रूस में लगातार जबरदस्त विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं??


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Reference -



नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

आपको सायद पता हो, रूस में राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता के ऊपर मजबूत पकड़ के विरोध में जबरदस्त विरोद प्रदर्शन चालू हो चुके हैं.



पिछले सप्ताह प्रोटेस्ट कर रहे 1000 लोगों को पकड़ लिया गया था, और कल तक 800 और लोगों को बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने के लिए पकड़ लिया गया है.



रशियन पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को दबाने की पिछले सप्ताह कोसिस करि थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन ख़तम नहीं हो रहे हैं.



जबकि पिछले सप्ताह सयुंक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रवक्ता ने चिंता प्रकट करि थी, की रूस की पुलिस विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग कर रही है.



चूँकि कुछ समय से मास्को शहर में तनाव चल रहा है, इसलिए सवाल यह उठता है, की आखिर यह बबाल हो क्यों रहा है.



बात यह है दोस्तों, 8 सितम्बर को मास्को सिटी के ड्यूमा इलेक्शन होने हैं. सिंपल सब्दो में यह पूरा विवाद मास्को के नगर निगम के चुनाव को लेकर है.



चुनाव में लड़ने के लिए हरेक इंडिपेंडेंट उम्मीदवार को 3% मतदाताओं के सिग्नेचर जमा करने होते हैं, लेकिन यदि इन जमा किये गए सिग्नेचर्स में से 10 फ़ीसदी से अधिक सिग्नेचर फ़र्ज़ी पाए जाते हैं, तो उस उम्मीदवार की चुनाव में इंडिपेंडेंट उम्मीदवारी कैंसिल कर दी जाती है.



लेकिन पार्टी के उम्मीदवारों को सिग्नेचर जमा करने के इस झंझट में नहीं फसना पड़ता है.



अब ध्यान देने वाली बात यह है, की 17 जुलाई को  opposition के सभी 57 कैंडिडेट्स की उम्मीदवारी इसलिए कैंसिल कर दी गयी, क्योकि उन्होंने 10 फ़ीसदी से अधिक फ़र्ज़ी वोट जमा करवा दिए थे.



इसलिए विरोधी उम्मीदवारों को लगता है, की राष्ट्रपति पुतिन मास्को के सिटी इलेक्शन तक में अपनी पकड़ को पहले की तरह मजबूत बनाये रखना चाहते हैं, इसलिए विरोधी पक्ष को नगर निगम के चुनाव तक में लड़ने नहीं दिया जा रहा है.



तभी से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की कोसिस की जा रही है, लेकिन मास्को अथॉरिटीज ने इन विरोध प्रदर्शनों को अनुमति नहीं दी है. opposition के लीडर्स को भी गिरफ्तार किया जा रहा है. लेकिन फिर भी सोशल मीडिया का कमाल देखिये, इतने दमन के बाबजूद विरोध प्रदर्शन तो हो ही रहे हैं.



इसलिए आप सोच रहे होंगे, की आखिर जहाँ पर सुई काम कर सकती थी, वहां पर रूस के अधिकारिओं ने तलवार का प्रयोग क्यों किया.



क्या एक छोटा सा 45 सदस्यीय  नगर निगम चुनाव राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता को चुनौती दे सकता है? इसका जवाब किसी को नहीं मालूम, लेकिन सत्ता में बैठे हुए लोगों को डर तो लगता ही है.



गौर करने वाली बात यह है, पिछली बार बड़े लेवल के विरोध प्रदर्शन वर्ष 2012 में हुए थे. जिनमे चुनौती सीधे राष्ट्रपति पुतिन को दी गयी थी.



लेकिन हाल के विरोध का टारगेट अभी भी पुतिन साब नहीं है, लेकिन कब वह विरोध प्रदर्शन का सीधा टारगेट हो जाये किसी को नहीं पता.



वर्ष 2018 में पुतिन साब को अगले 6 सालों का कार्यकाल मिला था, वर्ष 2024 में उन्हें शासन करते हुए लगातार 12 वर्ष हो जायेंगे.



पहले एक राष्ट्रपति केवल लगातार 8 वर्षो के लिए शासन कर सकता था, लेकिन आपको याद होगा, पुतिन साब ने संविधान को वदलकर यह समय अवधि बढ़ाकर 12 वर्ष कर दी थी.



यदि पुतिन साहब संबिधान को और नहीं बदलते हैं, तो वह 2024 का चुनाव तो नहीं लड़ पाएंगे.  पिछली बार वर्ष 2008 में पुतिन साब ने अपने कमजोर दोस्त को राष्ट्रपति बनवा दिया था, और खुद प्रधान मंत्री बन गए थे.



क्या वर्ष 2024 में भी यही होने दिया जायेगा? यह सवाल मुँह बाएं रूस के विपक्ष का सामना कर रहा है?



इसी बीच आपको पता है, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के बीच राष्ट्रपति पुतिन की अप्रूवल रेटिंग भी नीचे गिरती चली जा रही है,  ज्यादातर लोगों की इनकम नहीं बढ़ पा रही है, और करोड़ों  लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जे रहे हैं.



इसलिए पुतिन साहब को कमजोर देखकर, मास्को के नगर निगम के चुनाव तो एक बहाना है, असली टारगेट तो वर्ष 2024 का चुनाव है.



लेकिन क्या पता, जनता का विरोध कब कौन सा रुख ले ले, हो सकता है वर्ष 2024 के पहले ही पुतिन साहब की सत्ता खतरे में आ जाये. अभी तो ऐसा होने की सम्भावना कम ही लगती है,  लेकिन पॉलिटिक्स में कब क्या हो जाये, कहा नहीं जा सकता है.



आज का बेहद आसान सवाल है, किस शहर के नगर निगम के चुनाव को लेकर रूस में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं?



पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  Gaurav Kumar   .







इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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