दक्षिण कोरिया भारत पर इतना मेहरबान क्यों हो रहा है??
इस वीडियो में हम दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बारे में चर्चा करेंगे.
The Real Reason behind Indian visit of South Korean President.
In this video, we will discuss about ongoing Indian visit of South Korean President.
Reference -
https://www.livemint.com/Politics/aJ1uB4oAgmTpCbs6EfCTjI/SouthKoreatoliftIndia-ties-on-parwithChinaUS-Japan.html
http://english.yonhapnews.co.kr/news/2018/07/09/0200000000AEN20180709000300315.html
https://qz.com/1149663/china-south-korea-relations-in-2017-thaad-backlash-and-the-effect-on-tourism/
https://edition.cnn.com/2017/09/14/asia/south-korea-moon-jae-in-profile/index.html
https://en.wikipedia.org/wiki/China%E2%80%93South_Korea_relations#Background
https://en.wikipedia.org/wiki/Economy_of_South_Korea
https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_the_largest_trading_partners_of_India
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
आप तो जानते होंगे, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जै इस समय भारत की यात्रा पर आए हुए हैं. इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य, भारत को दक्षिण कोरिया के लिए अगला चीन बनाना है.
सवाल यह उठता है, आखिर वह ऐसा क्यों चाहते हैं?
एक छोटा कारण यह है. की चीन ना केवल दक्षिण कोरिया के माल का सबसे बड़ा खरीदार है, बल्कि वह सबसे बड़ी मात्रा में माल दक्षिण कोरिया को बेचता भी है. सच्चे अर्थों में, चीन दक्षिण कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.
वर्ष 2016 के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का 25% निर्यात सिर्फ चीन को होता है, और दक्षिण कोरिया 21 प्रतिशत आयात सिर्फ चीन से करता है.
अब आप सोच रहे होंगे, इस समय वर्ष 2018 चल रहा है, लेकिन हम दक्षिण कोरिया के आयात निर्यात से सबंधित वर्ष 2016 के आंकड़ों की चर्चा कर रहे हैं.
कारण यह है, वर्ष 2016 के अंत में उत्तरी कोरिया से मिसाइल और परमाणु हमने के खतरे से निपटने के लिए, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने मिलकर दक्षिण कोरिया में Terminal High-Altitude Area Defense system (Thaad) तैनात करने का निर्णय किया.
बच्चा बच्चा जानता है, की थाड anti missile defense system है, इसका प्रयोग करके हमला नहीं किया जा सकता है.
जब तक चीन को, दक्षिण कोरिया पर हमला नहीं करना है, तब तक दक्षिण कोरिया में थाड की तैनाती से चीन को कोई भी परेशानी नहीं होना चाहिए थी.
कोई बात नहीं, चीन तो वहां से सोचना चालू करता है, जहां से logical यानी तार्किक बुद्धि काम करना बंद कर देती हैं. इसलिए थाड की तैनाती को, चीन ने अपने राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा मान लिया.
वास्तव में चीन उत्तरी कोरिया का बचाव करना चाहता था, और अमेरिका के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने की कोशिश कर रहा था.
अगर आप ध्यान से देखें, तो चीन ने हमेशा से दो राक्षसों को पाला है. अमेरिका के लिए उत्तरी कोरिया, और भारत के लिए पाकिस्तान.
ताकि भारत और अमेरिका पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद करते रहे, और चीन शांति के साथ तेज गति से अपना विकास कर पाए.
चलिए मुख्य सवाल की ओर लौटते हैं, रोचक बात यह है, दक्षिण कोरिया के लोट्टे group ने अपना एक गोल्फ कोर्स दक्षिण कोरिया की सरकार को दे दिया था, ताकि वहां पर थाड की तैनाती की जा सके.
यह बात चीन को इतना ज्यादा चुभ गई, कि उसे अचानक लोट्टे stores और फैक्टरी में fire safety regulations और अन्य स्थानीय कानूनों का उल्लंघन होता हुआ दिखने लगा. और चीन में 99 में से 75 लोट्टे supermarkets बंद कर दिए गए.
अचानक से मांग में कमी आने से, हुंडई मोटर्स को चीन में अपने कारखानों पर ताला लगाना पड़ गया.
वर्ष 2013 से दक्षिण कोरिया में घूमने के लिए सबसे अधिक यात्री चीन से आते थे. लेकिन थाड की तैनाती के कारण, चीन की सरकार ने ट्रैवल एजेंट से दक्षिण कोरिया के लिए पैकेज बेचना बंद करने को कहा. जिससे दक्षिण कोरिया को जाने वाले चीन के यात्रियों की संख्या में 60% की भारी कमी आ गई.
एक अनुमान के मुताबिक, चीन के द्वारा अनौपचारिक रूप से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण, थाड की तैनाती करने का निर्णय लेने मात्र से दक्षिण कोरिया को 6.8 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ.
इसका परिणाम यह हुआ, दक्षिण कोरिया को घुटने टेकने पड़े, और 1 साल के भीतर ही अक्टूबर 2017 में थाड की तैनाती पर रोक लगा दी गई.
आजकल नेपाल को चीन पर बहुत प्यार उमड़ रहा है, अच्छा होगा कि वह दक्षिण कोरिया की प्रेमकथा से कुछ सीखें.
लेकिन हमें नेपाल से कोई आशा नहीं है, आखिर दूसरों की गलतियों से सीखने में बहुत कम लोग रुचि रखते हैं.
अब जाकर दक्षिण कोरिया का नेतृत्व अपने आर्थिक संबंधों को फैलाने पर ध्यान दे रहा है.
इसलिए बिना किसी खतरे के साथ, भारत दक्षिण कोरिया के लिए सबसे बड़े अवसर के रूप में उभरा है.
वैसे भी भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक और भौगोलिक किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है.
अच्छी बात यह है, दक्षिण कोरिया भारत को न केवल दुनिया का सबसे बड़ा बाजार समझता है, बल्कि वह भारत को दुनिया के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर भी ध्यान दे रहा है.
दोस्तों, samsung के द्वारा नोएडा में स्थापित की गई मोबाइल फैक्टरी के बारे में हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है.
भारत के अवसरों के संबंध में दक्षिण कोरिया आश्वस्त हो सकता है, लेकिन हम उसके लिए चीन नहीं बनेंगे.
वैसे भी हम आगे आने वाली सदियों के लिए दोस्ती की स्थापना करने के लिए कोशिश कर रहे हैं, इसलिए इस समय चीन का उदाहरण देना बिल्कुल बेमानी होगा.
लेकिन दक्षिण कोरिया को यह याद दिलाने की जरूरत है, पिछले वित्त वर्ष में दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार करते हुए भारत को 9 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ था.
दोनों देशों के बीच टिकाऊ दोस्ती की स्थापना तभी तक संभव है, जब तक दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार बढ़ने के साथ, दोस्ती को अस्थिर करने वाले भारतीय व्यापारिक घाटे में बढ़ोतरी ना हो.
एक ओर जहां हम दक्षिण कोरिया के लिए चीन नहीं बन सकते हैं, तो दूसरी ओर, हम दक्षिण कोरिया को अपने लिए चीन भी नहीं बनने देंगे.
आपके विचार से, क्या भारत को दक्षिण कोरिया के लिए चीन बन जाना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
आप तो जानते होंगे, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जै इस समय भारत की यात्रा पर आए हुए हैं. इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य, भारत को दक्षिण कोरिया के लिए अगला चीन बनाना है.
सवाल यह उठता है, आखिर वह ऐसा क्यों चाहते हैं?
एक छोटा कारण यह है. की चीन ना केवल दक्षिण कोरिया के माल का सबसे बड़ा खरीदार है, बल्कि वह सबसे बड़ी मात्रा में माल दक्षिण कोरिया को बेचता भी है. सच्चे अर्थों में, चीन दक्षिण कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.
वर्ष 2016 के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का 25% निर्यात सिर्फ चीन को होता है, और दक्षिण कोरिया 21 प्रतिशत आयात सिर्फ चीन से करता है.
अब आप सोच रहे होंगे, इस समय वर्ष 2018 चल रहा है, लेकिन हम दक्षिण कोरिया के आयात निर्यात से सबंधित वर्ष 2016 के आंकड़ों की चर्चा कर रहे हैं.
कारण यह है, वर्ष 2016 के अंत में उत्तरी कोरिया से मिसाइल और परमाणु हमने के खतरे से निपटने के लिए, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने मिलकर दक्षिण कोरिया में Terminal High-Altitude Area Defense system (Thaad) तैनात करने का निर्णय किया.
बच्चा बच्चा जानता है, की थाड anti missile defense system है, इसका प्रयोग करके हमला नहीं किया जा सकता है.
जब तक चीन को, दक्षिण कोरिया पर हमला नहीं करना है, तब तक दक्षिण कोरिया में थाड की तैनाती से चीन को कोई भी परेशानी नहीं होना चाहिए थी.
कोई बात नहीं, चीन तो वहां से सोचना चालू करता है, जहां से logical यानी तार्किक बुद्धि काम करना बंद कर देती हैं. इसलिए थाड की तैनाती को, चीन ने अपने राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा मान लिया.
वास्तव में चीन उत्तरी कोरिया का बचाव करना चाहता था, और अमेरिका के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने की कोशिश कर रहा था.
अगर आप ध्यान से देखें, तो चीन ने हमेशा से दो राक्षसों को पाला है. अमेरिका के लिए उत्तरी कोरिया, और भारत के लिए पाकिस्तान.
ताकि भारत और अमेरिका पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद करते रहे, और चीन शांति के साथ तेज गति से अपना विकास कर पाए.
चलिए मुख्य सवाल की ओर लौटते हैं, रोचक बात यह है, दक्षिण कोरिया के लोट्टे group ने अपना एक गोल्फ कोर्स दक्षिण कोरिया की सरकार को दे दिया था, ताकि वहां पर थाड की तैनाती की जा सके.
यह बात चीन को इतना ज्यादा चुभ गई, कि उसे अचानक लोट्टे stores और फैक्टरी में fire safety regulations और अन्य स्थानीय कानूनों का उल्लंघन होता हुआ दिखने लगा. और चीन में 99 में से 75 लोट्टे supermarkets बंद कर दिए गए.
अचानक से मांग में कमी आने से, हुंडई मोटर्स को चीन में अपने कारखानों पर ताला लगाना पड़ गया.
वर्ष 2013 से दक्षिण कोरिया में घूमने के लिए सबसे अधिक यात्री चीन से आते थे. लेकिन थाड की तैनाती के कारण, चीन की सरकार ने ट्रैवल एजेंट से दक्षिण कोरिया के लिए पैकेज बेचना बंद करने को कहा. जिससे दक्षिण कोरिया को जाने वाले चीन के यात्रियों की संख्या में 60% की भारी कमी आ गई.
एक अनुमान के मुताबिक, चीन के द्वारा अनौपचारिक रूप से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण, थाड की तैनाती करने का निर्णय लेने मात्र से दक्षिण कोरिया को 6.8 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ.
इसका परिणाम यह हुआ, दक्षिण कोरिया को घुटने टेकने पड़े, और 1 साल के भीतर ही अक्टूबर 2017 में थाड की तैनाती पर रोक लगा दी गई.
आजकल नेपाल को चीन पर बहुत प्यार उमड़ रहा है, अच्छा होगा कि वह दक्षिण कोरिया की प्रेमकथा से कुछ सीखें.
लेकिन हमें नेपाल से कोई आशा नहीं है, आखिर दूसरों की गलतियों से सीखने में बहुत कम लोग रुचि रखते हैं.
अब जाकर दक्षिण कोरिया का नेतृत्व अपने आर्थिक संबंधों को फैलाने पर ध्यान दे रहा है.
इसलिए बिना किसी खतरे के साथ, भारत दक्षिण कोरिया के लिए सबसे बड़े अवसर के रूप में उभरा है.
वैसे भी भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक और भौगोलिक किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है.
अच्छी बात यह है, दक्षिण कोरिया भारत को न केवल दुनिया का सबसे बड़ा बाजार समझता है, बल्कि वह भारत को दुनिया के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर भी ध्यान दे रहा है.
दोस्तों, samsung के द्वारा नोएडा में स्थापित की गई मोबाइल फैक्टरी के बारे में हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है.
भारत के अवसरों के संबंध में दक्षिण कोरिया आश्वस्त हो सकता है, लेकिन हम उसके लिए चीन नहीं बनेंगे.
वैसे भी हम आगे आने वाली सदियों के लिए दोस्ती की स्थापना करने के लिए कोशिश कर रहे हैं, इसलिए इस समय चीन का उदाहरण देना बिल्कुल बेमानी होगा.
लेकिन दक्षिण कोरिया को यह याद दिलाने की जरूरत है, पिछले वित्त वर्ष में दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार करते हुए भारत को 9 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ था.
दोनों देशों के बीच टिकाऊ दोस्ती की स्थापना तभी तक संभव है, जब तक दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार बढ़ने के साथ, दोस्ती को अस्थिर करने वाले भारतीय व्यापारिक घाटे में बढ़ोतरी ना हो.
एक ओर जहां हम दक्षिण कोरिया के लिए चीन नहीं बन सकते हैं, तो दूसरी ओर, हम दक्षिण कोरिया को अपने लिए चीन भी नहीं बनने देंगे.
आपके विचार से, क्या भारत को दक्षिण कोरिया के लिए चीन बन जाना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss about today's topic.
You know, Right now South Korean President Moon Jae is on Indian visit with the single aim of making India, the next China for South Korea.
The question is, why does he want so?
One small reason is that China is not only the largest buyer of South Korean goods, but also the largest seller of goods to South Korea.
In true sense, China is largest trading partner of South Korea.
As per statistics of year 2016, 25% of South Korean exports go to China, and 21% of South Korean imports come from China.
Now, you might be wondering, we are in the year 2018, but we are talking about south Korean import export in year 2016.
The reason is, In late 2016, South Korea and United States of America jointly announced the deployment of the Terminal High-Altitude Area Defense system (Thaad) in response to the continuous nuclear and missile threats from North Korea.
Even a kid knows it very well, Thaad is anti missile defense system. It cannot be used for offensive purpose.
Unless China had desire to be offensive against South Korea, it should have no issue whatsoever in Thaad deployment in South Korea.
Anyways, china starts thinking from where logic stops working. Therefore China considered Thaad deployment against its own national interest.
Its nothing but providing the shield for North Korean regime, and a way to limit american influence in the region.
If you consider carefully, China has always fed two monsters, One North Korea for America, and another Pakistan for India.
So that America and India continue to waste time and money in managing North Korea and Pakistan respectively, and China can peacefully continue to grow rapidly.
Anyways returning to main question, Interestingly, South Korean Lotte group has given its golf course to South Korean government for Thaad battery deployment.
This was enough for Chinese municipal authorities to suddenly discover that Lotte stores and factories are in contravention of fire safety regulations and other local ordinances, and they closed 75 out of 99 Lotte supermarkets in China.
Due to Sudden very low demand, Hyundai motors had to stop operation in its Chinese factories.
Since 2013 China has been largest source of Tourist to South Korea, After Thaad deployment decision, Chinese government forced travel agents to suspend selling group packages to South Korea. The result was whopping 60% decline in Chinese tourist to South Korea.
By one of the estimates, The Thaad deployment decision costed 6.8 Billion Dollar to South Korean economy, thanks to Crushing Chinese unofficial sanctions.
The obvious eventuality was South Korea had to freeze Thaad deployment within one year, in October 2017.
Of late, Nepal has fallen in great love with China, perhaps this South Korean love story has lesson for them.
However, We have no hope from Nepal, after all there are very few, who tend to learn from mistakes of others.
Anyways, now South Korean leadership is trying hard to diversify its economic relationships.
That's where India offers greatest potential for South Korea with least possible risk.
Naturally India has no historical or geopolitical sensitive issue with South Korea.
The good thing is South Korea considers India both world's largest market, and a manufacturing hub for the world.
Friends, We need not tell you about Samsung Mobile manufacturing unit in Noida.
South Korea can rest assured, However we cannot become next China for it.
It would be meaningless to follow Chinese example, when we are building a friendship for centuries.
However, its very important to remind South Korea, that Trade figures of last financial year clearly show, we have trade deficit of 9 Billion Dollar with South Korea.
Sustainable friendship demands that size of bilateral trade must increase without unsustainable rise in Indian trade deficit.
On one hand, we cannot become China for South Korea, on the other hand, we cannot let South Korea become China for India.
As per your views, do you think India should become next china for south Korea?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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