UAE के साथ भारत ने कर दिया सबसे बड़ा कारनामा, Indian Foreign Policy
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ADNOC, India mull collaboration in new energy areas, including hydrogen: CEO
ADNOC, Petronas to explore collaboration in Abu Dhabi's oil and gas sector
UAE Aims to Become Blue Hydrogen Powerhouse to Cut Emissions
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References -
https://www.spglobal.com/platts/en/market-insights/latest-news/oil/031821-adnoc-india-mull-collaboration-in-new-energy-areas-including-hydrogen-ceo
https://www.spglobal.com/platts/en/market-insights/latest-news/electric-power/031021-adnoc-petronas-to-explore-collaboration-in-abu-dhabis-oil-and-gas-sector
https://www.bloomberg.com/news/articles/2021-01-19/uae-can-be-major-low-cost-blue-hydrogen-producer-adnoc-ceo-says
https://economictimes.indiatimes.com/news/international/uae/abu-dhabi-plans-three-pronged-abu-dhabi-hydrogen-alliance-to-export-hydrogen-for-fuel/articleshow/80314510.cms?from=mdr
https://www.drishtiias.com/daily-updates/daily-news-analysis/national-hydrogen-energy-mission#:~:text=To%20link%20India's%20growing%20renewable,renewable%20energy%20development%20and%20NHM.
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, एडवोकेट गंगाधर रामराव चव्हाण जी (Adv Gangadhar Ramrao Chavan ) फ्रॉम पुणे. स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
सायद आपको जानकारी होगी, की इस साल के बजट में नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन की घोसणा की गयी है, जिसके तहत हाइड्रोजन को ऊर्जा के स्वच्छ और सस्ते विकल्प के रूप में विकसित किये जाने का लक्ष्य है. साथ ही साथ हाइड्रोजन गैस कच्चे तेल के इम्पोर्ट पर हमारी निर्भरता को कम करने में हमारी मदद करने बाली है.
सरल सब्दो में जब हाइड्रोजन को सीधा पानी को तोड़कर प्राप्त किया जाता है, तो उसे ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं, ओर यदि नेचुरल गैस को तोड़कर उसका कार्बन अलग से इखट्टा कर लिया जाये, तो जो हाइड्रोजन बचता है, उसे ब्लू हाइड्रोजन कहा जाता है. लेकिन दोनों ही प्रकार की हाइड्रोजन को जलाने से मिलता है, पानी ओर ऊर्जा. मतलब नो पोल्लुशन
चाहे ग्रीन हो या ब्लू हाइड्रोजन उनके दोहने के लिए बेहतर ओर लाभकारी टेक्नोलॉजी सोलुशन का विकास अभी चल रहा है, ओर साथ में इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाना अभी बाकि है.
हाइड्रोजन फ्यूल के इस लक्ष्य को हांसिल करने के लिए भारत अकेला कोसिस कर रहा है, लेकिन UAE साउथ कोरिया जापान जैसे मित्र देश भी इस टारगेट को हांसिल करने में जोरो शोरो से लगे हैं, चूँकि भारत और UAE की मंजिल एक है, इसलिए उनकी मुलाक़ात रास्ते पर ही हो गयी.
जी हाँ दोस्तों, कल भारत के पेट्रोलियम मिनिस्टर की बातचीत हुई UAE के इंडस्ट्री एंड एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर के साथ.
जिसमे अबू धाबी की नेशनल आयल कंपनी ने साफ़ साफ़ सब्दो में दर्शाया, की वह हाइड्रोजन फ्यूल के छेत्र में भारत के साथ आपसी सहयोग बढ़ाना चाहती है. जिसका भारत ने भी स्वागत किया है.
सायद आपको जानकारी हो, हाल के कुछ समय में UAE को ऊर्जा के उभरते विकल्प के रूप में हाइड्रोजन का महत्वा अच्छे से समझ में आ गया है, इसलिए अभी कच्चे तेल को दुनिया भर में बेचने वाला UAE अब प्रमुख हाइड्रोजन सप्लायर भी बनना चाहता है.
अच्छी बात यह है, की UAE की बातों में बजट की तागत आ चुकी है, क्योकि UAE की आयल कंपनी ने अपने यहाँ के national फण्ड से पैसे जुगाड़ लिए हैं.
अभी भी UAE सालाना 3 लाख टन हाइड्रोजन का सालाना उत्पादन करता है, जिसे वह बढ़ाकर 5 लाख टन करने जा रहा है. मतलब UAE इस खेल का कोई नया खिलाडी नहीं है. साथ ही साथ इसी महीने में पहले UAE ने साउथ कोरिया की कंपनी GE Energy के साथ ब्लू हाइड्रोजन के दोहन को लेकर साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया था, और फिर UAE ने मलेशिया की आयल एंड गैस कंपनी के साथ हाइड्रोजन के छेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत चालू कर दी . और अब भारत का भी नंबर आ गया है.
भले ही हमारा अपना हाइड्रोजन मिशन है, लेकिन जब सामने वाला देश खुद आगे आकर कह रहा है, तो साथ मिलकर चलने में क्या बुराई है. वैसे भी UAE के सरकारी फण्ड के पास पैसा भर भर के पड़ा है. और हमें उनके निवेश की दरकार है.
चूँकि हम अभी विकल्पों का विकास कर रहे हैं, इसलिए हमारे देश में ग्रीन एंड ब्लू हाइड्रोजन के दोहन के लिए इंडस्ट्री का विकास होना चाहिए, लेकिन साथ में हमारे पास इम्पोर्ट का हथियार भी होना चाहिए, हमारी डिमांड है ही इतनी बड़ी क्या पता हमें कब और कितने इम्पोर्ट की जरूरत पड़ जाये.
नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोसणा करके मोदी सरकार ने दिखा दिया, की वह हाइड्रोजन के ईंधन के रूप में बड़े पैमाने पर प्रयोग के प्रति गंभीर है, तभी तो आज UAE खुद आगे बढ़कर आया है.
अपना शोषण रोकने के लिए खाड़ी के कुछ गिने चुने देशो के कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को हमें कम करना ही होगा, इसलिए सभी मायनो में देखा जाये, तो हाइड्रोजन गैस हमारे लिए विकल्प नहीं मजबूरी बन चुकी है.
अंत में इस वीडियो के Sponsor पुणे के एडवोकेट गंगाधर रामराव चव्हाण जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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