चीन ने नेपाल को साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये गिफ्ट में क्यों दिए??
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Reference -
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-provides-rs-233-crore-financial-aid-to-nepal-for-infrastructure-projects/articleshow/70774519.cms?from=mdr
https://www.dw.com/en/china-aims-to-up-nepal-partnership-with-belt-and-road-initiative/a-50810381
https://economictimes.indiatimes.com/news/international/world-news/anti-china-protests-grow-in-nepal-even-as-beijing-claims-bonhomie-over-xi-visit/articleshow/71555073.cms
http://www.xinhuanet.com/english/2019-10/13/c_138467267.htm
https://news.cgtn.com/news/2019-10-13/BRI-and-multilateral-trade-stressed-in-China-Nepal-joint-statement-KL9oG7MAmI/index.html
https://timesofindia.indiatimes.com/world/south-asia/in-nepal-xi-talks-of-deeper-defence-ties/articleshow/71561325.cms
https://timesofindia.indiatimes.com/world/china/chinese-president-xi-pledges-nepalese-rs-56-billion-in-aid-to-nepal/articleshow/71563969.cms
https://www.business-standard.com/article/international/anyone-attempting-to-split-china-will-end-in-shuttered-bones-xi-in-nepal-119101300329_1.html
https://www.nepalitimes.com/opinion/self-reliance-in-nepals-peace-corridor/
https://www.ndtv.com/world-news/china-promises-492-million-aid-to-nepal-for-development-projects-2116174
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-provides-rs-233-crore-financial-aid-to-nepal-for-infrastructure-projects/articleshow/70774519.cms?from=mdr
https://www.dw.com/en/china-aims-to-up-nepal-partnership-with-belt-and-road-initiative/a-50810381
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https://timesofindia.indiatimes.com/world/china/chinese-president-xi-pledges-nepalese-rs-56-billion-in-aid-to-nepal/articleshow/71563969.cms
https://www.business-standard.com/article/international/anyone-attempting-to-split-china-will-end-in-shuttered-bones-xi-in-nepal-119101300329_1.html
https://www.nepalitimes.com/opinion/self-reliance-in-nepals-peace-corridor/
https://www.ndtv.com/world-news/china-promises-492-million-aid-to-nepal-for-development-projects-2116174
जैसा की आपको पता है, भारत की यात्रा पूरी करने के बाद आज चीन के तानाशाह ने नेपाल की यात्रा भी पूरी कर ली.
जैसा की कल के वीडियो में हमने चर्चा करि थी, भारत आने से पहले पाकिस्तान के नेताओ की चीन यात्रा और भारत से जाने के बाद चीन के राष्ट्रपति की नेपाल यात्रा का क्रम सिद्द करता है, की उन्होंने भले ही भारत में कितनी ही मीठी मीठी बातें करि हो, लेकिन उनकी यात्रा का कार्यक्रम संकेत देता है, की वह भारत के लिए कड़वे जहर की तैयारी भारत आने से पहले भी कर रहे थे, और बाद में भी करते रहेंगे.
जबकि चीन के राष्ट्रपति की नेपाल यात्रा का महत्व उनकी भारत यात्रा से अधिक ना सही, तो कम भी नहीं है, लेकिन फिर भी इस यात्रा को कवर करने का समय आज हमारी मीडिया को कम ही मिल पा रहा है.
इस वीडियो में हम जल्दी से भारत के आम आदमी के दृश्टिकोण से चीन के राजा की नेपाल यात्रा की चर्चा करते हैं.
चीन के राष्ट्रपति ने नेपाल में कहा की चीन नेपाल के विकास के लिए अगले दो सालों में 492 Million डॉलर यानि की 3493 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगा.
सबसे पहले नेपाल को इस भारी भरकम चीनी मदद के मिलने की शुभ कामनाएं.
लेकिन आज हमें यह याद रखना होगा, की इसी साल अगस्त में भारत ने नेपाल को 233 करोड़ की आर्थिक सहायता उपलभ्द कराई थी, जिसका प्रयोग नेपाल में सडकों के निर्माण के लिए किया जाना था.
चीन भारत की तुलना में बड़ी आर्थिक शक्ति है, लेकिन चीन की साढ़े तीन हज़ार करोड़ की आर्थिक सहायता और भारत की 200 करोड़ की फाइनेंसियल हेल्प के आंकड़े को देख कर आपको अंदाज़ा लग जायेगा, की नेपाल के लोगों को चीन पर बेसुमार प्यार क्यों आता है.
आप को समझ आ गया होगा, भारत में मीठी मीठी बातें देने के बाद चीन के राष्ट्रपति पैसे देने के लिए नेपाल चले गए थे.
लेकिन बड़ा सवाल यह है, की आखिर पाकिस्तान, नेपाल, श्री लंका और बांग्लादेश पर पैसो की बारिश करने के लिए चीन के पास पैसे के बादलआते कहाँ से है?
आप सभी स्मार्ट लोग हैं, हर साल भारत के साथ व्यापार में चीन को जो भारी भरकम लाभ होता है, उसी पैसे को चीन भारत के खिलाफ इन देशो में बांटता फिरता है.
अब आप कह सकते हैं, की चीन की मर्जी उसे जिसे पैसे देना हो, वह देता रहे. लेकिन अगर दिल दार चीन के पास इतना ही पैसा है, जो वह लैंड लॉक्ड नेपाल को दे रहा है, तो आखिर वह इतनी उदारता दूसरे लैंड लॉक्ड नेशन मंगोलीअ को क्यों नहीं दिखाताहै?
अगर पड़ोसियों का विकास करना ही चीन का एक मात्र लक्ष्य है, तो वह पैसे बांटते समय मंगोलिया और नेपाल के साथ भेद भाव करता दिखाई क्यों देता है?
आपको सायद पता हो, वर्ष 2017 से मंगोलिया IMF bailout प्रोग्राम के ICU में भर्ती है, और उसकी हालत में सुधार भी आया है.
इसलिए सवाल फिर भी यही है, की चीन अगर पैसे की बारिस नेपाल पर कर रहा है, तो पैसे के कुछ छीटें मंगोलिया पर क्यों नहीं मारता है?
इसलिए अगर आप चीन के प्यार में अंधे नहीं है, तो आपको यह आसानी से समझ आ जायेगा, की नेपाल पर चीन के राजा का प्यार इतना क्यों उमड़ रहा है?
आप कह सकते हैं, की हम पैसो जैसी छोटी छोटी बातें करते हैं, लेकिन आप को सायद पता लग गया हो, चीन और नेपाल के बीच 17 एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किये गए, इससे पता चलता है, चीन नेपाल के साथ दोस्ती को जमीं पर लाने की कितनी कोसिस कर रहा है.
आगे बढ़ते हुए,नेपाल और चीन के बीच आपसी सम्बन्धो को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा छेत्र में मेल जोल बढ़ाने पर ध्यान देने का निश्चय किया गया.
साथ ही नेपाल चीन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन पर काम में तेजी लाने का निर्णय लिया गया. लगे हाथों चीन के राष्ट्रपति ने नेपाल को लैंड लॉक्ड से लैंड लिंक्ड कंट्री बनाने का वादा भी कर दिया.
साथ ही चीन के राजा ने अपना असली रूप भी नेपाल में यह कह कर दिखा दिया, की यदि किसी ने भी चीन के टुकड़े करने की कोसिस करि, तो उसकी हड्डियों का चूरमा बना दिया जायेगा.
जिसके जवाब में नेपाल के प्रधान मंत्री ने चीन के सुल्तान को भरोसा दिलाया, की नेपाल हमेसा एंटी चाइना एक्टिविटीज का विरोध करता रहेगा. चूँकि नेपाल तिब्बत के साथ बॉर्डर साझा करता है, इसलिए आपको अंदाज़ा होगा, हड्डी पसली एक करने के महान विचार चीन के राजा ने नेपाल में व्यक्त क्यों किये.
कुछ एक्सपर्ट लोग चीन के राष्ट्रपति की धमकी को होन्ग कोंग से भी जोड़ कर देख रहे हैं. एक्सपर्ट लोगों की मर्जी चाहे जिससे इसे जोड़ें. लेकिन बात यह है, की चीन के राजा ने ऐसी चेतावनी भारत में ना देकर नेपाल में क्यों दी?
हो सकता है, नेपाल की जमीं पर खड़े होकर चीन के राजा भारत और अमेरिका को धमकियां देने की कोसिस कर रहे हों. लेकिन हाल फ़िलहाल कम से कम इन धमकियों का असर भारत पर तो होता हुआ दिखाई देता ही है. हम चीन की कमजोर नस पर हाथ धरने से घबराते हैं, तो चीन हर बार मौका लगने पर भारत का हाथ मरोड़ने से नहीं कतराता है.
इसलिए भारत में दो दिनों में जिस अच्छे मुखोटे को चीन के राजा ने पहन रखा था, वह उन्होंने नेपाल की यात्रा समाप्त करने के पहले उतार कर फेंक दिया.
वैसे भी आप में से ज्यादातर लोगों को इस बात का अंदेसा बहुत पहले से था.
लेकिन अंत में हम नेपाल को शुभ कामनाये देना चाहते हैं, वह चीन की गोद में बैठकर बहुत प्रगति की राह पर आगे बढ़े. लेकिन हमें यह अच्छे से पता है, इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में हमारे नेपाली भाई हमें भला बुरा ही कहेंगे.
ऐसा नहीं है, की नेपाल और चीन के बीच सब कुछ अच्छा है, अगस्त महीने में नेपाल में चीन की कंपनी हुआवे के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे, क्योकि चीन की इस महान कंपनी का हाथ नेपाल की 200 वेबसाइट जिनमे कुछ सरकारी वेबसाइट भी शामिल थी, उनकी हैकिंग में इन्वॉल्व होने का अंदेसा था.
भारत में आज कल हुआवे की पैरवी करनी वालों की आवादी बहुत बढ़ गयी है, अच्छा होता, अगर वह यह देख लेते, की नेपाल में एंटी हुआवे और एंटी चाइना नारे क्यों लगाए जा रहे है.
कुछ लोग होते है, जो खुद गलती करके सीखते हैं, तो कुछ दूसरों की गलती से सीखते हैं, आइये देखते हैं, भारत 5G में हुआवे को लेकर किन लोगों की श्रेणी में खड़ा होगा?
आज का बेहद आसान सवाल है, भारत की यात्रा पूरी करने के बाद चीन के राष्ट्रपति ने पैसों की बारिस किस देश पर करि.
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, कृष्ण बंसल .
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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