हिन्द महासागर में भारतीय नौसेना ने चीन कोई दिखाया अपना दम !!


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नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जैसा की आपको पता लग गया होगा, इस महीने की शुरुआत में भारतीय नौसेना के समुद्री निगरानी में माहिर हवाई जहाज ने चीनी जंगी जहाज के फोटो क्लिक कर लिए, जबकि वह दक्षिणी हिन्द महासागर से तैरता हुआ, श्री लंका के पानी में चला गया.

सबसे पहले तो हमारे लिए यह संतोष की बात है, की हमारी नौसेना चीन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाये हुए है, ताकि जरूरत पड़ने पर चीन को जवाब तुरंत दिया जा सके.

लेकिन एक सवाल जिसका जवाब हमें भी नहीं मिल रहा है, की चीन के इस जंगी जहाज को श्री लंका के पानी में जाने की क्या जरूरत थी. क्या श्री लंका चीन के जहाजों के स्वागत की तैयारी किये हुए बैठा था. उम्मीद है, भारतीय सेना इस बारे में श्री लंका की नौ सेना से भी संपर्क बनाये हुए होगी. ताकि भारत विरोधी गतिबिधियो का अंदाज़ा समय से पहले लगाया जा सके.

हमारी मीडिया में आज बड़े पैमाने पर बताया गया है, की किसी भी समय पायरेसी को कण्ट्रोल में रखने के लिए चीन के 6 अथवा 7 जंगी जहाज हिन्द महा सागर में बने रहते हैं. लेकिन यह स्थिति हमेसा से ऐसी नहीं रही है, चीन का हिन्द महासागर में इस प्रकार का रेगुलर डिप्लॉयमेंट वर्ष 2008 के बाद ही चालू हुआ है.

और कभी कभी चीन ने परमाणु पनडुब्बी तक हिन्द महासगार में भेज दी है. चीन सायद पूरी दुनिया को बेवक़ूफ़ समझता है, आप ही बताएं पायरेसी से बचने के लिए परमाणु पनडुब्बी की क्या जरूरत है.

दुर्भाग्य यह है, की चीन परमाणु पनडुब्बी डेप्लॉय करता रहा, और किसी ने यह पूछने की जहमत नहीं उठायी, की भाई हिन्द महा सागर में परमाणु पनडुब्बी की क्या जरूरत है.


आप सभी बेहद स्मार्ट लोग हैं, चीन का सामना साउथ चाइना सी में नहीं किया गया, तो आज हमें चीनी जंगी जहाजों के फोटो हिन्द महासागर में खींचने पड़ रहे है.

अभी कुछ दिनों पहले ही भारत के नेवी चीफ ने साफ़ किया है, की अगले 30 सालो में चीन के पास 10 युद्ध पोत होंगे. तो हमारे पास कम से कम तीन युद्ध पोत तो होने ही चाहिए.

आप ही बताएं, क्या चीन ये युद्ध पोत समुद्र में मछलियां पकड़ने के लिए बना रहा है?

ये चीनी ड्रैगन धीरे धीरे भारत की तरफ बढ़ रहा है, और ज्यादतर भारतीय चीन का सस्ता माल खरीदके खुश हो रहे हैं.

ऐसा नहीं है, की चीन केवल पायरेसी से निपटने के लिए ही ये युद्ध पोत दक्षिण हिन्द महासागर में भेज रहा है, पिछले चार सालों में दक्षिणी हिन्द महासागर में गहराई से मछली पकड़ने के लिए चीन ने बड़ी संख्या में अपने विशेष जहाज ट्रॉलर्स भेजे हैं.

अब आप देखिये, जबकि किसी भी समय अराउंड 6 चीनी युद्ध पोत हिन्द महासागर  में तैनात रहते हैं, तो पिछले चार सालों में 500 चाइनीस ट्रॉलर्स ने  इसी इलाके में मछली पकड़ी है.

चीन के जंगी जहाज आये तो थे पायरेसी से  निपटने के लिए, लेकिन उनके साथ आये ट्रॉलर्स ने मछलियां लूटना चालू कर दिया. आप सभी बेहद समझदार लोग हैं, अन्य भारतियों की तुलना में चीन की कारगुजारियों के पीछे के मतलब को आप समझ जाते हैं. 

लेकिन चीन के नेवल और ट्रॉलर्स डेप्लॉयमेंट ने इंडियन सिक्योरिटी इस्टैब्लिशमेंट की नींद तो उड़ा ही दी है.

चीन से कैसे निपटा जाए, इसका जवाब भी चीन ने ही दे दिया है, साउथ चाइना सी के बीचो बीच पार्सल आइलैंड के ऊपर चीन ताइवान और वियतनाम अपना दवा पेश करते हैं.

चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के अनुसार जब अमेरिकी जंगी जहाज ने इन आइलैंड के इलाके में बिना चीन की अनुमति के  प्रवेश किया, तो चीन की नौसेना और वायु सेना ने उसका पीछा किया, और अमेरिकी जहाज को इलाका छोड़ कर भागना पड़ा.

ब्रिटैन के एक्सप्रेस अख़बार में छपी इस खबर में कितनी सच्चाई है, यह तो तय होना अभी वाकी है. लेकिन इस खबर को पढ़कर बड़ी बड़ी बातें करने वाले अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति ओबामा को अपनी छोटी सी बुद्धि के  ऊपर शर्म जरूर आनी चाहिए.

बात साफ़ है, अगर चीन ने गलती से भी भारत के एक्सक्लूसिव इकनोमिक जोन में घुसने की कोसिस की, तो उसे मार मार के भगाने के लिए हमें पूरी तैयारी अभी से करनी होगी.

नहीं तो जो हाल आज अमेरिका का साउथ चाइना सी में चीन ने किया है, वही हाल हिन्दोस्तान का हिन्द महासागर में होगा.

चीन के एक्सपर्ट्स लोगों ने भारत को ज्ञान देते हुए, यह भी कहना चालू कर दिया है, की इंडिअन ocean का मतलब इंडिया का ocean  नहीं होता है. लेकिन इन ही पाखंडी एक्सपर्ट लोगों ने साउथ चाइना सी का मतलब साउथ चाइनीस सी जरूर मान लिया है.

इसलिए हमें और देर नहीं करनी चाहिए, चीन के खिलाफ अपनी नौ सेना और वायुसेना को मजबूत करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. आप तो समझते हैं, यदि हमें शांति की रक्षा करनी है, तो हमें हमेसा युद्ध के लिए तैयार रहना पड़ेगा.

इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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