पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ बाजवा का एक्सटेंशन क्यों रोका??
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Reference -
https://timesofindia.indiatimes.com/world/pakistan/pakistan-court-may-stop-army-chief-from-serving-3-more-years/articleshow/72237567.cms
https://www.dawn.com/news/1518960/gen-bajwas-extension-hangs-in-balance-as-cjp-suspends-govts-notification-until-tomorrow
https://www.geo.tv/latest/258578-sc-suspends-notification-of-coas-general-bajwas-extension
https://www.aninews.in/news/world/asia/peshawar-plea-filed-against-pak-army-chief-for-being-ahmadi-muslim20191122111311/
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/pakistan-army-chief-general-bajwa-gets-three-year-extension/articleshow/70739474.cms?from=mdr
https://timesofindia.indiatimes.com/world/pakistan/pakistan-court-may-stop-army-chief-from-serving-3-more-years/articleshow/72237567.cms
https://www.dawn.com/news/1518960/gen-bajwas-extension-hangs-in-balance-as-cjp-suspends-govts-notification-until-tomorrow
https://www.geo.tv/latest/258578-sc-suspends-notification-of-coas-general-bajwas-extension
https://www.aninews.in/news/world/asia/peshawar-plea-filed-against-pak-army-chief-for-being-ahmadi-muslim20191122111311/
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/pakistan-army-chief-general-bajwa-gets-three-year-extension/articleshow/70739474.cms?from=mdr
इस वीडियो में हम जल्दी से चर्चा करते हैं, की आखिर ये मामला क्या है?
आर्मी चीफ बाजवा के एक्सटेंशन को जूरिस्ट फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, और इस फाउंडेशन ने आज सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना करि, की उसे केस वापस लेने दिया जाये. लेकिन पाकिस्तान के मुख्या नयायधीस ने केस को ख़तम करने से मना कर दिया, और इसे जनहित का मुद्दा मानते हुए सुनवाई जारी रखी.
लेकिन सवाल उठता है, की आखिर जूरिस्ट फाउंडेशन केस को क्यों वापस लेना चाहता था? क्या उस पर किसी का दवाब था?
फिर भी सवाल यही उठता है, की सुप्रीम कोर्ट ने क्यों आर्मी चीफ बाजवा के एक्सटेंशन पर तलवार लटका दी.
आम तौर पर आप सभी को पता है, सबसे पहले किसी भी मुद्दे पर प्राइम मिनिस्टर की अध्यक्ष्ता में कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया जाता है, फिर वह प्रस्ताव प्रेजिडेंट के पास सिग्नेचर के लिए भेजा जाता है.
यह तो होती है, किसी भी सामान्य लोक तांत्रिक देश की आम प्रक्रिया, जिसका पालन हर छोटे और बड़े प्रस्ताव पर किया जाता है.
लेकिन अब आप असामान्य और फर्जी लोकतंत्र पाकिस्तान का केस देखिये.
19 अगस्त को पाकिस्तान के प्राइम मिन्स्टर, आर्मी चीफ बाजवा के एक्सटेंशन को अप्रूवल दे देते हैं, और उसे पाकिस्तान के प्रेजिडेंट भी पास कर देते हैं. और आर्मी चीफ को एक्सटेंशन मिल गया.
लेकिन बाद में पाकिस्तान की सर्कार को समझ आया, की उसने कैबिनेट से तो अप्रूवल लिया ही नहीं. इसलिए 21 अगस्त को कैबिनेट से अप्रूवल लिया गया. लेकिन इस बार पाकिस्तान की सर्कार प्रेजिडेंट से अप्रूवल लेना भूल गयी.
जब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछा, की 21 अगस्त को प्रेजिडेंट का अप्रूवल लिया गया या नहीं, तो पाकिस्तान सर्कार के वकील ने कहा, की तब अप्रूवल नहीं लिया गया. लेकिन वह अब ले सकते हैं.
पाकिस्तान के नियमो की धज्जीया यही पर रुक जाती तो ठीक होता. लेकिन 21 अगस्त को जिस प्रस्ताव को कैबिनेट ने अप्रूवल दिया, उसके पक्ष में केवल 11 मंत्रियो ने वोट दिया.
शेष सदस्यों ने कोई वोट ही नहीं दिया, तो सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, की कैबिनेट में डिसिशन बहुमत से लिए जाते हैं, तो शेष सदस्यों की विचार जानने की कोसिस क्यों नहीं की गयी? जिन सदस्यों ने वोट नहीं दिया, उनके वोट को आर्मी चीफ के एक्सटेंशन के पक्ष में क्यों मान लिया गया.
जाहिर है, इन सवालों को सुन कर पाकिस्तान सर्कार के अटॉर्नी जनरल को सांप सूंघ गया.
फिर सुप्रीम कोर्ट ने कैबिनेट के द्वारा पास किये गए प्रस्ताव को आड़े हाथों लिया, जिसमे कहा गया था, की रीजनल सिक्योरिटी सिचुएशन को ध्यान में रखते हुए, आर्मी चीफ को एक्सटेंशन दिया गया है.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, की रीजनल सिक्योरिटी सिचुएशन से डील करना ही तो आर्मी चीफ का मैन काम है, यदि एक्सटेंशन का आधार ख़राब रीजनल सिक्योरिटी सिचुएशन मान लिया जाये, तो भविस्य में हर आर्मी चीफ एक्सटेंशन चाहेगा.
इतने सारे सवालों के खड़े हो जाने के वाद, आर्मी चीफ के एक्सटेंशन के नोटिफिकेशन का गिरना तय हो गया , और सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ बाजवा के एक्सटेंशन नोटिफिकेशन पर ही रोक लगा दी.
जबकि इस मामले की सुनवाई अभी भी चल रही है, मुद्दे की बात यह है, की आर्मी चीफ बाजवा का पहला तीन सालो का कार्यकाल 29 नवंबर यानि की इस शुक्रवार को ख़तम होने वाला है.
इसलिए यदि तब तक इस मामले का कोई समाधान नहीं निकला तो हो सकता है, की बाजवा को आर्मी चीफ की पोस्ट खाली करनी पड़े.
जिस तरह से आर्मी चीफ को एक्सटेंशन दिया गया, वह साजिस से ज्यादा पाकिस्तान की इमरान खान सर्कार के निकम्मेपन को सिद्ध करती है.
नहीं तो यह कैसे हो सकता है, की आर्मी चीफ को एक्सटेंशन देने की फॉर्मेलिटी को भी ठीक से यह सर्कार ना निभा पाए.
वैसे आप को भी समझ आ गया होगा, की सुप्रीम कोर्ट ने प्रोसेस पर सवाल खड़े किये हैं, उन्होंने परिणाम पर अभी ध्यान नहीं दिया है.
अगर पाकिस्तान की जगह भारत का सुप्रीम कोर्ट होता, तो प्रोसेस के गलत होने के कारन वह परिणाम को भी रिजेक्ट कर देता.
लेकिन अब देखना होगा, की पाकिस्तान के केस में सुप्रीम कोर्ट की रीढ़ की हड्डी में कितना दम है.
अभी तो यही लगता है, की आर्मी चीफ को एक्सटेंशन देने की प्रोसेस में खामियां होने के बाबजूद, सत्य यही है, की पाकिस्तान की हर कठपुतली की डोर आर्मी चीफ बाजवा के हाथ में है.
इसलिए यह सब अभी तमाशा ही जान पड़ता है, और इस शुक्रवार के पहले बाजवा को दूसरा कार्यकाल मिल जायेगा.
लेकिन यदि सुप्रीम कोर्ट अपने पाव पर खड़ा हो कर, पाकिस्तान के आर्मी चीफ को आइना दिखा देता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होने वाली है.
आइये देखते हैं, पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट, सर्कार और आर्मी कैसे इस केस के सन्दर्भ में आगे बढ़ते हैं.
इस बात की पूरी सम्भावना है, की सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्णय के बाबजूद , बाजवा को बचाने का इंतजाम कर लिया जायेगा.
लेकिन आर्मी चीफ बाजवा को एक्सटेंशन देने की फॉर्मेलिटी तक ढंग से अदा ना कर पाने की सजा, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान को मिलेगी, अभी तो ये तय जान पड़ता है.
इसी पृष्ठभूमि में सायद आपको याद हो, कुछ ही दिनों पहले पेशावर हाई कोर्ट में पेटिशन दायर की गयी, की क़ादिआनी कम्युनिटी से आने वाले बाजवा साहेब अहमदी मुस्लमान हैं.
लेकिन पाकिस्तान के 1974 के संवैधानिक संसोधन ने डिक्लेअर कर दिया था, की अहमदी मुसलमान नहीं होते है.
इसलिए पेटिशन में दावा था , चूँकि पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक नॉन मुस्लिम आर्मी चीफ नहीं बन सकता है, इसलिए बाजवा का आर्मी चीफ के पद पर रहना illegal है.
जबकि पाकिस्तान के लोगो को पता चल रहा है, की बाजवा अहमदी मुस्लमान हो सकते हैं, तो कहीं ऐसा तो नहीं की अब एक्सटेंशन की प्रोसेस में खामिया निकालकर अहमदी आर्मी चीफ बाजवा की बलि सुप्रीम कोर्ट में चढाई जा रही हों?
दोस्तों, यह भी तो हो सकता है, की इमरान खान सर्कार ने जान बूझकर प्रोसेस का पालन नहीं किया हो, ताकि बाजवा को दूसरा कार्यकाल ही ना मिले?
जिन आर्मी चीफ के कंधे का सहारा लेकर इमरान खान साहेब प्रधान मंत्री की कुर्शी पर बैठे, क्या उन्ही बाजवा को रस्ते से हटाने की कोसिस तो नहीं हो रही है??
क्योकि ऐसा हो नहीं सकता है, की पाकिस्तान सर्कार आर्मी चीफ के एक्सटेंशन के मामले में इतनी बचकानी गलतियां करे.
इसलिए यह सप्ताह पाकिस्तान के भविस्य के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा या नहीं, यह देखने वाली बात होगी
आज का बेहद आसान सवाल है, पाकिस्तान के आर्मी चीफ का तीन सालों का कार्यकाल कब ख़तम होने जा रहा है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, महेंद्र बबेरवाल
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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