चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (RECP) करने से भारत ने किया इनकार


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Reference -
https://www.livemint.com/politics/news/industry-objections-may-force-centre-to-reconsider-rcep-1564767019098.html
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-insists-regional-comprehensive-economic-partnership-only-if-china-lifts-curbs-on-it/articleshow/70506701.cms
https://www.livemint.com/politics/news/industry-objections-may-force-centre-to-reconsider-rcep-1564767019098.html
https://www.business-standard.com/article/economy-policy/rcep-meet-india-china-refuse-to-budge-on-tariffs-services-trade-119080201897_1.html
https://www.thehindubusinessline.com/economy/rcep-negotiations-india-lists-out-demand-before-china-for-market-access/article28805927.ece
https://www.cnbc.com/2019/06/24/malaysia-mahathir-rcep-can-go-on-without-india-for-the-time-being.html
https://en.wikipedia.org/wiki/Regional_Comprehensive_Economic_Partnership



नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

आप में से हमारे ज्यादातर viewers ने हमेशा से भारत के रीजनल कम्प्रेहैन्सिव इकनोमिक पार्टनरशिप में शामिल होने का विरोध किया है.



भारत और चीन समेत 16 देशों के बीच इस पार्टनरशिप के आईडिया ने वर्ष 2012 में जन्म लिया था. सबसे पहले तो सीधी और कड़वी बात यह है, की यह कोई पार्टनरशिप एग्रीमेंट नहीं है, सिंपल शब्दो में यह भारत का चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है.



पिछले कुछ सालों में हर गुजरते हुए साल को इस एग्रीमेन्ट को फाइनल करने का अंतिम साल माना जाता है, लेकिन यह एग्रीमेंट अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है.



चीन के नेतृत्व में लगातार भारत पर दवाब बनाया जा रहा है, की भारत को 90 फीसदी माल के ऊपर से tariff हटा लेने चाहिए, ताकि ये सभी देश भारत के बाजार में अपना माल डंप कर सके.



इन सभी देशों को भारत की पार्टनरशिप नहीं, वल्कि केवल भारत का बाजार चाहिए.



अच्छी बात यह है, भारत की कोर इंडस्ट्रीज जैसे आयरन, स्टील, टेक्सटाइल और डेरी  ने साफ़ तौर पर सरकार को बता दिया है, अगर इन देशों से भारत में सस्ते माल की बाढ़ आयी, तो हमारी सारी इंडस्ट्रीज बिना बारिश के डूब कर मर जाएगी.



तो दूसरी और भारत की आईटी जैसी सर्विस इंडस्ट्रीज को इन देशो में पैठ बनाने का मौका ही नहीं दिया जाता है. जबकि हमारी आईटी कंपनियों ने चीन में निवेश किया है, और उनके 90 फीसदी एम्प्लोयी चीनी नागरिक है, लेकिन चीन में उनके रास्ते में इतने रोड़े रखे हैं, की हमारी कम्पनियाँ कॉन्ट्रैक्ट जीत  नहीं पाती है.



आप ही बताये, जब हम पुरे वेस्टर्न वर्ल्ड को अच्छी सॉफ्टवेयर सर्विस सस्ते में बेच रहे हैं, तो क्या हम चीन  को नहीं बेच पाएंगे.



जबकि भारत की चिंताएं बड़ी ही स्वाभाविक हैं, लेकिन इन 15 देशों ने भारत को संतोष देने के लिए कोई अच्छी डील आजतक नहीं दी हैं.



इन सभी देशो के साथ एक ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने से पहले, हमें यह याद रखना चाहिए,  पिछले साल इस एग्रीमेंट में शामिल होने वाले सभी देशो के साथ व्यापर करने से भारत को भारी भरकम 105 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ था, जिसमे 54 बिलियन डॉलर का सबसे तगड़ा घाटा चीन ने भारत को दिया था.



जब बिना फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के ये सभी देश भारत का खून चूस रहे हैं, तो एग्रीमेंट हो जाने के बाद क्या यह भारत को जिन्दा छोड़ेंगे.



क्योकि यह एग्रीमेंट आगे नहीं बढ़ पा रहा है, इसका ठीकरा भारत के सर पर फोड़ा जाता है, और चीन की तरफ से  अन्य देशो के द्वारा यह आईडिया भी दिया जाता है, की हाल फिलहाल बिना भारत के इस एग्रीमेंट को फाइनल कर लिए जाये.





अगर बिना भारत के इस एग्रीमेंट को करना है, तो अन्य 15 देशों को भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की तरफ से ढेर सारा गुड लक फ्री में दिया जाता है.



भारत को अपने बड़े मार्केट की मोल भाव की शक्ति पता है, इसलिए भारत सरकार ने अपनी डिमांड की लम्बी लिस्ट चीन के हाथो में दे दी है.



और साफ़ कर दिया है, इंडिया इस अनफेयर एग्रीमेंट में तब तक शामिल नहीं हो पायेगा, जब तक चीन समेत अन्य सभी देश भारत की चिंताओं का निराकरण नहीं करते हैं.



और तो और चूँकि हमारी सरकार को पता था, की इस 2 और 3 अगस्त की मीटिंग में कुछ होने वाला नहीं है, इसलिए भारत के कॉमर्स मिनिस्टर ने भी इस फालतू की मीटिंग को अटेंड न करते हुऐ, यह कह दिया की उन्हें ज्यादा इम्पोर्टेन्ट राज्य सभा का सेशन अटेंड करना है.



वैसे भी 15 देशो के साथ एक बड़ी ख़राब डील करने से अच्छा है, इस समूह के 15 देशो में से जिस किसी को भी भारत के साथ द्विपक्षीय फ्री एंड फेयर ट्रेड एग्रीमेन्ट करना हो, उसके साथ एग्रीमेंट कर लिया जाए.



चीन के दवाब के आगे भारत सरकार के द्वारा लिया गया  फर्म डिसिशन प्रसंशनीय है.



हम सभी को हमेशा से यही लगता है, की हमारी सरकार चीन की मीठी मीठी बातों में फसती चली जा रही है. लेकिन जिसप्रकार भारत ने इन दो दिनों में मजबूती के साथ अपनी बात खरे शब्दों में चीन को सुना दी है,  यह एक स्वागत योग्य परिवर्तन है.



आज का बेहद आसान सवाल है, किस देश के उकसावे पर भारत के बिना RECP एग्रीमेंट करने का आईडिया बार बार दिया जाता है.


पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  rajesh mahesh   .



इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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