डोवल साब के नेतृत्व में हेलीकाप्टर घोटाले के प्रत्यर्पण का भविष्य क्या होगा?
Reference -
https://www.hindustantimes.com/india-news/what-is-agustawestland-bribery-case-decoding-the-rs-3-6k-cr-deal/story-tAlvgyAmbECc365cvOIN9N.html
https://en.wikipedia.org/wiki/2013_Indian_helicopter_bribery_scandal#Cancellation_of_the_contract_by_the_Indian_Government
https://en.wikipedia.org/wiki/Ottavio_Quattrocchi
https://www.youtube.com/watch?v=ZmJ0CIjdzf0
Transcript -
नमस्ते दोस्तों, Real Quick Info चैनल पर आपका स्वागत है. आइए, अब हम अपने Real Quick Analysis के बारे में चर्चा करते हैं.
जैसा कि आपको पता है, क्रिश्चियन मिशेल को सफलतापूर्वक UAE से भारत लाया जा चुका है.
इसलिए हम यह सोच रहे थे, कि भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज की इस महत्वपूर्ण सफलता को लेकर सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया किस प्रकार की प्रतिक्रिया देंगे. क्योंकि वह हमेशा से भ्रष्टाचार का पुरजोर विरोध करते आए हैं, इसलिए आशा थी, कि इस बार तो वह कम से कम भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज के काम की तारीफ करेंगे.
फ्रेंकली हमें इस बात की अपेक्षा नहीं थी, कि इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए वह भारतीय एनएसए अजीत दोवाल को साधुवाद देंगे.
धन्यवाद देने वाली बात यह है, अपने 31 मिनट के कार्यक्रम में उन्होंने इस प्रत्यर्पण के लिए 3 मिनट चर्चा के लिए निकाल लिए.
उनका मुख्य विचार यह था, इस साल जनवरी महीने में क्योंकि इटली की सर्वोच्च अदालत हेलीकॉप्टर घोटाले के सभी आरोपों को खारिज कर चुकी है, इसलिए क्रिश्चन मिशेल के भारत आ जाने के बाद भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी को कुछ बड़ा हाथ लगेगा, इसकी संभावना बहुत कम है.
उन्होंने एक और सवाल पूछा, कि इस हेलीकॉप्टर के घोटाले की सच्चाई का पता लगाने के लिए, भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी आखिर कब इटली से उन दो बड़े अधिकारियों को भारत लेकर आएंगी, जिन्हें सबूतों के अभाव के कारण इटली के उच्चतम न्यायालय ने आरोपों से मुक्त कर दिया है.
हम सभी यह बात जानते हैं, की आशावादी आधा भरा गिलास देखता है, और निराशावादी आधा खाली गिलास देखता है.
हेलीकॉप्टर घोटाले के इस बिचौलिये को भारत लाने को लेकर भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज की प्रशंसा तो छोड़िए, उन्होंने इस महत्वपूर्ण प्रत्यर्पण की उपयोगिता के ऊपर ही बड़ा सवालिया निशान लगाने में सफलता प्राप्त की.
मूलभूत प्रश्न यह खड़ा होता है, क्या इटली की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को ध्यान में रखते हुए भारत की अदालतों ने भी इस केस को बंद कर देना चाहिए?
इस पूरी डील में कोई भ्रष्टाचार हुआ है, जब इसका कोई सबूत इटली की जांच संस्थाएं इकट्ठा नहीं कर पाई, तो आखिर भारत की जांच संस्थाओं की हिम्मत कैसे होती है, कि वह इस Deal में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूत ढूंढने की कोशिश कर रही हैं.
आप तो जानते हैं, भारत के सबसे ईमानदार रक्षा मंत्री ने वर्ष 2013 में स्वीकार किया था, कि इस हेलीकॉप्टर के सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है, और रिश्वत दी गई थी. शायद इसीलिए हेलीकॉप्टर के पूरे कॉन्ट्रैक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
अगर इस हेलीकॉप्टर की Deal में कोई करप्शन नहीं हुआ था, तो उस वक्त की भारत सरकार ने जांच शुरू होने के पहले ही कॉन्ट्रैक्ट को क्यों रोक दिया.
शायद उन्हें भ्रष्टाचार की बू लग गई थी, तभी तो जांच किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचे इसके बहुत पहले, जनवरी 2014 मैं भारत सरकार ने पूरे कॉन्ट्रैक्ट को ही कैंसिल कर दिया था.
इस प्रत्यर्पण की उपयोगिता पर सवालिया निशान लगाते हुए, सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए, एक अन्य हेलीकॉप्टर घोटाले से संबंधित छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके बेटे की चर्चा की.
भारतीय उच्चतम न्यायालय ने इस हेलीकॉप्टर घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके बेटे को पहले ही आरोपों से मुक्त कर दिया था.
लेकिन पीआईएल इंडस्ट्री के सीईओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डाली, जिसके ऊपर अभी भी विचार चल रहा है.
शायद इसीलिए सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया को बड़ा अफसोस हो रहा था, कि भारतीय मीडिया इस रिव्यू पिटिशन को लेकर खबरें कवर क्यों नहीं कर रही है.
यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है, इटली के सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार जो निर्णय लिया, उसमें सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया को पूरा भरोसा है. लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उस को दरकिनार करते हुए वह चाहते है, क्यों उनके दर्शक रिव्यू पिटिशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करते रहें.
सोशल मीडिया में फेक न्यूज़ बहुत फैल रही है, भारत की मीडिया इसके बारे में हमेशा रोती रहती है. लेकिन भारत की मीडिया के द्वारा फैलाये जाने वाले Fake एनालिसिस के बारे में कोई चर्चा नहीं करता है.
अगर फेक न्यूज़ भारत के लिए नुकसानदेह है, तो क्या फेक एनालिसिस भारत के लिए खतरनाक साबित नहीं होगा?
कोई बात नहीं, अब क्रिश्चन मिशेल भारत आ गए हैं, आशा की जानी चाहिए, इस घोटाले को लेकर अब जांच रफ्तार पकड़ एगी.
लेकिन हम यह बात नहीं भूल सकते हैं, कि भारत में आम चुनाव अगले वर्ष होने वाले हैं.
अगर आप यह जानना चाहते हैं, कि इस हेलीकॉप्टर घोटाले का भविष्य क्या होगा, तो आपको भूतकाल में वर्ष 2004 तक जाना होगा.
बोफोर्स घोटाले के उजागर होने के 12 वर्षों के बाद एनडीए सरकार के शासनकाल में वर्ष 1999 में इस घोटाले को लेकर पहली चार्जशीट फाइल की गई.
और जून 2003 में, बेहद ईमानदार क्वात्रोची और उनकी पत्नी के दो ब्रिटिश अकाउंट, जिनमें लगभग 4 मिलियन डॉलर पड़े थे. उन्हें फ्रीज कर दिया गया.
यहां पर ध्यान दीजिए, ईमानदार क्वात्रोची महोदय ने अपने अकाउंट को मुक्त करवाने के लिए कई बार कोशिश की. लेकिन हर बार सीबीआई ने मजबूत सबूत प्रस्तुत किए, जिनके कारण ब्रिटेन की अदालत ने अकाउंट को फ्रीज रखने का आदेश दिया.
इसी बीच फरवरी 2004 में, दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी जी के खिलाफ रिश्वत का मामला सबूतों के अभाव के कारण खत्म कर दिया.
और फिर सरकार भी बदल गई, परिणाम यह हुआ, सीबीआई से बातचीत किए बगैर, भारतीय कानून मंत्रालय ने ब्रिटेन के कोर्ट से दिसंबर 2005 में अनुरोध किया, की इन दो अकाउंट को मुक्त कर दिया जाए.
जनवरी 2006 में जब यह case सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, कि CBI यह निश्चित करे, की इन दो अकाउंट से पैसा ना निकाला जाए.
इससे पहले कि सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट कुछ कर पाते, इन दोनों अकाउंट से 4 मिलियन डॉलर निकाल लिए गए.
अगर बोफोर्स जैसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं था, तो उस समय की यूपीए सरकार ने ब्रिटेन के अकाउंट से इटली का पैसा निकलवाने मे सीधी मदद क्यों की. यूपीए सरकार जिसे अपने पॉलिसी पैरालिसिस के लिए दुनिया ने नवाजा, आखिर उसने पैसा निकलवाने में उदारता पूर्वक इतनी तेजाइ क्यों दिखाई.
भारतीय इतिहास के सबसे अधिक चर्चित बिचौलिए क्वात्रोची का शांतिपूर्वक ढंग से वर्ष 2013 में निधन भी हो गया. बोफोर्स घोटाले का सच उनके साथ इस प्रकार स्वर्ग की ओर चला गया.
आप में से कई लोग इन घटनाओं की याद ताजा कर पाएंगे, हम जैसे आम लोगों की याददाश्त थोड़ी छोटी होती है, लेकिन हमारे फेक एक्सपर्ट्स की याददाश्त बहुत ज्यादा छोटी होती है.
अगर अगले साल केंद्र में सरकार बदल जाती है, तो कृपया आप आश्चर्य में नहीं पड़ना, कि सबूतों के अभाव में क्रिश्चन मिशेल को भी इज्जत के साथ रिहा कर दिया जाएगा.
इस केस को लेकर आज जब सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया आशान्वित नहीं है, तो अगले आम चुनाव के बाद इस केस पर फुल स्टॉप लगाने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी.
अगर अजीत दोवाल और मोदी जी अभी सत्ता में नहीं होते, तो क्वात्रोची की तरह क्रिश्चन मिशेल का भी भारत में प्रत्यर्पण कभी नहीं हो पाता.
मोदी जी दुनिया भर में घूमते रहते हैं, आप में से कुछ लोगों को इससे बड़ी दिक्कत होती है. एक ब्रिटिश नागरिक का यूएई के द्वारा किया गया भारत को यह प्रत्यर्पण, आपको प्रधानमंत्री मोदी जी की विशेष यात्राओं से होने वाले लाभ को दर्शाने के लिए काफी होना चाहिए.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, इस हेलीकॉप्टर घोटाले का भविष्य ना तो भारत की इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी और ना ही भारत के कोर्ट तय करेंगे. बल्कि इस घोटाले का भविष्य आपके द्वारा डाले जाने वाले Vote के द्वारा तय होगा.
यहां पर याद रखने वाली बात यह है, यदि हमने भूतकाल में Bofors घोटाले की गलतियों से नहीं सीखा, तो हम बोफोर्स घोटाले की गलतियां हेलीकॉप्टर घोटाले को लेकर भविष्य में दोहराएंगे.
आप के विश्लेषण के अनुसार, इटली के उच्चतम न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय को ध्यान में रखते हुए, क्या भारतीय कोर्ट को इस हेलीकॉप्टर घोटाले के ऊपर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो, तो इसे शेयर कीजिए, और हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए. और साथ ही भविष्य में ऐसे ही वीडियो देखने के लिए बैल आइकन पर क्लिक कीजिए. इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
जैसा कि आपको पता है, क्रिश्चियन मिशेल को सफलतापूर्वक UAE से भारत लाया जा चुका है.
इसलिए हम यह सोच रहे थे, कि भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज की इस महत्वपूर्ण सफलता को लेकर सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया किस प्रकार की प्रतिक्रिया देंगे. क्योंकि वह हमेशा से भ्रष्टाचार का पुरजोर विरोध करते आए हैं, इसलिए आशा थी, कि इस बार तो वह कम से कम भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज के काम की तारीफ करेंगे.
फ्रेंकली हमें इस बात की अपेक्षा नहीं थी, कि इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए वह भारतीय एनएसए अजीत दोवाल को साधुवाद देंगे.
धन्यवाद देने वाली बात यह है, अपने 31 मिनट के कार्यक्रम में उन्होंने इस प्रत्यर्पण के लिए 3 मिनट चर्चा के लिए निकाल लिए.
उनका मुख्य विचार यह था, इस साल जनवरी महीने में क्योंकि इटली की सर्वोच्च अदालत हेलीकॉप्टर घोटाले के सभी आरोपों को खारिज कर चुकी है, इसलिए क्रिश्चन मिशेल के भारत आ जाने के बाद भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी को कुछ बड़ा हाथ लगेगा, इसकी संभावना बहुत कम है.
उन्होंने एक और सवाल पूछा, कि इस हेलीकॉप्टर के घोटाले की सच्चाई का पता लगाने के लिए, भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी आखिर कब इटली से उन दो बड़े अधिकारियों को भारत लेकर आएंगी, जिन्हें सबूतों के अभाव के कारण इटली के उच्चतम न्यायालय ने आरोपों से मुक्त कर दिया है.
हम सभी यह बात जानते हैं, की आशावादी आधा भरा गिलास देखता है, और निराशावादी आधा खाली गिलास देखता है.
हेलीकॉप्टर घोटाले के इस बिचौलिये को भारत लाने को लेकर भारतीय इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज की प्रशंसा तो छोड़िए, उन्होंने इस महत्वपूर्ण प्रत्यर्पण की उपयोगिता के ऊपर ही बड़ा सवालिया निशान लगाने में सफलता प्राप्त की.
मूलभूत प्रश्न यह खड़ा होता है, क्या इटली की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को ध्यान में रखते हुए भारत की अदालतों ने भी इस केस को बंद कर देना चाहिए?
इस पूरी डील में कोई भ्रष्टाचार हुआ है, जब इसका कोई सबूत इटली की जांच संस्थाएं इकट्ठा नहीं कर पाई, तो आखिर भारत की जांच संस्थाओं की हिम्मत कैसे होती है, कि वह इस Deal में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूत ढूंढने की कोशिश कर रही हैं.
आप तो जानते हैं, भारत के सबसे ईमानदार रक्षा मंत्री ने वर्ष 2013 में स्वीकार किया था, कि इस हेलीकॉप्टर के सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है, और रिश्वत दी गई थी. शायद इसीलिए हेलीकॉप्टर के पूरे कॉन्ट्रैक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
अगर इस हेलीकॉप्टर की Deal में कोई करप्शन नहीं हुआ था, तो उस वक्त की भारत सरकार ने जांच शुरू होने के पहले ही कॉन्ट्रैक्ट को क्यों रोक दिया.
शायद उन्हें भ्रष्टाचार की बू लग गई थी, तभी तो जांच किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचे इसके बहुत पहले, जनवरी 2014 मैं भारत सरकार ने पूरे कॉन्ट्रैक्ट को ही कैंसिल कर दिया था.
इस प्रत्यर्पण की उपयोगिता पर सवालिया निशान लगाते हुए, सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए, एक अन्य हेलीकॉप्टर घोटाले से संबंधित छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके बेटे की चर्चा की.
भारतीय उच्चतम न्यायालय ने इस हेलीकॉप्टर घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके बेटे को पहले ही आरोपों से मुक्त कर दिया था.
लेकिन पीआईएल इंडस्ट्री के सीईओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डाली, जिसके ऊपर अभी भी विचार चल रहा है.
शायद इसीलिए सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया को बड़ा अफसोस हो रहा था, कि भारतीय मीडिया इस रिव्यू पिटिशन को लेकर खबरें कवर क्यों नहीं कर रही है.
यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है, इटली के सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार जो निर्णय लिया, उसमें सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया को पूरा भरोसा है. लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उस को दरकिनार करते हुए वह चाहते है, क्यों उनके दर्शक रिव्यू पिटिशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करते रहें.
सोशल मीडिया में फेक न्यूज़ बहुत फैल रही है, भारत की मीडिया इसके बारे में हमेशा रोती रहती है. लेकिन भारत की मीडिया के द्वारा फैलाये जाने वाले Fake एनालिसिस के बारे में कोई चर्चा नहीं करता है.
अगर फेक न्यूज़ भारत के लिए नुकसानदेह है, तो क्या फेक एनालिसिस भारत के लिए खतरनाक साबित नहीं होगा?
कोई बात नहीं, अब क्रिश्चन मिशेल भारत आ गए हैं, आशा की जानी चाहिए, इस घोटाले को लेकर अब जांच रफ्तार पकड़ एगी.
लेकिन हम यह बात नहीं भूल सकते हैं, कि भारत में आम चुनाव अगले वर्ष होने वाले हैं.
अगर आप यह जानना चाहते हैं, कि इस हेलीकॉप्टर घोटाले का भविष्य क्या होगा, तो आपको भूतकाल में वर्ष 2004 तक जाना होगा.
बोफोर्स घोटाले के उजागर होने के 12 वर्षों के बाद एनडीए सरकार के शासनकाल में वर्ष 1999 में इस घोटाले को लेकर पहली चार्जशीट फाइल की गई.
और जून 2003 में, बेहद ईमानदार क्वात्रोची और उनकी पत्नी के दो ब्रिटिश अकाउंट, जिनमें लगभग 4 मिलियन डॉलर पड़े थे. उन्हें फ्रीज कर दिया गया.
यहां पर ध्यान दीजिए, ईमानदार क्वात्रोची महोदय ने अपने अकाउंट को मुक्त करवाने के लिए कई बार कोशिश की. लेकिन हर बार सीबीआई ने मजबूत सबूत प्रस्तुत किए, जिनके कारण ब्रिटेन की अदालत ने अकाउंट को फ्रीज रखने का आदेश दिया.
इसी बीच फरवरी 2004 में, दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी जी के खिलाफ रिश्वत का मामला सबूतों के अभाव के कारण खत्म कर दिया.
और फिर सरकार भी बदल गई, परिणाम यह हुआ, सीबीआई से बातचीत किए बगैर, भारतीय कानून मंत्रालय ने ब्रिटेन के कोर्ट से दिसंबर 2005 में अनुरोध किया, की इन दो अकाउंट को मुक्त कर दिया जाए.
जनवरी 2006 में जब यह case सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, कि CBI यह निश्चित करे, की इन दो अकाउंट से पैसा ना निकाला जाए.
इससे पहले कि सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट कुछ कर पाते, इन दोनों अकाउंट से 4 मिलियन डॉलर निकाल लिए गए.
अगर बोफोर्स जैसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं था, तो उस समय की यूपीए सरकार ने ब्रिटेन के अकाउंट से इटली का पैसा निकलवाने मे सीधी मदद क्यों की. यूपीए सरकार जिसे अपने पॉलिसी पैरालिसिस के लिए दुनिया ने नवाजा, आखिर उसने पैसा निकलवाने में उदारता पूर्वक इतनी तेजाइ क्यों दिखाई.
भारतीय इतिहास के सबसे अधिक चर्चित बिचौलिए क्वात्रोची का शांतिपूर्वक ढंग से वर्ष 2013 में निधन भी हो गया. बोफोर्स घोटाले का सच उनके साथ इस प्रकार स्वर्ग की ओर चला गया.
आप में से कई लोग इन घटनाओं की याद ताजा कर पाएंगे, हम जैसे आम लोगों की याददाश्त थोड़ी छोटी होती है, लेकिन हमारे फेक एक्सपर्ट्स की याददाश्त बहुत ज्यादा छोटी होती है.
अगर अगले साल केंद्र में सरकार बदल जाती है, तो कृपया आप आश्चर्य में नहीं पड़ना, कि सबूतों के अभाव में क्रिश्चन मिशेल को भी इज्जत के साथ रिहा कर दिया जाएगा.
इस केस को लेकर आज जब सुप्रीम जज ऑफ़ इंडिया आशान्वित नहीं है, तो अगले आम चुनाव के बाद इस केस पर फुल स्टॉप लगाने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी.
अगर अजीत दोवाल और मोदी जी अभी सत्ता में नहीं होते, तो क्वात्रोची की तरह क्रिश्चन मिशेल का भी भारत में प्रत्यर्पण कभी नहीं हो पाता.
मोदी जी दुनिया भर में घूमते रहते हैं, आप में से कुछ लोगों को इससे बड़ी दिक्कत होती है. एक ब्रिटिश नागरिक का यूएई के द्वारा किया गया भारत को यह प्रत्यर्पण, आपको प्रधानमंत्री मोदी जी की विशेष यात्राओं से होने वाले लाभ को दर्शाने के लिए काफी होना चाहिए.
यहां पर साफ करने वाली बात यह है, इस हेलीकॉप्टर घोटाले का भविष्य ना तो भारत की इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी और ना ही भारत के कोर्ट तय करेंगे. बल्कि इस घोटाले का भविष्य आपके द्वारा डाले जाने वाले Vote के द्वारा तय होगा.
यहां पर याद रखने वाली बात यह है, यदि हमने भूतकाल में Bofors घोटाले की गलतियों से नहीं सीखा, तो हम बोफोर्स घोटाले की गलतियां हेलीकॉप्टर घोटाले को लेकर भविष्य में दोहराएंगे.
आप के विश्लेषण के अनुसार, इटली के उच्चतम न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय को ध्यान में रखते हुए, क्या भारतीय कोर्ट को इस हेलीकॉप्टर घोटाले के ऊपर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए?
आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिख कर बता सकते हैं.
इस वीडियो को बनाते समय हमने कुछ ऑनलाइन लेख पढ़े थे. आपको उनकी लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी.
अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो, तो इसे शेयर कीजिए, और हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए. और साथ ही भविष्य में ऐसे ही वीडियो देखने के लिए बैल आइकन पर क्लिक कीजिए. इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
Transcript -
Hello Friends, welcome to Real Quick Info channel. Lets discuss our Real Quick Analysis.
you all know, Christian Michel has been successfully extradited from UAE to India .
We were just wondering, how Supreme Judge of India will respond to this success of Indian investigative agencies. Since he has been always against corruption, we were expecting, that he would now at least appreciate good work done by Indian investigative agencies.
Lets be frank, we didn't expect, that he will applaud that entire operation was conducted under the leadership of NSA Ajit Doval.
Thankfully, In the end, he could allocate three minutes in his 31 minutes program to this extradition.
his main point was, since highest Italian court dismissed all charges of corruption in this deal in last January, its unlikely that anything substantial will come out of this extradition.
he also asked, In order to prove any corruption in this deal, when Indian agencies would be able to extradite two seniors of the company, who were cleared of charges by Italian court due to lack of sufficient evidence.
We have heard this story of optimistic looking at Glass half full and Pessimist focusing on Glass half empty.
Rather than appreciating the extradition of this alleged middleman, The supreme Judge of India has successfully raised question on the very utility of extradition.
The basic question is, Should Indian investigative agencies accept the verdict of Italian court and close the case?
If Italian investigative agencies could not gather sufficient evidence to prove corruption in the deal. how come Indian investigative agencies dare to gather evidence.
You know, Most Honest defense minister of India said in 2013, that Corruption had taken place in the helicopter deal and bribes have been taken. That's why the contract to purchase helicopters had been frozen.
If there was no corruption, why then Indian government cancelled the contract even before the start of Investigation.
Perhaps They knew corruption has taken place, that's why even before investigation could reach any conclusion, government of India in January 2014, Cancelled the contract.
While raising questions on the utility of this extradition, As diversionary tactic, Supreme Judge of India has dragged Chattishgarh BJP chief minister and his son in another helicopter corruption case.
Supreme Court of India has already cleared the name of Chattishgarh BJP Chief Minister and his son in this corruption case.
However a review petition filed by CEO of PIL Industry, against last supreme court order is right now pending before supreme court.
But Supreme Judge of India repented, that Indian Media has not covered the news about this review petition.
Interestingly, He is ready to believe in verdict of Supreme court of Italy, but he is not ready to accept the verdict of Supreme court of India. In Indian case, he wants his viewers to wait until verdict on review petition comes.
Indian media always cry about Fake news being spread by Social Media, but what about the Fake Analysis being presented by Indian main Stream media.
If fake News is harmful to India, will fake analysis not be dangerous for India?
Anyways, now that Christian Michel is in India, We hope, speed of investigation will increase.
However, we cannot forget that Indian general elections are due in Next year.
In this chopper scam, what will happen after next general election, if you want to know, you can go back to year 2004.
12 Years after the Bofors scam surfaced, first chargesheet was filed in the year 1999 when NDA government was in power.
In June 2003, two bank accounts having around 4 Million Dollars were frozen. These accounts were held by Quattrochi and his wife.
Please remember, Quattrochi has requested multiple times to de freeze these accounts, however due to strong evidence presented by CBI, British courts turned down his request.
Significantly in February 2004, Delhi High Court quashed the charges of Bribery against RajiV Gandhi.
And Government at the center changed soon after. The result was, without consulting CBI, Indian law ministry requested British court to release these two accounts in December 2005.
When the matter reached to Supreme court in January 2006, CBI was asked to ensure that Money was not withdrawn from the account.
But before Supreme court & CBI could do anything, Around 4 Billion Dollar money was withdrawn from these two accounts.
If there was no corruption in the Bofors scam, Why UPA government helped in Italian money getting withdrawn from the British accounts. Why this alarmingly great generosity was shown by UPA government which was later known for its policy paralysis.
Thus most publicized middleman in Indian defense deal Quattrochi died peacefully in the year 2013 and with him all the hope to know the truth of Bofors scandal has gone in the heaven.
Many of you would be able to easily recall these incidents. Public memory may be short, but the memory of our fake experts are even shorter.
If central government changes in next year, please don't be surprised if Christian Michel is also released due to lack of evidence.
As supreme judge of India has tried to make the case today, it wont be difficult to put the full stop on this case in next year.
Rather If Ajit Doval and Narendra Modi had not been in power,Just like Quattrocchi, Christian Michel would have never been extradited to India.
Some of you would have raised question on why Prime Minister Modi keep on travelling. Perhaps this extradition of British national from UAE speaks for itself about the benefits of his foreign travels.
Lets be clear, future of this Helicopter scam will not be decided by investigative agencies and courts, but by you all, when you cast vote in next general election.
Lets always remember, those who don't learn from mistakes of past, will commit those mistakes in Future.
If We don't learn from the mistake of Bofors, we will commits the mistake of Bofors in case of Helicopter scam.
As per your analysis, relying on the verdict of Italian court, should Indian court close this case?
Please let us know your views in comment section below.
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