एक अच्छी खबर आयी है, हमारे कई दर्शक कुछ समय से चिंतन कर रहे थे, की भारतीय व्यापारियों के हितों को कुरवान करते हुए, मोदी सर्कार RCEP में शामिल हो जाएगी.

लेकिन जैसा की अब समझ आ रहा है, भारत सर्कार को आप सभी के दिल की बात भी समझ आ गयी है.

आप सभी पिछले लम्बे समय से पैरवी कर रहे थे, की भारत को चीन के झांसे में ना आकर सबसे पहले अमेरिका के साथ ट्रेड डील करके दोनों देशों के बीच व्यापर को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.

अब ऐसा लगता है, की भारत सर्कार ने निर्णय ले लिया है, की पहले लगे हाथों भारत अमेरिका के साथ पहले चरण की ट्रेड डील कर लेगा, लेकिन चीन के नेतृत्वा में प्रस्तावित RCEP में भारत बाद में शामिल होगा, जब हमारे हितों की रक्षा की पुख्ता व्यवस्था हो सके.

वैसे भी आप सभी ने पढ़ा होगा, की RECP के देशो को भारत की शर्तों पर मनाने की जिम्मेदारी भी भारत पर डाल दी गयी थी.

जबकि इन सभी देशों की नजर में केवल भारत का बड़ा बाजार है, लेकिन मोल भाव करने के लिए मेहनत भी अकेला भारत उठाये? यह भी कैसी बात हुए.

सबको भारत का बाजार चाहिए, लेकिन भारत के किसानो और व्यपारियो का क्या होगा, इससे इन देशों को कोई मतलब नहीं है.

हमें विस्वास के साथ उम्मीद है, की जब तक भारत के लिए कुल मिलाकर लाभकारी डील का पैकज तैयार नहीं होता है, मोदी सर्कार RCEP में शामिल होकर UPA सर्कार के द्वारा जल्दवाजी में किये गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करके पुरानी गलती को नए समझौते में नहीं दोहराएगी.

आपको पता होगा, यह पुराने केवल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट थे, फेयरनेस इनसे गायब थी, तभी तो भारत का व्यपारिक घाटा दिन दूना रात चौगुना बढ़ता चला गया.

चाहे अमेरिका हो, या चाहे कोई अन्य देश हो, भारत को व्यापार बढ़ाने में रूचि है, लेकिन अब भारत दूसरे देशो के साथ बढ़ते व्यापारिक घाटे को और नहीं सह सकता है,

बात साफ़ है, आपको यदि भारत को एक्सपोर्ट बढ़ाना है, तो आपको भारत से इम्पोर्ट भी बढ़ाना ही होगा, कुल मिलाकर हमें फ्री एंड फेयर ट्रेड एग्रीमेंट चाहिए.

और अगर RECP के देशों को भारत के बिना अग्रीमेंट करने की तेजाइ है, तो उन्हें हमारी तरफ से अभी से बधाई.

आज का बेहद आसान सवाल है, कर्नल चेवांग रिंचेन को कितने बार महा वीर चक्र का सम्मान प्राप्त हुआ था?

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  आनंद कुमार.



और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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