दलाईलामा के नए अवतार में अड़ंगे के लिए चीन पर अमेरिका प्रतिबन्ध लगाएगा
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Reference -
आप सभी को पता होगा, 60 साल पहले जब चीन ने तिब्बत पर कब्ज़ा किया, तभी से दलाई लामा भारत में रह रहे हैं.
इसी साल 6 जुलाई को दलाई लामा ने अपना 84 वा जन्म दिन मनाया है. भगवान से प्राथना है, की वह कई सालों तक हमारे बीच रहे. लेकिन सच्चाई यह भी है, की आज कल उन्हें कई हेल्थ प्रोब्लेम्स से भी जूझना पड़ रहा है.
जबकि दलाई लामा ने साफ़ कर दिया है, की 90 वर्ष की आयु में वह ही तय करेंगे, की उन्हें अगली बार अवतार लेना है, या नहीं. और लेना है, तो कहाँ पर लेना है.
चूँकि कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें तिब्बत की बजाय हिमाचल प्रदेश के धर्म शाला में रहने के लिए मजबूर कर दिया, इसलिए उनका नया अवतार भी धर्म शाला में जन्म लेगा, इस बात की सम्भावना अधिक है.
लेकिन तिब्बत ऑटोनोमस रीजन में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नीचे काम करने वाली सर्कार ने कह दिया है, की उसी के पास दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार है.
जबकि अगला दलाई लामा कौन होगा, इस बारे में निर्णय कौन लेगा, यह सवाल और गहराता जा रहा है, भारत सर्कार ने अभी तक इस सवाल से बचने की भरपूर कोसिस करि है.
हमारी अपेक्षा यही थी, की यदि हम चीन की चिंताओं का ध्यान रखेंगे, तो चीन हमारे दर्द का भी ख्याल रखेगा.
लेकिन अभी हाल में हम सभी ने देखा है, की चीन किस तरह और कितना हमारी इस आधारहीन अपेक्षा पर खरा उतरा है.
जबकि दलाई लामा के उत्तरा धिकारी को लेकर भारत अभी भी असमंजस की हालत में है , अमेरिकी संसद में नया बिल पेश कर दिया गया है, इस बिल में यह साफ़ तौर पर कहा गया है, की दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना एक धार्मिक मामला है, और इसका निर्णय करने का अधिकार केवल तिब्बत के लोगों को है.
और यदि कम्युनिस्ट पार्टी के टट्टुओं ने नए दलाई लामा के अवतार की प्रक्रिया में अडंगे लगाने की कोसिस की, तो उन्हें इस बिल के मुताबिक अमेरिका दंड देगा.
साथ ही यह बिल साफ़ कर देता है, की चीन को अमेरिका में नया वाणिज्य दूतावास तभी खोलने दिया जायेगा, जब चीन अमेरिका को तिब्बत की राजदानी ल्हासा में वाणिज्य दूतावास खोलने देगा.
चूँकि इस बिल को रिपब्लिक और डेमोक्रेट सांसदों ने मिलकर पेश किया है, इसके पास होने की संभावनाएं ज्यादा है. लेकिन फिर भी पार्लिअमेंटरी प्रोसेस के कम्पलीट होने का हम सभी को इंतजार तो करना ही होगा.
अगर यह बिल अमेरिकी कांग्रेस में पास हो गया. तो चीन को मिर्ची तो पक्के से लगेगी, फिर देखना होगा, की चीन कैसे दलाई लामा के नए उत्तराधिकारी के निर्णय में अपनी टांग अड़ाता है.
निश्चित रूप से यह देखने में अच्छा लगता है, की अमेरिकी सांसद इतने जागरूक तो है, की उन्हें दलाई लामा के उत्तराधिकारी की चिंता होने लगी है.
हमें और भी ज्यादा अच्छा लगता, यदि भारत की संसद में भी ऐसा ही कोई बिल पेश किया जाता, की दलाई लामा के उत्तराधिकारी का निर्णय पुरानी धार्मिक प्रक्रिया से ही लिया जाये.
कोई बात नहीं, भारत अभी अगले महीने चीन के सुल्तान का स्वागत करने के लिए तैयारी कर रहा है, और इस यात्रा के पहले माहौल को अच्छा करने के लिए चीन ने मीठी मीठी बातें भी बोलना चालू कर दिया है.
जब पिछले साल की चीन में इनफॉर्मल मीटिंग से भारत को कोई लाभ नहीं हुआ, तो हमारा उम्मीद रखना मूर्खता होगी, की इस साल की भारत में इनफॉर्मल मीटिंग से भारत के वारे न्यारे हो जायेंगे.
आप सभी जानते हैं, ये इनफॉर्मल मीटिंग का तमाशा चीन के द्वारा सिर्फ इसलिए किया जाता है, ताकि चीन को लाभ पहुंचाने वाली वर्तमान यथा स्थिति आगे भी बनी रहे, और चीन लगातार भारत का खून चूसता रहे.
चूँकि भारत सरकार किसी ना किसी रूप में अभी भी चीन का तुस्टीकरण करने की नीति पर ही चल रही है, इसलिए दुर्भाग्यबश हमें कम ही उम्मीद है, की दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भारत को स्पस्ट स्टैंड लेगा.
जहाँ तक हम समझ सकते हैं, देर सवेर भारत को इस बारे में अपना स्टैंड क्लियर करना ही होगा, क्योकि नया दलाई लामा कौन बनेगा, इस सवाल को सिर्फ टाला ही जा सकता है, इससे बचने का कोई उपाय ही नहीं है.
आज का बेहद आसान सवाल है, दलाई लामा अभी भारत में कहाँ रहते हैं?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, ramanbhai patel .
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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