चालाक चीन भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना क्यों चाहता है??
इस वीडियो में हम इंडोनेशिया जापान और भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की चीज की कोशिश के बारे में चर्चा करेंगे.
Cunning China is trying to build better relationship with India?
China is making a fool of India & Japan?
In this video, we will discuss about recent Chinese attempt to have better relationship with India, Japan and Indonesia.
References -
https://www.bloomberg.com/news/articles/2018-05-13/china-counters-trump-by-mending-fences-from-japan-to-india
https://defenceaviationpost.com/china-seeks-to-reset-ties-with-japan/
Transcript -
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कृपया हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए, और बैल आइकन पर क्लिक कीजिए, ताकि जैसे ही हम नया वीडियो अपलोड करें, आपको सूचना मिल जाए. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
दोस्तों, यदि आप कुछ महीने पीछे जाएं, चीन की आक्रामक महत्वाकांक्षाओं के विरोध में, भारत और जापान अमेरिका के साथ मिलकर चतुर्भुज संगठन बनाने के ऊपर बातचीत करने लगे थे.
बड़े ही साफ तौर पर भारत और जापान चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े हुए दिखाई दे रहे थे.
लेकिन पिछले 1 महीने के दौरान, बातचीत का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है. अब कोई भी देश चतुर्भुज संगठन को लेकर ज्यादा उत्सुक दिखाई नहीं दे रहा है.
भारतीय प्रधानमंत्री की हाल ही की चीन की यात्रा की याददाश्त हमारे दिमाग में अभी ताजा है. बड़े पैमाने पर इस बात की अपेक्षा थी, कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सी मिलकर बेहतर द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला रख रहे हैं .
रोचक बात यह है, कि ठीक इसी समय चीन जापान और इंडोनेशिया के साथ भी अच्छे संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
इंडोनेशिया की मित्रतापूर्ण यात्रा के बाद, पिछले सप्ताह चीन के प्रीमियर ली ने जापान की यात्रा की, और हंसते मुस्कुराते हुए जापान के प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवाए.
महत्वपूर्ण बात यह है, कि पिछले 7 वर्षों में चीन के किसी भी प्रीमियर की यह पहली जापान की यात्रा थी.
कोई आश्चर्य की बात नहीं है, प्रधानमंत्री मोदी की तरह जापान के प्रधानमंत्री भी सोच रहे हैं, कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धापूर्ण संबंधों के बजाए, यदि सौहार्द और मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित हो जाएं, तो पूरे एशिया महाद्वीप में तेजी से शांति स्थायित्व और समृद्धि लाई जा सकती है.
इससे भी अधिक रोचक बात यह है, कि यह तीन यात्राएं हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाती हैं. यह तो केवल चीन है, जो इन 3 देशों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की पहल कर रहा है.
भारत जापान और इंडोनेशिया तो केवल चीन की मित्रतापूर्ण पहल का जवाब दे रहे हैं.
इसलिए सवाल उठता है, कि चीन के व्यवहार में अचानक से यह परिवर्तन क्यों आया है?
इसका जवाब सीधा है, चीन को अमेरिका से व्यापार में हर साल मिलने वाले 500 बिलियन डॉलर अब खतरे में हैं.
चीन सबके सामने यह बात स्वीकार करे, या ना करे, कई आंतरिक आर्थिक समस्याओं का सामना करते हुए, अमेरिका के द्वारा आर्थिक प्रतिबंध लगने की संभावना उसे चेतावनी और खतरा प्रतीत हो रही हैं.
इस बीच भारत और जापान के साथ तनाव की स्थिति, केवल अमेरिका को और अधिक मजबूत करने वाली होगी.
स्वाभाविक रूप से, अपने कार्यों से चीन अमेरिका को और मजबूत नहीं करना चाहता है. वैसे भी हर कोई एक समय पर एक ही दुश्मन से लड़ना चाहता है.
अगर आप भविष्य में देखें, तो आने वाले समय में चीन अमेरिका को विश्व में उसकी शक्तिशाली स्थिति से हटाकर उसकी जगह लेना चाहता है.
इसलिए चीन इस बुरी हालत को बदल कर, एक अवसर के रूप में उसका लाभ उठाना चाहता है.
चतुर चीन ने यह अच्छी तरह से समझ लिया है, खुले वैश्विक व्यापार के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप के नजरिए से भारत और जापान भी खतरा महसूस करते हैं.
हाल फिलहाल तो भारत और जापान वैसे ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जैसी चीन को अपेक्षा थी.
अगर कोई जानबूझकर अवॉइड करना ना चाहे, तो चीन ने हाल ही में दक्षिण चीन सागर के द्वीप पर मिसाइल और सैन्य हथियार तैनात कर दिए हैं.
मुख्य रूप से, अभी तो मुस्कुराहट भरी कूटनीति दिखाई दे रही है. चीन से आ रही मुस्कुराहट के जवाब में भारत और जापान भी मुस्कुराकर उसे जवाब दे रहे हैं.
लेकिन इस तरीके की सीमाएं हैं, इसलिए भारत और जापान को चीन के जाल में फंसने से बचना चाहिए.
क्योंकि यह केवल वक्त की बात है, जब चीन अपना असली रंग और महत्वकांक्षा हम सब को फिर से दिखलायेगा.
इसलिए भारतीय प्रधानमंत्री की चीन की यात्रा के दौरान आसमान में ऊंचा उड़ने के बाद, अब हमें वास्तविकता के धरातल पर उतरना होगा.
चीन के साथ मीठी-मीठी बातें करने के साथ, हमें बड़े ही सावधान होकर यह देखना होगा, कि क्या चीन अपनी नीति और कार्यों में कोई परिवर्तन वास्तव में कर रहा है, या नहीं.
क्योंकि ऐसा होने की संभावना बहुत कम है. ऐसा लगता है, कि भारत अभी चीन को समय दे रहा है, ताकि वह केवल अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध अच्छी तरह से लड़ सके.
इसलिए बड़ा सवाल यह है, क्या चीन के ऊपर से दबाव हटाकर, हमें इस कठिन परिस्थिति में चीन को और अधिक शक्तिशाली बना देना चाहिए.
जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, यह एक ऐसा समय है, जब हमें चीन के ऊपर अधिक से अधिक दबाव डालकर, उसके साथ अपने व्यापारिक घाटे को कम करने की कोशिश करना चाहिए.
अगर हम इस बार चीन के साथ अपने व्यापारिक घाटे को कम नहीं कर पाए, तो निश्चित रुप से वास्तविक नियंत्रण सीमा पर देर सवेर चीन से हमें विश्वासघात मिलेगा.
यह विचार सीधा है, अगर चीन अभी हमें व्यापार में राहत नहीं देता है, तो निश्चित रुप से चीन भविष्य में सुरक्षा क्षेत्र में हमें राहत नहीं देगा .
जहां तक हम समझते हैं, चीन के व्यवहार में हुआ यह परिवर्तन बहुत ही अस्थाई है. चीन हमारा वर्तमान में उपयोग करके, भविष्य में फेंक दें. हमें ऐसा होने नहीं देना है.
आपके विचार से, क्या चीन के व्यवहार में हुआ यह परिवर्तन स्थाई है?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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दोस्तों, यदि आप कुछ महीने पीछे जाएं, चीन की आक्रामक महत्वाकांक्षाओं के विरोध में, भारत और जापान अमेरिका के साथ मिलकर चतुर्भुज संगठन बनाने के ऊपर बातचीत करने लगे थे.
बड़े ही साफ तौर पर भारत और जापान चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े हुए दिखाई दे रहे थे.
लेकिन पिछले 1 महीने के दौरान, बातचीत का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है. अब कोई भी देश चतुर्भुज संगठन को लेकर ज्यादा उत्सुक दिखाई नहीं दे रहा है.
भारतीय प्रधानमंत्री की हाल ही की चीन की यात्रा की याददाश्त हमारे दिमाग में अभी ताजा है. बड़े पैमाने पर इस बात की अपेक्षा थी, कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सी मिलकर बेहतर द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला रख रहे हैं .
रोचक बात यह है, कि ठीक इसी समय चीन जापान और इंडोनेशिया के साथ भी अच्छे संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
इंडोनेशिया की मित्रतापूर्ण यात्रा के बाद, पिछले सप्ताह चीन के प्रीमियर ली ने जापान की यात्रा की, और हंसते मुस्कुराते हुए जापान के प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवाए.
महत्वपूर्ण बात यह है, कि पिछले 7 वर्षों में चीन के किसी भी प्रीमियर की यह पहली जापान की यात्रा थी.
कोई आश्चर्य की बात नहीं है, प्रधानमंत्री मोदी की तरह जापान के प्रधानमंत्री भी सोच रहे हैं, कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धापूर्ण संबंधों के बजाए, यदि सौहार्द और मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित हो जाएं, तो पूरे एशिया महाद्वीप में तेजी से शांति स्थायित्व और समृद्धि लाई जा सकती है.
इससे भी अधिक रोचक बात यह है, कि यह तीन यात्राएं हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाती हैं. यह तो केवल चीन है, जो इन 3 देशों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की पहल कर रहा है.
भारत जापान और इंडोनेशिया तो केवल चीन की मित्रतापूर्ण पहल का जवाब दे रहे हैं.
इसलिए सवाल उठता है, कि चीन के व्यवहार में अचानक से यह परिवर्तन क्यों आया है?
इसका जवाब सीधा है, चीन को अमेरिका से व्यापार में हर साल मिलने वाले 500 बिलियन डॉलर अब खतरे में हैं.
चीन सबके सामने यह बात स्वीकार करे, या ना करे, कई आंतरिक आर्थिक समस्याओं का सामना करते हुए, अमेरिका के द्वारा आर्थिक प्रतिबंध लगने की संभावना उसे चेतावनी और खतरा प्रतीत हो रही हैं.
इस बीच भारत और जापान के साथ तनाव की स्थिति, केवल अमेरिका को और अधिक मजबूत करने वाली होगी.
स्वाभाविक रूप से, अपने कार्यों से चीन अमेरिका को और मजबूत नहीं करना चाहता है. वैसे भी हर कोई एक समय पर एक ही दुश्मन से लड़ना चाहता है.
अगर आप भविष्य में देखें, तो आने वाले समय में चीन अमेरिका को विश्व में उसकी शक्तिशाली स्थिति से हटाकर उसकी जगह लेना चाहता है.
इसलिए चीन इस बुरी हालत को बदल कर, एक अवसर के रूप में उसका लाभ उठाना चाहता है.
चतुर चीन ने यह अच्छी तरह से समझ लिया है, खुले वैश्विक व्यापार के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप के नजरिए से भारत और जापान भी खतरा महसूस करते हैं.
हाल फिलहाल तो भारत और जापान वैसे ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जैसी चीन को अपेक्षा थी.
अगर कोई जानबूझकर अवॉइड करना ना चाहे, तो चीन ने हाल ही में दक्षिण चीन सागर के द्वीप पर मिसाइल और सैन्य हथियार तैनात कर दिए हैं.
मुख्य रूप से, अभी तो मुस्कुराहट भरी कूटनीति दिखाई दे रही है. चीन से आ रही मुस्कुराहट के जवाब में भारत और जापान भी मुस्कुराकर उसे जवाब दे रहे हैं.
लेकिन इस तरीके की सीमाएं हैं, इसलिए भारत और जापान को चीन के जाल में फंसने से बचना चाहिए.
क्योंकि यह केवल वक्त की बात है, जब चीन अपना असली रंग और महत्वकांक्षा हम सब को फिर से दिखलायेगा.
इसलिए भारतीय प्रधानमंत्री की चीन की यात्रा के दौरान आसमान में ऊंचा उड़ने के बाद, अब हमें वास्तविकता के धरातल पर उतरना होगा.
चीन के साथ मीठी-मीठी बातें करने के साथ, हमें बड़े ही सावधान होकर यह देखना होगा, कि क्या चीन अपनी नीति और कार्यों में कोई परिवर्तन वास्तव में कर रहा है, या नहीं.
क्योंकि ऐसा होने की संभावना बहुत कम है. ऐसा लगता है, कि भारत अभी चीन को समय दे रहा है, ताकि वह केवल अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध अच्छी तरह से लड़ सके.
इसलिए बड़ा सवाल यह है, क्या चीन के ऊपर से दबाव हटाकर, हमें इस कठिन परिस्थिति में चीन को और अधिक शक्तिशाली बना देना चाहिए.
जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, यह एक ऐसा समय है, जब हमें चीन के ऊपर अधिक से अधिक दबाव डालकर, उसके साथ अपने व्यापारिक घाटे को कम करने की कोशिश करना चाहिए.
अगर हम इस बार चीन के साथ अपने व्यापारिक घाटे को कम नहीं कर पाए, तो निश्चित रुप से वास्तविक नियंत्रण सीमा पर देर सवेर चीन से हमें विश्वासघात मिलेगा.
यह विचार सीधा है, अगर चीन अभी हमें व्यापार में राहत नहीं देता है, तो निश्चित रुप से चीन भविष्य में सुरक्षा क्षेत्र में हमें राहत नहीं देगा .
जहां तक हम समझते हैं, चीन के व्यवहार में हुआ यह परिवर्तन बहुत ही अस्थाई है. चीन हमारा वर्तमान में उपयोग करके, भविष्य में फेंक दें. हमें ऐसा होने नहीं देना है.
आपके विचार से, क्या चीन के व्यवहार में हुआ यह परिवर्तन स्थाई है?
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Transcript -
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Lets discuss about today's topic.
Friends, if you go just few months back, we can recall the talks of the quadrilateral taking shape against Chinese aggressive ambition.
Clearly, India and Japan were seen on the American side against Chinese.
But in last one month, the narrative has completely changed. Nobody appears to be interested in the idea of Quad any longer.
The memory of recent Chinese visit of Indian prime minister is very fresh in our minds. its being widely expected that Modi and Xi are building foundation for better bilateral relationship.
Rather interestingly, at the same time, China is also attempting to have better relationship with Japan and Indonesia as well.
After cordial Indonesian visit, last week Chinese Premier Li Keqiang was in Japan have smiling photos clicked with Japanese Prime minister.
Significantly, this was the first visit of any Chinese premier to Japan in last seven years.
No wonder, Just like PM Modi, Japanese prime minister is thinking, that By changing the Japan China relationship from one of Competition to one of Harmony, will contribute greatly to peace, stability and prosperity in the Asia.
Rather interestingly, these three visits conclusively prove one point, it was China which was trying for better relationship.
India, Indonesia and Japan were simply reacting to Chinese friendly gesture.
Therefore the question comes, why there is sudden Chinese change of behavior?
The answer is rather simple, its the question of $500 Billion each year, that China gets due to its trade surplus with America.
Whether china publicly accepts it or not, while facing many internal economic challenges, it feels threatened by looming trade sanctions from America.
Therefore, by having confrontation with India and Japan will only make American position stronger.
Of late, China is denying that possibility to America. after all, Everyone prefers one fight at a time.
If you look it in future, this is Chinese way to dislodge America from its powerful status in the long term.
Therefore its trying to make an opportunity out of bad situation.
China has smartly understood, the anti global free trade voices coming from trump harms India and Japan as well.
For now, India and Japan are reacting the way China expect them to act.
If one doesn't want to knowingly avoid, China has recently deployed missiles and other military equipment on South China Sea island.
Basically, Right now, Smile diplomacy is in full play. In response to Smile coming from China, India and Japan are smiling back.
But this approach has serious limitation, India and China can fall into Chinese trap for now.
However, its just a matter of Time, when China will once again show its true colors and ambition.
Therefore after flying high during Indian PM's China visit, we must land on the ground now.
Beyond the sweet talk, We should be carefully see, if China is showing any meaningful change in its policy and acts.
Since its very unlikely to happen, it appears, we Indians are giving China an opportunity to buy Time to fight American trade war alone.
The bigger question is, By releasing pressure from our side, should we make China stronger in this difficult situation?
As we have discussed in this video, This is the time when India should continue to apply high degree of pressure on China to reduce trade deficit.
If we fail in getting trade deficit reduced this time around, rest assured friends, China will give a cold back stab to us on Line of actual control sooner than later.
The idea is simple, If China cannot offer trade relief to India now, it will not offer any security relief for India later.
So far as we think, Chinese behavioral change is temporary in nature, and we must not be used by Chinese now, to be only thrown later.
As per your views, do you foresee Chinese behavioral change being permanent in nature?
Please let us know your views in comment section below.
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