इतिहास में पहली बार, अमेरिका ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट क्यों किया??
Reference -
https://indianexpress.com/article/world/us-adds-pakistan-china-to-its-blacklist-for-religious-freedom-violations-5489034/
https://www.dawn.com/news/1450827
https://www.dawn.com/news/1380767
https://www.voanews.com/a/us-adds-pakistan-to-blacklist-for-religious-freedom-violations/4696017.html
https://wtvr.com/2018/12/11/us-condemns-10-countries-for-severe-religious-freedom-violations/
https://www.outlookindia.com/newsscroll/trump-admins-move-on-pak-religious-freedom-a-courageous-decision-us-lawmaker/1438259
https://en.wikipedia.org/wiki/Narendra_Modi
https://en.wikipedia.org/wiki/International_Religious_Freedom_Act_of_1998#Scope_and_substance_of_the_Act
https://en.wikipedia.org/wiki/Hinduism_in_Pakistan
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
शायद आपको याद हो, पिछले वर्ष दिसंबर महीने में अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के कारण पाकिस्तान को स्पेशल वॉच लिस्ट में शामिल किया था.
इस साल पाकिस्तान ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी रैंकिंग में बहुत सुधार किया है, उसे पहली बार ऐसे देशों की सूची में शामिल किया गया है, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन करने के कारण विशेष चिंता के साथ देखा जायेगा .
साधारण शब्दों में, इतिहास में पहली बार अमेरिका ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किया है. क्योंकि सिर्फ अपने धर्म और श्रद्धा के अनुसार जीवन जीने के लिए लोगों को पाकिस्तान में परेशान अथवा गिरफ्तार और या तो मार दिया जाता है.
अमेरिका में वर्ष 1998 में पारित International Religious Freedom act के अनुसार, अमेरिकी सरकार को हर साल ऐसी सूची तैयार करनी पड़ती है.
लेकिन पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता आया है, यह बात समझ पाने में अमेरिका को 20 वर्षों का समय लग गया.
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है, पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन पहले से ही इस ब्लैक लिस्ट में शामिल है. और अब पाकिस्तान भी इस ब्लैक लिस्ट में शामिल हो गया है. इस प्रकार से सिद्ध हो जाता है, चीन और पाकिस्तान की दोस्ती हिमालय से भी ऊंची और अरब सागर से भी गहरी है.
जैसे ही किसी देश को स्पेशल वॉच लिस्ट में शामिल किया जाता है, अमेरिकी प्रशासन उस देश में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों को ध्यानपूर्वक देखने लगता है. और इस प्रकार उस देश को नोटिस पर रख दिया जाता है, कि अगर उसने कोई सुधार नहीं किया, तो उसे ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है.
अगर इस दौरान वह देश कोई भी सुधार नहीं दिखलाता है, तो मजबूर होकर अमेरिका उस देश को ब्लैक लिस्ट में शामिल कर देता है. जिसके बाद अमेरिका लगातार उस देश के साथ बातचीत करता है, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को कम किया जा सके.
लेकिन बातचीत मोलभाव से अगर कोई फर्क नहीं पड़ता है, तो उस देश पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
यहां पर रोचक बात यह है, आसिया बीबी को जेल से रिहा करने के बावजूद, पाकिस्तान का प्रमोशन स्पेशल वॉच लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में कर दिया गया.
हो सकता है शायद इसी ब्लैक लिस्ट से अपने आप को बचाने के लिए, पाकिस्तान ने आसिया बीबी को जेल से रिहा किया हो. लेकिन इस बार पाकिस्तान की चाल नाकाम हो गई.
अब आप देखिए, पिछले लंबे समय से पाकिस्तान में हो रहे धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को ध्यानपूर्वक अमेरिकी प्रशासन रिपोर्ट और डॉक्यूमेंट कर रहा था, लेकिन अब पहली बार धार्मिक स्वतंत्रता का सबसे अधिक उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान को शामिल किया गया है .
दोस्तों इससे पहले कि आप निष्कर्ष पर पहुंच जाएं, कि पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगने वाले हैं. अमेरिका के काम करने का तरीका देखिए.
1998 के International Religious Freedom act के अनुसार, ब्लैक लिस्ट में शामिल किसी भी देश को अमेरिकी राष्ट्रपति आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई दे सकते हैं, ताकि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके.
आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई देने की इसी क्षमता का लाभ उठाते हुए, पाकिस्तान को पहली बार ब्लैक लिस्ट में शामिल करने के बावजूद उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिल गई है.
इस प्रकार हम यह कह सकते हैं, ब्लैक लिस्ट होने के बावजूद पाकिस्तान पर अभी हाल फिलहाल आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगेंगे.
ब्लैक लिस्ट में शामिल पाकिस्तान और चीन में यही अंतर है, जब की चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, पाकिस्तान को अभी आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिल गई है.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, जब आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद पिछले वर्षों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चीन के व्यवहार में रत्ती भर परिवर्तन नहीं हुआ है, तो बिना आर्थिक प्रतिबंधों के इस बात की गारंटी कैसे ली जा सकती है, कि धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पाकिस्तान के व्यवहार में सुधार होगा.
अमेरिका के द्वारा पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल करना केवल एक दिखावा मात्र है. हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए, अमेरिका का एक और पक्का दोस्त सऊदी अरब भी इसी ब्लैक लिस्ट में शामिल है, और उसे भी आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई प्राप्त है.
यही कारण है, International Religious Freedom Act जमीन पर काम कर पाने में पूरी तरह से असफल हुआ है.
आप इसके बारे में और अधिक समझ पाएंगे, क्योंकि इसी एक्ट के अनुसार गुजरात दंगों में भूमिका के लिए इतिहास में पहली बार नरेंद्र मोदी के ऊपर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके कारण उन्हें अमेरिका का वीजा नहीं मिल सकता था.
लेकिन जब वह भारत के प्रधानमंत्री बन गए, तो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका ने उन्हें आमंत्रण दिया था.
लेकिन फिर भी सवाल यही खड़ा होता है, पाकिस्तान में होने वाले धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को ध्यान में लाने में अमेरिका को 20 सालों का समय क्यों लगा?
वर्ष 2014 में, पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में यह साफ तौर पर कहा गया, हर साल पाकिस्तान से 5000 हिंदू भारत की ओर पलायन कर जाते हैं. इसके लिए तो धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन और भेदभाव को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की बुरी हालत को दरकिनार करने के लिए हम अमेरिका को जिम्मेदार क्यों ठहराएं, जबकि हमारी अपनी मीडिया उनके द्वारा झेले जा रहे भेदभाव की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित नहीं करती है.
एक सवाल यह भी सामने आता है, जब अमेरिका को बिना आर्थिक प्रतिबंधों के ही पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करना था, तो भी ऐसा करने में अमेरिका को 20 साल क्यों लगे?
इसका जवाब सीधा है, पहले अमेरिका पाकिस्तान के प्यार में पागल था. और अब पाकिस्तान पर दबाव बनाने की इच्छा से उसे इस ब्लैक लिस्ट में शामिल कराया गया है.
धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन तो एक बहाना मात्र है, ऐसा लगता है, अफगानिस्तान में अमेरिका को मौत के जाल में फंसाने के लिए अमेरिका पाकिस्तान को दंडित करना चाहता है.
लेकिन फिर भी अमेरिका पाकिस्तान को कम करके आंक रहा है. अगर अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों के साथ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल किया होता, तो भी पाकिस्तान अफगानिस्तान के युद्ध में अमेरिका की वास्तव में मदद नहीं करता.
चलिए कोई बात नहीं, पिछले 20 वर्षों में पहली बार पाकिस्तान पर कोई नई दवा आजमाने के लिए अमेरिका की प्रशंसा की जानी चाहिए. वैसे भी यह कानून तो 20 वर्षों से काम कर ही रहा है.
आप के विश्लेषण के अनुसार, बिना आर्थिक प्रतिबंधों के पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने के बाद, क्या पाकिस्तान अमेरिका की मदद करेगा, क्या पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सुधार होगा?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
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शायद आपको याद हो, पिछले वर्ष दिसंबर महीने में अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के कारण पाकिस्तान को स्पेशल वॉच लिस्ट में शामिल किया था.
इस साल पाकिस्तान ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी रैंकिंग में बहुत सुधार किया है, उसे पहली बार ऐसे देशों की सूची में शामिल किया गया है, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन करने के कारण विशेष चिंता के साथ देखा जायेगा .
साधारण शब्दों में, इतिहास में पहली बार अमेरिका ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किया है. क्योंकि सिर्फ अपने धर्म और श्रद्धा के अनुसार जीवन जीने के लिए लोगों को पाकिस्तान में परेशान अथवा गिरफ्तार और या तो मार दिया जाता है.
अमेरिका में वर्ष 1998 में पारित International Religious Freedom act के अनुसार, अमेरिकी सरकार को हर साल ऐसी सूची तैयार करनी पड़ती है.
लेकिन पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता आया है, यह बात समझ पाने में अमेरिका को 20 वर्षों का समय लग गया.
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है, पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन पहले से ही इस ब्लैक लिस्ट में शामिल है. और अब पाकिस्तान भी इस ब्लैक लिस्ट में शामिल हो गया है. इस प्रकार से सिद्ध हो जाता है, चीन और पाकिस्तान की दोस्ती हिमालय से भी ऊंची और अरब सागर से भी गहरी है.
जैसे ही किसी देश को स्पेशल वॉच लिस्ट में शामिल किया जाता है, अमेरिकी प्रशासन उस देश में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों को ध्यानपूर्वक देखने लगता है. और इस प्रकार उस देश को नोटिस पर रख दिया जाता है, कि अगर उसने कोई सुधार नहीं किया, तो उसे ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है.
अगर इस दौरान वह देश कोई भी सुधार नहीं दिखलाता है, तो मजबूर होकर अमेरिका उस देश को ब्लैक लिस्ट में शामिल कर देता है. जिसके बाद अमेरिका लगातार उस देश के साथ बातचीत करता है, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को कम किया जा सके.
लेकिन बातचीत मोलभाव से अगर कोई फर्क नहीं पड़ता है, तो उस देश पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
यहां पर रोचक बात यह है, आसिया बीबी को जेल से रिहा करने के बावजूद, पाकिस्तान का प्रमोशन स्पेशल वॉच लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में कर दिया गया.
हो सकता है शायद इसी ब्लैक लिस्ट से अपने आप को बचाने के लिए, पाकिस्तान ने आसिया बीबी को जेल से रिहा किया हो. लेकिन इस बार पाकिस्तान की चाल नाकाम हो गई.
अब आप देखिए, पिछले लंबे समय से पाकिस्तान में हो रहे धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को ध्यानपूर्वक अमेरिकी प्रशासन रिपोर्ट और डॉक्यूमेंट कर रहा था, लेकिन अब पहली बार धार्मिक स्वतंत्रता का सबसे अधिक उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान को शामिल किया गया है .
दोस्तों इससे पहले कि आप निष्कर्ष पर पहुंच जाएं, कि पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगने वाले हैं. अमेरिका के काम करने का तरीका देखिए.
1998 के International Religious Freedom act के अनुसार, ब्लैक लिस्ट में शामिल किसी भी देश को अमेरिकी राष्ट्रपति आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई दे सकते हैं, ताकि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके.
आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई देने की इसी क्षमता का लाभ उठाते हुए, पाकिस्तान को पहली बार ब्लैक लिस्ट में शामिल करने के बावजूद उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिल गई है.
इस प्रकार हम यह कह सकते हैं, ब्लैक लिस्ट होने के बावजूद पाकिस्तान पर अभी हाल फिलहाल आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगेंगे.
ब्लैक लिस्ट में शामिल पाकिस्तान और चीन में यही अंतर है, जब की चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, पाकिस्तान को अभी आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिल गई है.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, जब आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद पिछले वर्षों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चीन के व्यवहार में रत्ती भर परिवर्तन नहीं हुआ है, तो बिना आर्थिक प्रतिबंधों के इस बात की गारंटी कैसे ली जा सकती है, कि धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पाकिस्तान के व्यवहार में सुधार होगा.
अमेरिका के द्वारा पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल करना केवल एक दिखावा मात्र है. हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए, अमेरिका का एक और पक्का दोस्त सऊदी अरब भी इसी ब्लैक लिस्ट में शामिल है, और उसे भी आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई प्राप्त है.
यही कारण है, International Religious Freedom Act जमीन पर काम कर पाने में पूरी तरह से असफल हुआ है.
आप इसके बारे में और अधिक समझ पाएंगे, क्योंकि इसी एक्ट के अनुसार गुजरात दंगों में भूमिका के लिए इतिहास में पहली बार नरेंद्र मोदी के ऊपर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके कारण उन्हें अमेरिका का वीजा नहीं मिल सकता था.
लेकिन जब वह भारत के प्रधानमंत्री बन गए, तो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका ने उन्हें आमंत्रण दिया था.
लेकिन फिर भी सवाल यही खड़ा होता है, पाकिस्तान में होने वाले धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को ध्यान में लाने में अमेरिका को 20 सालों का समय क्यों लगा?
वर्ष 2014 में, पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में यह साफ तौर पर कहा गया, हर साल पाकिस्तान से 5000 हिंदू भारत की ओर पलायन कर जाते हैं. इसके लिए तो धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन और भेदभाव को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की बुरी हालत को दरकिनार करने के लिए हम अमेरिका को जिम्मेदार क्यों ठहराएं, जबकि हमारी अपनी मीडिया उनके द्वारा झेले जा रहे भेदभाव की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित नहीं करती है.
एक सवाल यह भी सामने आता है, जब अमेरिका को बिना आर्थिक प्रतिबंधों के ही पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करना था, तो भी ऐसा करने में अमेरिका को 20 साल क्यों लगे?
इसका जवाब सीधा है, पहले अमेरिका पाकिस्तान के प्यार में पागल था. और अब पाकिस्तान पर दबाव बनाने की इच्छा से उसे इस ब्लैक लिस्ट में शामिल कराया गया है.
धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन तो एक बहाना मात्र है, ऐसा लगता है, अफगानिस्तान में अमेरिका को मौत के जाल में फंसाने के लिए अमेरिका पाकिस्तान को दंडित करना चाहता है.
लेकिन फिर भी अमेरिका पाकिस्तान को कम करके आंक रहा है. अगर अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों के साथ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल किया होता, तो भी पाकिस्तान अफगानिस्तान के युद्ध में अमेरिका की वास्तव में मदद नहीं करता.
चलिए कोई बात नहीं, पिछले 20 वर्षों में पहली बार पाकिस्तान पर कोई नई दवा आजमाने के लिए अमेरिका की प्रशंसा की जानी चाहिए. वैसे भी यह कानून तो 20 वर्षों से काम कर ही रहा है.
आप के विश्लेषण के अनुसार, बिना आर्थिक प्रतिबंधों के पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने के बाद, क्या पाकिस्तान अमेरिका की मदद करेगा, क्या पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सुधार होगा?
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Transcript -
You might know, Last year in December, America placed Pakistan on the special watch list for severe violations of religious freedom.
Now, This year, Pakistan has improved its ranking, and for the first time, it has been placed in the list of countries of particular concern.
In simple words, for the first time in history America has black listed Pakistan for harassing or arresting or killing individual only for simply living their lives according to their religion and belief.
As per International Religious Freedom act passed in the year 1998, American government is supposed to prepare this list each year.
However, it took 20 years for America to realize, that Pakistan is a serious violator of religious freedom.
More importantly, all weather friend of Pakistan China was in the black list even last year, and now Pakistan has also joined it, confirming that their friendship is indeed higher than Himalayas and deeper than Arabian sea.
Once a country is placed on special watch list, American administration is supposed watch the cases of religious freedom violation. Basically, a country is put on notice in this way.
However if there is no improvement, country is placed in the black list and will be known as country of particular concern. Thereafter America enters in to discussion to ensure the reduction in the violation of religious freedom in that country.
However if negotiations and non economic sanctions dont work, economic sanctions are imposed on the country.
What is rather interesting is, Even the release of Asia Bibi could not prevent the promotion of Pakistan from Special watch list to Black list.
Perhaps only to save itself from Black list, Pakistan would have released her. but this time, efforts have failed.
You see, The violation of religious freedom in Pakistan has been reported and documented over the years. but now it has been placed among world's worst violators of religious freedom for the first time.
Friends, before you conclude that Pakistan would soon have to face economic sanctions, please see the american way of doing things.
As per this International Religious Freedom Act of 1998, American president can waive the sanctions against the countries on the black list, if imposing sanctions are against national security Interests of America.
Taking advantage of this waiver capability, America has waived Pakistan from sanctions due to its fresh placement in black list.
Therefore we can say, Pakistan has been blacklisted but without sanctions.
That's the difference in between China and Pakistan. Both are in same black list now, but America has put sanctions on China, but No sanction will be placed on Pakistan this year.
Lets be clear, When these sanctions have failed to show any meaningful change in the behavior of China in the past, Therefore even if America had imposed sanctions on Pakistan, there would have been no guarantee that Pakistan would show any change in behavior.
American decision to place Pakistan in the black list is more of cosmetic in nature. Lets not forget, American friend Saudi Arabia is also placed on this black list but has been waived from economic sanctions.
This perhaps explains why this International Religious Freedom Act has failed so miserably in the past.
You would be able to relate with this act with the simple fact, that Narendra Modi is the only person ever banned under this law and denied American visa due to his role in Gujrat riots.
Only after he became Indian prime minister, keeping the so called national interest in mind, America formally invited him.
However The point remains, why It took 20 years for America to identify religious freedom violation in Pakistan.
Back in the year 2014, it was revealed in the national assembly of Pakistan that around 5000 Hindus are migrating from Pakistan to India every year. Thanks to violation of religious freedom and discrimination.
Rather why should we blame America for disregarding the discrimination faced by Hindus in Pakistan, when our own Media doesn't focus on the discrimination faced by them in Pakistan.
The relevant question remains, if America was to put Pakistan in this black list without sanctions, why it had taken 20 years to do so.
The answer is simple, America was blind in the love of Pakistan. Now as part of a pressure tactic, Pakistan has been placed in this Black list.
Violation of religious freedom is just an excuse, basically America wants to punish Pakistan for catching it in death trap of Afghanistan.
However America is again underestimating Pakistan. Even if Pakistan had been placed on this blacklist with punishing economic sanctions, it would not have helped Americans win Afghan war.
Nevertheless, America must be appreciated for trying something new on Pakistan, which it has not done in last 20 years of existence of this law.
As per your analysis, with sanction waiver, will blacklisting Pakistan help Americans to win afghan war and improve religious freedom in Pakistan?
Please let us know your views in comment section below.
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