भारत सरकार जल्द मलेशिया से आने वाले पाम आयल पवादी लगाएगी??
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Reference -
जैसा की आपको पता होगा, चीन के राष्ट्रपति अभी भारत में आये हुए है, उनके भारत आगमन पर हम उनका स्वागत करते हैं.
लेकिन साफ़ तौर पर इस यात्रा से हमें कोई उम्मीद नहीं है. आप को तो पता है, जब 2018 की इनफॉर्मल समिट से भारत को कुछ हांसिल नहीं हुआ, तो इस साल की इनफॉर्मल समिट से भारत के भाग्य बदल जायेंगे, इसकी उम्मीद करना अपने आपको बेवक़ूफ़ बनाने जैसा होगा.
और जहाँ तक इन शिखर वार्ता को बेचा तो जा रहा है, इनफॉर्मल समिट के तौर पर, लेकिन आप सभी समझदार हैं, इस यात्रा में जो भी होगा, वह फोर्मल्ली ही होगा. ये सब केवल मार्केटिंग है, और कुछ नहीं. लेकिन इस पुरे तमाशे के पीछे एक मात्र चीनी इरादा यही है, कैसे चीन को लाभ पहुंचने वाली यथा स्थिति की आयु बड़ाई जा सके.
लेकिन फिर भी हम खुले दिमाग से इस यात्रा पर नजर बनाये हुए है, जैसे ही कुछ इम्पोर्टेन्ट होता है, तो हम उस पर वीडियो जरूर बनाएंगे.
इसी बीच,हमें अच्छे से याद है, पिछले 15 दिनों से आप में से ज्यादातर लोगों ने ऐसी अपेक्षा करि थी, की UN जनरल असेंबली में पाकिस्तान का साथ देने के कारण टर्की और मलेशिया को दण्डित जल्दी से जल्दी किया जाये.
जैसा की आपको पता है, टर्की को 2.3 बिलियन डॉलर यानि की अराउंड 16 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट से लगभग बहार निकाल दिया गया है. हालाँकि इस प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर औपचारिक डिसिशन सामने नहीं आया है.
लेकिन आप में से किसी को भी उम्मीद नहीं होगी, की भारत खुले में आकर इस डिसिशन की पब्लिसिटी करेगा. जिस देश को सन्देश दिया जाना था, उसे अब तक सन्देश मिल चुका होगा.
UN जनरल असेंबली में चंद सेकंडों के लिए कश्मीर पर पाकिस्तान का राग अलापने की कीमत टर्की को 16 हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट खोकर चुकानी होगी.
लेकिन अभी भी मलेशिया को कैसे सबक सिखाया जायेगा, यह बात निश्चित नहीं हो पायी थी.
इसी बीच रायटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया से आने वाले पाम आयल और अन्य वस्तुओं के कीमत पर भारत पावंदी लगा सकता है, अथवा उनके राह में बाधा भी खड़ी कर सकता है.
लगता है, भारत सर्कार को आप सभी के दिल की बात पता लग गयी है, तभी तो वह आप सभी के द्वारा सुझाये गए तरीके पर अमल करने की सोच रही है.
इसी बीच रायटर्स की इस रिपोर्ट की खबर से मलेशिया में खतरे की घंटी भी बजने लगी है, और मलेशिया के पाकिस्तान को प्यार करने वाले प्रधान मंत्री ने कहा है, की उन्हें इस बारे में सर्कार की और से ऑफिसियल स्टेटमेंट का अभी भी इतजार है.
यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है, की रायटर्स की खबर को अज्ञात सरकारी सूत्रों के हवाले से छापा गया है, इसलिए जब तक भारत आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई अनोउसमेंट नहीं करता है, तब तक हमें धैर्य पूर्वक इंतजार करना चाहिए.
इसी दौरान इंडोनेशिया के खाद्य और कृषि उप मंत्री ने आधिकारिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण बात कही, जो हमेसा की तरह हमारी मीडिया नजर अंदाज़ कर देगी. वैसे भी उन्हें जब पाकिस्तान और चीन जैसे भारत के दुश्मनो को कवर करने से फुर्सत मिलेगी, तभी तो वह भारत के दोस्तों पर ध्यान दे पाएंगे.
आप सभी को पता होगा, की भारत दुनिया में सबसे अधिक खाद्य तेल का आयत करता है, और भारत की पाम आयल की 70 फीसदी मांग को इंडोनेशिया पूरी किया करता था, और शेष मांग को मलेशिया .
लेकिन इस साल जनवरी में भारत मलेशिया के बीच हुए इकनोमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट के अंतर्गत, भारत ने मलेशिया से आने वाले रिफाइंड पाम आयल पर आयत शुल्क 54% से घटाकर 45 फीसदी कर दिया था, जबकि इंडोनेशिया के रिफाइंड पाम आयल पर 50% ड्यूटी ही लगायी जाती थी.
भारत की इस उदारता का मलेशिया ने जमकर लाभ उठाया, लेकिन इसके कारण भारत में पाम आयल की रिफाइनिंग इंडस्ट्री को दिन में तारे दिखने लगे, तो इंडोनेशिया का भी भारत को रिफाइंड पाम आयल का एक्सपोर्ट कम हो गया.
तब जाकर 8 महीनो बाद भारत सर्कार की आँख खुली, और उसने मलेशिया से आने वाले पाम आयल पर ड्यूटी बढ़ाकर 50% कर दी,
उसके बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री के कश्मीर पर वक्तव्यों को सुनकर हम सभी को विस्वास हो चला था, की मलेशिया भारत की उदारता के काबिल नहीं है.
लेकिन अभी भी इंडोनेशिया और मलेशिया से आने वाले क्रूड पाम आयल पर समान रूप से 40% ड्यूटी और रिफाइंड पाम आयल पर बराबर 50% ड्यूटी लगती है.
इसलिए इंडोनेशिया भारत के सामने एक प्रस्ताव लेकर सामने आ रहा है, की भारत ने इंडोनेशिया से आने वाले पाम आयल पर ड्यूटी कम कर देनी चाहिए, ताकि इंडोनेशिया भारत के पाम आयल मार्किट से मलेशिया को धक्के मारकर बहार निकाल सके.
साथ ही यदि भारत ने इंडोनेशिया को यह ढिलाई दी, तो बदले में इंडोनेशिया अपने नियमो तक में बदलाव कर सकता है, ताकि वह भारत से रॉ शुगर बड़ी मात्रा में खरीद सके.
सरल शब्दों में जबकि भारत की रॉ शुगर की क्वालिटी ज्यादा अच्छी होती है, लेकिन इंडोनेशिया के नियमो के मुताबिक इतनी अच्छी क्वालिटी के सक्कर को वह खरीदते नहीं है, इसलिए उन्हें अपने नियमो को बदलना होगा.
हालाँकि इंडोनेशिया का प्रस्ताव सरसरी निगाह से देखने पर आकर्सक प्रतीत होता है, लेकिन इंडोनेशिया को किसी भी प्रकार की उदारता दिखाने के पहले, हमें विस्वास है, हमारी सर्कार सभी फैक्टर्स पर ध्यान देगी.
क्योकि पाम आयल की बाढ़ इंडोनेशिया से आये या मलेशिया से आये, डूबना तो इसमें भारत की इंडस्ट्रीज को ही है. लेकिन साथ में रॉ शुगर के एक्सपोर्ट बढ़ने से कुल मिलाकर भारत का नफा नुकसान संतुलन में रखा जा सकता है.
एक आम आदमी के दिमाग से जहाँ तक हमें समझ आता है, भारत ने इंडोनेशिया को उतनी ही ढिलाई देनी चाहिए, की मलेशिया को सबक भी मिल जाये, और भारत की लोकल पाम आयल इंडस्ट्री पर भी बहुत ज्यादा बुरा प्रभाव न पड़े.
आप लोग स्मार्ट हैं, इस उपाय को अपनाने से भारत के बाजार में पाम आयल की कीमते भी नहीं बढ़ेगी.
बात साफ़ है, सांप भी मरना चाहिए, और लाठी भी नहीं टूटनी चाहिए.
मलेशिया के पाम आयल पर रेस्ट्रिक्शन लगाने के बजाये, इंडोनेशिया के पाम आयल को ड्यूटी में ढिलाई देना जायदा अच्छा विकल्प लगता है.
और इस कदम को उठाने पर मलेशिया भी रो और चिल्ला नहीं पायेगा, क्योकि जनवरी में भारत ने उसे भी विशेष ढिलाई दी थी, जिसके कारण अहसान फरामोश मलेशिया ने बहुत चांदी काटी थी. अब अगर भारत इंडोनेशिया को भी ऐसी ही सुविधा दे दे, तो उसमे बुराई ही क्या है?
आज का बेहद आसान सवाल है, कौन सा देश भारत से रॉ शुगर खरीदने के लिए अपन नियमो में बदलाव करने के लिए तैयार है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, आकाश बाबू.
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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