New Record - India Exported Largest Amount of Chilli to China
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Chinese love for Indian red chilli hoists exports of the spice to a record
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References -
https://www.moneycontrol.com/news/business/commodities/chinese-love-for-indian-red-chilli-hoists-exports-of-the-spice-to-a-record-7183011.html
कई बार हमने चर्चा की है, की चीन भारत से चावल स्टील इत्यादि इम्पोर्ट करता है, लेकिन सायद हमारी तरह आपको भी जानकर हैरानी होगी. की चीन भारत से लाल मिर्ची भी बहुत खरीदता रहा है.
यहाँ तक की भारत जीतनी मिर्ची एक्सपोर्ट करता है, उसमे से लगभग आधी लाल मिर्ची अकेला चीन खरीदता है. वैसे चीन में भी मिर्ची की खेती होती है, लेकिन वह उतनी तेज नहीं होती है, इसलिए अपनी मिर्ची की तुलना में चीन के लोगों को आजकल भारत की लाल मिर्च बहुत भाने लगी है.
पहले चीन भारत से मिर्ची पाउडर इम्पोर्ट किया करता था, लेकिन कोरोना क्राइसिस के कारण भारतीय कंपनियां मिर्ची पाउडर का प्रोडक्शन बड़ी मात्रा में नहीं कर पायी, तो चीन ने डायरेक्ट भारत से लाल मिर्ची खरीदना चालू कर दिया, और उन्हें पीसने के लिए अपने यहाँ खुद की फैक्ट्री लगा ली.
आलम तो यह है साहब, की साल 2018 तक भारत से हर साल दस हज़ार टन लाल मिर्ची खरीदने वाले चीन ने पिछले साल भारत से एक लाख चालीस टन लाल मिर्ची का इम्पोर्ट कर लिया.
और इसका सीधा सीधा लाभ मिला आंध्रा प्रदेश और तेलंगाना के किसानो को, क्योकि उन्हें मिर्ची के बेहतर भाव मिले, लेकिन हाँ, इसका एक दुस प्रभाव यह भी है, की महगी लाल मिर्ची खरीदने से हमारी भी जेब ठंडी हो रही है.
लेकिन यदि यह डिमांड बरक़रार रही, तो कोई कारण नहीं भारत में लाल मिर्ची का उत्पादन भी बढ़ने लगे, ताकि भारतीय किसान और व्यापारी घरेलु के साथ साथ ग्लोबल डिमांड को भी वाजिव दाम पर पूरा कर पाएं.
कभी कभी बातों बातों में हम कह देते थे, की भारत ने ऐसी चाल चली, की चीन को आंध्रा की मिर्ची लग गयी, लेकिन यहाँ तो कुछ अलग ही हो रहा है, चीन के लोगों को अब भारत की तीखा लाल मिर्ची भा रही है.
चलो कोई नहीं, जब तक चीन भारत से माल खरीद रहा है, और हमारी आमदनी बढ़ रही है, तब तक इसका स्वागत है, लेकिन हम निश्चित रुप से चाहेंगे, की भारत फिर से लाल मिर्ची की जगह मिर्ची पाउडर ही चीन को एक्सपोर्ट करे.
क्योकि मसाले की चक्की में भी भारतियों को रोजगार मिलना चाहिए. साथ में आगे ही सोचते हुए, उम्मीद है, भारतीय कम्पनिया ऐसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट चीन को एक्सपोर्ट करेंगी, जिनमे मिर्ची का तीखापन तो हो ही, साथ में हमें भी अधिक पैसा कमाने का मौका मिले.
वैसे चीन चाहे जीतनी मिर्ची हमसे खरीद ले, हमारा चीन के प्रति नजरिया बिलकुल भी नहीं बदला है.
इसका एक मूलभूत कारण यह है, की जहाँ हमारे देश में दोखेवाजी एक दुर्गुण हैं. वही चीन में धोखेवाजी एक सद गुण हैं.
हमारे यहाँ तो दुश्मन पर भी सामने से वार करने की बात कही जाती है. लेकिन चीन में पीठ पर छुपकर खंजर घोपने को युद्ध की सबसे बड़ी कला माना जाता है.
हम सभी ने देखा है, जब भी चीन बातचीत मोलभाव और एग्रीमेंट करता ही इसलिए है, क्योकि यह सभी उसकी धोखेवाजी के पेंतरे हैं.
दुर्भाग्य सिर्फ यही है, की सैंकड़ों सालों से चीन आर्ट ऑफ़ डिसेप्शन में महारथ हांसिल किये हुए बैठा है, फिर भी हम सभी बार बार चीन की नई नई बातों के जाल में फंस जाते हैं.
इसलिए उम्मीद है, की अब जबकि चीन भारतीय लाल मिर्ची खरीद रहा है, तो उसके प्रति हमारा अचानक से ह्रदय परिवर्तन नहीं होगा.
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