चीन से निपटने के लिए भारत की नयी रणनीति क्या है??
इस वीडियो में हम चीन के खिलाफ भारत की नयी रणनीति की चर्चा करेंगे
What is NEW Indian strategy to handle China??
In this video, we will discuss about New Indian strategy against China.
Reference -
https://www.hindustantimes.com/india-news/india-will-adopt-a-three-pronged-strategy-to-check-china-influence/story-o3OkceE6h2URXJFL9rxiEK.html
https://en.wikipedia.org/wiki/Pax_Sinica
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. अब आज के विषय के बारे में बात करते हैं.
चीन के साथ अच्छे संबंधों की स्थापना की कोशिश करते समय, भारत यह बात नहीं भूला है, की चीन पूरी दुनिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है.
दुनिया के सभी देशों का विकास करने की बात चीन कहता है, लेकिन इसके पीछे चीन की इच्छा फिर से पैक्स सिनिका की स्थापना करना है.
पैक्स सिनिका का मतलब फिर से चीन का स्वर्णिम युग वापस लाना है. इस युग में आर्थिक राजनीतिक सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में चीन की सभ्यता का वर्चस्व था. हम वर्ष 200 के पूर्व का समय, और वर्ष 618 और 907 के बीच के समय की चर्चा कर रहे हैं. अब चीन अपने स्वर्णिम भूतकाल का निर्माण भविष्य में करना चाहता है.
इसलिए हम चाहे चीन का कितना भी तुष्टीकरण करें, चीन के साथ हमारा तनाव बना रहेगा, जब तक हम चीन का प्रभुत्व पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर लेते हैं. भारत के तेज गति से विकास के लिए, चीन चाहता है, कि भारत चीन का अनुसरण करे.
लेकिन श्रीलंका पाकिस्तान और मालदीव तीन ऐसे देश हैं, जो चीन का अनुसरण करने पर होने वाले दुष्परिणामों को साफ तौर पर दिखलाते हैं.
अंग्रेजी के अखबार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, भारत ने चीन से निपटने के लिए एक नई रणनीति तैयार की है, ताकि इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते हुए प्रभाव को रोका जा सके. इस रणनीति के तीन पहलू हैं.
हमें इस क्षेत्र में चल रही चीन की गतिविधियों को ध्यान से देखना होगा.
चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय, हमें अपने प्रोजेक्ट पर ध्यान देना चाहिए, और अपने वादों को समय पर पूरा करना चाहिए.
हमें अपने पड़ोसी देशों को यह बताना चाहिए, की चीन के साथ मेलजोल बढ़ाने का क्या दुष्परिणाम होता है.
हमें यह बात पसंद आती है, की संसाधनों के मामले में हमें चीन के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए. क्योंकि यह तो एक ऐसा खेल है, जिसमें हमारी हार होना निश्चित है. इसके लिए वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था को धन्यवाद देने की जरूरत है, जिसके कारण चीन ने बड़े पैमाने पर संसाधन इकट्ठे कर लिए हैं.
वैसे भी जब चीन अपने संसाधन पाकिस्तान और श्रीलंका में बर्बाद करने के लिए तैयार है, तो हमें इस बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए.
चीन ने श्रीलंका में एक ऐसा बंदरगाह बनाया, जिस पर कोई जहाज रुकना नहीं चाहता है. और एक ऐसा हवाई अड्डा बनाया, जहां पर कोई हवाई जहाज उतरना नहीं चाहता है.
जल्दी ही इस बात की संभावना है, हंबनटोटा बंदरगाह की जगह, ग्वादर बंदरगाह ले लेगा. और उसे दुनिया के सबसे बड़े स्विमिंग पूल के रूप में जाना जाएगा.
अगर आज दुनिया over capacity की समस्या से परेशान है, तो इसके लिए चीन मुख्य रूप से जिम्मेदार है. हाल ही में चालू हुए Global Trade War को धन्यवाद देने की जरूरत है, अब चीन के द्वारा बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के White elephant बनने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई है.
जब विद्वान लोग Global Trade War के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को दोषी ठहराते हैं, तो वह सुविधाजनक तरीके से यह बात भूल जाते हैं, की चीन के व्यवहार में परिवर्तन लाने के अन्य सभी तरीके बुरी तरह से असफल हुए हैं.
पिछले दो दशकों में अमेरिका ने चीन से लगातार बात की है, लेकिन इस बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है.
अमेरिका को भूल जाइए, भारत ने भी अपने बाजार में पहुंच देने के लिए चीन से लगातार प्रार्थना की है. लेकिन चीन ने हमेशा ऐसा करने से मना किया है.
1 तरीके से, हमेशा बातचीत करते रहना चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिससे यथा स्थिति बनी रहती है, जो कि चीन के लिए सबसे अधिक लाभकारी है.
भारत चाहे किसी भी रणनीति पर काम करता रहे, कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि यह रणनीति मूल रूप से रक्षात्मक है.
जब तक वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में बदलाव नहीं होता है, देर-सवेर पैक्स सिनिका की स्थापना होना निश्चित है.
इसलिए अमेरिका के साथ भारत का Trade war हमें अच्छा आईडिया प्रतीत नहीं होता है. क्योंकि मूल रूप से अमेरिका की लड़ाई चीन से है.
आप शायद जानते होंगे, जब अमेरिका ने दुनियाभर पर Trade Tariffs लगा दिए हैं, तो जापान को छोड़कर अन्य सभी देशों ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्यवाही की है.
इसलिए ऐसा लगता है, Global Trade war में अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्यवाही करके भारत ने गलती की है. लेकिन अच्छी बात यह है, भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चालू है, और जल्दी ही दोनों देश सहमति पर पहुंचेंगे.
हमें यह बात समझ लेनी चाहिए, यह ट्रेड war भारत के खिलाफ नहीं है. हमें अमेरिका के साथ व्यापार में लाभ होता है, इसका कारण यह है कि भारत अमेरिका को IT सर्विसेस प्रोवाइड करता है.
इन सर्विसेस इसका लाभ उठा कर, अमेरिकी व्यापारी और कंपनियां कुशलता पूर्वक अपना काम करती हैं, और दुनिया भर से Billions of Dollars का व्यापार कर पाती है. इसलिए भारत और अमेरिका के बीच एक दूसरे को लाभ पहुंचाने वाला संबंध है.
राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहते रहे, वह यह वास्तविकता समझते हैं.
हाल ही में चालू हुई Trade war में सबसे बड़ी गलती यह होगी, की हम एक ऐसा युद्ध लड़ रहे हैं, जिसमें हम पार्टी ही नहीं हैं. वास्तव में हमें अमेरिका और चीन के साथ मिलकर ऐसे काम करना चाहिए, कि भारत के हितों को आगे बढ़ाया जा सके.
और अगर हमें किसी का पक्ष लेना पड़े, तो हमें चीन के पक्ष की बजाय अमेरिका का पक्ष लेना चाहिए.
आप जानते हैं, चीन के पास बड़े पैमाने पर Over capacity है, अगर अमेरिकी बाजार तक उसकी पहुंच कम होती है, तो वह तुरंत अपना माल सस्ती कीमत पर भारत के बाजार में पटकना चालू कर देगा. जिससे चीन के साथ व्यापार में भारत को होने वाला घाटा और बढ़ता चला जाएगा.
दूसरी ओर, यदि चीन धीरे से अपना बाजार भारत के लिए खोलता भी है, तो चीन के बाजार में माल बेचने के लिए भारत को कैपेसिटी का निर्माण करने में और अधिक समय लगेगा. वैसे भी चीन के पास over capacity है, उसे दुनिया से माल आयात करने की जरूरत वैसे भी कहां है.
इसलिए वर्तमान Global Trade War के दौरान, भारत को अपनी रणनीति में परिवर्तन करना होगा.
आपके विचार से,इस Global Trade War में क्या भारत को चीन का पक्ष लेना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
चीन के साथ अच्छे संबंधों की स्थापना की कोशिश करते समय, भारत यह बात नहीं भूला है, की चीन पूरी दुनिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है.
दुनिया के सभी देशों का विकास करने की बात चीन कहता है, लेकिन इसके पीछे चीन की इच्छा फिर से पैक्स सिनिका की स्थापना करना है.
पैक्स सिनिका का मतलब फिर से चीन का स्वर्णिम युग वापस लाना है. इस युग में आर्थिक राजनीतिक सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में चीन की सभ्यता का वर्चस्व था. हम वर्ष 200 के पूर्व का समय, और वर्ष 618 और 907 के बीच के समय की चर्चा कर रहे हैं. अब चीन अपने स्वर्णिम भूतकाल का निर्माण भविष्य में करना चाहता है.
इसलिए हम चाहे चीन का कितना भी तुष्टीकरण करें, चीन के साथ हमारा तनाव बना रहेगा, जब तक हम चीन का प्रभुत्व पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर लेते हैं. भारत के तेज गति से विकास के लिए, चीन चाहता है, कि भारत चीन का अनुसरण करे.
लेकिन श्रीलंका पाकिस्तान और मालदीव तीन ऐसे देश हैं, जो चीन का अनुसरण करने पर होने वाले दुष्परिणामों को साफ तौर पर दिखलाते हैं.
अंग्रेजी के अखबार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, भारत ने चीन से निपटने के लिए एक नई रणनीति तैयार की है, ताकि इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते हुए प्रभाव को रोका जा सके. इस रणनीति के तीन पहलू हैं.
हमें इस क्षेत्र में चल रही चीन की गतिविधियों को ध्यान से देखना होगा.
चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय, हमें अपने प्रोजेक्ट पर ध्यान देना चाहिए, और अपने वादों को समय पर पूरा करना चाहिए.
हमें अपने पड़ोसी देशों को यह बताना चाहिए, की चीन के साथ मेलजोल बढ़ाने का क्या दुष्परिणाम होता है.
हमें यह बात पसंद आती है, की संसाधनों के मामले में हमें चीन के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए. क्योंकि यह तो एक ऐसा खेल है, जिसमें हमारी हार होना निश्चित है. इसके लिए वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था को धन्यवाद देने की जरूरत है, जिसके कारण चीन ने बड़े पैमाने पर संसाधन इकट्ठे कर लिए हैं.
वैसे भी जब चीन अपने संसाधन पाकिस्तान और श्रीलंका में बर्बाद करने के लिए तैयार है, तो हमें इस बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए.
चीन ने श्रीलंका में एक ऐसा बंदरगाह बनाया, जिस पर कोई जहाज रुकना नहीं चाहता है. और एक ऐसा हवाई अड्डा बनाया, जहां पर कोई हवाई जहाज उतरना नहीं चाहता है.
जल्दी ही इस बात की संभावना है, हंबनटोटा बंदरगाह की जगह, ग्वादर बंदरगाह ले लेगा. और उसे दुनिया के सबसे बड़े स्विमिंग पूल के रूप में जाना जाएगा.
अगर आज दुनिया over capacity की समस्या से परेशान है, तो इसके लिए चीन मुख्य रूप से जिम्मेदार है. हाल ही में चालू हुए Global Trade War को धन्यवाद देने की जरूरत है, अब चीन के द्वारा बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के White elephant बनने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई है.
जब विद्वान लोग Global Trade War के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को दोषी ठहराते हैं, तो वह सुविधाजनक तरीके से यह बात भूल जाते हैं, की चीन के व्यवहार में परिवर्तन लाने के अन्य सभी तरीके बुरी तरह से असफल हुए हैं.
पिछले दो दशकों में अमेरिका ने चीन से लगातार बात की है, लेकिन इस बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है.
अमेरिका को भूल जाइए, भारत ने भी अपने बाजार में पहुंच देने के लिए चीन से लगातार प्रार्थना की है. लेकिन चीन ने हमेशा ऐसा करने से मना किया है.
1 तरीके से, हमेशा बातचीत करते रहना चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिससे यथा स्थिति बनी रहती है, जो कि चीन के लिए सबसे अधिक लाभकारी है.
भारत चाहे किसी भी रणनीति पर काम करता रहे, कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि यह रणनीति मूल रूप से रक्षात्मक है.
जब तक वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में बदलाव नहीं होता है, देर-सवेर पैक्स सिनिका की स्थापना होना निश्चित है.
इसलिए अमेरिका के साथ भारत का Trade war हमें अच्छा आईडिया प्रतीत नहीं होता है. क्योंकि मूल रूप से अमेरिका की लड़ाई चीन से है.
आप शायद जानते होंगे, जब अमेरिका ने दुनियाभर पर Trade Tariffs लगा दिए हैं, तो जापान को छोड़कर अन्य सभी देशों ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्यवाही की है.
इसलिए ऐसा लगता है, Global Trade war में अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्यवाही करके भारत ने गलती की है. लेकिन अच्छी बात यह है, भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चालू है, और जल्दी ही दोनों देश सहमति पर पहुंचेंगे.
हमें यह बात समझ लेनी चाहिए, यह ट्रेड war भारत के खिलाफ नहीं है. हमें अमेरिका के साथ व्यापार में लाभ होता है, इसका कारण यह है कि भारत अमेरिका को IT सर्विसेस प्रोवाइड करता है.
इन सर्विसेस इसका लाभ उठा कर, अमेरिकी व्यापारी और कंपनियां कुशलता पूर्वक अपना काम करती हैं, और दुनिया भर से Billions of Dollars का व्यापार कर पाती है. इसलिए भारत और अमेरिका के बीच एक दूसरे को लाभ पहुंचाने वाला संबंध है.
राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहते रहे, वह यह वास्तविकता समझते हैं.
हाल ही में चालू हुई Trade war में सबसे बड़ी गलती यह होगी, की हम एक ऐसा युद्ध लड़ रहे हैं, जिसमें हम पार्टी ही नहीं हैं. वास्तव में हमें अमेरिका और चीन के साथ मिलकर ऐसे काम करना चाहिए, कि भारत के हितों को आगे बढ़ाया जा सके.
और अगर हमें किसी का पक्ष लेना पड़े, तो हमें चीन के पक्ष की बजाय अमेरिका का पक्ष लेना चाहिए.
आप जानते हैं, चीन के पास बड़े पैमाने पर Over capacity है, अगर अमेरिकी बाजार तक उसकी पहुंच कम होती है, तो वह तुरंत अपना माल सस्ती कीमत पर भारत के बाजार में पटकना चालू कर देगा. जिससे चीन के साथ व्यापार में भारत को होने वाला घाटा और बढ़ता चला जाएगा.
दूसरी ओर, यदि चीन धीरे से अपना बाजार भारत के लिए खोलता भी है, तो चीन के बाजार में माल बेचने के लिए भारत को कैपेसिटी का निर्माण करने में और अधिक समय लगेगा. वैसे भी चीन के पास over capacity है, उसे दुनिया से माल आयात करने की जरूरत वैसे भी कहां है.
इसलिए वर्तमान Global Trade War के दौरान, भारत को अपनी रणनीति में परिवर्तन करना होगा.
आपके विचार से,इस Global Trade War में क्या भारत को चीन का पक्ष लेना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss about today's topic.
While making an attempt for better relationship with China, India has not forgotten the reality, how China is trying to establish its Hegemony in the whole world.
Behind asking for development for all countries, there is Chinese aim to establish Pax Sinica once again.
Pax Sinica refers to historical Golden Chinese Age, when China maintained dominant civilization in the region due to its political, economic, military and cultural power.
We are talking about time before year 200. and the duration in between year 618 and Year 907.
Now China is once again trying to recreate its glorious past in future.
That's where no matter how much we appease china, there will be confrontation with India as long as we don't end up surrendering to Chinese hegemonic tendencies.
For rapid Indian development, China wants India to learn from China and follow it.
However, Sri Lanka , Pakistan and Maldives are three countries, which clearly show us the result of following China.
Going forward, As per news report published by Hindustan Times news paper, India has come up with three pronged strategy to check Chinese influence in the region. This strategy has following three dimensions.
We should carefully Track Chinese activities in the region.
Rather than competing with China, we should continue to pursue our own projects and commitments.
We should educate and advice neighbors on the consequences of engaging with china.
We definitely liked the idea that India need not compete with China on resources. Its going to be game for India to loose.
After all, thanks to the way China has exploited current global trade system, it has huge resources at its disposal.
Moreover, when China is ready to waste its resources in Pakistan and Sri Lanka, we need not worry about it.
China built a Sri Lankan port, where no ship wants to stop and a Sri Lankan airpot, where no airplane wants to land.
Soon, In all likelihood, Gwadar port will replace Hambantota port as world's biggest swimming pool.
If world is struggling with over capacity now, China is mainly responsible for this. Thanks to Just started Global Trade war, the possibility of Chinese mega infrastructural projects turning in to White Elephants has only increased.
When experts talk about Global Trade war, they end up blaming President Trump, while conveniently forgetting that all other ways to force China change its way, have simply failed.
Over last two decades, America has engaged with China in discussions, from which nothing positive came out.
Forget America, even India has continued to request China for market access, which China steadfastly refused to provide.
In a way, Talks have become a Chinese way to ensure that current status quo continue to prevail, after all its most beneficial to China.
Indian can continue with its three pronged, or four pronged strategy, nothing is going to happen, because this strategy is defensive in nature.
Unless the current global trade system changes, Pax Sinica will be established sooner or later.
That's where, we don't find it a good idea for India to fight trade war with America, when America is primarily fighting with China.
You know, when Trump has imposed global trade tariff, all nations except Japan has retaliated against America.
That's where India is simply wrong to retaliate against America in current trade war. However good thing is, India is engaged with America in talks and hopefully a deal will be made.
We must understand, this trade war is not against India. We have trade surplus with America but It primarily comes from IT services that India offers to America.
These Indian services enable American business to operate efficiently and earn billions of dollars more. That's where, there is synergy in between India and America.
No matter what president trump says publicly, but he understands this reality.
In this just started trade war, the worst thing is to fight a war, to which we are not even a party.
We should rather engage with both America and China to get the best deal for India.
If at all we get to take sides, we should join American side rather than Chinese.
Please note, China has immense over capacity, if American market reduces, it may end up dumping goods in Indian market immediately, thus Indian trade deficit with China will further increase.
On the other hand, China will take time to slowly open its market for India, and it will take even longer time for India to build capacity to exploit it. Moreover, When China has over capacity, the least it would require is the import from foreign countries.
That's why India must re-calibrate its strategy in ongoing trade war.
As per your views, in this global trade war, should India join Chinese side?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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