भारत की टॉयलेट और चीन पाकिस्तान कॉरिडोर में से कौन बेहतर है ??
Reference -
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/how-swachh-bharat-changed-india-and-became-a-global-inspiration/articleshow/65862401.cms
https://www.bloomberg.com/news/articles/2018-07-30/world-s-biggest-toilet-building-spree-is-a-windfall-in-india
https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/Swaminomics/why-china-cant-win-the-world-with-easy-money/
https://tribune.com.pk/story/1352995/pakistan-will-paying-china-90b-cpec-related-projects/
https://en.wikipedia.org/wiki/China%E2%80%93Pakistan_Economic_Corridor
https://www.dawn.com/news/1320028
https://en.wikipedia.org/wiki/Gwadar_Port#China_Overseas_Port_Holding_Company_(2013%E2%80%93present)
https://www.marinetraffic.com/en/ais/details/ports/19578/Pakistan_port:GWADAR
https://www.hellenicshippingnews.com/pakistans-gwadar-port-sees-first-container-vessel-a-milestone-for-belt-and-road-initiative/
https://tribune.com.pk/story/1755608/2-pakistans-trade-deficit-skyrockets-historic-high/
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Original Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
दोस्तों, हम जब कभी भी चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर पर कोई भी वीडियो डालते हैं,तो हमारे पाकिस्तानी दोस्त टॉयलेट बनाने के लिए भारत का बड़ा मजाक उड़ाते हैं.
हमारे प्यारे पाकिस्तानी दोस्त उल्लूओं की जन्नत में जी चाहे तो रह सकते हैं, लेकिन आज हम स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट और चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर की तुलना करेंगे.
हम सभी जानते हैं, दुनिया के इतिहास में स्वच्छ भारत टॉयलेट बनाने का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है.
4 साल पहले, 20 बिलियन डॉलर के निवेश पर भारत में 11 करोड़ 10 लाख टॉयलेट बनाने का लक्ष्य लिया गया था.
आज तक भारत में लगभग आठ करोड़ टॉयलेट का निर्माण किया जा चुका है. जबकि अक्टूबर 2014 में भारत के केबल 39% घरों में टॉयलेट थी. लेकिन जुलाई 2018 तक भारत के 89% घरों में टॉयलेट का निर्माण हो चुका था.
अगले वर्ष जब स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट का लक्ष्य पूरा हो जाएगा. तो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार गंदगी से होने वाली बीमारियों से मरने वाले 3 लाख लोगों की जान बचाई जा सकेगी. साथ ही स्वच्छता के होने से भारत के लोगों को और सरकार को बीमारियों के ऊपर कम खर्चा करना पड़ेगा.
अब चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर के बारे में चर्चा करते हैं. जिसके बारे में पूरी दुनिया पागल हो रही है.
वर्ष 2015 में 46 बिलियन डॉलर के निवेश पर पाकिस्तान में चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी.
28 बिलियन डॉलर की कीमत पर जल्दी से खत्म होने वाले प्रोजेक्ट पर काम किया जाना था. और बचे हुए 18 बिलियन डॉलर की कीमत पर कई सारे प्रोजेक्ट को वर्ष 2030 तक कंप्लीट किया जाना था.
लेकिन अब चीन पाकिस्तान के इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत 46 से बढ़कर 62 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है.
जल्दी से समाप्त होने वाले पावर प्रोजेक्ट के कारण पाकिस्तान की बिजली की समस्या का समाधान हो चुका है. लेकिन इन प्रोजेक्ट के कारण बिजली की कीमतों में इजाफा हुआ है.
ग्वादर बंदरगाह नवंबर 2016 से काम कर रहा है. लेकिन 10 मार्च 2018 को चीन के पहले जहाज ने ग्वादर से फ्रोजन सीफूड लोड किया ताकि उसे संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह तक ले जाया जा सके. ग्वादर बंदरगाह पर कितना व्यवसाय हो रहा है, इसके बारे में सार्वजनिक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. लगता है, ग्वादर बंदरगाह पर होने वाला व्यापार बहुत बड़ा सीक्रेट है, जो कि आईएसआई को भी पता नहीं है.
चीन से आने वाले सस्ते माल के बढ़ते हुए आयात के कारण, इस वर्ष पाकिस्तान को अपने इतिहास का सबसे अधिक व्यापार घाटा हुआ है.
कहने की जरूरत नहीं है, पाकिस्तान को देर सवेर चीन से लिए हुए कर्ज को लौटाना भी पड़ेगा.
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, चीन से लिए हुए 50 बिलियन डॉलर के एवज में अगले 30 वर्षों के दौरान पाकिस्तान को 90 बिलियन डॉलर चीन को चुकाने होंगे.
वर्ष 2020 के बाद, चीन का कर्ज अदा करने के लिए सालाना कम से कम 3 बिलियन डॉलर पाकिस्तान को चुकाने होंगे.
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है, चाहे यह सभी प्रोजेक्ट सफल हो या असफल हो, पाकिस्तान की सरकार ने कर्ज की अदायगी की गारंटी दे रखी है.
कोई बात नहीं है, अब हम स्वच्छ भारत की चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर से तुलना करेंगे.
अगर दो प्रोजेक्ट्स में तुलना करनी हो. तो आमतौर पर दोनों प्रोजेक्ट के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट प ध्यान दिया जाता है . जोकि प्रोजेक्ट से होने वाले लाभ और प्रोजेक्ट में होने वाले निवेश का अनुपात होता है.
अगर आप सो रुपए में एक खिलौना खरीद कर उसे ₹120 में बेच देते हैं. तो इसका मतलब होता है, कि आपको सौ रुपए के इन्वेस्टमेंट पर 20% का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट प्राप्त हुआ है.
स्वाभाविक रूप से, जिस प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा होता है, वह प्रोजेक्ट बेहतर होता है. क्योंकि वह अधिक लाभ कमाता है.
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट मात्र 40% है.
लेकिन यूनिसेफ के अनुमान के अनुसार, भारत में चल रहे स्वच्छता संबंधित प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट बहुत अधिक 400% है.
इसका मतलब होता है, कि आप सो रुपए में एक खिलौना खरीदकर, उसे 500 रुपए में बेच रहे हैं. जिससे हर खिलौने पर आपको ₹400 का लाभ हो रहा है.
अब यह हमारे बड़े बुद्धिमान पाकिस्तानी दोस्तों को तय करना है, स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट और चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट में से कौन सा प्रोजेक्ट अच्छा है?
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है, स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट अगले साल खत्म हो जाएगा. और 20 बिलियन डॉलर के निवेश के ऊपर भारत को किसी भी देश का कर्ज नहीं लौटाना है. इस प्रोजेक्ट से जितना भी लाभ पैदा होगा, वह भारत में ही रहेगा.
हम सभी को याद है, वर्ष 2014 में विश्वविख्यात भारत के प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी ने हम सभी को ज्ञान दिया था, कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं. लेकिन अब हम आश्वस्त होकर कह सकते हैं, कि पैसे टॉयलेट में जरूर उगते हैं.
कहने की जरूरत नहीं है, मानव जाति के इतिहास में इतने बड़े व्यापक स्तर पर लोगों के किसी भी प्रकार के व्यवहार में परिवर्तन पहले कभी नहीं किया गया है.
यह बात समझ में आती है, कि भारत की मीडिया ने मोदी सरकार की असाधारण सफलता को नजरअंदाज करना उचित क्यों समझा.
विद्वान लोगों का कहना है, कि भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी ने भारत का निर्माण किया था. लेकिन उसी भारत को टॉयलेट का निर्माण करवाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का 70 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा.
मूलभूत सवाल यह है, जब इस प्रोजेक्ट पर इतना भारी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट है, तो क्या आजादी के बाद भारत में सबसे पहले टॉयलेट का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए था?
राहुल गांधी जी से यह सवाल कोई नहीं पूछता, कि उनके परिवार की 4 पीड़ीओं को टॉयलेट के बारे में बात करने का समय कैसे नहीं मिला.
कोई बात नहीं देर आए, दुरुस्त आए. अगले साल भारत के हर एक घर में टॉयलेट होगी. लेकिन चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर की योजना के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी 12 साल और लगेंगे.
पाकिस्तान चीन को पेमेंट करने में जानबूझकर डिफॉल्ट मारेगा. वास्तव में चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर और कुछ नहीं बस चीन के डॉलर जलाने की मशीन है.
जब तक चीन के पास पाकिस्तान जैसे दोस्त हैं, उसे दुश्मनों की जरूरत क्यों होगी?
इसलिए, टॉयलेट बनाने के लिए हम भारतीयों का यूट्यूब पर मजाक उड़ाते समय, एक दिन पाकिस्तानी मित्रों को पता पड़ेगा, कि वह खुद एक मजेदार चुटकुला बन चुके हैं.
फिर भी, हम पाकिस्तानी दोस्तों को धन्यवाद देना चाहेंगे, उन्होंने बड़ी चालाकी से चीन जैसे मोटे मुर्गे को अपने मौत के जाल में फांसने में सफलता प्राप्त की है.
आप के विश्लेषण के अनुसार, चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट और स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट में से कौन सा प्रोजेक्ट बेहतर है?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
दोस्तों, हम जब कभी भी चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर पर कोई भी वीडियो डालते हैं,तो हमारे पाकिस्तानी दोस्त टॉयलेट बनाने के लिए भारत का बड़ा मजाक उड़ाते हैं.
हमारे प्यारे पाकिस्तानी दोस्त उल्लूओं की जन्नत में जी चाहे तो रह सकते हैं, लेकिन आज हम स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट और चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर की तुलना करेंगे.
हम सभी जानते हैं, दुनिया के इतिहास में स्वच्छ भारत टॉयलेट बनाने का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है.
4 साल पहले, 20 बिलियन डॉलर के निवेश पर भारत में 11 करोड़ 10 लाख टॉयलेट बनाने का लक्ष्य लिया गया था.
आज तक भारत में लगभग आठ करोड़ टॉयलेट का निर्माण किया जा चुका है. जबकि अक्टूबर 2014 में भारत के केबल 39% घरों में टॉयलेट थी. लेकिन जुलाई 2018 तक भारत के 89% घरों में टॉयलेट का निर्माण हो चुका था.
अगले वर्ष जब स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट का लक्ष्य पूरा हो जाएगा. तो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार गंदगी से होने वाली बीमारियों से मरने वाले 3 लाख लोगों की जान बचाई जा सकेगी. साथ ही स्वच्छता के होने से भारत के लोगों को और सरकार को बीमारियों के ऊपर कम खर्चा करना पड़ेगा.
अब चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर के बारे में चर्चा करते हैं. जिसके बारे में पूरी दुनिया पागल हो रही है.
वर्ष 2015 में 46 बिलियन डॉलर के निवेश पर पाकिस्तान में चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी.
28 बिलियन डॉलर की कीमत पर जल्दी से खत्म होने वाले प्रोजेक्ट पर काम किया जाना था. और बचे हुए 18 बिलियन डॉलर की कीमत पर कई सारे प्रोजेक्ट को वर्ष 2030 तक कंप्लीट किया जाना था.
लेकिन अब चीन पाकिस्तान के इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत 46 से बढ़कर 62 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है.
जल्दी से समाप्त होने वाले पावर प्रोजेक्ट के कारण पाकिस्तान की बिजली की समस्या का समाधान हो चुका है. लेकिन इन प्रोजेक्ट के कारण बिजली की कीमतों में इजाफा हुआ है.
ग्वादर बंदरगाह नवंबर 2016 से काम कर रहा है. लेकिन 10 मार्च 2018 को चीन के पहले जहाज ने ग्वादर से फ्रोजन सीफूड लोड किया ताकि उसे संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह तक ले जाया जा सके. ग्वादर बंदरगाह पर कितना व्यवसाय हो रहा है, इसके बारे में सार्वजनिक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. लगता है, ग्वादर बंदरगाह पर होने वाला व्यापार बहुत बड़ा सीक्रेट है, जो कि आईएसआई को भी पता नहीं है.
चीन से आने वाले सस्ते माल के बढ़ते हुए आयात के कारण, इस वर्ष पाकिस्तान को अपने इतिहास का सबसे अधिक व्यापार घाटा हुआ है.
कहने की जरूरत नहीं है, पाकिस्तान को देर सवेर चीन से लिए हुए कर्ज को लौटाना भी पड़ेगा.
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, चीन से लिए हुए 50 बिलियन डॉलर के एवज में अगले 30 वर्षों के दौरान पाकिस्तान को 90 बिलियन डॉलर चीन को चुकाने होंगे.
वर्ष 2020 के बाद, चीन का कर्ज अदा करने के लिए सालाना कम से कम 3 बिलियन डॉलर पाकिस्तान को चुकाने होंगे.
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है, चाहे यह सभी प्रोजेक्ट सफल हो या असफल हो, पाकिस्तान की सरकार ने कर्ज की अदायगी की गारंटी दे रखी है.
कोई बात नहीं है, अब हम स्वच्छ भारत की चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर से तुलना करेंगे.
अगर दो प्रोजेक्ट्स में तुलना करनी हो. तो आमतौर पर दोनों प्रोजेक्ट के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट प ध्यान दिया जाता है . जोकि प्रोजेक्ट से होने वाले लाभ और प्रोजेक्ट में होने वाले निवेश का अनुपात होता है.
अगर आप सो रुपए में एक खिलौना खरीद कर उसे ₹120 में बेच देते हैं. तो इसका मतलब होता है, कि आपको सौ रुपए के इन्वेस्टमेंट पर 20% का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट प्राप्त हुआ है.
स्वाभाविक रूप से, जिस प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा होता है, वह प्रोजेक्ट बेहतर होता है. क्योंकि वह अधिक लाभ कमाता है.
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट मात्र 40% है.
लेकिन यूनिसेफ के अनुमान के अनुसार, भारत में चल रहे स्वच्छता संबंधित प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट बहुत अधिक 400% है.
इसका मतलब होता है, कि आप सो रुपए में एक खिलौना खरीदकर, उसे 500 रुपए में बेच रहे हैं. जिससे हर खिलौने पर आपको ₹400 का लाभ हो रहा है.
अब यह हमारे बड़े बुद्धिमान पाकिस्तानी दोस्तों को तय करना है, स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट और चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट में से कौन सा प्रोजेक्ट अच्छा है?
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है, स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट अगले साल खत्म हो जाएगा. और 20 बिलियन डॉलर के निवेश के ऊपर भारत को किसी भी देश का कर्ज नहीं लौटाना है. इस प्रोजेक्ट से जितना भी लाभ पैदा होगा, वह भारत में ही रहेगा.
हम सभी को याद है, वर्ष 2014 में विश्वविख्यात भारत के प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी ने हम सभी को ज्ञान दिया था, कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं. लेकिन अब हम आश्वस्त होकर कह सकते हैं, कि पैसे टॉयलेट में जरूर उगते हैं.
कहने की जरूरत नहीं है, मानव जाति के इतिहास में इतने बड़े व्यापक स्तर पर लोगों के किसी भी प्रकार के व्यवहार में परिवर्तन पहले कभी नहीं किया गया है.
यह बात समझ में आती है, कि भारत की मीडिया ने मोदी सरकार की असाधारण सफलता को नजरअंदाज करना उचित क्यों समझा.
विद्वान लोगों का कहना है, कि भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी ने भारत का निर्माण किया था. लेकिन उसी भारत को टॉयलेट का निर्माण करवाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का 70 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा.
मूलभूत सवाल यह है, जब इस प्रोजेक्ट पर इतना भारी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट है, तो क्या आजादी के बाद भारत में सबसे पहले टॉयलेट का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए था?
राहुल गांधी जी से यह सवाल कोई नहीं पूछता, कि उनके परिवार की 4 पीड़ीओं को टॉयलेट के बारे में बात करने का समय कैसे नहीं मिला.
कोई बात नहीं देर आए, दुरुस्त आए. अगले साल भारत के हर एक घर में टॉयलेट होगी. लेकिन चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर की योजना के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी 12 साल और लगेंगे.
पाकिस्तान चीन को पेमेंट करने में जानबूझकर डिफॉल्ट मारेगा. वास्तव में चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर और कुछ नहीं बस चीन के डॉलर जलाने की मशीन है.
जब तक चीन के पास पाकिस्तान जैसे दोस्त हैं, उसे दुश्मनों की जरूरत क्यों होगी?
इसलिए, टॉयलेट बनाने के लिए हम भारतीयों का यूट्यूब पर मजाक उड़ाते समय, एक दिन पाकिस्तानी मित्रों को पता पड़ेगा, कि वह खुद एक मजेदार चुटकुला बन चुके हैं.
फिर भी, हम पाकिस्तानी दोस्तों को धन्यवाद देना चाहेंगे, उन्होंने बड़ी चालाकी से चीन जैसे मोटे मुर्गे को अपने मौत के जाल में फांसने में सफलता प्राप्त की है.
आप के विश्लेषण के अनुसार, चीन पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट और स्वच्छ भारत प्रोजेक्ट में से कौन सा प्रोजेक्ट बेहतर है?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Original Real Quick Analysis.
Whenever we publish videos on china Pakistan economic corridor, our very smart Pakistani friends ridicule India for building toilets.
While Pakistani friends can continue to live in Fool's paradise. today we will quickly compare Indian Clean Project Vs China Pakistan Economic Corridor Project, which have never been compared before.
we all know, Clean India project is the greatest toilet building project in the human history.
At the investment of 20 Billion Dollars, four years back India has decided to build 11 Crore 10 Lakh toilets.
As of now, 8 Crore toilets have been built. In October 2014, 39% Household in India had toilets. As of July 2018, 89% Indian households have toilets.
By the time, India completes this project next year, as per the estimate of World Health Organization, Huge 3 Lakh lives would have been saved from diseases caused by poor sanitation.
Now, lets talk about China Pakistan Economic corridor Project, which whole world is obsessed about.
In the year 2015, China Pakistan Economic Corridor project has been announced at the Chinese investment of 46 Billion Dollars.
28 Billion Dollars were marked for early harvest projects, and projects worth rest 18 Billion Dollars have been planned to be completed by year 2030.
Now the value of these projects have gone up from 46 to 62 Billion Dollars.
Thanks to early harvest power projects, electricity supply has certainly improved in Pakistan but at the higher tariffs.
Gwadar port has been operationalized in November 2016. But only on 10 March 2018, first Chinese vessel loaded frozen sea food and departed for the Jebel Ali port in the United Arab Emirates. As of today, there is no real time public data available for the maritime traffic on this port. Perhaps Commercial operation on Gwadar port is top secret, which even ISI doesn't know.
Thanks to rising Chinese import to Pakistan for these projects, this year Pakistan has recorded highest trade deficit in its history.
Needless to say, sooner than later Pakistan will have to pay back these loans to China as well.
As per estimate published in Pakistani News paper Express Tribune, for the Chinese investment of 50 Billion Dollars, Pakistan will end up paying total 90 Billion Dollars to China over period of next 30 years.
From year 2020, Each year, Pakistan will have to pay at least 3 Billion Dollars annually to China.
More importantly, Pakistan government has guaranteed repayment to China regardless success, or failure of projects.
Anyways, now lets compare China Pakistan Economic Corridor project with Clean India project.
In order to compare two projects, we normally look at their return on investment, which is the ratio of net profit and cost of investment.
If you buy a toy at 100 rupees and sell it at 120 rupees, it simply means, you have 20% return on investment of 100 rupees.
the project with higher Return on Investment will obviously be better because its simply means, its earning more profit.
As per estimate published in Pakistani News paper Express Tribune, China Pakistan Economic Corridor project has 40% return on investment.
Now, as per estimate done by Unicef, Indian sanitation project has return on investment of whopping 400%
it means, you are buying a toy at 100 rupees but selling it at 500 rupees , thus earning 400 rupees on each toy.
Now, its up to our very intelligent Pakistani friends to determine, out of cpec and Clean India project, which one is better.
More importantly, Clean India project is about to complete next year, and India doesn't need to repay anyone for the 20 Billion Dollar investment made in this project. Whatever profit is generated from this project, will remain in India.
we can recall , World famous economist Prime Minister Manmohan sing taught us in the year 2014, Money does not grow on trees. however we can safely say, Money instead grows in Indian toilets.
Needless to say, Clean India project is largest successful behavioral change project in the history of mankind.
Understandably, Indian Media doesn't have time to cover the magnificent success of Modi government.
Experts say, First Prime Minister Neharu built India, but India has to wait for Prime Minister modi to build toilets.
The basic question is, When return on investment is so huge, Should India not have built toilet first after getting independence?
Its a question worth asking from Rahul Gandhi, why four generations of his family didn't get time to even talk about toilets.
Anyways, better late than never. Next Year, all Indian households will have toilets and China Pakistan Economic corridor project will have to wait for next 12 years for completion.
Pakistan will default on the repayment for China. China Pakistan Economic Corridor project is nothing but a Chinese cash burning machine.
As long as China has friend like Pakistan, it doesn't need enemy.
Therefore, while making fun of Indians for building toilets on Youtube, Pakistani friends will realize one day, that they have made a joke of themselves.
Nevertheless, we would like to thank Pakistani friends for death trapping Chinese Murga.
As per your analysis, which project is better Clean India or China Pakistan Economic Corridor project?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
Tags
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