रविवार को मालदीव के चुनाव में राष्ट्रपति यामीन क्यों हारेंगे?
Why President Yameent will lose Maldivian election on Sunday?
In this election, we will discuss about President Yameen losing election on 23 September.
Reference -
https://timesofindia.indiatimes.com/india/maldives-remains-evasive-on-deployment-of-indian-maritime-surveillance-aircraft/articleshow/64876955.cms
https://www.thehindu.com/news/international/maldives-joint-opposition-agree-to-field-a-common-candidate/article24297757.ece
https://newsin.asia/ibrahim-mohamed-solih-is-mdp-and-joint-opposition-candidate-against-maldivian-president-yameen/
https://maldivesindependent.com/feature-comment/the-race-of-his-life-an-introduction-to-the-maldives-latest-presidential-hopeful-139100
https://maldivesindependent.com/politics/government-welcomes-mdp-decision-to-take-part-in-presidential-poll-139098
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Original Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
हम सभी यह बात जानते हैं, छोटा सा मालदीव भारतीय विदेश नीति के लिए बड़ी चुनौती बन कर उभरा है.
इसी बीच भारत ने मालदीव से ऐसी अपेक्षा की है, इस रविवार को मालदीव में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का आयोजन किया जाना चाहिए. हम सभी जानते हैं, मालदीव का वर्तमान प्रशासन भारत की आशाओं पर खरा उतरने वाला नहीं है.
लेकिन कुछ महीनों पहले इस संदर्भ में रणनीति कोलंबो में तैयार की गयी थी .
अचानक से, मालदीव के भूतपूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से बाहर निकल गए. आप जानते हैं, इस निर्णय का कोई ज्यादा महत्व नहीं है. क्योंकि वह वैसे भी मालदीव लौट नहीं पा रहे थे, चुनाव लड़ने की बात तो फिर अलग ही है.
महत्वपूर्ण बात यह है, मालदीप की चार विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इब्राहिम मोहमद सोलीह के रूप में राष्ट्रपति यामीन के विरोध में चुनाव लड़ने के लिए एक संयुक्त उम्मीदवार को उतारने का निर्णय लिया है.
54 वर्षीय इब्राहिम Maldivian democratic party के एक वरिष्ठ नेता है. जमीन से जुड़े हुए एक लोकप्रिय नेता के रूप में उन्हें अपने सुधार कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है.
विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में, राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ इब्राहिम के जीतने की संभावना प्रबल है.
हालांकि राष्ट्रपति यामीन ने औपचारिक रूप से उनके चुनाव लड़ने का स्वागत किया है. लेकिन यह देखना रोचक होगा, कि क्या इब्राहिम को शक्ति के साथ चुनाव लड़ने का बराबर मौका मिलता है, या नहीं .
शुरुआत में, भूतपूर्व राष्ट्रपति नशीद राष्ट्रपति चुनाव की रेस से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे. जिससे विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार की सम्भावना बहुत कमजोर पड़ गई थी.
लेकिन जैसा कि मालदीव में कहा जा रहा है, किसी विशेष शक्ति के प्रभाव में आकर नशीद को चुनाव से बाहर निकलना पड़ा.
हम समझते हैं, आप को भली भांति पता है, यहां पर किस शक्ति की बात हो रही है.
चलिए, श्रीलंका के पिछले आम चुनाव के बारे में चर्चा करते हैं.
जनवरी 2015 में श्रीलंका में चुनाव हुए थे, जिसमें चीन के वफादार राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पराजय हुई थी.
श्रीलंका की मीडिया के अनुसार, इस चुनाव के ठीक पहले दिसंबर महीने में श्रीलंका की सरकार ने Research and Analysis wing के station chief को श्रीलंका छोड़ने के लिए कहा था. क्योंकि विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे उनकी भूमिका का अंदेशा था.
लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनको सामान्य ट्रांसफर के अंतर्गत श्रीलंका से हटाया गया था.
हम में से किसी को ऐसी अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, की श्रीलंका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे भारतीय विदेश मंत्रालय या गुप्त सेवाएं अपनी किसी भी भूमिका को औपचारिक रूप से स्वीकार करेंगी. .
लेकिन अब आप अंदाजा लगाने के लिए स्वतंत्र हैं, राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे किसने भूमिका अदा की होगी.
हाल फिलहाल मालदीव में लोकतंत्र की पुनः स्थापना के लिए अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टियों ने हाथ मिलाने का निर्णय लिया है.
अब तो गेंद मालदीव की जनता के पाले में आ गई है.
हमने अपने पिछले एक वीडियो में चर्चा की है, मालदीप की समस्याओं का सबसे अच्छा हल वहां की जनता ही निकाल सकती है.
संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के खड़े होने से, इस बारे में आशा बलवान हो चुकी है. लेकिन हमें यह बात याद रखनी चाहिए, राष्ट्रपति यामीन किसी भी कीमत पर चुनाव में जीतने के लिए कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं.
कहने की जरूरत नहीं है, राष्ट्रपति यामीन रविवार को होने वाले चुनाव में धांधली करने की पूरी कोशिश करेंगे, मालदीव के लोगों को पहले से ही इसका बहुत डर है. और शायद इसीलिएवह इस चुनाव में निर्णायक मतदान करने जा रहे हैं.
आगे जाने वाला रास्ता कठिन है, और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है. लेकिन एक बात निश्चित हो गई है, संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के कारण राष्ट्रपति यामीन को चुनाव में कड़ा संघर्ष जरूर करना पड़ेगा?
इसी बीच, बाज़ीगर राष्ट्रपति यामीन की हारे हुए चुनाव को जीतने की क्षमता को हमें कम करके नहीं आंकना चाहिए. लेकिन चीन बड़ी बेचैनी से रविवार को होने वाले चुनाव के परिणामो की प्रतीक्षा करेगा. क्योंकि इस चुनाव में उसके करोड़ों डॉलर दांव पर लगे हुए हैं.
आप के विश्लेषण के अनुसार, संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के सामने, क्या राष्ट्रपति यामीन चुनाव हार जाएंगे?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
हम सभी यह बात जानते हैं, छोटा सा मालदीव भारतीय विदेश नीति के लिए बड़ी चुनौती बन कर उभरा है.
इसी बीच भारत ने मालदीव से ऐसी अपेक्षा की है, इस रविवार को मालदीव में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का आयोजन किया जाना चाहिए. हम सभी जानते हैं, मालदीव का वर्तमान प्रशासन भारत की आशाओं पर खरा उतरने वाला नहीं है.
लेकिन कुछ महीनों पहले इस संदर्भ में रणनीति कोलंबो में तैयार की गयी थी .
अचानक से, मालदीव के भूतपूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से बाहर निकल गए. आप जानते हैं, इस निर्णय का कोई ज्यादा महत्व नहीं है. क्योंकि वह वैसे भी मालदीव लौट नहीं पा रहे थे, चुनाव लड़ने की बात तो फिर अलग ही है.
महत्वपूर्ण बात यह है, मालदीप की चार विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इब्राहिम मोहमद सोलीह के रूप में राष्ट्रपति यामीन के विरोध में चुनाव लड़ने के लिए एक संयुक्त उम्मीदवार को उतारने का निर्णय लिया है.
54 वर्षीय इब्राहिम Maldivian democratic party के एक वरिष्ठ नेता है. जमीन से जुड़े हुए एक लोकप्रिय नेता के रूप में उन्हें अपने सुधार कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है.
विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में, राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ इब्राहिम के जीतने की संभावना प्रबल है.
हालांकि राष्ट्रपति यामीन ने औपचारिक रूप से उनके चुनाव लड़ने का स्वागत किया है. लेकिन यह देखना रोचक होगा, कि क्या इब्राहिम को शक्ति के साथ चुनाव लड़ने का बराबर मौका मिलता है, या नहीं .
शुरुआत में, भूतपूर्व राष्ट्रपति नशीद राष्ट्रपति चुनाव की रेस से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे. जिससे विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार की सम्भावना बहुत कमजोर पड़ गई थी.
लेकिन जैसा कि मालदीव में कहा जा रहा है, किसी विशेष शक्ति के प्रभाव में आकर नशीद को चुनाव से बाहर निकलना पड़ा.
हम समझते हैं, आप को भली भांति पता है, यहां पर किस शक्ति की बात हो रही है.
चलिए, श्रीलंका के पिछले आम चुनाव के बारे में चर्चा करते हैं.
जनवरी 2015 में श्रीलंका में चुनाव हुए थे, जिसमें चीन के वफादार राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पराजय हुई थी.
श्रीलंका की मीडिया के अनुसार, इस चुनाव के ठीक पहले दिसंबर महीने में श्रीलंका की सरकार ने Research and Analysis wing के station chief को श्रीलंका छोड़ने के लिए कहा था. क्योंकि विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे उनकी भूमिका का अंदेशा था.
लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनको सामान्य ट्रांसफर के अंतर्गत श्रीलंका से हटाया गया था.
हम में से किसी को ऐसी अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, की श्रीलंका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे भारतीय विदेश मंत्रालय या गुप्त सेवाएं अपनी किसी भी भूमिका को औपचारिक रूप से स्वीकार करेंगी. .
लेकिन अब आप अंदाजा लगाने के लिए स्वतंत्र हैं, राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार को खड़ा करने के पीछे किसने भूमिका अदा की होगी.
हाल फिलहाल मालदीव में लोकतंत्र की पुनः स्थापना के लिए अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टियों ने हाथ मिलाने का निर्णय लिया है.
अब तो गेंद मालदीव की जनता के पाले में आ गई है.
हमने अपने पिछले एक वीडियो में चर्चा की है, मालदीप की समस्याओं का सबसे अच्छा हल वहां की जनता ही निकाल सकती है.
संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के खड़े होने से, इस बारे में आशा बलवान हो चुकी है. लेकिन हमें यह बात याद रखनी चाहिए, राष्ट्रपति यामीन किसी भी कीमत पर चुनाव में जीतने के लिए कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं.
कहने की जरूरत नहीं है, राष्ट्रपति यामीन रविवार को होने वाले चुनाव में धांधली करने की पूरी कोशिश करेंगे, मालदीव के लोगों को पहले से ही इसका बहुत डर है. और शायद इसीलिएवह इस चुनाव में निर्णायक मतदान करने जा रहे हैं.
आगे जाने वाला रास्ता कठिन है, और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है. लेकिन एक बात निश्चित हो गई है, संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के कारण राष्ट्रपति यामीन को चुनाव में कड़ा संघर्ष जरूर करना पड़ेगा?
इसी बीच, बाज़ीगर राष्ट्रपति यामीन की हारे हुए चुनाव को जीतने की क्षमता को हमें कम करके नहीं आंकना चाहिए. लेकिन चीन बड़ी बेचैनी से रविवार को होने वाले चुनाव के परिणामो की प्रतीक्षा करेगा. क्योंकि इस चुनाव में उसके करोड़ों डॉलर दांव पर लगे हुए हैं.
आप के विश्लेषण के अनुसार, संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के सामने, क्या राष्ट्रपति यामीन चुनाव हार जाएंगे?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Original Real Quick Analysis.
We all are aware of the fact that small Maldives has proved to be big foreign affair challenge for India.
Nevertheless, India has asked Maldives to create conducive atmosphere for holding free and fair election on this Sunday.
We all know, Yameen regime is not going to come up to Indian expectation.
However, Few months back, real game plan has been prepared somewhere in Colombo.
Former Maldivian president Mohamed Nasheed suddenly pulled out of Maldivian presidential race. If you see, This decision was not very important because he anyways could not return Maldives, leave aside his possibility of fighting election.
What is rather important is, Four opposition parties decided to field a joint candidate in Ibrahim Mohamed Solih in order to present a strong challenge to President Yameen.
54 years old Ibrahim is senior leader of Maldivian democratic party and he is popular grassroot politician, who is also known for his reform work.
In the form of joint opposition candidate, he has good chance against current president Yameen.
Though President Yameen has officially welcome him fighting the election, yet it would be interesting to see if Ibrahim really gets level playing field.
Initially, Ex president Nasheed was not willing to back out and hope for joint opposition candidate was totally lost.
However, As it has been reported in Maldives, Someone or some force prevailed upon Nasheed to back out.
We think, you know , which force we are talking about here.
Anyways, lets talk about last Sri Lankan Election.
You can recall, Pro china Sri Lankan President Mahinda Rajapaksa Lost election in January 2015.
However As per Sri Lankan media, Just before the election in December, Sri Lankan government asked Research and Analysis wing station chief to leave Sri Lanka for his links to the formation of strong opposition alliance.
As per Indian foreign ministry, he was removed from Sri lanka as a routine transfer.
No one should expect that Indian foreign ministry and spy agencies would stake formal credit for playing any sort of role in the formation of joint opposition against last Sri Lankan president .
But you may now easily speculate, who might have played invisible role in fielding joint opposition candidate against President Yameen in Maldives.
for now, its good that Opposition parties belonging to different political ideologies have joined hands in order to restore democracy in Maldives.
Now, Ball is placed in the court of Maldivian people.
We have argued in one of our videos, the best solution to the problem of Maldives can be found by the people of Maldives.
With joint opposition candidate, the hope is revived, however we must remember, president Yameen will do everything possible to win this election at any cost.
Needless to say, people of Maldives are already worried about systematic rigging in election by President Yameen, and They may provide decisive mandate in general election on 23 September.
The path ahead is very difficult and uncertain, however, When the votes will be counted President Yameen will have tough competition, that has become certain.
Meanwhile, No one should underestimate the ability of president yameen to manipulate the election results. Amid all this, Anxious China will be waiting for favorable election results, after all its billions of dollars are at stake.
As per your analysis, in front of Joint Opposition candidate, Will President Yameen lose in the election?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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