कश्मीर को लेकर चीन,टर्की,मलेशिया&अमेरिका ने क्या प्रतिक्रिया दी??
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Reference -
जैसा की आपको पता है, हम एक ऐतिहासिक तारीख से गुजर रहे हैं,
कल ही ऐसी खबरे आयी थी, की पाकिस्तान ने अर्जेंट हेल्प के लिए अपने मित्र देश जैसे टर्की और मलेशिया से हाल के घटना क्रम को लेकर बात करि है.
ऐसा बताया जा रहा है, टर्की ने मजबूती के साथ पाकिस्तान का साथ देने का वादा फ़ोन पर दोहरा दिया है. अच्छा होता, अगर पाकिस्तान की खुसी के लिए टर्की यह बात ऑफिशियली स्टेटमेंट जारी करके भी दुनिया को बता देता.
लेकिन मलेशिया ने पाकिस्तान को कौन सी गोली दी, यह अभी तक पता नहीं लग पाया है.
जहाँ तक आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉउन्सिल का सवाल है, पाकिस्तान के विदेश मंत्री का ट्वीट आया था, की OIC में जम्मू और कश्मीर को लेकर आज बात चीत होने वाली है.
ध्यान रखने वाली बात यह है, की 4 अगस्त को ही OIC ने भारत के कदमो की निंदा करि थी, और स्टेटमेंट जारी करके, अंतर्राट्रीय समुदाय से इस मामले के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए हस्तक्छेप का आह्वाहन किया था.
इसलिए OIC कांटेक्ट ग्रुप की मीटिंग के बाद, भारत के लिए कोई सकारात्मक मैसेज आएगा, इसकी हमें कोई उम्मीद भी नहीं है. वैसे भी हर किसी को खुश रखने का ठेका हमने लिया नहीं है. लेकिन जम्मू कश्मीर का विकास करके उसे खुश हाल बनाने की राह पर भारत आगे बढ़ चुका है.
सुबह ही अमेरिका की तरफ से प्रतिक्रिया मिल गयी थी , की उसने नोट किया है, की कश्मीर को लेकर कानून बनाना भारत का आंतरिक मामला है, और अमेरिका चाहता है, की पाकिस्तान और भारत के बीच शांति बनी रही .
जबकि कल सुबह इस बारे में सबको पता लग गया था, की भारत सरकार जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में बाँट रही थी, लेकिन फिर भी कल से लेकर आज तक चीन रेत में अपना सर गाड़े रहा..
अब ऐसा तो हुआ नहीं होगा, की चीन को भारत में क्या हो रहा है, यह पता ही नहीं था. अगर चीन को पता नहीं था, तो ऐसा हो ही नहीं सकता, की उसके प्यारे दोस्त पाकिस्तान ने उसे नहीं बताया होगा.
लेकिन पॉइंट यहाँ पर यह है, की चीन को इस बारे में प्रतिक्रिया देने में 72 घंटो का समय क्यों लगा. ऊपरी तौर पर देखें, तो कारण समझ में यह आता है, की आज भारत के साहसी गृह मंत्री ने लोक सभा में साफ कर दिया, की जब वह जम्मू और कश्मीर की बातकरते हैं, तो उसमे POK और अक्साई चिन दोनों ही आते हैं.
इसलिए चीन को आज स्टेटमेंट जारी करना पड़ गया, की उसे भारत का यह कदम स्वीकार्य नहीं है. वैसे हम भारतीय ऐसी कोई अपेक्षा भी नहीं रखते हैं, की चीन भारत के इस कदम को स्वीकार करे.
लेकिन बात यहाँ पर बड़ी है, चीन ने जिस प्रकार दो स्टेटमेंट जारी करने में देरी लगायी, और अगर पाकिस्तान सोचता है, की ऐसे देश भारत के खिलाफ मौका पड़ने पर उसका समय पर साथ देंगे, तो पाकिस्तान को हमारी तरफ से गुड लक.
वैसे भी पाकिस्तान के हर मौसम के दोस्त चीन ने इतिहास में बार बार सिद्ध किया है, की वह पाकिस्तान का केवल बहार में साथी है. पाकिस्तान के लोग अमेरिका को गांलियां देना अपना हक़ मानते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इस सवाल के ऊपर नहीं सोचा, की आखिर 1965 1971 कारगिल में चीन ने पाकिस्तान की मदद क्यों नहीं करि?
anyways अगर चीन के दो स्टेटमेंट की लॉलीपॉप से पाकिस्तान खुश है, तो बात ही अलग है.
आगे बढ़ते हुए, अगर आप हमारे विपक्षी दलों की बातें सुन रहे हैं, तो आपको यह सुनने की और जानने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है, की पाकिस्तान के लीडर्स भारत के इस कदम के बारे में क्या सोचते हैं.
इसी बीच पाकिस्तान की सेना की तरफ से कमेंट आ गया, की वह कश्मीर के लिए हर किसी हद को पार कर सकते हैं.
और पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने भी फिर से कह दिया, की भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हुआ, तो बड़ी तवाही होगी, इसलिए पश्चिमी दुनिया को इस विवाद में हस्तछेप करना चाहिए.
आप अगर इतिहास को देखें, दुनिया कहाँ से कहाँ पहुंच गयी है, पाकिस्तान के लोग वही गिसी पिटी पुरानी धमकिया दोहराते रहते हैं. अरे भाई, 1998 से लेकर 2019 तक किसी नई धमकी को ही ईजाद कर लेते.
बात यह है, पाकिस्तान की धमकियाँ सुनते सुनते दुनिया के कान पाक चुके हैं, लेकिन अभी तक पाकिस्तान का मुँह नहीं थका है.
लेकिन अंत में हमें यही कहना है, की मोदी सरकार ने जो साहसिक कदम उठाया है, उसे सही बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है. इसलिए कश्मीर के लोगो के साथ हम अच्छा व्यवहार करें, इसका हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए.
चलिए देखते हैं, आगे दुनिया के अन्य देशों की तरफ से कैसी प्रतिक्रियाएं आती है.
आज का बेहद आसान सवाल है, किस मित्र देश से पाकिस्तान ने अर्जेंट हेल्प मांगी, लेकिन उस देश की तरफ से रिस्पांस अभी तक नहीं मिला है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, आशुतोष.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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