चीन के बाद, S400 डील के कारण अमेरिका भारत पर प्रतिबन्ध लगाएगा ??
After China, America to impose Sanctions on India for S400 deal?
Reference -
https://www.npr.org/2018/09/21/650554494/china-fires-back-against-u-s-sanctions-for-purchases-of-russian-weapons
https://timesofindia.indiatimes.com/india/s-400-a-significant-purchase-with-potential-caatsa-implications-says-us/articleshow/65897582.cms
https://nationalinterest.org/blog/buzz/america-striking-back-over-russias-sale-su-35-fighters-and-s-400s-china-31672
http://www.atimes.com/article/outrage-after-china-ensnared-in-americas-russia-sanctions/
https://www.republicworld.com/world-news/us-news/usa-imposes-sanctions-on-the-chinese-entity-equipment-development-department-edd
https://www.indiatoday.in/india/story/president-putin-in-new-delhi-for-summit-on-october-5-1337384-2018-09-11
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Original Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
जैसा कि आप जानते हैं, चीन को अमेरिका के Caatsa कानून का सबसे पहला शिकार बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
अमेरिका का यह नया कानून अगस्त 2017 में अस्तित्व में आया था. इसके बाद दिसंबर 2017 में रूस ने चीन को 10 सुखोई 35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की. और इस साल जनवरी महीने में चीन के लिए S400 की पहली रेजिमेंट के लिए रूस के द्वारा लास्ट डिलीवरी भी पूरी की गई.
इसलिए अमेरिका ने इन 2 बड़े सौदों को Caatsa कानून का उल्लंघन माना. और इन 2 सौदों में शामिल होने वाली चीन के Equipment Development department और उसके निदेशक के ऊपर तगड़े आर्थिक प्रतिबंध ठोक दिए.
ध्यान देने वाली बात यह है, यह दोनों सौदे चीन के Equipment Development department और रूस की रोसोबोरोनेक्सपोर्ट स्टेट कंपनी के बीच हुए थे.
अमेरिकी प्रतिबंधों के लगने से, चीन का यह Equipment Development department अमेरिका से कुछ भी माल आयात नहीं कर पाएगा.
अमेरिकी फाइनेंसियल सिस्टम का लाभ उठाते हुए, चीन का यह डिपार्टमेंट डॉलर में व्यापार भी नहीं कर पाएगा.
चीन के इस डिपार्टमेंट और इसके निदेशक की अमेरिका में स्थित संपत्तियों पर सरकारी कब्जा कर लिया गया है.
अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध ना केवल चीन की दूसरे देशों से हथियार खरीदने की क्षमता को प्रभावित करते हैं, बल्कि इनके कारण चीन दूसरे देशों को अपने हथियार भी नहीं बेच पाएगा.
इन आर्थिक प्रतिबंधों को लगाने के पहले अमेरिका ने काफी सोच विचार किया था. लेकिन चीन को इन आर्थिक प्रतिबंधों के तमाचे की लगने की कोई भनक नहीं लग पाई थी.
आपको याद होगा, Trade war के दो चरणों के दौरान, जैसे ही अमेरिका ने चीन के माल पर आयात शुल्क लगाया था, चीन ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका के माल पर आयात शुल्क जड़ दिया था.
लेकिन इस बार उतनी तेजाइ के साथ, चीन अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं कर पाया. उसने केवल तिल मिलाकर अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंधों को लगाने की गलती सुधारने के लिए धमकी दी.
और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका को भी इन आर्थिक प्रतिबंधों का दुष्परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए.
चीन को यह बात समझ आ जाए तो अच्छा होगा, अभी जितना चीन डॉलर पर निर्भर है, उतना अमेरिका यूआन पर निर्भर नहीं है.
यद्यपि यह देखना रोचक होगा, की अब चीन अमेरिका के खिलाफ कौनसी जवाबी कार्यवाही करेगा, क्योंकि trade war के पहले दो चरणों में ही चीन ने अपनी पूरी गोलिआं अमेरिका के खिलाफ चला दी हैं.
अमेरिका के द्वारा लगाए गए इन आर्थिक प्रतिबंधों को, अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापक आर्थिक युद्ध के अंतर्गत देखा जाना चाहिए.
अमेरिका और चीन के बीच में अभी जो चल रहा है, उसे ट्रेड war कह कर बहुत कम करके आंका जाता है. यह तो इन दो देशों के बीच Economic War चल रही है. जिसे कई स्तरों पर लड़ा जा रहा है.
देखा जाए तो राष्ट्रपति ट्रंप अपने विरोधियों और सहयोगियों पर अधिक से अधिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. ताकि वह सभी से अच्छी डील प्राप्त करने के लिए शक्ति के साथ मोल भाव कर पाए.
दुनिया के किसी भी विशेषज्ञ ने एक बात पर ध्यान नहीं दिया है, की हाल फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के बारे में कुछ सुनाई नहीं दे रहा है.
उत्तरी कोरिया ना तो मिसाइल दाग रहा है, और ना ही परमाणु परीक्षण कर रहा है.
ईरान अब मध्य पूर्व एशिया में ना तो आतंकवाद और ना ही युद्ध को भड़का रहा है.
लड़ाई को दुश्मन के घर तक ले जाने का यही तो लाभ होता है.
दुश्मन के साथ लड़ाई अपने घर में लड़ने के बजाय, अमेरिका ने हमेशा से लड़ाई अपने दुश्मन के घर में लड़ी है.
चाहे राष्ट्रपति ट्रंप आपको पसंद आए या ना आए. लेकिन आज उन्होंने दुनिया में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका प्राप्त कर ली है. दुनिया के बहुत अच्छे भाषण देने वाले राष्ट्रपति ओबामा के 8 वर्षों के शासन के दौरान अमेरिका ने यह शक्ति पूरी तरह से खो दी थी.
अब जबकि अमेरिका ने चीन के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, हमें इन आर्थिक प्रतिबंधों के पीछे छुपे हुए संदेश को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अगले महीने की शुरुआत में, रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत की यात्रा पर आने वाले हैं.
रूस से s400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का सौदा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है.
हमारी मीडिया को अब ऐसा लगता है, चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के जरिए से अमेरिका भारत की s-400 deal को रोकना चाहता है.
हालांकि मीडिया का डरना जायज है, लेकिन इस डर की कोई वजह नहीं है.
बात यह है, आर्थिक प्रतिबंधों को लगाना तो बड़ा आसान होता है, लेकिन उन्हें हटाना ना केवल मुश्किल होता है, बल्कि उन्हें हटाने में बहुत लंबा समय भी लग जाता है.
अभी हाल ही में भारत अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन एग्रीमेंट में शामिल हुआ है. जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को बहुत अधिक बढ़ाना है.
यहां पर कहने की जरूरत नहीं है, अमेरिका भारत से कई बिलियन डॉलर के रक्षा सौदों की जुगाड़ लगाए बैठा है.
मूलभूत रूप से, अमेरिका दुनिया का सबसे मूर्ख देश होगा, अगर वह s-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण भारत पर चीन जैसे आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा.
इस प्रकार भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर, रूस की तरफ निशाना साधते हुए, अमेरिका अपने आप का शिकार कर लेगा .
आप ही बताइए, अगर अमेरिका इन आर्थिक प्रतिबंधों को भारत पर लगा देता है, तो भारत अमेरिका से खरीदे जाने वाले कई बिलियन डॉलर के रक्षा सौदों के लिए भविष्य में पेमेंट कैसे करेगा?
और अगर अमेरिका को आगे आने वाले कुछ महीनों में भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने ही थे, तो फिर इस महीने भारत को Communication Compatibility and Security Arrangements agreement में शामिल करने का क्या मतलब था.
इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा चल रही है, तो दूसरी ओर भारत अमेरिका का रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा सहयोगी बन कर उभरा है.
फिर भी केवल धमकियां देकर अगर एस 400 की डील आसानी से रुक जाए, तो इसमें अमेरिका को क्या नुकसान है.
जैसा कि हम सभी का मानना है, कि चाहे अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध लगे या ना लगे, भारत को रूस से s400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदना चाहिए.
अभी हाल ही में प्राप्त हुई ढिलाई देने की क्षमता का लाभ उठाते हुए, अमेरिका को भारत पर आर्थिक प्रतिबंध ना लगाने का उपाय ढूंढना होगा.
और फिर भी अगर अगले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, तो इसका खामियाजा सिर्फ अमेरिका को उठाना पड़ेगा.
इसलिए यह अनुमान लगाना उचित होगा, कि भारत सरकार को शतरंज की बिसात समझ आ रही होगी. और वह एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को खरीदने के निर्णय से पीछे नहीं हटेगी.
वैसे भी अगर आपके पास छड़ी है, तो ना केवल आपको उसका उपयोग करना आना चाहिए, बल्कि आपको यह भी पता होना चाहिए कि उसे किस पर चलाना है.
आशा की जानी चाहिए, चीन पर एक बार चलाने के बाद, अमेरिका मूर्खतापूर्ण ढंग से Caatsa की उसी छड़ी को भारत पर नहीं चलाएगा.
कल हमारे कुछ दर्शकों ने, इस विषय के ऊपर वीडियो बनाने के लिए हमसे कहा था. इसलिए हमने यह वीडियो बनाया है. अंत में हम उन सभी दर्शकों को धन्यवाद देना चाहेंगे.
आप के विश्लेषण के अनुसार, क्या अमेरिका एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
जैसा कि आप जानते हैं, चीन को अमेरिका के Caatsa कानून का सबसे पहला शिकार बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
अमेरिका का यह नया कानून अगस्त 2017 में अस्तित्व में आया था. इसके बाद दिसंबर 2017 में रूस ने चीन को 10 सुखोई 35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की. और इस साल जनवरी महीने में चीन के लिए S400 की पहली रेजिमेंट के लिए रूस के द्वारा लास्ट डिलीवरी भी पूरी की गई.
इसलिए अमेरिका ने इन 2 बड़े सौदों को Caatsa कानून का उल्लंघन माना. और इन 2 सौदों में शामिल होने वाली चीन के Equipment Development department और उसके निदेशक के ऊपर तगड़े आर्थिक प्रतिबंध ठोक दिए.
ध्यान देने वाली बात यह है, यह दोनों सौदे चीन के Equipment Development department और रूस की रोसोबोरोनेक्सपोर्ट स्टेट कंपनी के बीच हुए थे.
अमेरिकी प्रतिबंधों के लगने से, चीन का यह Equipment Development department अमेरिका से कुछ भी माल आयात नहीं कर पाएगा.
अमेरिकी फाइनेंसियल सिस्टम का लाभ उठाते हुए, चीन का यह डिपार्टमेंट डॉलर में व्यापार भी नहीं कर पाएगा.
चीन के इस डिपार्टमेंट और इसके निदेशक की अमेरिका में स्थित संपत्तियों पर सरकारी कब्जा कर लिया गया है.
अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध ना केवल चीन की दूसरे देशों से हथियार खरीदने की क्षमता को प्रभावित करते हैं, बल्कि इनके कारण चीन दूसरे देशों को अपने हथियार भी नहीं बेच पाएगा.
इन आर्थिक प्रतिबंधों को लगाने के पहले अमेरिका ने काफी सोच विचार किया था. लेकिन चीन को इन आर्थिक प्रतिबंधों के तमाचे की लगने की कोई भनक नहीं लग पाई थी.
आपको याद होगा, Trade war के दो चरणों के दौरान, जैसे ही अमेरिका ने चीन के माल पर आयात शुल्क लगाया था, चीन ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका के माल पर आयात शुल्क जड़ दिया था.
लेकिन इस बार उतनी तेजाइ के साथ, चीन अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं कर पाया. उसने केवल तिल मिलाकर अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंधों को लगाने की गलती सुधारने के लिए धमकी दी.
और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका को भी इन आर्थिक प्रतिबंधों का दुष्परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए.
चीन को यह बात समझ आ जाए तो अच्छा होगा, अभी जितना चीन डॉलर पर निर्भर है, उतना अमेरिका यूआन पर निर्भर नहीं है.
यद्यपि यह देखना रोचक होगा, की अब चीन अमेरिका के खिलाफ कौनसी जवाबी कार्यवाही करेगा, क्योंकि trade war के पहले दो चरणों में ही चीन ने अपनी पूरी गोलिआं अमेरिका के खिलाफ चला दी हैं.
अमेरिका के द्वारा लगाए गए इन आर्थिक प्रतिबंधों को, अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापक आर्थिक युद्ध के अंतर्गत देखा जाना चाहिए.
अमेरिका और चीन के बीच में अभी जो चल रहा है, उसे ट्रेड war कह कर बहुत कम करके आंका जाता है. यह तो इन दो देशों के बीच Economic War चल रही है. जिसे कई स्तरों पर लड़ा जा रहा है.
देखा जाए तो राष्ट्रपति ट्रंप अपने विरोधियों और सहयोगियों पर अधिक से अधिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. ताकि वह सभी से अच्छी डील प्राप्त करने के लिए शक्ति के साथ मोल भाव कर पाए.
दुनिया के किसी भी विशेषज्ञ ने एक बात पर ध्यान नहीं दिया है, की हाल फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के बारे में कुछ सुनाई नहीं दे रहा है.
उत्तरी कोरिया ना तो मिसाइल दाग रहा है, और ना ही परमाणु परीक्षण कर रहा है.
ईरान अब मध्य पूर्व एशिया में ना तो आतंकवाद और ना ही युद्ध को भड़का रहा है.
लड़ाई को दुश्मन के घर तक ले जाने का यही तो लाभ होता है.
दुश्मन के साथ लड़ाई अपने घर में लड़ने के बजाय, अमेरिका ने हमेशा से लड़ाई अपने दुश्मन के घर में लड़ी है.
चाहे राष्ट्रपति ट्रंप आपको पसंद आए या ना आए. लेकिन आज उन्होंने दुनिया में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका प्राप्त कर ली है. दुनिया के बहुत अच्छे भाषण देने वाले राष्ट्रपति ओबामा के 8 वर्षों के शासन के दौरान अमेरिका ने यह शक्ति पूरी तरह से खो दी थी.
अब जबकि अमेरिका ने चीन के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, हमें इन आर्थिक प्रतिबंधों के पीछे छुपे हुए संदेश को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अगले महीने की शुरुआत में, रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत की यात्रा पर आने वाले हैं.
रूस से s400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का सौदा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है.
हमारी मीडिया को अब ऐसा लगता है, चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के जरिए से अमेरिका भारत की s-400 deal को रोकना चाहता है.
हालांकि मीडिया का डरना जायज है, लेकिन इस डर की कोई वजह नहीं है.
बात यह है, आर्थिक प्रतिबंधों को लगाना तो बड़ा आसान होता है, लेकिन उन्हें हटाना ना केवल मुश्किल होता है, बल्कि उन्हें हटाने में बहुत लंबा समय भी लग जाता है.
अभी हाल ही में भारत अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन एग्रीमेंट में शामिल हुआ है. जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को बहुत अधिक बढ़ाना है.
यहां पर कहने की जरूरत नहीं है, अमेरिका भारत से कई बिलियन डॉलर के रक्षा सौदों की जुगाड़ लगाए बैठा है.
मूलभूत रूप से, अमेरिका दुनिया का सबसे मूर्ख देश होगा, अगर वह s-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण भारत पर चीन जैसे आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा.
इस प्रकार भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर, रूस की तरफ निशाना साधते हुए, अमेरिका अपने आप का शिकार कर लेगा .
आप ही बताइए, अगर अमेरिका इन आर्थिक प्रतिबंधों को भारत पर लगा देता है, तो भारत अमेरिका से खरीदे जाने वाले कई बिलियन डॉलर के रक्षा सौदों के लिए भविष्य में पेमेंट कैसे करेगा?
और अगर अमेरिका को आगे आने वाले कुछ महीनों में भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने ही थे, तो फिर इस महीने भारत को Communication Compatibility and Security Arrangements agreement में शामिल करने का क्या मतलब था.
इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा चल रही है, तो दूसरी ओर भारत अमेरिका का रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा सहयोगी बन कर उभरा है.
फिर भी केवल धमकियां देकर अगर एस 400 की डील आसानी से रुक जाए, तो इसमें अमेरिका को क्या नुकसान है.
जैसा कि हम सभी का मानना है, कि चाहे अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध लगे या ना लगे, भारत को रूस से s400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदना चाहिए.
अभी हाल ही में प्राप्त हुई ढिलाई देने की क्षमता का लाभ उठाते हुए, अमेरिका को भारत पर आर्थिक प्रतिबंध ना लगाने का उपाय ढूंढना होगा.
और फिर भी अगर अगले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, तो इसका खामियाजा सिर्फ अमेरिका को उठाना पड़ेगा.
इसलिए यह अनुमान लगाना उचित होगा, कि भारत सरकार को शतरंज की बिसात समझ आ रही होगी. और वह एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को खरीदने के निर्णय से पीछे नहीं हटेगी.
वैसे भी अगर आपके पास छड़ी है, तो ना केवल आपको उसका उपयोग करना आना चाहिए, बल्कि आपको यह भी पता होना चाहिए कि उसे किस पर चलाना है.
आशा की जानी चाहिए, चीन पर एक बार चलाने के बाद, अमेरिका मूर्खतापूर्ण ढंग से Caatsa की उसी छड़ी को भारत पर नहीं चलाएगा.
कल हमारे कुछ दर्शकों ने, इस विषय के ऊपर वीडियो बनाने के लिए हमसे कहा था. इसलिए हमने यह वीडियो बनाया है. अंत में हम उन सभी दर्शकों को धन्यवाद देना चाहेंगे.
आप के विश्लेषण के अनुसार, क्या अमेरिका एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Original Real Quick Analysis.
As you know, China has got the privilege to become first victim of Caatsa.
After this American act came in to effect in August 2017, China got delivery of 10 Sukhoi 35 fighter jets in December 2017. and for first regiment of S400 missile system in China, Russia delivered last batch in the month of January this year.
America considered these two transactions as significant violation of Caatsa, and slapped sanctions on Chinese entity Equipment Development department and its director. Interestingly, these two transactions happened in between Chinese Equipment Development department and Russian Rosoboronexport state company.
As part of sanctions, Chinese Equipment Development department will not be able to import any thing from America.
This Chinese entity wont be able to do any transaction using Dollars within American financial system.
The american property of this company and its director will be blocked.
These sanctions not only limit Chinese ability to buy military equipment from other countries, but also reduces its ability to sell its made in china military equipment to other countries.
While after putting a lot of thought, America imposed sanctions, but it caught China with Surprise.
You may recall, During last two rounds of trade war, as soon as America imposed tariffs on China, China retaliated with its set of tariffs.
However, this time around, China could not retaliate immediately. All it could express was its outrage and asked america to correct its mistake by taking back sanctions.
Otherwise China has threatened america to be ready to bear the consequences of these sanctions.
China must realize here, America is not as much dependent on Yuan, as China is dependent on Dollar.
Though it would be interesting to see, how china will retaliate against America, when it has already ran out of bullets in last two rounds of trade war.
These American sanctions should be seen as third round in America China Economic War.
It would be gross underestimation by calling, what is happening in between America and China as mere Trade War.
Simply, President Trump is working on his policy of applying maximum pressure on American adversaries to get the best deal in negotiations.
What perhaps, no expert in the world has noticed, Now Chinese activities in South China Sea have suddenly stopped.
North Korea is no longer firing missile and conducting nuclear tests.
Iran is no longer fueling terrorism and war in Middle east.
That's the advantage of taking the fight direct to the enemy's house.
America believe in fighting war in the enemy's house, rather than fighting enemy in its own house.
Whether you like or dislike President Trump, he has been successful in gaining center stage leadership in the world, which America miserably lost during 8 years rule of great orator President Obama.
Now that America imposed sanctions China for violating Caatsa. We must not miss the message behind the timing of this decision.
Early next month, Russian President Putin is going to visit India.
India has already reached the final stage of signing Russian S400 missile defense system.
While Indian media seems to believe, there is message for India to prevent S400 Missile deal.
The fear is justified, but it is misplaced.
The point is, its easy to impose sanctions, but its very difficult and takes even longer time to release them.
Whats important here is, recently India entered in to Communication agreement with America, which will enable more defense engagement in between these two countries.
Needless to say that America is eyeing orders worth billions of Dollars from India.
Basically, America has to be a foolish country on earth to impose same Chinese sanctions on India for buying S400 missile defense system.
By imposing sanctions on India, while targeting Russia, America will end up harming itself more.
You tell, with these sanctions imposed, how Indian government will be able to pay America in Dollar for American defense equipment worth billions of dollars in future.
If America were to impose economic sanctions on India in next few months, what was the need to let India enter in to Communication Compatibility and Security Arrangements in this month?
More over, China is designated strategic competitor of America, but India is designated major defense partner of America.
Anyways, before the S400 deal is signed, America will try its best to prevent the deal by verbal threats and indirect messages.
As we all have common view point, India must buy S400 missile defense system with or without American Caatsa sanctions.
By taking advantage of waiver capability, America will find a way to avoid imposition of sanctions on India.
Frankly, if America does impose sanction after few months, America will only be the looser.
Therefore, we assume, Indian government has eyes on the chessboard and will not go back from the S400 buying decision.
In the end, if you have stick, you must know how to use it and on whom to use it.
Hopefully, America will use its mind, before foolishly using stick of Caatsa against India.
Yesterday, few our viewers have asked to make a video on this topic, therefore we made this video. We thank all of them.
As per your analysis, Will America end up imposing sanctions on India for S400 deal?
Please let us know your views in comment section below.
Please find the reference links of this video in the description box below. Thank you friends for watching this video.
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