चाबहार पोर्ट में रूस करेगा निवेश, ताकि वह अपना माल भारत भेज सके?


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Reference -


नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं. आपको पता है, अमेरिका ने ईरान के ऊपर इतिहास के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबन्ध लगा रखे हैं, लेकिन इन प्रतिबंधों से चाबहार पोर्ट को ढिलाई मिली हुई है. इसी बीच, पिछले शनिवार को रूस के एक अधिकारी ने चाबहार पोर्ट की यात्रा करि, और उन्होंने साफ़ कर दिया, की रूस चाबहार पोर्ट में निवेश करने के लिए तैयार है. रूस चाबहार बंदरगाह का उपयोग, भारत और साउथ एशिया के बाजार में अपना माल भेजने के लिए कर सकता है. जबकि रूस ने चाबहार बंदरगाह में शामिल होने की इच्छा जताई है, तो ईरान के अधिकारी ने भी साफ़ कर दिया, की चाबहार बंदरगाह में निवेश और वहां से माल के ट्रांसपोर्ट में कोई दिक्कत नहीं है. आपको तो पता है, की भारत ने भी चाबहार पोर्ट में निवेश कर रखा है, चाबहार पोर्ट को लेकर भारत की योजना बड़ी ही महत्वकांछी है. इसलिए चाबहार पोर्ट में रूस का शामिल होना तो एक अच्छी खबर ही माना जा सकता है. लेकिन ईरान ने भी साफ़ कर दिया है, की उसने पूरा चाबहार बंदरगाह ना तो भारत को दिया है, और ना ही रूस को वह देने वाला है. वैसे भी हम भारतीयों को यह गलत फहमी नहीं है, की चाबहार पोर्ट हमारे नियंत्रण में है, जब तक ईरान भारत के साथ हुए एग्रीमेंट का पालन करता रहे, हमें कोई दिक्कत नहीं है. इस साल नार्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को चालू होना था, लेकिन अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से पूरी बात उलझ गयी थी. नार्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर ईरान के बन्दर अब्बास पोर्ट से हो कर गुजरना है, अब जबकि अमेरिकी प्रतिबंध बन्दर अब्बास पोर्ट पर लगे हुई है, इसलिए ईरान भी कोसिस कर रहा है, की वह चाबहार पोर्ट का प्रयोग करके अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली ढिलाई का लाभ उठा सके. बन्दर अब्बास पोर्ट के बजाय यदि चाबहार पोर्ट से नार्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर चालू हो जाता है, तो यह एक अच्छी खबर मानी जा सकती है. लेकिन इस बारे में अभी कुछ भी भविस्य वाड़ी करना जल्दवाजी होगी. आइये देखते है, चाबहार पोर्ट में रूस के शामिल होने की खबर के ऊपर आगे क्या प्रगति होती है. इसी बीच, आपको याद होगा, आज से 30 साल पहले सोवियत यूनियन को अफ़ग़ानिस्तान से इसलिए भगाया गया था, की अफ़ग़ानिस्तान से हो कर रूस को अरब सागर के गरम पानी तक पहुंचने का रास्ता मिल जाने का खतरा था. आज से 400 साल पहले रशियन एम्पायर के शासक पीटर the ग्रेट ने सपना देखा था, की एक दिन रूस पर्शियन गल्फ तक पहुंच जायेगा. लेकिन अब राष्ट्रपति पुतिन के कार्यकाल में सायद रूस का सपना साकार होने वाला है. क्योकि ऐसी खबरे भी आ रही है, की रूस और ईरान के बीच एग्रीमेंट हो गया है, जिसके अनुसार रूस चाबहार पोर्ट पर अपने युद्ध पोत और पनडुब्बियां तैनात कर सकता है. हालांकि चाबहार पोर्ट के रूस का फॉरवर्ड नेवल बेस बनने को लेकर आ रही खबरों की पुस्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन यदि चाबहार पोर्ट पर रूस की नौ सेना आ गयी, तो तय जानिए, खाड़ी में तनाव बहुत बढ़ जायेगा. वैसे आपको भी पता है, इस तरह की खबरों की पुस्टि कभी हो भी नहीं सकती है, लेकिन सवाल उठता है, की यदि ईरान ने रूस को चाबहार पोर्ट को नेवल बेस बनाने की अनुमति दे दी है, तो ऐसा अचानक से कैसे हो गया? इसका कारण यह जान पड़ता है, की इसराइल से ऐसे सन्देश आ रहे हैं, की वह खाड़ी में शांति बनाये रखने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर गस्त लगाएगा. आपतो समझदार है, इसराइल के युद्धपोत यदि खाड़ी में तैरेंगे, तो यह बात ईरान को नागवार गुजरेगी. ईरान ने साफ़ कर दिया है, की यदि इसराइल खाड़ी में आया तो युद्ध भी छिड़ सकता है. अब आपको अंदाज़ा लग गया होगा, खाड़ी में इसराइल के प्रवेश को रोकने के लिए ईरान ने इस तरह की खबरों को हवा दी होगी, की वह रूस को पर्शियन गल्फ के मुँह पर फॉरवर्ड नेवल बेस बनाने देगा. यदि खाड़ी में तनाव बढ़ता है, तो भारत के लिए यह एक बुरी खबर ही साबित होगी. रूस के चाबहार पोर्ट के शांतिपूर्ण व्यापारिक प्रयोग का स्वागत है, लेकिन यदि चाबहार पोर्ट रूस का नौसैनिक अड्डा बन जाता है, तो यह एक सुभ संकेत नहीं होगा. अभी इस काम्प्लेक्स स्थिति के साफ़ होने में समय लगेगा, इसलिए हमें ध्यान से देखना होगा. आज का बेहद आसान सवाल है, भारत के बाद, चाबहार पोर्ट में कौन सा देश निवेश करने की सोच रहा है? पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, Manoj kumar Choudhary . और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.


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