भारत की मजबूती से दुनिया हैरान
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Reference -
https://www.thehindubusinessline.com/portfolio/how-india-defies-gravity-in-global-equity-sell-off/article64968557.ece
दुनिया के अखाड़े में जब बड़े बड़े पहलवान धराशायी हो चुके हैं, तब भारत शान से खड़ा हुआ है.
आप पूछेंगे वह कैसे, तो जवाब यह है, इस नए साल में अभी तक अमेरिका का नैस्डेक जहाँ 11 प्रतिशत नीचे हैं, वही रूस के इंडेक्स ने 8 प्रतिशत, चीन और कोरिया के इंडेक्स ने 7 प्रतिशत का गोता खा लिया है.
यहाँ तक की न्यू ज़ि लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान ताइवान और फ्रांस तक के इंडेक्स ने तीन से छह फ़ीसदी तक की गिरावट दर्ज की है.
इन सभी के बीच भारतीय स्टॉक मार्किट के प्रमुख इंडेक्स निफ़्टी 50 ने इस साल में अभी तक एक प्रतिशत के आस पास की ही गिरावट दर्ज की है.
मतलब साफ़ है, जब बड़े बड़े मार्किट तीन से तेरह फ़ीसदी तक गिर चुके हैं, तब भी भारत का मार्किट शान से खड़ा हुआ है. और यह कोई छोटी मोटी बात नहीं है. हमने इसे नोटिस करना ही करना चाहिए.
इस समय पूरी दुनिया में भारी बिकवाली हावी है, बढ़ी बढ़ी कंपनियों जैसे की फेसबुक का पिछले कुछ दिनों में क्या हस्र हुआ वह पूरा का पूरा आपके सामने हैं.
तो अब सवाल उठता है, की आखिर कारण क्या है, जो भारत में तुलनात्मक रूप से भयानक गिरावट नहीं आयी.
जबकि विदेशी निवेशक भारतीय मार्किट में माल भर भर के बेच रहे हैं, फिर भी हमारे यहाँ आम छोटा निवेशक और म्यूच्यूअल फण्ड लगातार अच्छा माल सस्ते दाम पर बटोर रहे हैं.
इस प्रकार भाव की इस उथल पुथल के दौरान केवल स्टॉक्स की ओनरशिप चेंज हो रही है. विदेशी निवेशकों के हाथो से माल निकलकर घरेलु निवेशकों के हाथ में जा रहा है.
लेकिन सवाल फिर भी यही है, की आखिर घरेलु निवेशक क्यों हर गिरावट पर खरीद रहे हैं.
तो इसके पीछे प्रमुख कारण यह है, की भारतीय मार्किट भले ही विदेशियों को शार्ट टर्म में महंगा दिखे, लेकिन लॉन्ग टर्म में सबको पता है, की भारत ने विकास करना ही करना है.
और इस विस्वास की आधारशिला है. भारतीय कंपनियों का अच्छा प्रदर्शन और अर्थव्यवस्था में लगातार हो रहा विस्तार.
जैसा की हमने समय समय पर चर्चा की है, हर बढ़ी कंपनी अपनी छमता को बढाने पर काम कर रही है, जिससे भविस्य में उनकी आय और प्रॉफिट बढ़ने की सम्भावना बहुत अधिक हो गयी है. साथ में से नो टु चाइना और चाइना प्लस वन की रणनीति भी हमारे पक्ष में काम कर रही है.
जहाँ तक अमेरिका और दुनिया भर में बढ़ती व्याज दरों का सवाल है, उसके कारण हाल फ़िलहाल जरूर विदेशी निवेशक भारत से भाग रहे हैं. लेकिन कभी ना कभी तो उनका यह भारत छोड़ो आंदोलन समाप्त होगा, और फिर उन्हें लौटकर भारत ही वापस आना पड़ेगा.
जो अच्छा माल आज वह सस्ते दाम पर फेंक रहे हैं, कल उसी माल को उन्हें महंगे दाम पर उठाना ही पड़ेगा, और कोई चारा है ही नहीं, उनके सामने.
लेकिन हाल फ़िलहाल शेयर मार्किट में चल रही इस उथल पुथल के कारण अब पैसा बनाना दिन प्रतिदिन कठिन होता चला जा रहा है. इस उतार चढ़ाव का मजा लेते हुए यदि आपको साथ में मुनाफा भी बांधना है, तो एक अनपढ़ इन्वेस्टर बने रहने से काम नहीं चलने वाला. आपको बनना होगा, एक आत्मनिर्भर इन्वेस्टर.
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