जल्द मोदी ट्रम्प इंडिया अमेरिका ट्रेड डील फाइनल करने वाले हैं??
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Reference -
https://economictimes.indiatimes.com/markets/expert-view/we-dont-want-to-fish-in-troubled-waters-both-us-china-are-big-trading-partners-suresh-prabhu/articleshow/68128721.cms?from=mdr
https://www.financialexpress.com/economy/thailand-beats-india-to-woo-companies-looking-to-escape-death-in-us-china-trade-war/1704262/
https://www.financialexpress.com/economy/thailand-beats-india-to-woo-companies-looking-to-escape-death-in-us-china-trade-war/1704262/
आप में से ज्यादातर लोग भारत और अमेरिका के बीच फ्री एंड फेयर ट्रेड डील के पक्ष में होंगे .
जबकि यह बात बहुत ही स्वाभाविक है, की चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड टेंशन से भारत को लाभ मिल सकता है. लेकिन फिर भी अभी तक इस ट्रेड टेंशन से हमें ज्यादा कुछ हांसिल नहीं हुआ है.
इसका एक प्रमुख कारण यह है, की जब अमेरिका और चीन के बीच तनाव बड़ा तब कन्फ्यूज्ड भारत ने तटस्थ रह कर अपना समय बर्बाद कर दिया.
इसी साल फरबरी महीने में हमारे कॉमर्स मिनिस्टर ने स्टेटमेंट दिया था, की चीन और अमेरिका दोनों ही हमारे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर हैं, इसलिए भारत इन दोनों की लड़ाई की आग में अपनी रोटी नहीं सेंकेगा.
अगर हम एक आदर्शवादी दुनिया में रह रहे होते, तो यह बात सही भी होती. लेकिन ग्लोबल ट्रेड में यदि बड़ी बड़ी बातें कर हमने यह मौका भी गवां दिया, तो हिस्ट्री हमें हमारी मूर्खता के लिए ही याद रखेगी.
आपको तो अच्छे से याद होगा, उस समय हमारी पूरी मीडिया और एक्सपर्ट्स चीन पर प्यार की बारिश और ट्रम्प को गालियां देने में बिजी थे .
जब करोड़ों के सैलरी पाने वाले एक्सपर्ट्स ट्रेड वॉर को लेकर अपनी छाती पीट रहे थे, तब आप सभी समझदार लोगों को यह दिखाई दे गया था, की इस ट्रेड वॉर से हमें जबरदस्त लाभ हो सकता है
कहने की जरूरत नहीं है, फिर भारत में चुनाव आ गए, और चुनाव प्रचार के दौरान ट्रेड डील की बात आगे बड़ पायेगी, इसकी उम्मीद तो हम में से किसी को नहीं थी.
लेकिन चुनाव हो जाने के बाद, मोदी साब ने पियूष गोयल को कॉमर्स मिनिस्टर बना दिया, और अब अंतर देखिये, की ट्रेड वॉर को लेकर आज वह उसी बात को दोहरा रहे है, जिसका आप सभी स्मार्ट लोगों ने पिछले डेड़ साल से समर्थन किया है.
उनके अनुसार अमेरिका और चीन के बीच में ट्रेड वॉर भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो की एक जीवन में बार बार नहीं आता है.
पिछले महीने मोदी और ट्रम्प के बीच मुलाक़ात हुई, जिसके बाद से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के छेत्र में सकारात्मक तरीके से पहिया घूमने लगा.
आपको तो पता है, 27 सितम्बर को मोदी जी सयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भाग ले ने के लिए अमेरिका जा रहे हैं. और उम्मीद है, की इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के लिए बात कुछ आगे बढ़ सकती है.
हम सभी को इतना अंदाज़ा तो है, की एक महीने में दोनों देशों के बीच व्यापक ट्रेड डील के लिए negotiation कम्पलीट नहीं किये जा सकते हैं.
इसलिए मीडिया में ऐसी रिपोर्ट आयी है, की हो सकता है, भारत और अमेरिका कम से कम कुछ मुद्दों को सुलझा लें, ट्रेड डील न सही, तो कम से कम उससे छोटा ट्रेड पैकेज ही फाइनल हो जाये.
और इस ट्रेड पैकेज को लेकर भारत के कॉमर्स मिनिस्टर की अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेन्टेटिव से फ़ोन पर बात हो रही है, ऐसा बताया जा रहा है.
आप सभी ने फ्री एंड फेयर ट्रेड डील का समर्थन किया था, तो ट्रेड पैकेज भी फ्री एंड फेयर ही होना चाहिए. अमेरिकी कृषि, मेडिकल और इनफार्मेशन कम्युनिकेशन technology प्रोडक्ट्स का भारत में रास्ता और आसान हो सकता है. लेकिन बदले में भारत को क्या मिलेगा, यह अभी क्लियर नहीं है.
अमेरिका का लक्ष्य भारत के साथ व्यापारिक घाटे को कम करना है, तो भारत का लक्ष्या अभी अमेरिका के साथ सिर्फ व्यापार बढ़ाने पर होना चाहिए. आप तो जानते हैं, व्यापार में पहले स्केल बड़ाई जाती है, प्रॉफिट बढ़ाने के रास्ते बाद में खोजे जाते हैं.
हो सकता है, अमेरिका और भारत के बीच इस महीने के अंत तक फ्री एंड फेयर ट्रेड पैकेज ही हो जाये. लेकिन जहाँ तक हम राष्ट्रपति ट्रम्प को समझते हैं, वह केवल वही डील लेते हैं, जिसमे उन्हें अपना लाभ साफ़ साफ़ दिखता है.
इसलिए हमें इस गफलत में नहीं रहना चाहिए, की ट्रम्प कोई भी डील या पैकेज पर साइन कर देंगे. साथ ही राष्ट्रपति ट्रम्प को भारत के साथ ट्रेड पैकेज के तुलना में पूरी ट्रेड डील करने में ज्यादा रूचि होगी.
और वैसे भी अभी ट्रम्प प्रसाशन का पूरा ध्यान जापान के साथ ट्रेड डील करने पर है. इसलिए हो सकता है, की यह ट्रेड पैकेज ना भी हो, और कुछ महीनो बाद दोनों देशों के बीच फाइनल ट्रेड डील हो.
लेकिन कुछ बड़े मुद्दों को लेकर तो इस महीने के अंत तक कुछ पॉजिटिव अनाउंसमेंट हो, इसकी उम्मीद तो हमें रहेगी ही.
भारत और अमेरिका लोक तांत्रिक देश हैं, इसलिए साथ बैठकर लेन देन करने से ट्रैड डील हो सकती है. इस ट्रेड डील में जीतनी देरी होगी, उतना ही हमें नुकसान होने वाला है.
जबकि भारत और अमेरिका अभी भी ट्रेड डील से बहुत दूर हैं, वियतनाम, थाईलैंड और मेक्सिको जैसे देशों ने ट्रेड वॉर में चाँदी काटना भी चालू कर दिया है.
हमारे देश और दुनिया में मंदी आ गयी है, ऐसा कहने में हमारी ज्यादातर मीडिया कौओं के तरह काउ काउ कर रही है, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड टेंशन से पैदा हुए सुनहरे अवसर का भारत लाभ कैसे उठाये, इस बारे में पॉजिटिव बात बहुत कम हो रही है.
अंत में साफ़ करने वाली बात यही है, की भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए तेजाइ हो सकती है, लेकिन इसके लिए हमारे किसानो और छोटे व्यापारियों की बलि भी नहीं दी जा सकती है. आशा है, अमेरिका भी भारत की लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखेगा.
आइये देखते हैं, अगले दो सप्ताह में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई बात बनती है, या नहीं.
आज का बेहद आसान सवाल है, भारत के वर्तमान कॉमर्स मिनिस्टर का नाम क्या है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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