भारत ने टर्की को 16 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट से धक्के मारकर बाहर निकला.


मोदी जी ने पाकिस्तानी दोस्त टर्की-मलेशिया को कैसे सजा दी

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Reference -
https://www.defensenews.com/industry/2019/10/03/india-targets-turkish-shipyard-over-ties-with-pakistan/
https://www.asiatimes.com/2019/10/article/india-hits-back-at-turkey-malaysia-over-kashmir/
https://www.financialexpress.com/defence/unga-fallout-turkish-company-could-be-out-of-the-fss-project-for-indian-navy/1724697/
https://www.financialexpress.com/defence/make-in-india-in-a-first-turkish-company-to-help-build-fss-for-the-indian-navy-at-hsl/1646162/
https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/turkish-consortium-to-sign-pact-with-hsl-to-build-five-fleet-support-ships/article27279087.ece



नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.


आप सभी को पता है, की UN जनरल असेंबली में चीन के अलावा टर्की और मलेशिया पाकिस्तान के पीछे खड़े हुए साफ़ साफ़ दिखाई दिए थे.



तभी से आप सभी को अपेक्षा थी , की भारत ने इन दोनों देशो को इसकी सजा देनी चाहिए.



इसी बीच खबरें प्रकाशित हुई, की भारत ने टर्की को २.3 बिलियन डॉलर का झटका दे दिया है. भारत सर्कार के इस कदम को लेकर खुस होने के बजाय, इस वीडियो में हम गंभीरता पूर्वक देखेंगे, की आखिर भारत और टर्की के बीच अभी चल क्या रहा है.



यहाँ पर जिस प्रोजेक्ट की बात चल रही है, उसके अंतर्गत २.३ बिलियन डॉलर यानि की लगभग 16 हज़ार करोड़ की कीमत पर भारत में मेक इन इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत 5 फ्लीट सपोर्ट शिप्स बनाये जाने थे.  इन फ्लीट सपोर्ट शिप्स का प्रयोग इंडियन नेवी के इंडियन ocean में दूर तैनात नेवल फ्लीट के लिए खाने और हथियारों की सप्लाई के लिए किया जाना है .



इस प्रकार इस फ्लीट सपोर्ट शिप का महत्वा आपको समझ आ गया होगा, भारत के रक्षा मंत्रालय के नीचे काम करने वाली कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को इन जहाजों का निर्माण करना था. इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी पार्टनर के चुनाव के लिए दुनिया भर से 8 कंपनियों के समूहों ने अपने प्रपोजल सबमिट किये थे.



जिनमे से केवल तीन रूस, जर्मनी और टर्की के समूहों को टेहक्नीकल आधार पर शार्ट लिस्ट इस साल July महीने में किया गया था. यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है, की भारतीय डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट हांसिल करने के लिए  पहली बार कोसिस कर रहे टर्की के प्रपोजल की कॉस्ट सबसे कम थी.




लेकिन अभी भी इन तीनो शॉर्टलिस्टेड प्रोपोज़ल्स का टेक्निकल और फाइनेंसियल इवैल्यूएशन चल रहा है, उसके बाद कीमत को लेकर मोलभाव होना था, और सब कुछ फाइनल हो जाने के बाद ही इंडियन नेवी और मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस के पास प्रपोजल अप्रूवल के लिए भेजा जाता.



और यदि सब कुछ टाइम लाइन के मुताबिक चलता, तो फाइनल अग्रीमेंट अगले साल किये जाने की सम्भावना थी, ताकि वर्ष 2020 के अंत तक काम चालू हो जाये. लेकिन पहला शिप बनने में भी 4 साल का समय लगना था, और उसके बाद हर एक शिप को बनने में मात्र 10 महीनो का समय चाहिए था.



इस प्रकार आपको समझ आ गया होगा, की यह long टर्म का प्रोजेक्ट है, और टर्की के साथ कोई फाइनल कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया गया था.



लेकिन जैसा की आप सभी को पता है, भारत नोर्मल्ली कम कीमत पर फोकस करता है, इसलिए मीडिया में इस प्रकार का प्रचार चल रहा था , की टर्की के समूह को कॉन्ट्रैक्ट मिल जायेगा.



इस प्रचार प्रसार को कौन फण्ड कर रहा था, यह हमें भी नहीं पता. लेकिन जिस पैमाने पर कॉन्ट्रैक्ट जीतने के पहले टर्की के सर पर जीत का सहरा बाँध दिया गया, उससे दाल में कुछ काला तो जरूर नजर आता है.



लेकिन यहाँ पर आश्चर्य करने वाली बात है, टर्की पाकिस्तान नेवी की भी मदद कर रहा है, अभी हाल ही में टर्की के राष्ट्रपति ने कहा था, की टर्की ने पाकिस्तान के लिए युद्ध पोत का कंस्ट्रक्शन चालू कर दिया है.



जबकि टर्की और पाकिस्तान के गठजोड़ का सीक्रेट हम सबको पता है, यह आश्चर्य करने वाली बात है, की हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने कैसे टर्की के समूह को शार्ट लिस्ट कर लिया?



इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होना था, और साथ में मिलकर उत्पादन भी होना था, इसलिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने कैसे यह स्वीकार कर लिया, की टर्की के लोग भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में काम करेंगे? क्या यह कोई छोटी मोटी सिक्योरिटी रिस्क थी?



कम कीमत के चक्कर में क्या हमें खाने की जगह जहर खरीद कर खा लेना चाहिए? 


अगर पॉजिटिव तरीके से देखें, तो हो सकता हो, भारत टर्की को इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में शामिल करके, उसके साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने की कोसिस कर रहा हो?



टर्की के समूह को शॉर्टलिस्ट करने का कारण कोई भी हो, टर्की के प्रेजिडेंट को बहुत बहुत धन्यवाद्, की उन्होंने UN जनरल असेंबली में अपना असली चेहरा दिखा दिया. 



नहीं तो कॉन्ट्रैक्ट फाइनल हो जाने के बाद यदि भारत की आँखें खुलती तो बहुत देर हो जाती. जैसा की अभी भी रूस और जर्मनी के ग्रुप के प्रोपोज़ल्स सामने है, इसलिए अभी भी सिंगल वेंडर प्रपोजल की हालत पैदा  नहीं हुई है.



उम्मीद है, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड अब रूस और जर्मनी के प्रपोजल पर विचार करेगी, वैसे भी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड  के पास और कोई ऑप्शन नहीं है, क्योकि टर्की के इस प्रोजेक्ट में शामिल होने को लेकर  इंडियन नेवी ने उसे लाल झंडी दिखा दी है.



हालाँकि इंडियन नेवी ने समय पर कदम उठा लिया है, लेकिन रियलिटी में हमें थैंक यू टर्की के प्रेजिडेंट को ही देना चाहिए.  अब टर्की का भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सेंध मारी करने का सपना कभी पूरा नहीं हो पायेगा.



जबकि UN जनरल असेंबली में पाकिस्तान का साथ देने के लिए 16 हज़ार करोड़ कीमत टर्की को चुकानी पड़ी.



घमंडी मलेशिया की तरफ से ऐसी खबरे आ रही है, की भारत और मलेसिया के संबंधों पर उसके भारत विरोधी कारनामो की काली छाया अभी तक नहीं पड़ी है.



लगता है, मलेशिया मोदी प्रशासन को हलके में ले रहा है. कोई बात नहीं, मलेशिया इसी गफलत में बना रहे, तो भारत के लिए बहुत अच्छा है.



टर्की और मलेशिया को यह नहीं समझना चाहिए, की भारत इन दोनों देशों को झटका डायरेक्ट ही देगा, इन के पावों के तले की जमीं खिसकाने के भारत को कई तरीके आते हैं.



आप सभी को मालूम है, टर्की और मलेशिया को आजकल नेता गिरी करने का बड़ा शौक चढ़ा हुआ है, आपको यह भी पता है, सऊदी अरब को यह बात नागवार गुजरी है .



आप को याद होगा, किस तरह UN जनरल असेंबली में भाग लेने गए पाकिस्तान टर्की और मलेशिया के नेताओं  ने हवाई किले बनाए थे.



अब देख लीजिए, सऊदी प्राइवेट plane से अमेरिका पहुंचकर शयाने पाकिस्तानी प्रधान मंत्री ने सऊदी अरब की उड़ान में बाधा उत्पन्न करने के कोसिस करि.



तभी तो रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने सऊदी प्राइवेट प्लेन में उड़ रहे, पाकिस्तानी प्रदानमंत्री के पर ही क़तर दिए, और फिर उन्हें कमर्शियल plane में धक्के खाते हुए, पाकिस्तान वापस लौटना पड़ा.



इसी बीच भारत से डोवाल साहब ने सऊदी अरब और UAE की यात्रा करि, और इस महीने मोदी जी सऊदी अरब की यात्रा पर जा सकते हैं.



आप को शतरज की विसात अब साफ़ साफ़ दिखने लगी होगी, अगर पाकिस्तान टर्की और मलेशिया के साथ मिल सकता है, तो भारत सऊदी अरब और UAE के साथ मजबूती से हाथ  क्यों नहीं मिला सकता है?



इस Geo पॉलिटिक्स के गेम में ये नया भारत अपनी नयी चाल चलने के पहले अब घबराता नहीं है, इसलिए टर्की को तो सबक सीखा दिया गया है, जल्द ही मलेशिया को भी मामला समझा दिया जायेगा.



आज का बेहद आसान सवाल है, भारत के फ्लीट सपोर्ट शिप के प्रोजेक्ट के लिए टर्की के अलावा किन दो देशों के समूहों को शार्ट लिस्ट किया गया है?



पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  Guru Sai Hari Kumar Dosapati.






और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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