अमेरिका के ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकलने का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा??
इस वीडियो में हम राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा लिए गए निर्णय के बारे में चर्चा करेंगे
How American withdrawal from Iran nuclear deal affects India??
In this video, we will discuss about recent decision of president Trump.
Will America impose sanctions on India for buying Iranian Oil??
References -
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Transcript -
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जैसा कि इसराइल के प्रधानमंत्री ने पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी, 12 मई की तय सीमा के ठीक पहले, अपने स्वभाव के अनुसार, आज राष्ट्रपति ट्रंप ने औपचारिक रूप से ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकलने का निर्णय ले लिया.
यह पुरानी स्थिति पर वापस लौटने के समान हैं. 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील होने के पहले ईरान पर जो अमेरिकी परमाणु प्रतिबंध लगे हुए थे, वह आर्थिक प्रतिबंध ईरान के ऊपर अब दोबारा से लग जाएंगे.
मुख्य रूप से राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा अपने देश की आम जनता के लिए कर रहे हैं.
आप जानते हैं, राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप पूरे समय इस डील के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.
हम सभी जानते थे, कि देर-सवेर यह जरूर होगा. फिर भी बहुत बड़े पैमाने पर कूटनीतिक प्रयास चल रहे थे, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप को इस निर्णय को ना लेने के लिए प्रेरित किया जा सके.
अमेरिका के इस निर्णय से सबसे अधिक हानि यूरोपियन यूनियन को होने वाली है. 2015 की इरान न्यूक्लियर डील के बाद, ईरान और यूरोपियन यूनियन के बीच चल रहे व्यापार में 3 गुना इजाफा हुआ था.
इसलिए फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस डील में बने रहने के लिए मनाने की भरसक कोशिश की.
महत्वपूर्ण सवाल यह है, आखिर राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा करके क्या प्राप्त करना चाहते हैं.
इसका जवाब बहुत सीधा है, इरान में सत्ता परिवर्तन और अमेरिका में अपनी सत्ता बनाए रखना राष्ट्रपति ट्रंप का इस निर्णय के पीछे उद्देश्य है.
वास्तव में, हाल ही में नियुक्त राष्ट्रपति ट्रंप के वकील गिलिआनी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के प्रति कटिबद्ध है.
आप जानते हैं, इस साल की शुरुआत में जब ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके प्रति सहानुभूति प्रकट की थी.
लेकिन अनुभव बताता है, आर्थिक प्रतिबंधों के दोबारा लगने से ईरान की जनता को बहुत दिक्कत होने वाली है. जिससे वहां पर राष्ट्रवाद की भावना को बल मिलेगा, और वर्तमान सत्ता की शक्ति और अधिक बढ़ती चली जाएगी.
इसलिए यदि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के प्रति गंभीर हैं, तो आज उन्होंने जो रास्ता चुना है, वह केवल युद्ध की ओर ले जाता है.
अब हम अमेरिका के इस निर्णय का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके बारे में चर्चा करते हैं. जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, हमारी सरकार ने पहले से ही इस स्थिति को भाप लिया था, और काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी.
आप जानते हैं, ईरान के कई बैंक भारत में अपनी शाखाएं खोल रहे हैं, और भारत का एक बैंक ईरान में शाखा खोलने जा रहा है. Rupee Riyal exchange mechanism भारत और ईरान के बीच वर्तमान स्तर पर व्यापार को बनाए रखने में सक्षम है. और अधिक जानकारी के लिए आप हमारा यह वीडियो देख सकते हैं.
लेकिन फिर भी, एक दूसरे के विरोधाभासी रिश्तो को निभाने के लिए भारत को दिक्कत का सामना निश्चित रूप से करना पड़ेगा.
वास्तविकता के धरातल पर, यह आर्थिक प्रतिबंध भारत और ईरान के रिश्तो में और अधिक सुधार नहीं होने देंगे. यहां तक कि भारत और ईरान के बीच बढ़ते हुए व्यापार को देखकर, अमेरिकी प्रशासन भारत पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है .
जबकि भारत ईरान के कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, चीन सबसे अधिक ईरान का तेल खरीदता है.
इसलिए यदि भारत ने ईरान में कोई भी जगह खाली छोड़ी, तो चीन उसे तुरंत भर देगा.
रूस और पाकिस्तान भी इस मौके का लाभ उठाने के लिए तैयार बैठे हैं.
क्षेत्रीय राजनीति और मध्य एशिया में अपनी भूमिका मजबूत करने की भारत की इच्छा ऐसे दो कारण हैं, जो हमें ईरान पर वर्तमान स्तर पर मेलजोल बनाए रखने के लिए मजबूर करते हैं.
इस पृष्ठभूमि में हमें पुरानी कहावत याद रखना चाहिए, कि जहां चाह होती है, वहां राह होती है.
आशा की जानी चाहिए, कि मोदी सरकार कम से कम वर्तमान स्तर पर ईरान के साथ रिश्तो को बनाए रखने में सफल होगी.
आपके विचार से, क्या इसराइल और अमेरिका के साथ अच्छे संबंधों के लिए, भारत को ईरान के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ लेना चाहिए.
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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जैसा कि इसराइल के प्रधानमंत्री ने पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी, 12 मई की तय सीमा के ठीक पहले, अपने स्वभाव के अनुसार, आज राष्ट्रपति ट्रंप ने औपचारिक रूप से ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकलने का निर्णय ले लिया.
यह पुरानी स्थिति पर वापस लौटने के समान हैं. 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील होने के पहले ईरान पर जो अमेरिकी परमाणु प्रतिबंध लगे हुए थे, वह आर्थिक प्रतिबंध ईरान के ऊपर अब दोबारा से लग जाएंगे.
मुख्य रूप से राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा अपने देश की आम जनता के लिए कर रहे हैं.
आप जानते हैं, राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप पूरे समय इस डील के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.
हम सभी जानते थे, कि देर-सवेर यह जरूर होगा. फिर भी बहुत बड़े पैमाने पर कूटनीतिक प्रयास चल रहे थे, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप को इस निर्णय को ना लेने के लिए प्रेरित किया जा सके.
अमेरिका के इस निर्णय से सबसे अधिक हानि यूरोपियन यूनियन को होने वाली है. 2015 की इरान न्यूक्लियर डील के बाद, ईरान और यूरोपियन यूनियन के बीच चल रहे व्यापार में 3 गुना इजाफा हुआ था.
इसलिए फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस डील में बने रहने के लिए मनाने की भरसक कोशिश की.
महत्वपूर्ण सवाल यह है, आखिर राष्ट्रपति ट्रंप ऐसा करके क्या प्राप्त करना चाहते हैं.
इसका जवाब बहुत सीधा है, इरान में सत्ता परिवर्तन और अमेरिका में अपनी सत्ता बनाए रखना राष्ट्रपति ट्रंप का इस निर्णय के पीछे उद्देश्य है.
वास्तव में, हाल ही में नियुक्त राष्ट्रपति ट्रंप के वकील गिलिआनी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के प्रति कटिबद्ध है.
आप जानते हैं, इस साल की शुरुआत में जब ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके प्रति सहानुभूति प्रकट की थी.
लेकिन अनुभव बताता है, आर्थिक प्रतिबंधों के दोबारा लगने से ईरान की जनता को बहुत दिक्कत होने वाली है. जिससे वहां पर राष्ट्रवाद की भावना को बल मिलेगा, और वर्तमान सत्ता की शक्ति और अधिक बढ़ती चली जाएगी.
इसलिए यदि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के प्रति गंभीर हैं, तो आज उन्होंने जो रास्ता चुना है, वह केवल युद्ध की ओर ले जाता है.
अब हम अमेरिका के इस निर्णय का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके बारे में चर्चा करते हैं. जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, हमारी सरकार ने पहले से ही इस स्थिति को भाप लिया था, और काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी.
आप जानते हैं, ईरान के कई बैंक भारत में अपनी शाखाएं खोल रहे हैं, और भारत का एक बैंक ईरान में शाखा खोलने जा रहा है. Rupee Riyal exchange mechanism भारत और ईरान के बीच वर्तमान स्तर पर व्यापार को बनाए रखने में सक्षम है. और अधिक जानकारी के लिए आप हमारा यह वीडियो देख सकते हैं.
लेकिन फिर भी, एक दूसरे के विरोधाभासी रिश्तो को निभाने के लिए भारत को दिक्कत का सामना निश्चित रूप से करना पड़ेगा.
वास्तविकता के धरातल पर, यह आर्थिक प्रतिबंध भारत और ईरान के रिश्तो में और अधिक सुधार नहीं होने देंगे. यहां तक कि भारत और ईरान के बीच बढ़ते हुए व्यापार को देखकर, अमेरिकी प्रशासन भारत पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है .
जबकि भारत ईरान के कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, चीन सबसे अधिक ईरान का तेल खरीदता है.
इसलिए यदि भारत ने ईरान में कोई भी जगह खाली छोड़ी, तो चीन उसे तुरंत भर देगा.
रूस और पाकिस्तान भी इस मौके का लाभ उठाने के लिए तैयार बैठे हैं.
क्षेत्रीय राजनीति और मध्य एशिया में अपनी भूमिका मजबूत करने की भारत की इच्छा ऐसे दो कारण हैं, जो हमें ईरान पर वर्तमान स्तर पर मेलजोल बनाए रखने के लिए मजबूर करते हैं.
इस पृष्ठभूमि में हमें पुरानी कहावत याद रखना चाहिए, कि जहां चाह होती है, वहां राह होती है.
आशा की जानी चाहिए, कि मोदी सरकार कम से कम वर्तमान स्तर पर ईरान के साथ रिश्तो को बनाए रखने में सफल होगी.
आपके विचार से, क्या इसराइल और अमेरिका के साथ अच्छे संबंधों के लिए, भारत को ईरान के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ लेना चाहिए.
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Transcript -
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Lets discuss about today's topic.
With the stage set by Israeli prime minister, well ahead of 12 May dead line, true to his character, today President trump has formally announced the decision to withdraw from the Iran nuclear deal.
Its back to square one situation. all the american nuclear sanctions on Iran that had been lifted under the 2015 deal, will be re imposed on again on Iran.
More than anything else, by doing this, President Trump is addressing his domestic audience.
You know, Trump has been against this deal during his entire election campaign.
We all knew, it was coming. Nevertheless high degree of diplomatic efforts have been going on to avoid this inevitable situation.
Biggest loser by this decision is the European union. After the sanctions were lifted, There was 3 times increase in the trade in between Iran and European union.
That’s why France and Germany were obviously trying hard to convince President Trump to remain in the deal.
The important question is, what President trump wants to achieve by this.
The simple answer is, regime change in Iran and continuity of his regime in United states.
In fact, President trump's newly appointed lawyer Giuliani has publicly stated, that President Trump is committed to regime change in Iran.
You can recall, earlier this year, when Iranian started street protests, President Trump himself tweeted solidarity.
However, experience suggests, With these sanctions, Iranian public is surely going to have tough time. This decision may end up increasing nationalist sentiments among them, and making the current regime stronger.
That’s why, if president trump is serious about regime change in Iran, the path he has chosen today will only lead to War.
Now, coming to effects of today's decision on India, As we have discussed in our this video, Our government has already read the writing on the wall, and started preparation well in advance.
You know, Iranian banks are opening branches in India, and Indian bank is opening branch in Iran. Rupee Riyal exchange mechanism will allow India and Iran to continue the trade at present level. We highly recommend you to watch our this video.
Having said that, we will certainly have problem in future while managing conflicting relationship.
Let’s be realistic, these sanctions will create serious problem for any growth in bilateral India Iran relationship. In fact, this trade with Iran may also force Trump administration to impose sanctions on India.
While India is third largest consumer of Iranian oil, China is the largest consumer.
Hence, if India leaves any space, it will be filled by China immediately.
Russia and Pakistan are also willing to fish in troubled water.
The regional geopolitics and our desire to have bigger role in Central Asia require us to remain engaged with Iran at the current level.
In this background, we must remember the old saying, where there is a will, there is a way.
Hopefully, Modi government will not let American sanctions impact the current bilateral relationship with Iran.
As per your views, In order to have better relationship with Israel and America, should India stop trade relationship with Iran?
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