सीरिया पर हमले के लिए पाखंडी टर्की को भारत ने दिया करारा जवाब.


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नमस्ते दोस्तों, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

जैसा की आपको पता है, भारतीय विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से स्टेटमेंट जारी करके नार्थ ईस्ट सीरिया में टर्की के द्वारा की जा रही एक तरफ़ा कारवाही के प्रति चिंता प्रकट करि है.

हालाँकि टर्की के जिस offensive ऑपरेशन को लांच किया है, उसका नाम ऑपरेशन पीस स्प्रिंग रखा गया है, लेकिन भारत को आधिकारिक रूप से ऐसा लगता है, की इससे छेत्रिय स्तर पर अस्थिरता बढ़ेगी, और आतंकवाद भी भड़केगा.

और इसी खतरे को मद्दे नजर रखते हुए, भारत ने अपेक्षा करि है, की टर्की अपने इरादों पर लगाम कसते हुए, सीरिया की सीमा और सम्प्रभुता का सम्मान करेगा.

जैसा की कुछ ही घंटो पूर्व टर्की ने ऑपरेशन लांच किया है, भारत सर्कार ने स्टेटमेंट जारी करने में देरी नहीं लगायी, कम से कम यह काम इस बार ठीक हुआ.

लेकिन आप सभी को अच्छे से याद होगा, टर्की की यह कारवाही कोई अचानक से नहीं हुई है, दुनिया में सबको इसका डर था, और अब जैसी की रिपोर्ट्स आ रही है, टर्की ने दुनिया के डर  से बहुत बड़ा ऑपरेशन लांच कर दिया है.

यहाँ तक की पिछले साल अमेरिका के रक्षा सचिव ने आज के ही खतरे को भांपकर पिछले साल दिसंबर में इस्तीफ़ा दे दिया था.

लेकिन राष्ट्पति ट्रम्प ने उनकी एक ना सुनी, और अब परिणाम सबके सामने है. राष्ट्रपति ट्रम्प टर्की की इकॉनमी को बर्बाद करने की धमकिया ही देते रह गए, और टर्की ने सीरिया में अमेरिका के पूर्व सहयोगियों पर बम पटकना भी चालू कर दिया.

वह तो भला हो ट्रम्प का, उन्होंने पिछले महीने तालिबान के साथ पीस टॉक से पीछे हटने का निर्णय लिया, नहीं तो आज सीरिया के साथ साथ अफ़ग़ानिस्तान में भी आम चुनाव के  मतों को गिनने के बजाये लाशें गिनी जा रही होती.

लेकिन सीरिया हो अथवा अफ़ग़ानिस्तान हो, ट्रम्प साहब को चुनाव जीतने की तेजाइ पड़ी है, वह सीरिया से पीछे हट तो गए, लेकिन अब वह किस मुँह से वहां पर सैन्य हस्तछेप दोबारा से  करेंगे.

और टर्की को यही बात समझ आ गयी है, इसलिए बिना समय बर्बाद किये, उसने उत्तरी सीरिया को बर्बाद करना चालू कर दिया.

लेकिन  टर्की में ट्रम्प का सबसे बड़ा मानसिक डर जिस प्रकार जमीं पर उतरा है, उससे निश्चित सा हो चला है, की वह अपने जनरल्स की सलाह के खिलाफ अफ़ग़ानिस्तान से तेजी में भागने की गलती नहीं करेंगे.

लेकिन कुछ कह नहीं सकते, क्यों की महाभियोग के मार झेल रहे राष्ट्रपति को चुनाव का भी सामना करना है. इसी बीच टर्की में ट्रम्प प्लान का जो हस्र हो रहा है, उसने उनके विरोधियों के हाथ ही मजबूत किये है.

इसी बीच टर्की का कहना है, की वह उत्तरी सीरिया में सेफ जोन बनाना चाहता है, जहाँ पर सीरिया के शरणार्थी रह सकेंगे.

आप को भी अच्छे से पता है, इस सेफ जोन पर किसका कब्ज़ा रहेगा. अगर सीरिया के refugees को बसाना ही टर्की का एक मात्रा उद्देस्य है, तो वह नार्थ सीरिया के लोगों को बेघर क्यों कर रहा है?

आप सभी समझदार है, ऑपरेशन पीस स्प्रिंग के द्वारा नार्थ सीरिया में सेफ जोन बनाना केवल मार्केटिंग टैक्टिक है, ताकि सीना तानकर चीन और रूस टर्की का बचाव UN सिक्योरिटी कौंसिल में कर पाएं.

इसी बीच टर्की ने यह भी चेतावनी दी है, की यदि यूरोपियन देशों ने अपना मुँह खोला, तो टर्की गेट खोलकर अपने यहाँ रह रहे 36 लाख शरणार्थियों को यूरोप का रास्ता दिखा देगा.

इसीलिए आप भांप गए होंगे, ये 36 लाख  सीरियन शरणार्थी टर्की के लिए प्यादे से ज्यादा और कुछ नहीं है.

सायद आपको पता हो, टर्की में खुरदिस लोगों के आवादी 15 से 20 फीसदी है. आसपास के देशों में अल्प संख्यक के तौर पर रह रहे खुरदिस लोगों का खुर्दिस्तान का एक सपना है, जो आजतक पूरा नहीं हो पाया  है.

खुरिदस लोगों के इसी सपने से टर्की के राजा की नींद उडी रहती है.

अब आप देख लीजिये, के अपने देश की माइनॉरिटी सुन्नी मुसलमान खुरदिश लोगों के साथ टर्की का प्रसाशन कैसा व्यव्हार कर रहा है, लेकिन कुछ ही दिनों पूर्व UN जनरल असेंबली में यही टर्की भारत को ज्ञान दे रहा था.

खुद ने तो दूसरे देश की सीमा में एक तरफा कारवाही करते हुए बम बरसाने चालू कर दिए, लेकिन अभी कुछ दिनों पहले भारत को यह उपदेश दे रहे थे, की भारत ने कश्मीर विवाद को शांति और बातचीत से सुलझाना चाहिए, नाकि टकराव से.

अगर कश्मीर का विवाद बातचीत से सुलझ सकता है, तो क्या बातचीत करके 36 लाख शरणार्थियों को शांति और सम्मान के साथ सीरिया में नहीं बसाया जा सकता है?

पाखंडी टर्की को यह पहले से पता होगा, की जब वह सीरिया पर बम बरसायेगा, तो भारत उसकी आलोचना करेगा, इसलिए ओवर स्मार्ट बनते हुए उसने पहले से ही अपने जिगरी दोस्त पाकिस्तान के साथ खड़ा रहने का फैसला किया.

आज अच्छा होता, की सीरिया पर हमले के बारे में चिंता प्रकट करते समय, हमारा विदेश मंत्रालय कम से कम इशारों इशारो में ही टर्की के दोहरे चरित्र को उजागर करता?

जैसा की आपको अंदाज़ा होगा, सीरिया में जो आग लग चुकी है, उसकी लपटों की आंच भारत तक भी आएगी. इसलिए हमें तेजी से बदलते हुए इन घटना क्रम पर नजर बनाये रखनी होगी.

उम्मीद के साथ हमें पूरा विश्वास है, की भारत सर्कार विश्व पटल पर इस दौरान टर्की के खिलाफ माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

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