काम कैसे किया जाता है, भारत ने करके दिखाया, Iran India Relations



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India delivers 20,000 litres of pesticide to Iran to fight locust swarms

India supplies 25 tonnes of Malathion to Iran to curb locust menace

Iran receives new equipment to fight desert locust

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References -

https://www.hindustantimes.com/world-news/india-delivers-20-000-litres-of-pesticide-to-iran-to-fight-locust-swarms-101616091077019.html

https://www.cnbctv18.com/agriculture/india-supplies-25-tonnes-of-malathion-to-iran-to-curb-locust-menace-6141951.htm

https://www.downtoearth.org.in/news/agriculture/over-200-000-hectares-crops-lost-to-locust-attacks-since-2019-agriculture-minister-75965

https://www.tehrantimes.com/news/454964/Iran-receives-new-equipment-to-fight-desert-locust 


पिछले दो सालों में टिड्डियों ने जो आतंक मचाया है, वह 1993 के बाद से टिड्डियों का भारत के ऊपर सबसे बड़ा हमला था. जिसमे ये टिड्डियाँ २ लाख हेक्टेयर जमीं पर फैली फसल खा गई थी.


जैसा की हर बार होता है, घर में आग लग जाने के बाद कुआ खोदते हुए जब टिड्डियों ने हमला बोल दिया, तब भारत ने ईरान और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक सिस्टम का विकास करने की कोसिस की, जिसके तहत टिड्डियों को उनके पैदा होने के स्थान पर पैदा होते ही मारा जा सके.


इसलिए चूँकि भारत में आने वाले टिड्डियों के झुण्ड की पैदाइश ईरान की थी, इसलिए स्वाभाविक रूप से यह काम ईरान को ही करना था, लेकिन ईरान ने कर दिए थे हाथ खड़े, क्योकि उसके पास नहीं था टिड्डियों को मारने वाला पेस्टिसाइड मेलाथिओन.


भारत ने तो पाकिस्तान से भी कहा था, की भाई चलो टिड्डी से मिलकर लड़ते हैं, लेकिन पाकिस्तान को उस समय सांप सूंघ गया, लेकिन आज वही पाकिस्तान चीन और टर्की से दान स्वरुप मिले केमिकल एंड इक्विपमेंट से टिड्डियों के खिलाफ अकेले जंग लड़ रहा  है. किसी भी समस्या का समाधान उसकी जड़ का इलाज करने पर होता है, लेकिन पगले पाकिस्तान की बात ही अलग है.


देख लीजिये पाकिस्तान में कितनी ऐंठ थी, लेकिन आज कल बाजवा की बातें सुनकर ऐसा लग रहा है, की रस्सी जल चुकी है, और बल भी निकल गया है. कभी सीधे मुँह बात ना करने बाले पाक आर्मी चीफ की बातों में आज कल नरमी दिखाई देती है. तभी तो कोई आश्चर्य नहीं, भारत में बैठे पाकिस्तान परस्त लोगों को हिंदुस्तान में लोकतंत्र और स्वतंत्रता ख़तम होती नजर आती है. 


एनीवे पिछले साल जून महीने में भारत सरकार ने ईरान को २० हज़ार लीटर मेलाथिओन सप्लाई किया था. तब दिक्कत यह थी, की भारत और ईरान काम बिगड़ जाने के बाद उसे सम्हालने की कोसिस कर रहे थे.


लेकिन इस बार पिछले अनुभव से सिखते हुए, 18 मार्च को ही भारत ने मेलाथिओन  के 20 हज़ार लीटर ईरान को चाबहार पोर्ट के रास्ते सप्लाई कर दिए हैं.


चूँकि टिड्डियों की ब्रीडिंग फ़रबरी से चालू होकर मार्च अप्रैल मई तक चलती है,  इसलिए शुरुआत में ही मेलाथिओन सप्लाई करके भारत ने कोसिस करि है, ताकि कम से कम इस बार टिड्डियों को काबू में किया जा सके.


अब जब ईरान को मेलाथिओन मिल गया है, यह उम्मीद की जा सकती है, की वह इसका सही ढंग से इस्तेमाल करेगा. लेकिन यह सुनश्चित भी हमें ही करना होगा. 


इस बार मोदी सरकार जो प्रोएक्टिव काम कर रही है, वह स्वागत योग्य कदम तो है, बस दुःख इसी बात का है, की यह कदम हम लगातार दो बर्षो तक टिड्डियों से पराजित होने के बाद उठा रहे हैं.


कोई बात नहीं, देर आए दुरुस्त आये. आइये देखते हैं, इस बार ईरान की टिड्डियाँ भारत में हमला बोल पाती हैं या नहीं.


जबकि भारतीय पैसे और मेहनत की मलाई दोनों पाकिस्तान और ईरान उड़ाएंगे, फिर भी हमें कोई गलत फहमी नहीं है, की ये दोनों देश भारत को थैंक यू बोलेंगे.

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