चीन को अमेरिका के खिलाफ भारत की मदद क्यों चाहिए??
इस वीडियो में हम चर्चा करेंगे चीन को उभरते हुए बाजारों से सहायता की उम्मीद क्यों हैं.
Next BRICS Summit Special - China seek Indian help against America!!!
In this video, we will discuss why China needs help from emerging markets.
Reference -
https://thediplomat.com/2017/08/how-to-fix-india-china-trade/
https://www.scmp.com/news/china/economy/article/2155264/dont-mention-trade-war-what-china-doesnt-want-people-know-its
https://www.scmp.com/week-asia/geopolitics/article/2155161/trumps-trade-war-china-winner-will-be-whoever-can-stand-lose
https://www.bloomberg.com/news/articles/2018-07-11/trump-s-trade-war-sinks-china-s-yuan-most-since-2015-devaluation
http://www.xinhuanet.com/english/2018-07/13/c_137322567.htm
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
अमेरिका के द्वारा चालू की गई Global Trade War के दौरान, चीन के द्वारा अमेरिका को किए जाने वाले 200 बिलियन डॉलर के निर्यात को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. इसलिए बड़ी आशा के साथ, इस महीने के अंत में साउथ अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में होने वाली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग हिस्सा लेने जा रहे हैं.
तेज गति से विकास करती हुई अमेरिकी अर्थव्यवस्था, और धीमी हो रही चीन की अर्थव्यवस्था के कारण, यह Global Trade War चीन के हिसाब से और अधिक खराब समय पर चालू नहीं हो सकती थी. राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपेक्षा है, कि भारत जैसे उभरते बाज़ारों वाले देश इस वैश्विक व्यापारिक युद्ध में चीन का साथ देंगे.
इसी बीच खलबली के हालात चीन में दिखने लगे हैं. आधिकारिक रूप से चीन की मीडिया रिपोर्टिंग करते समय 'Global Trade War' इस शब्द का प्रयोग नहीं कर सकती हैं.
इसका मतलब यह है, चीन का स्टॉक मार्केट नीचे जाएगा, या फिर चीन की मुद्रा युआन में गिरावट होगी, तो उसके लिए Global Trade War को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.
चीन की सोशल मीडिया में, ग्लोबल ट्रेड War से जुड़े कमैंट्स को लगातार हटाया जाने लगा है.
आप ध्यान दीजिए, अमेरिका की मीडिया आज भी उतनी ही स्वतंत्र है, जितनी वह ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के पहले थी.
आसमान टूट कर गिरने वाला है, और राष्ट्रपति ट्रंप इसके लिए जिम्मेदार हैं, अमेरिकी मीडिया मुख्य रूप से इस प्रकार की थीम पर ध्यान बनाए हुए हैं.
तो दूसरी ओर, चीन की सरकार ने यह निश्चित करना चालू कर दिया है, ताकि वहां की जनता को ऐसा लगे, की Global Trade War जैसी कोई चीज है ही नहीं.
और अगर Global Trade War चल भी रही हो, तो उसका चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट से कोई संबंध नहीं है.
ट्रंप का प्रभाव तो इसी बात से प्रगट हो जाता है, अब कोई भी Made in China vision 2025 की बात नहीं कर रहा है.
आप शायद जानते हो, चीन के Vision का मतलब है, कि अमेरिका को विस्थापित करके चीन दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा. और इसके लिए चीन Artificial intelligence, Robotics और quantum computing जैसे क्षेत्रों में अपना दबदबा स्थापित करना चाहता है.
चीन के ऐसे vision से अमेरिका में खतरे की घंटी बजने लगी, और इसने ट्रंप के राष्ट्रपति बनने में भी सहयोग प्रदान किया.
अब चीन को समय से पहले अपनी योजना दुनिया को बताने से होने वाले नुकसान का पता लग गया है. और उसने अपनी इस महत्वकांक्षी योजना को ठंडे बस्ते में छुपा कर रख दिया है.
यदि आपने आजकल अनुभव किया हो, तो चीन के बेल्ट एवं रोड इनिशिएटिव के बारे में भी बातचीत कम होने लगी है.
इसलिए सवाल यह उठता है, यदि यह Trade War केवल कुछ बिलियन डॉलर के व्यापार से जुड़ी हुई है, तो चीन ने सबसे पहले कमजोरी के लक्षण दिखाना क्यों चालू कर दिया?
क्योंकि इस Trade War का संबंध केवल अर्थव्यवस्था से नहीं हैं, बल्कि यह राजनीति को भी प्रभावित करने वाली है.
आप जानते हैं, इस वर्ष मार्च महीने में, राष्ट्रपति शी को जीवनभर चीन पर शासन करने का अधिकार प्राप्त हो गया. एक मजबूत नेता के रूप में उनकी छवि का चीन के लोगों के सामने निर्माण किया गया है.
अब यह Trade War राष्ट्रपति शी की मजबूत छवि के लिए खतरा बन कर उभरी है. अगर यह Trade War लंबे समय तक के लिए चलती है, तो चीन के विशेषज्ञों ने इस बात पर विचार करना चालू कर दिया है, की इसका राष्ट्रपति शी के शासन के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चीन के विशेषज्ञों को ऐसा खतरा लगने लगा है, कि कम्युनिस्ट चीन में शी अपना राष्ट्रपति पद खो सकते हैं. यह बात सिद्ध करती है, कि चीन में हलचल होना चालू हो गई है.
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और हमारे कई दशकों का ऐसा मानना है, कि राष्ट्रपति ट्रंप को वर्ष 2020 में दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन राष्ट्रपति शी को जीवन भर किसी भी चुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. और इसी के कारण इस लंबे चलने वाले Global Trade War में चीन की जीत होना निश्चित है. लेकिन इसके पीछे अनुमान है, कि राष्ट्रपति ट्रंप को दूसरा कार्यकाल नहीं मिलेगा.
लेकिन अब आप को इस बात का आभास हो गया होगा, राष्ट्रपति शी जीवन भर के लिए चीन पर राज करते रहेंगे, इसकी गारंटी भी नहीं है.
अगर राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा चुनाव जीत जाते है, तो इस बात की संभावना होगी, की राष्ट्रपति ट्रंप के अपने शासनकाल के 8 वर्ष पूरा करने के पहले ही, राष्ट्रपति शी अपनी गद्दी खो देंगे.
केवल इसी खतरे के कारण, चीन में बड़े ही साधारण शब्द Global Trade War के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई. आप तो जानते हैं, बिना किसी को पता लगे, पिछले 20 वर्षों से चीन ने पूरी दुनिया को Global Trade War से रौंदा है.
जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप का सवाल है, वह चीन पर सबसे अधिक दबाव बनाने की कोशिश करेंगे. ताकि उन्हें अमेरिका के पक्ष में डील करने में कामयाबी हासिल हो. यद्यपि कोई नहीं जानता है कि यह डील कैसी होगी , लेकिन इसी डील के सहारे राष्ट्रपति ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिल सकता है.
इसी बीच, चीन ने भारत और अन्य छोटे देशों के लिए अपना बाजार खोलना चालू कर दिया है.
इसके लिए चीन को धन्यवाद देने के बजाए, हमारा धन्यवाद राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाना चाहिए.
अब आप इस बात को सोचिए, चीन अपने आर्थिक तंत्र को बदलने वाला नहीं है. वह तो हमेशा की तरह निर्यात पर ही निर्भर रहने वाला है.
भारत हमेशा से चीन को कच्चे माल की सप्लाई करता रहा है, अब चीन वह सब कुछ करेगा, जिससे भारत भविष्य में भी चीन को कच्चा माल जैसे कपास सोयाबीन और जेनेरिक मेडिसिन निर्यात करता रहे.
लेकिन आप तो जानते हैं, कच्चे माल का निर्यात करने से ज्यादा लाभ नहीं होता है.
दूसरी और चीन बना बनाया माल दूसरे बाजारों में बेचता है, जिसको बेचने में भारी लाभ होता है.
आप जानते हैं, चीन में जितने माल की खपत होती है, वह उससे कई गुना अधिक माल पैदा करता है. चीन के पास जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता मौजूद है.
कई विद्वानों का तर्क है, कि भारत को खुले हुए चीन के बाजार का लाभ उठाना चाहिए, और बड़ी मात्रा में कच्चा माल निर्यात करना चाहिए, क्योंकि भारत को मैन्युफैक्चरिंग बेस स्थापित करने में समय लगेगा.
ऐसे विद्वान लोग बिल्कुल भूल जाते हैं, कि चीन में घरेलू मांग का विकास करने में भी अधिक समय लगेगा. ताकि चीन अपने द्वारा बनाए गए माल की घरेलू स्तर पर खपत कर सके.
दोस्तों, हमें अपनी कमजोरी का पता हो, यह एक अच्छी बात है. लेकिन अगर हमें अपने दुश्मन की कमजोरी का पता ना हो, तो यह एक बुरी बात होगी.
देखा जाए तो चीन में घरेलू स्तर पर मांग का विकास करने की तुलना में, भारत में मैन्युफैक्चरिंग base की स्थापना करना ज्यादा आसान है.
अमेरिका की मीडिया भारत की मीडिया को ज्ञान देती है. यही कारण है, सभी विद्वान यथास्थिति की रक्षा करने में लगे हुए हैं.
लंबे समय से बातचीत करते हुए, चीन ने यह निश्चित किया है, कि उस को लाभ पहुंचाने वाली यथास्थिति बनी रहे.
हर व्यापारी को परिवर्तन पसंद नहीं होता है. 30 वर्षों से चीजें जैसी चल रही है, सभी Global Companies का हित उनको ऐसा ही चलाने में है. आप जानते हैं, इन सभी कंपनियों ने अपनी factories चीन में लगा रखी हैं.
Global Trade War के कारण इन कंपनीज को होने वाला लाभ कम हो सकता है, जिसके कारण इनके अधिकारियों को कम सैलरी और कम बोनस मिलेगा. अब आप बताइए, यह अधिकारी, और उनको सलाह देने वाले विद्वान यथास्थिति को क्यों बदलना चाहेंगे, जबकि ऐसा होने पर उनको व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक हानि होने वाली है.
हमें यह साधारण बात समझनी होगी, अगर हर साल चीन के साथ व्यापार में हमें 52 बिलियन डॉलर का घाटा होता है, तो यही पैसा चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में निवेश किया जाएगा, और इसी पैसे से भारत के खिलाफ चीन मजबूत String of pearls की स्थापना करेगा.
और इस धन का उपयोग करके, चीन भारत की कंपनियों को खरीदेगा और उनको अपने नियंत्रण में ले लेगा.
अगर यह स्थिति बनी रहेगी, तो देर सवेर चीन दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा.
हमें यहां पर लोकतांत्रिक अमेरिका और कम्युनिस्ट चीन में से किसी एक का चुनाव करना है.
दोस्तों, हमारे पास यहां पर कोई अच्छा या बुरा विकल्प नहीं है. हमें तो यहां पर सिर्फ एक दूसरे की तुलना में कम खराब विकल्प को चुनना है.
बड़े ही साफ तौर पर, हमारा यह कहना नहीं है, कि हमें चीन के बाजार में कच्चा माल बेच कर लाभ नहीं कमाना चाहिए. हमारा कहना सिर्फ यह है, कि भारत को अमेरिका के साथ मिलकर इस प्रकार काम करना चाहिए, ताकि Free और Fair वैश्विक व्यापार व्यवस्था की स्थापना की जा सके.
जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, हमें चीन के द्वारा दी जा रही मूंगफलियों और अमेरिका के द्वारा मिलने वाले jackpot में से किसी एक का चुनाव करना है. अधिक जानकारी के लिए, आप हमारे इस वीडियो को देख सकते है.
आपके विचार से, भारत को मूंगफली और jackpot में से किसका चुनाव करना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript - अमेरिका के द्वारा चालू की गई Global Trade War के दौरान, चीन के द्वारा अमेरिका को किए जाने वाले 200 बिलियन डॉलर के निर्यात को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. इसलिए बड़ी आशा के साथ, इस महीने के अंत में साउथ अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में होने वाली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग हिस्सा लेने जा रहे हैं.
तेज गति से विकास करती हुई अमेरिकी अर्थव्यवस्था, और धीमी हो रही चीन की अर्थव्यवस्था के कारण, यह Global Trade War चीन के हिसाब से और अधिक खराब समय पर चालू नहीं हो सकती थी. राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपेक्षा है, कि भारत जैसे उभरते बाज़ारों वाले देश इस वैश्विक व्यापारिक युद्ध में चीन का साथ देंगे.
इसी बीच खलबली के हालात चीन में दिखने लगे हैं. आधिकारिक रूप से चीन की मीडिया रिपोर्टिंग करते समय 'Global Trade War' इस शब्द का प्रयोग नहीं कर सकती हैं.
इसका मतलब यह है, चीन का स्टॉक मार्केट नीचे जाएगा, या फिर चीन की मुद्रा युआन में गिरावट होगी, तो उसके लिए Global Trade War को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.
चीन की सोशल मीडिया में, ग्लोबल ट्रेड War से जुड़े कमैंट्स को लगातार हटाया जाने लगा है.
आप ध्यान दीजिए, अमेरिका की मीडिया आज भी उतनी ही स्वतंत्र है, जितनी वह ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के पहले थी.
आसमान टूट कर गिरने वाला है, और राष्ट्रपति ट्रंप इसके लिए जिम्मेदार हैं, अमेरिकी मीडिया मुख्य रूप से इस प्रकार की थीम पर ध्यान बनाए हुए हैं.
तो दूसरी ओर, चीन की सरकार ने यह निश्चित करना चालू कर दिया है, ताकि वहां की जनता को ऐसा लगे, की Global Trade War जैसी कोई चीज है ही नहीं.
और अगर Global Trade War चल भी रही हो, तो उसका चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट से कोई संबंध नहीं है.
ट्रंप का प्रभाव तो इसी बात से प्रगट हो जाता है, अब कोई भी Made in China vision 2025 की बात नहीं कर रहा है.
आप शायद जानते हो, चीन के Vision का मतलब है, कि अमेरिका को विस्थापित करके चीन दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा. और इसके लिए चीन Artificial intelligence, Robotics और quantum computing जैसे क्षेत्रों में अपना दबदबा स्थापित करना चाहता है.
चीन के ऐसे vision से अमेरिका में खतरे की घंटी बजने लगी, और इसने ट्रंप के राष्ट्रपति बनने में भी सहयोग प्रदान किया.
अब चीन को समय से पहले अपनी योजना दुनिया को बताने से होने वाले नुकसान का पता लग गया है. और उसने अपनी इस महत्वकांक्षी योजना को ठंडे बस्ते में छुपा कर रख दिया है.
यदि आपने आजकल अनुभव किया हो, तो चीन के बेल्ट एवं रोड इनिशिएटिव के बारे में भी बातचीत कम होने लगी है.
इसलिए सवाल यह उठता है, यदि यह Trade War केवल कुछ बिलियन डॉलर के व्यापार से जुड़ी हुई है, तो चीन ने सबसे पहले कमजोरी के लक्षण दिखाना क्यों चालू कर दिया?
क्योंकि इस Trade War का संबंध केवल अर्थव्यवस्था से नहीं हैं, बल्कि यह राजनीति को भी प्रभावित करने वाली है.
आप जानते हैं, इस वर्ष मार्च महीने में, राष्ट्रपति शी को जीवनभर चीन पर शासन करने का अधिकार प्राप्त हो गया. एक मजबूत नेता के रूप में उनकी छवि का चीन के लोगों के सामने निर्माण किया गया है.
अब यह Trade War राष्ट्रपति शी की मजबूत छवि के लिए खतरा बन कर उभरी है. अगर यह Trade War लंबे समय तक के लिए चलती है, तो चीन के विशेषज्ञों ने इस बात पर विचार करना चालू कर दिया है, की इसका राष्ट्रपति शी के शासन के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चीन के विशेषज्ञों को ऐसा खतरा लगने लगा है, कि कम्युनिस्ट चीन में शी अपना राष्ट्रपति पद खो सकते हैं. यह बात सिद्ध करती है, कि चीन में हलचल होना चालू हो गई है.
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और हमारे कई दशकों का ऐसा मानना है, कि राष्ट्रपति ट्रंप को वर्ष 2020 में दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन राष्ट्रपति शी को जीवन भर किसी भी चुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. और इसी के कारण इस लंबे चलने वाले Global Trade War में चीन की जीत होना निश्चित है. लेकिन इसके पीछे अनुमान है, कि राष्ट्रपति ट्रंप को दूसरा कार्यकाल नहीं मिलेगा.
लेकिन अब आप को इस बात का आभास हो गया होगा, राष्ट्रपति शी जीवन भर के लिए चीन पर राज करते रहेंगे, इसकी गारंटी भी नहीं है.
अगर राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा चुनाव जीत जाते है, तो इस बात की संभावना होगी, की राष्ट्रपति ट्रंप के अपने शासनकाल के 8 वर्ष पूरा करने के पहले ही, राष्ट्रपति शी अपनी गद्दी खो देंगे.
केवल इसी खतरे के कारण, चीन में बड़े ही साधारण शब्द Global Trade War के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई. आप तो जानते हैं, बिना किसी को पता लगे, पिछले 20 वर्षों से चीन ने पूरी दुनिया को Global Trade War से रौंदा है.
जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप का सवाल है, वह चीन पर सबसे अधिक दबाव बनाने की कोशिश करेंगे. ताकि उन्हें अमेरिका के पक्ष में डील करने में कामयाबी हासिल हो. यद्यपि कोई नहीं जानता है कि यह डील कैसी होगी , लेकिन इसी डील के सहारे राष्ट्रपति ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिल सकता है.
इसी बीच, चीन ने भारत और अन्य छोटे देशों के लिए अपना बाजार खोलना चालू कर दिया है.
इसके लिए चीन को धन्यवाद देने के बजाए, हमारा धन्यवाद राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाना चाहिए.
अब आप इस बात को सोचिए, चीन अपने आर्थिक तंत्र को बदलने वाला नहीं है. वह तो हमेशा की तरह निर्यात पर ही निर्भर रहने वाला है.
भारत हमेशा से चीन को कच्चे माल की सप्लाई करता रहा है, अब चीन वह सब कुछ करेगा, जिससे भारत भविष्य में भी चीन को कच्चा माल जैसे कपास सोयाबीन और जेनेरिक मेडिसिन निर्यात करता रहे.
लेकिन आप तो जानते हैं, कच्चे माल का निर्यात करने से ज्यादा लाभ नहीं होता है.
दूसरी और चीन बना बनाया माल दूसरे बाजारों में बेचता है, जिसको बेचने में भारी लाभ होता है.
आप जानते हैं, चीन में जितने माल की खपत होती है, वह उससे कई गुना अधिक माल पैदा करता है. चीन के पास जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता मौजूद है.
कई विद्वानों का तर्क है, कि भारत को खुले हुए चीन के बाजार का लाभ उठाना चाहिए, और बड़ी मात्रा में कच्चा माल निर्यात करना चाहिए, क्योंकि भारत को मैन्युफैक्चरिंग बेस स्थापित करने में समय लगेगा.
ऐसे विद्वान लोग बिल्कुल भूल जाते हैं, कि चीन में घरेलू मांग का विकास करने में भी अधिक समय लगेगा. ताकि चीन अपने द्वारा बनाए गए माल की घरेलू स्तर पर खपत कर सके.
दोस्तों, हमें अपनी कमजोरी का पता हो, यह एक अच्छी बात है. लेकिन अगर हमें अपने दुश्मन की कमजोरी का पता ना हो, तो यह एक बुरी बात होगी.
देखा जाए तो चीन में घरेलू स्तर पर मांग का विकास करने की तुलना में, भारत में मैन्युफैक्चरिंग base की स्थापना करना ज्यादा आसान है.
अमेरिका की मीडिया भारत की मीडिया को ज्ञान देती है. यही कारण है, सभी विद्वान यथास्थिति की रक्षा करने में लगे हुए हैं.
लंबे समय से बातचीत करते हुए, चीन ने यह निश्चित किया है, कि उस को लाभ पहुंचाने वाली यथास्थिति बनी रहे.
हर व्यापारी को परिवर्तन पसंद नहीं होता है. 30 वर्षों से चीजें जैसी चल रही है, सभी Global Companies का हित उनको ऐसा ही चलाने में है. आप जानते हैं, इन सभी कंपनियों ने अपनी factories चीन में लगा रखी हैं.
Global Trade War के कारण इन कंपनीज को होने वाला लाभ कम हो सकता है, जिसके कारण इनके अधिकारियों को कम सैलरी और कम बोनस मिलेगा. अब आप बताइए, यह अधिकारी, और उनको सलाह देने वाले विद्वान यथास्थिति को क्यों बदलना चाहेंगे, जबकि ऐसा होने पर उनको व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक हानि होने वाली है.
हमें यह साधारण बात समझनी होगी, अगर हर साल चीन के साथ व्यापार में हमें 52 बिलियन डॉलर का घाटा होता है, तो यही पैसा चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में निवेश किया जाएगा, और इसी पैसे से भारत के खिलाफ चीन मजबूत String of pearls की स्थापना करेगा.
और इस धन का उपयोग करके, चीन भारत की कंपनियों को खरीदेगा और उनको अपने नियंत्रण में ले लेगा.
अगर यह स्थिति बनी रहेगी, तो देर सवेर चीन दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा.
हमें यहां पर लोकतांत्रिक अमेरिका और कम्युनिस्ट चीन में से किसी एक का चुनाव करना है.
दोस्तों, हमारे पास यहां पर कोई अच्छा या बुरा विकल्प नहीं है. हमें तो यहां पर सिर्फ एक दूसरे की तुलना में कम खराब विकल्प को चुनना है.
बड़े ही साफ तौर पर, हमारा यह कहना नहीं है, कि हमें चीन के बाजार में कच्चा माल बेच कर लाभ नहीं कमाना चाहिए. हमारा कहना सिर्फ यह है, कि भारत को अमेरिका के साथ मिलकर इस प्रकार काम करना चाहिए, ताकि Free और Fair वैश्विक व्यापार व्यवस्था की स्थापना की जा सके.
जैसा की हमने अपने इस वीडियो में चर्चा की है, हमें चीन के द्वारा दी जा रही मूंगफलियों और अमेरिका के द्वारा मिलने वाले jackpot में से किसी एक का चुनाव करना है. अधिक जानकारी के लिए, आप हमारे इस वीडियो को देख सकते है.
आपके विचार से, भारत को मूंगफली और jackpot में से किसका चुनाव करना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss about today's topic.
With looming threat of American trade tariffs on Chinese exports worth 200 Billion dollars, Later this month, Hopeful Chinese president Xi Jinping is going to participate in next BRICS summit in Johannesburg South Africa.
With growing American economy and slowing Chinese economy, The global trade war could not have arrived at worse time.
President Xi has hope that emerging markets will stand with him in this fight against America.
Anyways first signs of Panic have appeared from the simple fact, that Chinese media has been asked not to use Phrase 'Trade War' in their reporting.
It means, if Stock market is going down, or Chinese currency is fast loosing its value, Chinese media cannot say that its due to trade war.
In Chinese social media, comments about Trade War have been regularly removed.
Please note, even now, American media is as free as it was before President trump was elected.
Sky is about to fall and President Trump is responsible for it, are still two main themes in american media.
On the other hand, Chinese government has started ensuring that public is made to believe, that Trade war sort of thing is not going on.
And even if its going on, there is no direct effect of Trade war on deteriorating Chinese economy.
Trump effect is so clear, that No one is talking about Made in China vision 2025.
If you know, this Chinese vision entails replacing America, and becoming as number one economy in the world by dominating in the areas like Artificial intelligence, Robotics and quantum computing etc.
This Chinese vision has sent alarm bells ringing in America and in a way, it has helped Trump in winning the election.
Now China realized the cost of premature releasing the plan, and pushed that ambitious vision under the carpet.
In fact, if you have observed, now a days you hear less about Chinese Belt and Road initiative.
Now, the question is, If this trade war is all about few billions of dollars, why China first started showing signs of weakness?
Because, Its not economic, but political aspect, that matters most here.
You know, In this March, President Xi has got authority to become Chinese ruler for life. He has this very strong and larger than life image created for himself.
Now, Trade war has emerged as a threat to his political authority. If trade war goes on for longer time, Chinese analysts have started pondering about future of Presidency for Xi Jinping.
The mere thought that Chinese experts has started thinking that President Xi can lose his presidency in communist China, clearly reflect early signs of Panic.
Many of our viewers and international media, hold the opinion that President Trump will have to face election in the year 2020, but President Xi will never have to face any election. This fact alone can ensure that China wins in this long trade war. But the assumption is, that president Trump will not get second term.
However, now you can realize that Life long Presidency of Xi Jinping is no longer a guarantee.
If President Trump wins second term, It may also happen, that before president Trump completes his 8 years in office, President Xi will lose his chair.
Its this possibility, which has forced Chinese authorities to censor innocent phrase 'Trade War'. You know, for last 20 years or so, its China which has happily waged trade war against Whole world without anyone noticing it.
So far as president Trump is concerned, he will apply maximum pressure on China to get the best deal for America. Though No one knows, what the deal would be, yet this deal alone can make President trump win second term.
Meanwhile, China has been found opening its market for India and other smaller nations.
Rather than Thanking china for this, our thank should go to President Trump.
Now, consider this, China is not changing its economic model, it will remain export driven economy.
India has been source of raw material, and China will do everything possible to let India export more raw material like Cotton, Soybean and generic medicines.
But you know, for India, there is very less margin in exporting raw material to China.
On the other Hand, China exports value added finished goods, thus earning real money.
You know, China produces lot more than it can consume. it has industrial overcapacity.
Many experts argue, we should take advantage of Chinese relaxed market and keep exporting more raw material to China. Because India will take time to build manufacturing base.
These experts simply forget, that China will also take time to build domestic demand to consume massive amount of goods it produces.
Friends, Its good to know your weakness, but its bad to ignore weakness of your competitor.
In fact, building manufacturing base is easier for India, than growing domestic demand for China.
American mainstream media feeds information to Indian mainstream media. The result is, everyone is trying hard to protect status quo.
By having prolonged discussion, China has been very successful in protecting status quo, because it simply helps them.
A Businessman hates change. Here, many global companies have interest in letting things go on, as it has been for last thirty years. You know, They all have set up manufacturing facilities there in China.
After all, Global Trade war may erode their revenue and profits, and these high paying CEOs will get less salary and bonus. You tell, why will CEO or Experts, who are supposed to give them advice, will allow status quo to change at such a heavy personal cost.
We got to understand simple thing, When we lose 52 Billion dollars a year in trade deficit to China, This same money is being invested in China Pakistan Economic Corridor and Chinese String of pearls.
The same money, China is investing in Indian companies and getting their control.
If status quo is preserved now, China will end up becoming number one super power of the world.
We got to choose here, Do we prefer Democratic America, or Communist China as superpower of the world.
Friends, here we don't have good or bad option to choose from. We have to select lesser evil here.
Lets be clear, we are not saying, we should not take advantage if china is opening its market for Indian raw material. All we are saying is, India should collaborate with American administration, not with Chinese to ensure that truly free and fair trade system is established in the world.
As we have discussed in our this video, India has to select in between Peanuts offered By China, or Jackpot offered by America. please watch this video as well.
As per your views, What India should go for Peanut, or Jackpot?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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