कैसे प्रधानमंत्री मोदी जी राष्ट्रपति यामीन को चारों खाने चित किया??
2018 Maldives Election Results
The Real Reason Behind
In this video, we will discuss about Maldives election results.
Reference -
https://www.scmp.com/news/china/diplomacy/article/2165597/why-are-china-and-india-so-interested-maldives
https://maldivesindependent.com/politics/live-blog-voting-extended-to-7pm-141439
https://en.wikipedia.org/wiki/Maldivian_presidential_election,_2013
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Original Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
जैसा कि हम सभी जानते हैं, राष्ट्रपति यामीन मालदीव के चुनाव में औपचारिक रूप से अपनी हार मान चुके हैं.
तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति यामीन के कार्य काल के समाप्त होने के बाद 17 नवंबर को इब्राहिम मोहम्मद सोलीह को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी.
जैसा कि कल हम ने चर्चा की थी, 89% भारी भरकम मतदान होने के बाद, इब्राहिम को राष्ट्रपति यामीन की तुलना में बहुमत के 16% अधिक मत मिले थे. इसलिए जनता के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के सिवाय राष्ट्रपति यामीन के पास और कोई चारा नहीं बचा था.
रोचक बात यह है, प्रधानमंत्री मोदी जी ने राष्ट्रपति पद पर चुने गए इब्राहिम से फोन पर बातचीत करके उन्हें शुभकामनाएं दी है. और उन्हें जल्दी से जल्दी भारत आने का न्योता भी दिया है.
इब्राहिम ने भारतीय न्योता स्वीकार कर लिया है, और वह जल्दी ही भारत की यात्रा पर आएंगे.
भारत और अमेरिका ने तो मालदीव के चुनाव परिणामों का स्वागत सबसे पहले किया था, लेकिन चीन को मानो सांप सूंघ गया है.
24 सितंबर को चीन में सरकारी छुट्टी थी, इसलिए मालदीव के चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिकारी उपलब्ध नहीं थे. इस प्रकार के बहाने में भारतीय मीडिया ने विश्वास कर लिया है. लेकिन आपको भी पता है, छोटे से मालदीव में इतनी बड़ी हार के बाद चीन की अकल ठिकाने आने में कुछ समय लगेगा.
कोई बात नहीं, आज या कल में चीन के तरफ से औपचारिक प्रतिक्रिया भी आ जाएगी, जिसमें वह मालदीव में हुए चुनावों की प्रशंसा और स्वागत करेंगे.
इसी बीच समझ आ सकता है, हमारे प्यारे चीनी दर्शकों ने रेत में अपना सर गाड़ लिया है, ताकि उन्हें ऐसा लगे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है.
लेकिन आप जानते हैं, अभी भी मालदीव के ऊपर चीन का 1.3 बिलियन डॉलर का कर्ज है. जो कि मालदीव की जीडीपी का 25% हिस्सा है.
निर्धारित शर्तों के अनुसार, कर्जा चुकाने के लिए चीन मालदीप की नई सरकार पर अब दबाव बनाना चालू कर देगा.
अगर राष्ट्रपति यामीन चुनाव में जीत जाते, तो शायद चीन क़र्ज़ की शर्तों को ढीला करने, अथवा कर्ज माफ करने के बारे में सोचता.
लेकिन कुछ वर्षों पहले जैसा श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में हुआ था, इस बात की संभावना बढ़ गई है, कि अपना कर्ज चुकाने मैं असफल हो जाने के बाद, चीन मालदीव के द्वीपों पर अगले 99 वर्षों के लिए कब्जा पाने के लिए कोशिश करेगा.
राष्ट्रपति यामीन ने बड़ी खुशी से क़र्ज़ लिया था. लेकिन इब्राहिम को चीन से किसी भी उदारता की अपेक्षा किए बगैर इस कर्ज को समय पर चुकाना होगा.
हम बात यह कहना चाह रहे हैं, इस खेल में चीन अभी भी मजबूत दावेदार है.
मालदीव का चुनाव तो एक छोटी सी लड़ाई था , जिसे भारत ने जीत लिया है. लेकिन चीन के साथ हमारा युद्ध अभी भी चल रहा है.
आप इस युद्ध के अस्तित्व को नकार सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से वास्तविकता नहीं बदलेगी.
जैसा कि हमने हमेशा चर्चा की है, मालदीव तो चीन नामक बीमारी का एक लक्षण मात्र है. अगर आपको खांसी जैसे लक्षण से थोड़े समय के लिए आराम मिल जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं होता है, कि आप को टीवी जैसे रोग से निजात मिल गई है.
मालदीव के चुनाव परिणामों का आनंद लेते समय, हमें शतरंज की बिसात के ऊपर से अपनी नजर नहीं हटानी चाहिए.
आश्चर्य करने वाली बात यह है, कुछ ही समय पहले तक भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया प्रधानमंत्री मोदी जी का नाम ले लेकर, मालदीव की समस्या को बुरी तरह से संभालने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराती थी.
लेकिन अब वह, मालदीव की जनता, लोकतंत्र की शक्ति और भारतीय कूटनीति को मालदीव की समस्या सुलझाने का श्रेय दे रहे हैं.
मालदीव के संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो असाधारण नेतृत्व क्षमता दिखाई, इसके लिए उन्हें बधाई देती ना तो कोई खबर हमने पड़ी है, और ना सुनी है.
हमारी अपोजिशन पार्टी मीडिया के अनुसार अगर मालदीव के संकट को बुरी तरह से संभालने का जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी जी हैं, तो क्या मालदीव में सफल चुनावों के आयोजन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का नाम लेकर उन्हें श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए?
एक साधारण से परिदृश्य के बारे में चर्चा करते हैं, अगर मालदीव के इस चुनाव में राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ विपक्ष की तरफ से दो या तीन उम्मीदवार खड़े होते, तो चुनाव के पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलना था.
जिसके कारण राष्ट्रपति यामीन को अवसर मिल जाता, और वह वर्ष 2013 के राष्ट्रपति चुनाव की तरह कई बार मतदान करवाने के लिए कोशिश करते, जब तक उन्हें चुनाव में बहुमत प्राप्त नहीं हो जाता.
हम बहुत ही स्वाभाविक बात कहना जा रहे हैं, अगर मालदीव के लोगों को काला और सफेद दो विकल्प नहीं दिए जाते, तो मालदीव के लोग स्पष्ट जनादेश भी नहीं दे पाते.
जुलाई महीने में जब महागठबंधन ने राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का निश्चय लिया, राष्ट्रपति यामीन की पराजय तभी तय हो गई थी. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हमारा यह वीडियो देख सकते हैं.
इसलिए हमें अपने आप को मूर्ख बनाने की जरूरत नहीं है, मालदीव के चुनाव परिणामों से भारत की रणनीति की सफलता सिद्ध हो गई है. और हमें इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को बधाई और श्रेय देने में कोई झिझक नहीं है.
चलिए थोड़ा हटकर एक और विषय के बारे में बात करते हैं, आजकल पूरे भारत में रफाल लड़ाकू विमान को लेकर बड़ा कोहराम मचा हुआ है.
ऐसे लोगों की भरमार है, जिनके अनुसार लगातार सफलता पूर्वक मोदी सरकार पर हमला करने के लिए राहुल गांधी जी की प्रशंसा की जानी चाहिए.
लेकिन हमारा मत थोड़ा सा हटके है, रफाल विवाद को जिंदा रखने और उसे भड़काने में भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया को पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए.
वह तो इतनी उत्साहित चीयरलीडर्स हैं, कि अगर राहुल गांधी जी 1 रन भी बनाते हैं, तो वह ऐसे नाचने लगते हैं, जैसे राहुल गांधी जी ने छक्का मार दिया हो.
भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ जानबूझकर प्रचार कर रही है, उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है. लेकिन उन्हें यह नहीं कहना चाहिए, कि वह किसी का पक्ष न लेने वाले और सत्य की खोज करने वाले महान लोग हैं.
वास्तव में जब हम अमेरिकी मीडिया और भारतीय मीडिया की तुलना करते हैं. तो हम दोनों को एक जैसा पाते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप को दिन रात गाली देने में अमेरिकी मीडिया को बड़ा अच्छा लगता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ षड्यंत्र कारी एजेंडा चलाने मैं भारतीय मीडिया को गर्व की अनुभूति होती है.
वैसे भी शायद आप सभी समझते होंगे, भारत के हितों की रक्षा करने की तुलना में, भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया पाकिस्तान और चीन के हितों की रक्षा ज्यादा अच्छे से करती हैं.
आज के मुख्य विषय पर लौटते हुए, मालदीव की समस्या, जिसे आज से 5 साल पहले यूपीए की सरकार ने जन्म दिया था, उसको हाल-फिलहाल समाप्त करने में प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो सफलता प्राप्त की है, उसके लिए उनको बधाई दी जानी चाहिए.
बड़े ही साफ तौर पर, हमारे पास इस बात का कोई सबूत मौजूद नहीं है. लेकिन फिर भी ऐसी आशंका है, प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ महागठबंधन के निर्माण को आसान बना कर चीन और पाकिस्तान बदला लेने की फिराक जरूर निकालेंगे.
आपके विश्लेषण के अनुसार, क्या माल दीप की लड़ाई में जीत के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
जैसा कि हम सभी जानते हैं, राष्ट्रपति यामीन मालदीव के चुनाव में औपचारिक रूप से अपनी हार मान चुके हैं.
तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति यामीन के कार्य काल के समाप्त होने के बाद 17 नवंबर को इब्राहिम मोहम्मद सोलीह को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी.
जैसा कि कल हम ने चर्चा की थी, 89% भारी भरकम मतदान होने के बाद, इब्राहिम को राष्ट्रपति यामीन की तुलना में बहुमत के 16% अधिक मत मिले थे. इसलिए जनता के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के सिवाय राष्ट्रपति यामीन के पास और कोई चारा नहीं बचा था.
रोचक बात यह है, प्रधानमंत्री मोदी जी ने राष्ट्रपति पद पर चुने गए इब्राहिम से फोन पर बातचीत करके उन्हें शुभकामनाएं दी है. और उन्हें जल्दी से जल्दी भारत आने का न्योता भी दिया है.
इब्राहिम ने भारतीय न्योता स्वीकार कर लिया है, और वह जल्दी ही भारत की यात्रा पर आएंगे.
भारत और अमेरिका ने तो मालदीव के चुनाव परिणामों का स्वागत सबसे पहले किया था, लेकिन चीन को मानो सांप सूंघ गया है.
24 सितंबर को चीन में सरकारी छुट्टी थी, इसलिए मालदीव के चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिकारी उपलब्ध नहीं थे. इस प्रकार के बहाने में भारतीय मीडिया ने विश्वास कर लिया है. लेकिन आपको भी पता है, छोटे से मालदीव में इतनी बड़ी हार के बाद चीन की अकल ठिकाने आने में कुछ समय लगेगा.
कोई बात नहीं, आज या कल में चीन के तरफ से औपचारिक प्रतिक्रिया भी आ जाएगी, जिसमें वह मालदीव में हुए चुनावों की प्रशंसा और स्वागत करेंगे.
इसी बीच समझ आ सकता है, हमारे प्यारे चीनी दर्शकों ने रेत में अपना सर गाड़ लिया है, ताकि उन्हें ऐसा लगे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है.
लेकिन आप जानते हैं, अभी भी मालदीव के ऊपर चीन का 1.3 बिलियन डॉलर का कर्ज है. जो कि मालदीव की जीडीपी का 25% हिस्सा है.
निर्धारित शर्तों के अनुसार, कर्जा चुकाने के लिए चीन मालदीप की नई सरकार पर अब दबाव बनाना चालू कर देगा.
अगर राष्ट्रपति यामीन चुनाव में जीत जाते, तो शायद चीन क़र्ज़ की शर्तों को ढीला करने, अथवा कर्ज माफ करने के बारे में सोचता.
लेकिन कुछ वर्षों पहले जैसा श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में हुआ था, इस बात की संभावना बढ़ गई है, कि अपना कर्ज चुकाने मैं असफल हो जाने के बाद, चीन मालदीव के द्वीपों पर अगले 99 वर्षों के लिए कब्जा पाने के लिए कोशिश करेगा.
राष्ट्रपति यामीन ने बड़ी खुशी से क़र्ज़ लिया था. लेकिन इब्राहिम को चीन से किसी भी उदारता की अपेक्षा किए बगैर इस कर्ज को समय पर चुकाना होगा.
हम बात यह कहना चाह रहे हैं, इस खेल में चीन अभी भी मजबूत दावेदार है.
मालदीव का चुनाव तो एक छोटी सी लड़ाई था , जिसे भारत ने जीत लिया है. लेकिन चीन के साथ हमारा युद्ध अभी भी चल रहा है.
आप इस युद्ध के अस्तित्व को नकार सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से वास्तविकता नहीं बदलेगी.
जैसा कि हमने हमेशा चर्चा की है, मालदीव तो चीन नामक बीमारी का एक लक्षण मात्र है. अगर आपको खांसी जैसे लक्षण से थोड़े समय के लिए आराम मिल जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं होता है, कि आप को टीवी जैसे रोग से निजात मिल गई है.
मालदीव के चुनाव परिणामों का आनंद लेते समय, हमें शतरंज की बिसात के ऊपर से अपनी नजर नहीं हटानी चाहिए.
आश्चर्य करने वाली बात यह है, कुछ ही समय पहले तक भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया प्रधानमंत्री मोदी जी का नाम ले लेकर, मालदीव की समस्या को बुरी तरह से संभालने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराती थी.
लेकिन अब वह, मालदीव की जनता, लोकतंत्र की शक्ति और भारतीय कूटनीति को मालदीव की समस्या सुलझाने का श्रेय दे रहे हैं.
मालदीव के संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो असाधारण नेतृत्व क्षमता दिखाई, इसके लिए उन्हें बधाई देती ना तो कोई खबर हमने पड़ी है, और ना सुनी है.
हमारी अपोजिशन पार्टी मीडिया के अनुसार अगर मालदीव के संकट को बुरी तरह से संभालने का जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी जी हैं, तो क्या मालदीव में सफल चुनावों के आयोजन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का नाम लेकर उन्हें श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए?
एक साधारण से परिदृश्य के बारे में चर्चा करते हैं, अगर मालदीव के इस चुनाव में राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ विपक्ष की तरफ से दो या तीन उम्मीदवार खड़े होते, तो चुनाव के पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलना था.
जिसके कारण राष्ट्रपति यामीन को अवसर मिल जाता, और वह वर्ष 2013 के राष्ट्रपति चुनाव की तरह कई बार मतदान करवाने के लिए कोशिश करते, जब तक उन्हें चुनाव में बहुमत प्राप्त नहीं हो जाता.
हम बहुत ही स्वाभाविक बात कहना जा रहे हैं, अगर मालदीव के लोगों को काला और सफेद दो विकल्प नहीं दिए जाते, तो मालदीव के लोग स्पष्ट जनादेश भी नहीं दे पाते.
जुलाई महीने में जब महागठबंधन ने राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का निश्चय लिया, राष्ट्रपति यामीन की पराजय तभी तय हो गई थी. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हमारा यह वीडियो देख सकते हैं.
इसलिए हमें अपने आप को मूर्ख बनाने की जरूरत नहीं है, मालदीव के चुनाव परिणामों से भारत की रणनीति की सफलता सिद्ध हो गई है. और हमें इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को बधाई और श्रेय देने में कोई झिझक नहीं है.
चलिए थोड़ा हटकर एक और विषय के बारे में बात करते हैं, आजकल पूरे भारत में रफाल लड़ाकू विमान को लेकर बड़ा कोहराम मचा हुआ है.
ऐसे लोगों की भरमार है, जिनके अनुसार लगातार सफलता पूर्वक मोदी सरकार पर हमला करने के लिए राहुल गांधी जी की प्रशंसा की जानी चाहिए.
लेकिन हमारा मत थोड़ा सा हटके है, रफाल विवाद को जिंदा रखने और उसे भड़काने में भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया को पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए.
वह तो इतनी उत्साहित चीयरलीडर्स हैं, कि अगर राहुल गांधी जी 1 रन भी बनाते हैं, तो वह ऐसे नाचने लगते हैं, जैसे राहुल गांधी जी ने छक्का मार दिया हो.
भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ जानबूझकर प्रचार कर रही है, उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है. लेकिन उन्हें यह नहीं कहना चाहिए, कि वह किसी का पक्ष न लेने वाले और सत्य की खोज करने वाले महान लोग हैं.
वास्तव में जब हम अमेरिकी मीडिया और भारतीय मीडिया की तुलना करते हैं. तो हम दोनों को एक जैसा पाते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप को दिन रात गाली देने में अमेरिकी मीडिया को बड़ा अच्छा लगता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ षड्यंत्र कारी एजेंडा चलाने मैं भारतीय मीडिया को गर्व की अनुभूति होती है.
वैसे भी शायद आप सभी समझते होंगे, भारत के हितों की रक्षा करने की तुलना में, भारत की अपोजिशन पार्टी मीडिया पाकिस्तान और चीन के हितों की रक्षा ज्यादा अच्छे से करती हैं.
आज के मुख्य विषय पर लौटते हुए, मालदीव की समस्या, जिसे आज से 5 साल पहले यूपीए की सरकार ने जन्म दिया था, उसको हाल-फिलहाल समाप्त करने में प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो सफलता प्राप्त की है, उसके लिए उनको बधाई दी जानी चाहिए.
बड़े ही साफ तौर पर, हमारे पास इस बात का कोई सबूत मौजूद नहीं है. लेकिन फिर भी ऐसी आशंका है, प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ महागठबंधन के निर्माण को आसान बना कर चीन और पाकिस्तान बदला लेने की फिराक जरूर निकालेंगे.
आपके विश्लेषण के अनुसार, क्या माल दीप की लड़ाई में जीत के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Original Real Quick Analysis.
As we all know, President Yameen has formally accepted his defeat.
Now, as per scheduled program, Ibrahim Mohammad Solih will take oath of office on 17 November after President Yameen completes his 5 year term.
As we have discussed yesterday, with overwhelming 89% of voting and Ibrahim getting 16% more majority votes, it was just a matter of time for President Yameen to face the truth in the public.
Interestingly, our prime minister modi has not only congratulated president elect Ibrahim, but also invited him to India as soon as possible.
Ibrahim has accepted the invitation, and very soon we will see him arriving in India.
While America and India congratulated Maldives for successful election. China has maintained the silence.
One excuse is, due to public holiday on 24 Sept, Chinese foreign ministry officials are not available to give reaction. While our dear media tend to believe so, the reality seems, China is yet to come to its senses to accept the big scale of defeat in small Maldives.
Nevertheless, today or tomorrow China will come out with official response welcoming successful election process in Maldives.
Meanwhile, understandably our Chinese viewers have also buried their heads in sand, as if nothing has happened.
You know, Maldives has 1.3 billion dollar Chinese debt. which is equal to 25% of Maldivian GDP.
New government will now be pressurized by China to service the loan as per the set conditions.
if Yameen had won, China would have thought of relaxing or cancelling the loan.
As it happened in the case of Hambantota port in Sri Lanka, its quite possible, that China will force new Maldives government to give up control of strategic assets on next 99 year lease to repay the loans.
While Yameen took the loan, but Ibrahim will have to repay it without any Chinese lenience whatsoever.
The point we are trying to make is simple, China is still very much in the game.
Election in Maldives was just battle that India has won, but we are certainly at war with China.
even if you reject it, the existence of this reality will not change.
We have always made the point, Maldives has been symptom of disease. If we get temporary relief from Symptom like Cough , it doesn't mean that we have cured the Tuberculosis disease.
While relishing win in Maldives, we must never forget to see the chessboard.
What is rather surprising is, our opposition party media were at the fore front for calling PM Modi's name for failure in handling in Maldives.
Now, they are thanking people of Maldives, democratic systems and Indian diplomacy.
Frankly, we have not heard any one crediting Prime Minister Modi for his remarkable leadership in handling Maldives.
If Indian opposition party media can blame PM Modi for his failure in handling Maldives, should they not take his name after successful election in Maldives?
lets talk about this simple scenario, if two or three candidate had contested election against President Yameen, in the first round of voting, none of the candidates would have got majority.
thus opening gate for multiple rounds of voting until Yameen gets majority as it happened in 2013 election.
The point we are trying to make is very obvious, People of Maldives would not have given clear mandate if they had not been offered two options Black and White.
President Yameen has lost the election when the joint opposition candidate was fielded against him in the month of July. To know more about this, please watch our this video.
Therefore, lets not make ourselves fool, it was success of grand Indian strategy against Maldives, and we have no hesitation in saying, that Prime Minister Modi deserves credit for it.
Lets talk about something different, now a days, there is so much uproar going on Rafael jet deal in our country.
There are many who are crediting Rahul Gandhi for his persistent and successful attack on Modi government.
But we beg to differ here. Its Indian opposition party media, which must be given its full credit for sustaining this rafael controversy.
They are so enthusiastic cheerleaders, that they start dancing for sixer, even when Batsman in Rahul Gandhi has scored a single run.
We have no issue if Opposition party media is deliberately running anti Modi agenda. They have full right to do so, but they should not claim, that they are truth seeker unbiased media.
In fact, when we watch American media, we realize Indian media is exactly same.
American Media feels pride in abusing President Trump, Indian Media feels the same in abusing Prime Minister Modi.
Anyways, we all understand, opposition party media serves Pakistani and Chinese interests better than Indian interests.
Returning to main topic of this video, we would like to congratulate Prime Minister Modi for his great leadership in solving the problem of Maldives, which was the very creation of Last UPA regime.
Frankly we don't have any evidence but it appears, Now China and Pakistan will somehow try to take revenge from Prime Minister Modi by felicitating Grand Alliance In India.
As per your analysis, Should Prime Minister Modi not be given credit for win in Maldives?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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