ईरान ने चाबहार पोर्ट के रेलवे प्रोजेक्ट से भारत को बहार क्यों निकाला??
चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लटकने का असल जिम्मेदार कौन है??
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Reference -
https://financialtribune.com/articles/domestic-economy/99732/ndfi-funds-for-completing-chabahar-railroad-project
http://www.iran-daily.com/News/235410.html
https://www.news18.com/news/world/indias-decision-to-shut-down-oil-import-hurting-trade-chabahar-work-iranian-envoy-2304767.html
https://www.thehindu.com/news/national/india-should-not-have-joined-us-ban-says-iran/article29386180.ece
नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
आप सभी को पता है, ईरान पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था.
हालाँकि ट्रम्प प्रसाशन का लक्ष्य यह था, की वह ईरान को तेल की एक बूँद तक नहीं बेचने देंगे, लेकिन पिछले महीने में ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के ही अनुमान के मुताबिक ईरान का 50 से 70 फ़ीसदी कच्चा तेल चीन चोरी छिपे खरीद रहा है. और लगभग 30 फीसदी ईरानियन ऑइल सीरिया में बेचा जा रहा है.
हालाकिं जुलाई महीने में ईरान से तेल खरीदने वाली चीनी कंपनी पर अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगा दिए थे, लेकिन ऐसा लगता है, चीन ने फिर भी ईरान से तेल खरीदना चालू रखा है.
इसलिए चीन का उदाहरण लेकर अब ईरान के भारत में राजदूत अब हमें ही ताना मार रहे हैं, की हमने अपनी स्वतंत्रता बड़ी मुश्किलों के बाद हांसिल करि थी, इसलिए हमें उसे अमेरिका के ऊपर न्योछावर नहीं करनी चाहिए.
और जिस प्रकार चीन ईरान से तेल खरीद रहा है, उसी प्रकार भारत भी ईरान से तेल आयात कर सकता है.
सबसे पहले तो साफ़ करने वाली बात यह है, की ईरान से तेल खरीदने के लिए लोक तांत्रिक भारत को कम से कम कम्युनिस्ट चोर चीन से तो कुछ सीखने की जरूरत नहीं है.
और हम सभी को याद है, कश्मीर में धारा 370 का मानसिक तिलिस्म टूटने के बाद, पाकिस्तान की धुन पर नाचते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर ने साफ तौर पर कहा था, की भारत ने कश्मीर के लोगों का दमन नहीं करना चाहिए.
इसलिए अब ईरान ने कम से कम भारत को तो दोस्ती का वास्ता नहीं देना चाहिए. हाँ अगर ईरान UAE और सऊदी अरब की तरह भारत का साथ देता, तो भारत सायद ईरान से तेल खरीदने के ऊपर सोचता भी.
और तो और चाबहार पोर्ट के विकास के धीमे पड़ने का ठीकरा भी ईरान अब भारत के ही सर पर फोड़ रहा है. वल्कि इसके बजाय ईरान को थैंक यू बोलना चाहिए था, क्योकि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के कारण ही चाबहार पोर्ट को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से ढिलाई मिली हुई है.
बात यही पर ख़तम हो जाती तो ठीक होता, लेकिन इसी महीने की शुरुआत में ईरान के सुप्रीम लीडर ने निर्णय लिया, की अब ईरान अकेला अपने पैसे लगाकर चाबहार और ज़हेदन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन का काम पूरा करेगा.
जबकि ईरान के ही अख़बारों ने पिछले साल दिसंबर में रिपोर्ट किया था, की इस रेलवे लाइन का लगभग 40 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है. अब ईरान अपने आप को बड़ा दिखाने के लिए इस प्रोजेक्ट का काम वर्ष 2021 तक अकेला पूरा करने की सोच रहा है.
साथ ही चीन पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर के रास्ते चीन तक जाने वाली LNG पाइपलाइन पर भी ईरान काम चालू कर रहा है.
बात साफ़ है, इन प्रोजेक्ट के जरिये ईरान भारत पर दवाब बनाने की कोसिस कर रहा है.
लेकिन आपको पता है, भारत और ईरान के संबंधों को अलग करके नहीं देखा जा सकता है. यदि चाबहार पोर्ट और रेलवे लाइन के प्रोजेक्ट को पूरा करने की ईरान को इतनी ही तेजाइ है, तो वह क्यों अमेरिका के साथ नई डील नहीं कर लेता है.
यहाँ तक की राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के सबसे बड़े दुश्मन जॉन बोलटन को अमेरिका के NSA के पद से भी हटा दिया है. अगर अब भी ईरान अमेरिका के साथ नई डील करने के लिए आगे नहीं आता है, तो इसके लिए भारत को दोस देना ईरान की ही मूर्खता होगी.
और आप सभी को याद है , जब अफ़ग़ान पीस टॉक का तमाशा चल रहा था, तब भारत को भी यह निश्चित रूप से नहीं पता था, की अफ़ग़ानिस्तान का फ्यूचर क्या होगा.
लेकिन अब जबकि अफ़ग़ान पीस टॉक के नाटक पर राष्ट्रपति ट्रम्प ने बीच में ही पर्दा डाल दिया है, तो हो सकता था, की भारत चाबहार पोर्ट को जोड़ने वाली रेलवे लाइन पर पैसा लगाने के लिए ईरान के साथ पुराने वादे के मुताबिक आगे बढ़े.
लेकिन ईरान इतनी तेजाइ में था, की उसने भारत के बिना ही रेलवे लाइन को पूरा करने का काम अपने सर पर ले लिया है.
हल्का सा दुःख इस बात का है, की हमारी मीडिया को पाकिस्तान अलग थलग पड़ चुका है, यह कहने से जब फुर्सत मिले, तब वह ईरान की इन कार गुजारियों के बारे में रिपोर्ट ब्रॉडकास्ट करें.
ईरान इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को दोस दे रहा है, लेकिन वह अपने दोस्त तालिबान को क्यों नहीं समझाता की, वह ट्रम्प के साथ डील कर ले. ताकि अफ़ग़ानिस्तान शांति और प्रगति की राह पर आगे बढ़ सके.
लेकिन आपको भी पता है, ईरान ऐसा कभी नहीं करेगा, क्योकि दूसरों को ज्ञान बाँटना बहुत आसान है. लेकिन ऐसा बहुत कुछ है, जिसे तुरंत करके ईरान भारत और ईरान की दोस्ती को पटरी पर फिर से ला सकता है.
भारत में ईरान के राजदूत की बातों को सुनकर लगता है, जैसे चाबहार पोर्ट को सफल बनाने का ठेका अकेले भारत ने ले लिया हो, और ईरान का काम केवल वहां पर बैठकर नोट गिनने का हो.
भारत ईरान की दोस्ती की कीमत अकेला भारत चुकाए, यह तो होगा नहीं. और ईरान अगर सोचता है, की धमकी से भारत झुख जायेगा, तो ईरान को जल्द ही अपनी गलती का अहसास हो जायेगा.
आज का बेहद आसान सवाल है, आज भी चोरी छिपे ईरान का सबसे अधिक तेल कौन सा देश खरीद रहा है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, सचिन जाधव.
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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