सीरिया के बाद, अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से भी पीछे हटेगा??
Reference -
https://www.nbcnews.com/news/us-news/defense-secretary-jim-mattis-leaving-his-post-trump-announces-n950616
https://www.washingtonpost.com/politics/2018/12/20/trumps-war-basic-logic/?utm_term=.8ac59ce1997e
https://economictimes.indiatimes.com/news/international/world-news/donald-trump-signs-bill-on-tibet-into-law-despite-china-protest/articleshow/67175620.cms
https://www.voanews.com/a/us-envoy-doubts-afghan-taliban-s-desire-for-peace/4709060.html
https://lompocrecord.com/news/world/report-trump-will-pull-back-half-of-u-s-soldiers/article_451e07c2-ac34-576d-9bad-6db822b49496.html
https://www.voanews.com/a/afghan-us-taliban-talks/4707000.html
https://www.voanews.com/a/us-weighs-sizable-drawdown-in-afghanistan-officials-say/4709809.html
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
इस वीडियो की शुरुआत में, हम एक अच्छी खबर की चर्चा करते हैं, चीन के जबरदस्त विरोध के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने Reciprocal Access to Tibet Act पर हस्ताक्षर करके उसे कानून में तब्दील कर दिया.
आज के बाद, चीनी अधिकारियों ने अमेरिकियों के तिब्बत पहुंचने के रास्ते में अगर रोड़े अटकाए, तो अमरीकी सरकार उन चीनी अधिकारियों को अमेरिका में नहीं घुसने देगी.
आशा की जानी चाहिए, कि अब चीन को बराबरी से लेनदेन करने का महत्व समझ में आएगा. यहां पर देखने वाली अच्छी बात यह है, कि इस विधेयक के अमेरिकी कांग्रेस से पास होने के 10 दिनों के भीतर, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर भी कर दिए, जबकि चीन ने विरोध दर्ज कराया था, कि ऐसा करके अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं.
अब हम अमेरिकी सैनिकों कि सीरिया से हुई वापसी के बारे में चर्चा करते हैं.
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सीरिया के युद्ध में जीत का दावा किया है, लेकिन ऐसा शायद ही कोई विद्वान होगा, जो सीरिया के युद्ध में इसे अमेरिका की जीत बतलायेगा.
मोटे तौर पर सभी विद्वानों के बीच इस बात पर सहमति है, कि सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी करके अमेरिका एक बहुत बड़ी गलती कर रहा है.
आप तो जानते होंगे, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस निर्णय के विरोध में उनके रक्षा सचिव ने भी इस्तीफा डाल दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप का यह निर्णय सही है या गलत, इसका निर्णय कर पाने की क्षमता तो केवल समय के पास है.
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के बीच में एक आम सहमति है, कि अगर अमेरिका आतंकवादियों का सामना सीरिया और अफगानिस्तान में नहीं करता है, तो अमेरिका को उनसे लड़ाई अमेरिका के अंदर करनी होगी.
बात यह है, अमेरिकी विशेषज्ञों को हमेशा अगले 9/11 का डर लगा रहता है.
राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा लिया गया यह नया कदम, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों की इस डर के ठीक विपरीत है. अमेरिका अब आक्रमण करने की स्थिति से पीछे हटकर रक्षात्मक रुख अख्तियार करने वाला है. इसीलिए तो राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है, कि अगर आईसिस ने अमेरिका के ऊपर दोबारा आक्रमण किया, तो अमेरिका जबरदस्त जवाबी कार्यवाही करेगा.
हालांकि यह अंदाज से उठाया हुआ कदम जान पड़ता है, लेकिन इसके पीछे राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव में किया हुआ वादा पूरा करना चाहते हैं.
पिछले मिटर्म इलेक्शन में अमेरिकी हाउस में अपना बहुमत खो देने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप को शायद यह समझ आ गया था, की कड़े निर्णय लेने का समय आ चुका है.
फिर भी सीरिया से मात्र 2000 सैनिकों की वापसी से बड़ी खबर यह आने वाली है, कि अब अमेरिका अफगानिस्तान से अपने 7000 सैनिक वापस बुलाने वाला है.
आज की डेट में अफगानिस्तान में 14000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, लेकिन अफगानिस्तान के 60% भाग पर तालिबान का कब्जा है.
जब अमेरिका के 14000 सैनिक बढ़ते हुए तालिबान को नहीं रोक पाए, तो इस बात में संदेह है, की मात्र 7000 अमेरिकी सैनिक पाकिस्तान की शक्ति प्राप्त तालिबान के आगे खड़े कैसे रह पाएंगे.
हालांकि अमेरिका के इस निर्णय को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन फिर भी यूएई में अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत का आयोजन करवाने का श्रेय पाकिस्तान ने अपने आप ले लिया है.
हालांकि यह बातचीत 3 दिनों तक हुई थी, लेकिन 2 दिनों के भीतर ही बातचीत समाप्त कर दी गई, और यह वादा किया गया, कि तालिबान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल दोबारा बातचीत के लिए जल्दी ही बैठेंगे.
अब आप देखिए, इस बातचीत को खत्म करते ही अफगानिस्तान में अमेरिका के द्वारा नियुक्त विशेष प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष से मुलाकात करने के लिए पाकिस्तान की यात्रा की.
बात साफ है, पाकिस्तान आईएमएफ के बेलआउट की राह देख रहा है, तो अमेरिका पाकिस्तान के अफ़गानिस्तान बेलआउट का सपना देख रहा है.
पहले भी जब पाकिस्तान को आईएमएफ बेलआउट की जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान ने अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत का आयोजन करवाया था. लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि तालिबान की मांग यह थी, की अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए निश्चित समय सीमा के साथ कार्यक्रम बताना होगा.
स्वाभाविक है अमेरिका को यह बात स्वीकार नहीं थी, इसलिए अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत असफल रही.
इस बार शायद ऐसा लगता है कि अमेरिका ने अपनी रणनीति थोड़ी सी बदली है, अगर तालिबान अफगानिस्तान में आतंकवाद की समस्या को संभाल सके, तो अमेरिका की अफगानिस्तान में स्थाई तौर पर रहने की कोई इच्छा नहीं है.
जैसा कि आप समझ गए होंगे, अमेरिका को तालिबान से एक ऐसे वादे की अपेक्षा है, जिसके अनुसार भविष्य में अमेरिका के घर के अंदर आतंकवादी हमला नहीं होगा, जैसा कि 9/11 को हुआ था.
तालिबान ऐसा वादा करता है, या नहीं, यह देखना रोचक होगा. लेकिन तालिबान झूठ बोलने की कला पाकिस्तान से सीख सकता है, पाकिस्तान हमेशा कहता रहता है, कि वह अपनी जमीन का प्रयोग आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिए नहीं होने देगा, लेकिन वह इसके ठीक विपरीत काम कर रहा है.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, अगर अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से पीछे हटते हैं, तो ना तो यह अमेरिका की जीत होगी, और ना ही तालिबान की जीत होगी. यह तो केवल पाकिस्तान की विजय होगी.
और अफगानिस्तान से अमेरिका का सम्मानजनक विदाई कार्यक्रम करवाने के लिए, पाकिस्तान को आईएमएफ से बेलआउट भी मिल जाएगा.
आप तो जानते हैं, पाकिस्तान ने अमेरिका को अफगानिस्तान के मौत के जाल में फांस रखा है . अब अमेरिका पाकिस्तान से भीख मांग रहा है, कि पाकिस्तान अपने नुकीले दांतो से इस मौत के जाल को काट दे. ताकि शक्तिशाली हाईटेक अमेरिकी सैनिक तिल तिल कर के मरने के बजाय, अपने घर अमेरिका लौट सकें.
अमेरिका को अफगानिस्तान से भाग खड़ा होना होगा, यह केवल वक्त की बात है, और यह सबको पता था. इसलिए तो पाकिस्तान आज खुश हो रहा होगा, कि उसने अमेरिका के अफगानिस्तान में 1 ट्रिलियन डॉलर भी जला दिए, और अफगानिस्तान से भागते हुए अमेरिका आईएमएफ से पाकिस्तान के नाम 8 बिलियन डॉलर का चेक भी भरवा देगा.
अब अमेरिका के लिए अफगानिस्तान विजय की परिभाषा बहुत छोटी हो गई है, अमेरिका केवल घर वापस आने की सोच रहा है, उसकी आशा यह है, कि भविष्य में उसके घर पर हमला नहीं होगा.
इस बात की संभावना बनी हुई है, कि पाकिस्तान अमेरिका को थोड़े समय के लिए जीतने का मौका दे देगा. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है, कि पाकिस्तान साजिश अगले हजार वर्षों के लिए तैयार रखता है, इस बात की संभावना बरकरार है, कि अफगानिस्तान से सैनिक वापस बुलाने के बावजूद, अभी नहीं तो बाद में अमेरिका फिर से उसके घर के अंदर घुसकर मारा जाएगा.
आप के विश्लेषण के अनुसार, क्या लंबे समय के लिए पाकिस्तान अमेरिका को अफगानिस्तान में जीत दर्ज कराने का मौका देगा?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
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इस वीडियो की शुरुआत में, हम एक अच्छी खबर की चर्चा करते हैं, चीन के जबरदस्त विरोध के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने Reciprocal Access to Tibet Act पर हस्ताक्षर करके उसे कानून में तब्दील कर दिया.
आज के बाद, चीनी अधिकारियों ने अमेरिकियों के तिब्बत पहुंचने के रास्ते में अगर रोड़े अटकाए, तो अमरीकी सरकार उन चीनी अधिकारियों को अमेरिका में नहीं घुसने देगी.
आशा की जानी चाहिए, कि अब चीन को बराबरी से लेनदेन करने का महत्व समझ में आएगा. यहां पर देखने वाली अच्छी बात यह है, कि इस विधेयक के अमेरिकी कांग्रेस से पास होने के 10 दिनों के भीतर, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर भी कर दिए, जबकि चीन ने विरोध दर्ज कराया था, कि ऐसा करके अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं.
अब हम अमेरिकी सैनिकों कि सीरिया से हुई वापसी के बारे में चर्चा करते हैं.
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सीरिया के युद्ध में जीत का दावा किया है, लेकिन ऐसा शायद ही कोई विद्वान होगा, जो सीरिया के युद्ध में इसे अमेरिका की जीत बतलायेगा.
मोटे तौर पर सभी विद्वानों के बीच इस बात पर सहमति है, कि सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी करके अमेरिका एक बहुत बड़ी गलती कर रहा है.
आप तो जानते होंगे, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस निर्णय के विरोध में उनके रक्षा सचिव ने भी इस्तीफा डाल दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप का यह निर्णय सही है या गलत, इसका निर्णय कर पाने की क्षमता तो केवल समय के पास है.
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के बीच में एक आम सहमति है, कि अगर अमेरिका आतंकवादियों का सामना सीरिया और अफगानिस्तान में नहीं करता है, तो अमेरिका को उनसे लड़ाई अमेरिका के अंदर करनी होगी.
बात यह है, अमेरिकी विशेषज्ञों को हमेशा अगले 9/11 का डर लगा रहता है.
राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा लिया गया यह नया कदम, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों की इस डर के ठीक विपरीत है. अमेरिका अब आक्रमण करने की स्थिति से पीछे हटकर रक्षात्मक रुख अख्तियार करने वाला है. इसीलिए तो राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है, कि अगर आईसिस ने अमेरिका के ऊपर दोबारा आक्रमण किया, तो अमेरिका जबरदस्त जवाबी कार्यवाही करेगा.
हालांकि यह अंदाज से उठाया हुआ कदम जान पड़ता है, लेकिन इसके पीछे राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव में किया हुआ वादा पूरा करना चाहते हैं.
पिछले मिटर्म इलेक्शन में अमेरिकी हाउस में अपना बहुमत खो देने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप को शायद यह समझ आ गया था, की कड़े निर्णय लेने का समय आ चुका है.
फिर भी सीरिया से मात्र 2000 सैनिकों की वापसी से बड़ी खबर यह आने वाली है, कि अब अमेरिका अफगानिस्तान से अपने 7000 सैनिक वापस बुलाने वाला है.
आज की डेट में अफगानिस्तान में 14000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, लेकिन अफगानिस्तान के 60% भाग पर तालिबान का कब्जा है.
जब अमेरिका के 14000 सैनिक बढ़ते हुए तालिबान को नहीं रोक पाए, तो इस बात में संदेह है, की मात्र 7000 अमेरिकी सैनिक पाकिस्तान की शक्ति प्राप्त तालिबान के आगे खड़े कैसे रह पाएंगे.
हालांकि अमेरिका के इस निर्णय को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन फिर भी यूएई में अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत का आयोजन करवाने का श्रेय पाकिस्तान ने अपने आप ले लिया है.
हालांकि यह बातचीत 3 दिनों तक हुई थी, लेकिन 2 दिनों के भीतर ही बातचीत समाप्त कर दी गई, और यह वादा किया गया, कि तालिबान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल दोबारा बातचीत के लिए जल्दी ही बैठेंगे.
अब आप देखिए, इस बातचीत को खत्म करते ही अफगानिस्तान में अमेरिका के द्वारा नियुक्त विशेष प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष से मुलाकात करने के लिए पाकिस्तान की यात्रा की.
बात साफ है, पाकिस्तान आईएमएफ के बेलआउट की राह देख रहा है, तो अमेरिका पाकिस्तान के अफ़गानिस्तान बेलआउट का सपना देख रहा है.
पहले भी जब पाकिस्तान को आईएमएफ बेलआउट की जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान ने अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत का आयोजन करवाया था. लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि तालिबान की मांग यह थी, की अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए निश्चित समय सीमा के साथ कार्यक्रम बताना होगा.
स्वाभाविक है अमेरिका को यह बात स्वीकार नहीं थी, इसलिए अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत असफल रही.
इस बार शायद ऐसा लगता है कि अमेरिका ने अपनी रणनीति थोड़ी सी बदली है, अगर तालिबान अफगानिस्तान में आतंकवाद की समस्या को संभाल सके, तो अमेरिका की अफगानिस्तान में स्थाई तौर पर रहने की कोई इच्छा नहीं है.
जैसा कि आप समझ गए होंगे, अमेरिका को तालिबान से एक ऐसे वादे की अपेक्षा है, जिसके अनुसार भविष्य में अमेरिका के घर के अंदर आतंकवादी हमला नहीं होगा, जैसा कि 9/11 को हुआ था.
तालिबान ऐसा वादा करता है, या नहीं, यह देखना रोचक होगा. लेकिन तालिबान झूठ बोलने की कला पाकिस्तान से सीख सकता है, पाकिस्तान हमेशा कहता रहता है, कि वह अपनी जमीन का प्रयोग आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिए नहीं होने देगा, लेकिन वह इसके ठीक विपरीत काम कर रहा है.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, अगर अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से पीछे हटते हैं, तो ना तो यह अमेरिका की जीत होगी, और ना ही तालिबान की जीत होगी. यह तो केवल पाकिस्तान की विजय होगी.
और अफगानिस्तान से अमेरिका का सम्मानजनक विदाई कार्यक्रम करवाने के लिए, पाकिस्तान को आईएमएफ से बेलआउट भी मिल जाएगा.
आप तो जानते हैं, पाकिस्तान ने अमेरिका को अफगानिस्तान के मौत के जाल में फांस रखा है . अब अमेरिका पाकिस्तान से भीख मांग रहा है, कि पाकिस्तान अपने नुकीले दांतो से इस मौत के जाल को काट दे. ताकि शक्तिशाली हाईटेक अमेरिकी सैनिक तिल तिल कर के मरने के बजाय, अपने घर अमेरिका लौट सकें.
अमेरिका को अफगानिस्तान से भाग खड़ा होना होगा, यह केवल वक्त की बात है, और यह सबको पता था. इसलिए तो पाकिस्तान आज खुश हो रहा होगा, कि उसने अमेरिका के अफगानिस्तान में 1 ट्रिलियन डॉलर भी जला दिए, और अफगानिस्तान से भागते हुए अमेरिका आईएमएफ से पाकिस्तान के नाम 8 बिलियन डॉलर का चेक भी भरवा देगा.
अब अमेरिका के लिए अफगानिस्तान विजय की परिभाषा बहुत छोटी हो गई है, अमेरिका केवल घर वापस आने की सोच रहा है, उसकी आशा यह है, कि भविष्य में उसके घर पर हमला नहीं होगा.
इस बात की संभावना बनी हुई है, कि पाकिस्तान अमेरिका को थोड़े समय के लिए जीतने का मौका दे देगा. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है, कि पाकिस्तान साजिश अगले हजार वर्षों के लिए तैयार रखता है, इस बात की संभावना बरकरार है, कि अफगानिस्तान से सैनिक वापस बुलाने के बावजूद, अभी नहीं तो बाद में अमेरिका फिर से उसके घर के अंदर घुसकर मारा जाएगा.
आप के विश्लेषण के अनुसार, क्या लंबे समय के लिए पाकिस्तान अमेरिका को अफगानिस्तान में जीत दर्ज कराने का मौका देगा?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो, तो इसे शेयर कीजिए, और हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए. और साथ ही भविष्य में ऐसे ही वीडियो देखने के लिए बैल आइकन पर क्लिक कीजिए. इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Real Quick Analysis.
In the start of this video, we talk about a good news, despite Chinese protest President Trump has signed on Reciprocal Access to Tibet Act, thus making it american law.
Now onward, if Chinese officials restrict Americans access to Tibet, US government will restrict those Chinese officials access to America.
Hopefully, now china will learn the principal of reciprocity hard way. Its equally good to see, here is a president, who signed on the act, within 10 days of passage despite Chinese allegation of american interference in the internal affairs of China.
Now, we come to American decision to complete troops withdrawal from Syria.
While President trump has claimed victory in Syrian war, There is hardly any expert, who shares this end result with Trump.
By and large, there is this consensus that President Trump has committed mistake by withdrawing troops from Syria.
You know, In the opposition to this move of president trump, his defense secretary has also resigned.
Whether Trump has taken right or wrong decision here, only time will be able to tell.
Among american strategic experts, there is unanimous understanding that if America doesn't fight terrorist in Syria and Afghanistan, it will have to fight with them in America.
American experts are basically afraid of next 9/11 attack.
The recent decision of President Trump is against this basic idea. America is now moving from offensive mode to defensive mode. That's why President trump has warned massive retaliation if ISIS attacks over United states again.
Though it appears leap of faith, yet its a decision to fulfill his poll promise.
After losing majority in the house in the November election, President Trump has realized that time to take tough decision has come.
However, withdrawal of 2000 troops from Syria is not so big news as Trump administration now planning to withdraw 7000 troops from Afghanistan.
Right now, America has 14000 troops deployed in Afghanistan, where 60% territory is being controlled by Taliban.
When 14000 american troops could not stop advances of Taliban, its doubtful that 7000 troops will be able to withstand the might of Taliban backed by Pakistan.
While formal announcement in this regard is yet to be made, rather surprisingly Pakistan has taken full credit for organizing the talks in between Taliban and America in UAE.
The talks were scheduled to be held for three days, but got concluded in only two days with the commitment of meeting again soon.
Significantly, just after concluding the talks with Taliban, American special representative for peace in Afghanistan has visited Pakistan to meet Chief of Pakistani army.
You see, While Pakistan is looking for IMF bailout, America is looking for Pakistan's bailout from Afghanistan.
In the past, American talks with Taliban were also arranged by Pakistan, but nothing worked out because Taliban has been insisting confirmed time line for American withdrawal from Afghanistan.
America obviously did not promise time bound withdrawal from Afghanistan and talks failed.
This time around, America seem to have changed its strategy by saying that it has no intention to remain permanently in Afghanistan as long as menace of terrorism is tackled.
You see, America is expecting commitment from Taliban, that Afghan soil will not be used to sponsor attack on American homeland as it happened on 9/11.
It would be interesting to see, if Taliban give such commitment or not, but Taliban can easily learn from Pakistan, which has this habit of saying that Pakistani soil will not be used to sponsor terrorism but does exactly the opposite.
Lets be clear, American withdrawal from Afghanistan will neither be win for Taliban nor for America, it will be win only for Pakistan.
Rather by only allowing honorable exit to Americans from Afghanistan, Pakistan will get US backed bailout from IMF as well.
You all know, Afghanistan has been a death trap for America laid by Pakistan, Now America is begging Pakistan, to cut the death trap, and let go American soldiers to america, else mighty power United states will only die in Afghanistan with slow death.
America has to leave Afghanistan, everyone knows that its just a matter of time. That's why Pakistan must be laughing that even after burning 1 trillion american dollars in Afghanistan, While leaving Afghanistan, America will ask IMF to write a check of 8 Billion Dollar to Pakistan.
For America, the definition of victory in Afghanistan is very simple now, that is to come back home and there should not be any terrorist attack on US homeland.
Its more likely, that Pakistan will grant such short lived victory to America. But lets remember, Pakistan makes conspiracy for next 1000 years. Its also possible that even after withdrawal from Afghanistan, America will be attacked later if not sooner.
As per your analysis, Will Pakistan really help America to win afghan war in the long term?
Please let us know your views in comment section below.
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