चीन के ईरान में $400 बिलियन के निवेश से भारत कैसे प्रभावित होगा??
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Reference -
https://www.forbes.com/sites/kenrapoza/2019/09/16/drone-wars-china-has-400-billion-at-stake-in-iran-oil/#7ee8b5ac468a
https://www.forbes.com/sites/arielcohen/2019/09/19/chinas-giant-400-billion-iran-investment-snubs-trump/#257ed6dd84d1
http://www.globalconstructionreview.com/news/china-de5velop-arctic-silk-road/
https://www.petroleum-economist.com/articles/politics-economics/middle-east/2019/china-and-iran-flesh-out-strategic-partnership
https://www.middleeastmonitor.com/20190918-iran-china-agree-deals-worth-400bn/
https://oilprice.com/Geopolitics/Middle-East/War-In-The-Middle-East-Is-Chinas-Worst-Nightmare.html
https://www.forbes.com/sites/kenrapoza/2019/09/16/drone-wars-china-has-400-billion-at-stake-in-iran-oil/#7ee8b5ac468a
https://www.forbes.com/sites/arielcohen/2019/09/19/chinas-giant-400-billion-iran-investment-snubs-trump/#257ed6dd84d1
http://www.globalconstructionreview.com/news/china-de5velop-arctic-silk-road/
https://www.petroleum-economist.com/articles/politics-economics/middle-east/2019/china-and-iran-flesh-out-strategic-partnership
https://www.middleeastmonitor.com/20190918-iran-china-agree-deals-worth-400bn/
https://oilprice.com/Geopolitics/Middle-East/War-In-The-Middle-East-Is-Chinas-Worst-Nightmare.html
पिछले कुछ दिनों से हमारे बहुत से दर्शकों का कहना था, की हम चीन और ईरान के बीच 400 बिलियन डॉलर की डील्स के बारे में वीडियो बनाये. इसलिए हमने इस टॉपिक पर यह वीडियो बनाया है.
जैसा की ईरान और चीन के बीच डील्स के बारे में व्यापक तौर पर मीडिया में खबरें छपी है. लेकिन ज्यादातर जगहों पर चीज़ों को मिलाया जा रहा है.
सबसे पहले तो साफ़ करने वाली बात यह है, यह 400 बिलियन डॉलर की डील्स कोई नयी नहीं है. वर्ष 2016 में ईरान और चीन के बीच कम्प्रेहैन्सिव स्ट्रेटेजिक पार्टरनशिप को लेकर करार हुआ था.
इसलिए यह 400 बिलियन डॉलर का अनोउसमेंट नयी बोतल में पुरानी शराब की तरह है, क्योकि इन सभी एग्रीमेंट्स पर सहमति पहले ही बन चुकी थी .
यह ठीक उसी तरह है, जिस तरह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव केवल चमकने दमकने वाली मार्केटिंग थी. क्योकि चीन तो पिछले कई दशकों से दुनिया के अन्य देशों में निवेश करता आया है. हाँ, बेल्ट एंड रोड की ब्रिलियंट मार्केटिंग कैंपेन से दुनिया के कान जरूर खड़े हो गए थे.
जब तक 400 बिलियन डॉलर का नंबर नहीं था, दुनिया का ध्यान वर्ष 2016 की इस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर नहीं गया, लेकिन अब सभी की आखें खुल गयी है.
और अभी भी अज्ञात सरकारी सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें लीक करि गयी है, की चीन ईरान के पेट्रोकेमिकल सेक्टर में 280 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा, जिसके बदले में ईरान 20 से 30 फ़ीसदी के डिस्काउंट के साथ चीन को तेल और गैस बेचेगा.
और साथ ही ईरान के ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन शेष 120 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा.
यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात है, की इस पार्टनरशिप के दौरान जिन प्रोजेक्ट को identify किया गया है, उनके लिए पहले कॉन्ट्रैक्ट चीन को दिया जायेगा, और यदि चीन ने मना कर दिया, तभी यह प्रोजेक्ट किसी दूसरी पार्टी को दिए जायेंगे, इसलिए चीन के पास ना कहने का मौका अभी भी है.
हाँ एक बात जरूर है, इस पार्टनरशिप के अनुसार चीन अपने प्रोजेक्ट्स की रक्षा करने के लिए अपने 5000 सैनिक ईरान में तैनात करेगा. यह जितना चीन के लिए अच्छा है, उससे ज्यादा यह भविस्य में ईरान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है.
जब चीन के सैनिक ईरान की जमीं पर घूमेंगे, तो अमेरिका ईरान पर हमला करने से पहले 100 बार सोचेगा.
आप को अंदाजा लग गया होगा, जबकि ईरान और चीन के इस प्रोजेक्ट का हॉरिजोन बहुत लम्बा है. लेकिन हाल ही में सऊदी अरब के दिल में हुए ड्रोन अटैक के कारन ऐसा दिखाया जा रहा है, की चीन का पैसा ईरान में डूब जायेगा.
आप ही बताएं, जब चीन ने ईरान में अभी इतना अधिक पैसा लगाया ही नहीं है, तो डूबेगा कैसे?
और कुछ एनालिस्ट का कहना है, की ईरान ऐसी डील करके अमेरिका को सन्देश देने की कोसिस कर रहा है, लेकिन यह पार्टनरशिप तो वर्ष 2016 में ही हो गयी थी, जबकि अमेरिका ने फिर से ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबन्ध केवल पिछले साल ही लगाना चालू कर दिया था .
बात यह है, की यह लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट है, 400 बिलियन डॉलर का नंबर रख कर केवल इन प्रोजेक्ट का शार्ट टर्म में लाभ उठाने की कोसिस की जा रही है.
लेकिन आपने देखा होगा, सऊदी अरब पर ड्रोन अटैक के बाबजूद, अभी तक ईरान पर जवाबी कारवाही नहीं हुई है. ऐसा नहीं है, की ईरान को जवाब नहीं दिया जायेगा, सऊदी अरब और अमेरिका केवल ऐसे मौके की ताक में है, जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे.
कोई कुछ भी कहता रहे, खाड़ी में खुला युद्ध किसी के हक़ में नहीं है. इसलिए तो सऊदी अरब और ईरान ने डायरेक्ट न लड़ कर यमन को अखाड़ा बना दिया है.
और यदि ईरान को लड़ाई लड़ने का इतना शौक होता, तो वह भी सऊदी अरब पर हुए ड्रोन अटैक की जिम्मेदारी अपने सर पर ले लेता.
सऊदी अरब और अमेरिका ईरान को ऐसे जवाब देंगे, की ईरान को आल आउट वॉर करने का जायज़ मौका ना मिले.
इसलिए फालतू में पैनिक मोड में जाने की कोई जरूरत नहीं है. ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जायेगा, जिससे दुनिया की आयल सप्लाई पर बहुत बड़ा बुरा प्रभाव पड़े.
खाड़ी में सिर्फ तमाशा चल रहा है, आज नहीं तो कल अमेरिका और ईरान के बीच डील होना तय है. इसलिए भारत ने अपने हित सुरक्षित रखते हुए, इसका मजा लेना चाहिए.
अभी हाल में सऊदी अरब ने भारत को आयल सप्लाई का जहाँ भरोषा दिलाया है, तो दूसरी और रूस भी भारत को कन्सेशन पर आयल बेचने के लिए आगे आया है, साथ ही आशा है, की भारत को आयल के सप्लाई के लिए अमेरिका भी ऐसा ही कुछ कर सकता है
जहाँ तक चीन के ईरान में निवेश का सवाल है, चीन चाहे 400 बिलियन या 1 ट्रिलियन का निवेश ईरान में कर दे. ईरान कितना अपने वादों पर खरा उतरतरा है, यह कम से कम भारत में तो सबको पता है.
इसलिए ईरान से डिस्काउंट में तेल खरीदने के लिए चीन को बधाई. जिस दिन ईरान और अमेरिका के बीच डील हो गयी, ईरान अपने सुर बदलने में 1 मिनट तक का समय नहीं लगाएगा.
आप सभी स्मार्ट लोग हैं, हर देश दूसरे देश का इस्तेमाल करने में लगा है, और इस खेल में कौन कितना आगे निकलता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
जहाँ तक कुछ लोगों का कहना है, की चीन के ईरान में निवेश का भारत के चाबहार प्रोजेक्ट पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. आप ही बताएं, क्या ईरान कभी चाहेगा, की वह पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो जाये, और चीन उसी का खून चूसने लगे.
इसलिए यदि भारत को अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचने के लिए ईरान की हेल्प चाहिए, तो चीन और पाकिस्तान को उनकी औकात में रखने के लिए ईरान को भी भारत की मदद चाहिए.
आज का बेहद आसान सवाल है, की ईरान और चीन के बीच स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को लेकर करार कब हुआ था?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, Ranjeet Singh
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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