कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से भारत बनेगा दुनिया के नंबर वन फैक्ट्री !!
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हमारे देश भक्त दर्शको को आज कल भारत की बिगड़ती अर्थव्यवस्था के बारे में बहुत चिंता हो रही थी. लेकिन आज मोदी सर्कार ने जो किया, उससे आप सभी के चहरे पर मुस्कान जरूर होगी. चाहे धारा 370 हो या कॉर्पोरेट टैक्स हो, मोदी सर्कार जब भी देती है, छप्पर फाड़ के देती है.
कॉर्पोरेट टैक्स में जिस तरह जबरदस्त कटौती की गयी, उसकी सायद किसी को भी अपेक्षा नहीं थी, हाँ, कॉर्पोरेट टैक्स कम होना चाहिए, इसकी डिमांड हर बजट के पहले की जाती थी.
लेकिन टैक्स की दर को कम कर देने से सर्कार की कमाई कम हो जाएगी, वैसे भी हमारी सर्कार की आमदनी से उसका खर्चा अधिक है, इसलिए सवाल यही उठता था, की सरकारी घाटे को कैसे काबू में रखा जा सके.
सरल शब्दों में सर्कार को confusion इसी बात का रहता था, की वह 100 रुपये पर 35 % कॉर्पोरेट टैक्स लगाकर 35 रुपये कमाए. अथवा 100 रुपये पर 25% कॉर्पोरेट टैक्स लगाकर 25 रुपये कमाए, और उम्मीद करे, की टैक्स की दर कम हो जाने पर व्यापार बढ़ेगा, और वही व्यापारी 200 रुपये कमायेगा, जिससे 25% की दर पर भी सर्कार को ज्यादा 50 रुपये की कमाई होगी.
लेकिन हमारी सरकारों को इंडिया के फ्यूचर में इतना कॉन्फिडेंस नहीं था, की वह बर्तमान में अपनी कमाई को कम होने दे. भारत सरकार के आज के निर्णय से भी सालाना 1.4 लाख करोड़ की कमाई कम होगी. भविस्य में जब व्यपार बढ़ेगा तब बढ़ेगा, लेकिन बर्तमान में तो सर्कार के घाटे का बढ़ना तय है.
मोदी सर्कार ने पहले कार्यकाल में कॉर्पोरेट टैक्स कम करने की लगातार कोसिस करि थी, लेकिन सर्कार का revenue कम हो जायेगा, इसी डर से बड़ा कदम नहीं उठाया गया. साथ ही GST के लागू होने के कारण भी सरकार की कमाई पहले से ही कम हो रही थी.
लेकिन आज मोदी सर्कार ने जो कदम उठाया है, उससे सिद्ध हो जाता है, की उसे भारत के भविस्य में पूरा विश्वास है, इसी लिए वह वर्तमान में घाटा उठाने को तैयार है.
पिछले 20 सालों में दुनिया भर में कॉर्पोरेट टैक्स को कम किया गया है. वर्ष 2003 में दुनिया भर की एवरेज कॉर्पोरेट टैक्स जहाँ 30 फीसदी थी, वह घटकर 20 फीसदी हो गयी थी. जहाँ तक एशिया की एवरेज कॉर्पोरेट टैक्स रेट भी 29 फीसदी से घटकर 23 फ़ीसदी हो गयी थी.
बात साफ़ है, दुनिया भर में कॉर्पोरेट टैक्स को कम किया जा रहा था, तो भारत लम्बी छलांग लगाने से झिझक रहा था.
अगर ब्रिक्स संघटन की बात करें, जिसमे चीन भी शामिल है, उसमे भी भारत की corporate टैक्स सबसे ज्यादा थी .
आप ही बताएं, जब भारत का कॉर्पोरेट टैक्स दुनिया में सबसे ज्यादा है, तो कोई भी कंपनी भारत में पैसा लगाकर कम प्रॉफिट क्यों कमाएगी, जबकि चीन और एशिया के अन्य देशो में कम कॉर्पोरेट टैक्स होने के कारण उसकी कमाई जायदा हो सकती थी.
कम और छोटी कंपनियों से ज्यादा कमाने के चक्कर में हम उनकी संख्या और उनका अकार भी बढ़ने नहीं दे रहे थे.
लेकिन कोई बात नहीं, देर आये दुरुस्त आये, अब भारत में corporate टैक्स अन्य एशियाई देशों के स्तर तक आ गया है.
एक तर्क दिया जा रहा है, की भारत के कॉर्पोरेट टैक्स के कम कर लेने के बाद चीन और एशिया के अन्य देश अपना कॉर्पोरेट टैक्स और भी ज्यादा कम कर लेंगे. ये देश अपना कॉर्पोरेट टैक्स कितना कम करते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
लेकिन यह देश अपना कॉर्पोरेट टैक्स कम कर लेंगे, इसके लिए क्या हम हमेसा अपना कॉर्पोरेट टैक्स ऊँचा करके अपनी इंडस्ट्री का गला घोटते रहे?
यह तो बिज़नेस है, अगर एशियाई देश कुछ कदम उठाएंगे, तो भारत भी नहले पर दहला मारेगा . बात सिंपल है, भारत अब डरेगा नहीं, भारत वह सब करेगा, जिससे वह व्यापार और उत्पादन के लिए दुनिया की सबसे आकर्षक जगह बने.
वैसे भी जैसा की दिखाई पड़ रहा है, मोदी सर्कार ने मन बना लिया है, की वह रीजनल कम्प्रेहैन्सिव इकनोमिक पार्टनरशिप में शामिल होने वाला है, इसलिए कॉर्पोरेट टैक्स के कम होने से हो सकता है, की भारत इस नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ उठा सके. लेकिन क्युकी अभी इस एग्रीमेंट के बारे में जायदा डिटेल्स बहार निकल कर नहीं आयी है, इसलिए निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले हमें इंतजार करना होगा.
लेकिन हमें विश्वास रखना होगा, की साहसी मोदी सरकार चीन की बातों में आकर भारत के उज्जवल भविस्य को दाव पर नहीं लगाएगी.
तो दूसरी और मोदी साब अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं, इसलिए भारत में कॉर्पोरेट टैक्स में आयी कमी से अमेरिकी कंपनियों के लिए एक सुनहरा अवसर बन गया है. अमेरिका में मोदी साहब कोई भी बात कर लेते, लेकिन इस जमीनी कदम ने माहौल ही बदल दिया है.
हमारी कांग्रेस पार्टी कह रही है, की अमेरिका जाने के लिए मोदी जी ने यह कदम उठाया है. अरे भाई, तो कौन सा गुनाह कर दिया?? अमेरिकी कंपनी भारत में आएं, लोगों को रोजगार मिले, इससे कांग्रेस पार्टी के पेट में क्यों दर्द होने लगा है.
पता नहीं, ये अमेरिका और भारत के बीच व्यापार बढ़ने से दुखी हैं, या चीन के बुरे दिन आने वाले हैं, इसलिए इनकी आंखें नम हो रही है.
चीन को दुनिया की फैक्ट्री बनाने का सबसे बड़ा श्रेय तो चीन और अमेरिका से ज्यादा UPA सरकार को दिया जाना चाहिए. कोई बात नहीं, मोदी सरकार के दौरान अब भारत दुनिया की नयी फैक्ट्री बनेगा.
आज मोदी सरकार के इस कदम के बाद, सही मायनो में भारत अमेरिका चीन ट्रेड वॉर का लाभ उठाने की हालत में आ गया है.
अब बस जल्द से जल्द भारत और अमेरिका के बीच फ्री एंड फेयर ट्रेड डील हो जाये. फिर देखते हैं, चीन का घमंड कितने दिनों तक सातवे आसमान पर रहता है.
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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