मोदी जी ने रूस से सबसे सस्ती LNG कैसे खरीदी???
इस वीडियो में हम रूस से इतिहास में पहली बार भारत आए एलएनजी शिपमेंट के बारे में चर्चा करें
How PM Modi managed to buy Cheapest Russian LNG??
In this video, we will discuss about recent Russian LNG Shipment to India.
Reference -
https://www.moneycontrol.com/ news/business/russias-gazprom- begins-lng-supplies-to-india- 2582235.html
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Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
शायद आप जानते हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश चल रही थी, जिसके अंतर्गत भारत की कुल ऊर्जा खपत में environment friendly Clean gas का हिस्सा 6% से बढ़ाकर 15% करने के ऊपर लक्ष्य साधा गया था.
4 वर्ष पहले भारत सिर्फ कतर से liquefied natural gas या LNG का आयात किया करता था. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती हुई ऊर्जा की जरूरतों की पूर्ति के लिए, भारत ने गैस को आयात करने के स्रोतों को बढ़ा दिया है. अब भारत लंबे समय के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी LNG आयात करता है.
अभी हाल ही में इतिहास में पहली बार भारत ने रूस से एलएनजी को आयात किया है. रूस की तरफ से भारत के लिए सबसे सस्ता LNG का पहला शिपमेंट दहेज़ गुजरात पहुंचा है.
आप शायद जानते हो, ब्रिटिश थर्मल यूनिट इतनी उर्जा के बराबर होती है, जिस की गर्मी के द्वारा एक पाउंड पानी का तापमान 1 डिग्री फेरन हाइट तक बढ़ाया जा सकता है.
1000000 ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी mmbtu इकाई में गैस की कीमत का अंदाजा लगाया जाता है.
कतर भारत को 8.5 डॉलर में 1 mmbtu गैस देता है, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया $8 में 1 mmbtu गैस बेचता है. इसकी तुलना में रूस ने भारत के लिए बहुत अच्छी कीमत लगाते हुए $7 में 1 mmbtu गैस बेची है.
यदपि भारत और रूस के बीच में LNG को खरीदने के लिए सौदा वर्ष 2012 में किया गया था. लेकिन यह नई और अच्छी कीमत इसी साल फाइनल हुई है.
वर्ष 2012 की deal के अनुसार रूस को बारेंट्स सागर में स्थित गैस के प्रोजेक्ट से गैस का दोहन करके भारत को गैस सप्लाई करनी थी. लेकिन जैसे ही अमेरिका में shale gas revolution हुई, रूस के इस प्रोजेक्ट के लिए गैस की मांग कम हो गई. इसलिए कस्टमर के अभाव में रूस ने इस प्रोजेक्ट को बीच में ही छोड़ दिया.
अब क्योंकि गैस का स्रोत बदल चुका था, इसलिए औपचारिक रूप से रूस के साथ किए गए सौदे में परिवर्तन की जरूरत आन पड़ी. यहां पर यह अनुमान लगाना सही होगा, 2012 में हम जिस कीमत पर LNG खरीद रहे थे, वह अधिक थी.
लेकिन इस बार बुद्धिमान भारत सरकार ने रूस के साथ मजबूती से मोलभाव किया, और एक अच्छी कीमत पर गैस खरीदी. ध्यान रहे, यह पूरा सौदा भारी भरकम 25 बिलियन डॉलर कीमत का है.
कहने की जरूरत नहीं है, इस सौदे में दोनों देशों की जीत हुई है. वर्ष 2012 के सौदे के अनुसार, रूस भारत को सिर्फ 20 वर्षों तक गैस सप्लाई कर सकता था. लेकिन इस नए सौदे के अनुसार 23 वर्षों के लिए रूस भारत को LNG सप्लाई कर पाएगा.
इसके अलावा, वर्ष 2012 की डील के अनुसार भारत को कुल मिलाकर 50 मिलियन टन एलएनजी खरीदनी थी. लेकिन अब भारत रूस से 52 मिलियन टन गैस खरीदेगा.
दोस्तों, हम में से किसी को इस नए सौदे से दिक्कत नहीं होनी चाहिए,क्योंकि हमें गैस कम कीमत पर मिल रही है,वैसे भी भविष्य में हमारी ऊर्जा की जरूरत तेजी से बढ़ने वाली है.
इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है, इसके अनुसार Gas Authority of India के पास पर्याप्त समय होगा, जिसमें वह गैस के उपभोक्ताओं का विकास कर पाएगी.
ऐसा संभव करने के लिए, इस साल भारत सिर्फ 0.5 मिलियन टन गैस खरीदेगा, अगले साल 0.75 मिलियन टन गैस खरीदेगा, और तीसरे वर्ष भारत 1.5 मिलियन गैस टन खरीदेगा. तब जाकर चौथे वर्ष से भारत प्रतिवर्ष पूरी मात्रा में 2.5 मिलियन टन गैस रूस से खरीदेगा.
जैसा कि सौदे के लिए कुल गैस की मात्रा निर्धारित है, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे के वर्षों में भारत को 2.5 मिलियन टन से भी अधिक गैस प्रतिवर्ष खरीदनी पड़ेगी, ताकि शुरुआती 3 वर्षों में कम मात्रा में खरीदी गई गैस की मात्रा की भरपाई हो सके.
आप जानते हैं, पावर स्टील और अन्य उद्योगों में ऊर्जा के स्रोत को बदलने में समय लगता है. धीमी गति से बढ़ाया गया यह गैस का आयात ऊर्जा के स्रोत को बदलने में भारतीय उद्योगों की मदद करेगा.
अब जैसा कि अगले 23 वर्षों के लिए LNG की सप्लाई की गारंटी हो गई है, भारतीय उद्योग विश्वासपूर्वक अपने ऊर्जा के स्रोत को बदल सकते हैं. अब वह कोयले और डीजल की जगह स्वच्छ और अच्छे इंधन LNG का उपयोग कर सकते हैं.
जैसा कि आप समझ सकते हैं, शुरुआती वर्षों में बड़ी मात्रा में LNG को खरीदकर इकट्ठा करके हमारे कीमती विदेशी मुद्रा भंडार की बर्बादी होती. अब जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग बढ़ेगी, वैसे वैसे गैस की सप्लाई भी बढ़ेगी. एक तरह से यह गैस का बहुत ही अच्छा और चतुर इन्वेंटरी मैनेजमेंट है.
यह डील एक बार फिर सिद्ध करती है, कि लंबे समय के लिए रूस और भारत एक दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं .
कल ही हम इस बात की चर्चा कर रहे थे, रूस पाकिस्तान के लिए 10 बिलियन डॉलर का निवेश करके offshore गैस पाइपलाइन बिछा रहा है.
और आज देखिए, अगले 23 वर्षों के लिए भारत और रूस ने LNG के क्षेत्र में 25 बिलियन डॉलर के सौदे को अंजाम दिया है.
यह सिद्ध करता है, कि थोड़े समय के लिए अमेरिकी नीति में असमंजस बनी हुई है, लेकिन भारत और रूस कि दोस्ती का भविष्य सुरक्षित है, और इनके संबंध भविष्य में निश्चित रूप से और मजबूत होते जाएंगे. जब तक हम दोनों एक दूसरे के हितों को समझते हैं और उन्हें पूरा करते हैं, तब तक भारत रूस की दोस्ती को किसी तीसरे देश से कोई खतरा नहीं होगा.
हाल फिलहाल तो यह एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट ट्रंप प्रशासन को परेशानी में डाल देगा, लेकिन हमें इसकी परवाह नहीं है.
गंभीरतापूर्वक, यह तो व्यापारिक निर्णय है, यदि अमेरिका हमें और अधिक बेहतर कीमत पर गैस उपलब्ध कराता है, तो हम उससे भी खरीदेंगे. वास्तव में, यही एक ऐसा सही तरीका है, जिससे अमेरिका यह निश्चित कर सकता है, की भारत रूस से और अधिक मात्रा में गैस ना खरीदे.
आपके विचार से. अमेरिकी प्रशासन के गुस्से को नियंत्रण में रखने के लिए, क्या भारत को रूस के साथ एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत गैस नहीं खरीदनी चाहिए थी?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
शायद आप जानते हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश चल रही थी, जिसके अंतर्गत भारत की कुल ऊर्जा खपत में environment friendly Clean gas का हिस्सा 6% से बढ़ाकर 15% करने के ऊपर लक्ष्य साधा गया था.
4 वर्ष पहले भारत सिर्फ कतर से liquefied natural gas या LNG का आयात किया करता था. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती हुई ऊर्जा की जरूरतों की पूर्ति के लिए, भारत ने गैस को आयात करने के स्रोतों को बढ़ा दिया है. अब भारत लंबे समय के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी LNG आयात करता है.
अभी हाल ही में इतिहास में पहली बार भारत ने रूस से एलएनजी को आयात किया है. रूस की तरफ से भारत के लिए सबसे सस्ता LNG का पहला शिपमेंट दहेज़ गुजरात पहुंचा है.
आप शायद जानते हो, ब्रिटिश थर्मल यूनिट इतनी उर्जा के बराबर होती है, जिस की गर्मी के द्वारा एक पाउंड पानी का तापमान 1 डिग्री फेरन हाइट तक बढ़ाया जा सकता है.
1000000 ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी mmbtu इकाई में गैस की कीमत का अंदाजा लगाया जाता है.
कतर भारत को 8.5 डॉलर में 1 mmbtu गैस देता है, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया $8 में 1 mmbtu गैस बेचता है. इसकी तुलना में रूस ने भारत के लिए बहुत अच्छी कीमत लगाते हुए $7 में 1 mmbtu गैस बेची है.
यदपि भारत और रूस के बीच में LNG को खरीदने के लिए सौदा वर्ष 2012 में किया गया था. लेकिन यह नई और अच्छी कीमत इसी साल फाइनल हुई है.
वर्ष 2012 की deal के अनुसार रूस को बारेंट्स सागर में स्थित गैस के प्रोजेक्ट से गैस का दोहन करके भारत को गैस सप्लाई करनी थी. लेकिन जैसे ही अमेरिका में shale gas revolution हुई, रूस के इस प्रोजेक्ट के लिए गैस की मांग कम हो गई. इसलिए कस्टमर के अभाव में रूस ने इस प्रोजेक्ट को बीच में ही छोड़ दिया.
अब क्योंकि गैस का स्रोत बदल चुका था, इसलिए औपचारिक रूप से रूस के साथ किए गए सौदे में परिवर्तन की जरूरत आन पड़ी. यहां पर यह अनुमान लगाना सही होगा, 2012 में हम जिस कीमत पर LNG खरीद रहे थे, वह अधिक थी.
लेकिन इस बार बुद्धिमान भारत सरकार ने रूस के साथ मजबूती से मोलभाव किया, और एक अच्छी कीमत पर गैस खरीदी. ध्यान रहे, यह पूरा सौदा भारी भरकम 25 बिलियन डॉलर कीमत का है.
कहने की जरूरत नहीं है, इस सौदे में दोनों देशों की जीत हुई है. वर्ष 2012 के सौदे के अनुसार, रूस भारत को सिर्फ 20 वर्षों तक गैस सप्लाई कर सकता था. लेकिन इस नए सौदे के अनुसार 23 वर्षों के लिए रूस भारत को LNG सप्लाई कर पाएगा.
इसके अलावा, वर्ष 2012 की डील के अनुसार भारत को कुल मिलाकर 50 मिलियन टन एलएनजी खरीदनी थी. लेकिन अब भारत रूस से 52 मिलियन टन गैस खरीदेगा.
दोस्तों, हम में से किसी को इस नए सौदे से दिक्कत नहीं होनी चाहिए,क्योंकि हमें गैस कम कीमत पर मिल रही है,वैसे भी भविष्य में हमारी ऊर्जा की जरूरत तेजी से बढ़ने वाली है.
इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है, इसके अनुसार Gas Authority of India के पास पर्याप्त समय होगा, जिसमें वह गैस के उपभोक्ताओं का विकास कर पाएगी.
ऐसा संभव करने के लिए, इस साल भारत सिर्फ 0.5 मिलियन टन गैस खरीदेगा, अगले साल 0.75 मिलियन टन गैस खरीदेगा, और तीसरे वर्ष भारत 1.5 मिलियन गैस टन खरीदेगा. तब जाकर चौथे वर्ष से भारत प्रतिवर्ष पूरी मात्रा में 2.5 मिलियन टन गैस रूस से खरीदेगा.
जैसा कि सौदे के लिए कुल गैस की मात्रा निर्धारित है, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे के वर्षों में भारत को 2.5 मिलियन टन से भी अधिक गैस प्रतिवर्ष खरीदनी पड़ेगी, ताकि शुरुआती 3 वर्षों में कम मात्रा में खरीदी गई गैस की मात्रा की भरपाई हो सके.
आप जानते हैं, पावर स्टील और अन्य उद्योगों में ऊर्जा के स्रोत को बदलने में समय लगता है. धीमी गति से बढ़ाया गया यह गैस का आयात ऊर्जा के स्रोत को बदलने में भारतीय उद्योगों की मदद करेगा.
अब जैसा कि अगले 23 वर्षों के लिए LNG की सप्लाई की गारंटी हो गई है, भारतीय उद्योग विश्वासपूर्वक अपने ऊर्जा के स्रोत को बदल सकते हैं. अब वह कोयले और डीजल की जगह स्वच्छ और अच्छे इंधन LNG का उपयोग कर सकते हैं.
जैसा कि आप समझ सकते हैं, शुरुआती वर्षों में बड़ी मात्रा में LNG को खरीदकर इकट्ठा करके हमारे कीमती विदेशी मुद्रा भंडार की बर्बादी होती. अब जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग बढ़ेगी, वैसे वैसे गैस की सप्लाई भी बढ़ेगी. एक तरह से यह गैस का बहुत ही अच्छा और चतुर इन्वेंटरी मैनेजमेंट है.
यह डील एक बार फिर सिद्ध करती है, कि लंबे समय के लिए रूस और भारत एक दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं .
कल ही हम इस बात की चर्चा कर रहे थे, रूस पाकिस्तान के लिए 10 बिलियन डॉलर का निवेश करके offshore गैस पाइपलाइन बिछा रहा है.
और आज देखिए, अगले 23 वर्षों के लिए भारत और रूस ने LNG के क्षेत्र में 25 बिलियन डॉलर के सौदे को अंजाम दिया है.
यह सिद्ध करता है, कि थोड़े समय के लिए अमेरिकी नीति में असमंजस बनी हुई है, लेकिन भारत और रूस कि दोस्ती का भविष्य सुरक्षित है, और इनके संबंध भविष्य में निश्चित रूप से और मजबूत होते जाएंगे. जब तक हम दोनों एक दूसरे के हितों को समझते हैं और उन्हें पूरा करते हैं, तब तक भारत रूस की दोस्ती को किसी तीसरे देश से कोई खतरा नहीं होगा.
हाल फिलहाल तो यह एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट ट्रंप प्रशासन को परेशानी में डाल देगा, लेकिन हमें इसकी परवाह नहीं है.
गंभीरतापूर्वक, यह तो व्यापारिक निर्णय है, यदि अमेरिका हमें और अधिक बेहतर कीमत पर गैस उपलब्ध कराता है, तो हम उससे भी खरीदेंगे. वास्तव में, यही एक ऐसा सही तरीका है, जिससे अमेरिका यह निश्चित कर सकता है, की भारत रूस से और अधिक मात्रा में गैस ना खरीदे.
आपके विचार से. अमेरिकी प्रशासन के गुस्से को नियंत्रण में रखने के लिए, क्या भारत को रूस के साथ एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत गैस नहीं खरीदनी चाहिए थी?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel.
Lets discuss about today's topic.
You know, Under the leadership of Prime Minister Modi, the effort is being made to transform India in to a gas based economy by taking the share of environment friendly fuel from current 6 percent to 15 percent.
Four years ago, India used to import liquefied natural gas LNG only from Qatar. For ensuring the energy security, India has recently diversified the gas sources by entering into long term LNG contracts with Australia and America.
Now, for the first time in history, India received Russian LNG shipment in Dahej, Gujrat.
More interestingly, this is the cheapest LNG shipment for India.
You might know, a British Thermal Unit is the amount of heat required to raise temperature of one pound of water by one degree Fahrenheit.
one million British Thermal Unit or MMBTU is used as unit for Gas pricing.
In comparison to Qatar's rate of 8.50 Dollar per million British Thermal Unit and Australian and American rate of 8 Dollar per mmbtu , Russian have offered very competitive rate of around 7 Dollar per mmbtu.
though the basic Russia and India LNG deal was signed in the year 2012, yet the price has been renegotiated early this year only.
Basically, as per 2012 deal, Russia was to supply gas from its Schtokman project in the Barents Sea, however this project got scrapped as the shale gas revolution in the United states removed a key customer base.
Now, There was need to reopen the formally concluded agreement since the gas source itself changed. Here Its safe to assume, 2012 deal involved over priced gas.
this time wise Indian government decided to renegotiate hard, and got better pricing from Russian friends for this long term deal worth more than 25 Billion Dollar.
Needless to say, As win win strategy, Russia will be able to supply gas for next 23 years, it means 3 years more than 20 years as per the deal signed in the year 2012.
In addition, India will buy 2 Million Tonnes of LNG over and above 50 Million tonnes as per the agreement signed in year 2012.
Friends, none of us should have problem with this renegotiated deal, as long as we are getting better price, given our energy need is anyway going to increase for sure.
Another important feature of this deal is to give Gas Authority of India enough time to develop its customer base.
To allow this to happen, In comparison to agreed 2.5 Million Tonnes per year volume, India will buy only 0.5 Million Tonnes in this year, 0.75 Million Tonnes in second year, 1.5 Million Tones in Third Year, and We have to buy full volume from fourth year on wards.
Given The total volume of contract is fixed, India may have to buy more than 2.5 Million tonnes also for few years to make up for the less gas purchased in the initial three years.
You know, customers in power, steel and other industries obviously need time to change their energy source, and this deferred procurement will allow it to happen.
Now, there is guarantee for LNG supply for next 23 years, hence they can reliably make the shift towards cleaner fuel.
You may understand, There is no point in blocking our precious foreign reserves in stocked LNG for three years. Now as the demand slowly grows, the supply will also rise. In a way, this is smart way of gas inventory management.
This deal once again shows, what India and Russia can offer to each other in the long term.
Yesterday only, we were discussing about Russia building 10 billion dollar gas pipeline for Pakistan.
Today, we have a contract worth more than 25 Billion dollar executed in between India and Russia.
This confirms the belief that regardless the short term uncertainty in American policy, The fate of India Russia friendship is certain, and this relationship is bound to be stronger with each passing year. As long as we understand and serve each others interests, this friendship has no threat from any other nations.
However, this LNG contract may end up making Trump administration a bit more angry. Anyways who cares!
Seriously, nothing personal here, if america can offer cheaper price, we will buy more. In fact, that's the only logical way for America to stop India buying more Russian gas.
As per your views, In order to contain American Anger, should India not have bought LNG from Russia?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends.
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