टर्की के खिलाफ विश्वशक्ति भारत के स्टैंड का सीरिया ने किया स्वागत!!


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आप सभी स्मार्ट देश भक्त दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जैसा की आपको पता होगा, पिछले सप्ताह जब टर्की ने सीरिया में offensive लॉच किया था, तो उसके तुरंत बाद भारत ने टर्की के इस आक्रामक कदम की आलोचना करि थी.

आपको याद होगा, टर्की उत्तरी सीरिया में  सेफ जोन बनाने के लिए कारवाही अभी भी जारी किए हुए है, ताकि इस इलाके में टर्की में रह रहे सीरियन शर्णार्थिओं को बसाया जा सके है.

लेकिन टर्की के इस ऑपरेशन की कीमत उत्तरी सीरिया में ऑटोनोमस रीजन में रह रहे खुरदिस लोगों को चुकानी पड़ रही है.

लेकिन इसी बीच टर्की की मार झेल रहे खुरदिस फोर्सेज ने सीरिया की सर्कार से हाथ मिला लिया है, और टर्की का सामना करने के लिए सीरिया की सेना उत्तरी सीरिया की तरफ रवाना हो गयी है.

आपको याद होगा, राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल के दौरान, अमेरिका ने सीरिया में राष्ट्रपति असाद को हटाने के लिए एड़ी चोटीका जोर लगा दिया था, और रूस के राष्ट्रपति पुतिन उस समय राष्ट्रपति असाद के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे.

लेकिन उसके बाद खुरदिस फोर्सेज ने अमेरिका के साथ मिलकर आतंकवाद के खात्मे के लिए लड़ाई लड़ी. और उत्तर पूर्वी सीरिया में  खुरदिस लोगों के नेतृत्वा में ऑटोनोमस रीजन बन गया.

अब जब अमेरिका सीरिया से निकल गया है, और राष्ट्रपति ट्रम्प के लेटेस्ट ट्वीट के अनुसार वह सीरिया से वापस आने के निर्णय पर अभी भी कायम है,  और उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है, की सीरिया में जिसको जिसके साथ लड़ना है, लड़ते रहे, में तो चला बहार इन फालतू की न ख़तम होने वाली लड़ाइयों से.

राष्ट्पति ट्रम्प के द्वारा सीरिया से बहार निकलने का सीधा लाभ अभी हाल फिलहाल तो सीरिया के असाद रेजीम को ही मिलता नजर आ रहा है, और दूर रूस में बैठे राष्ट्रपति पुतिन के लिए भी यह खुसी की खबर है.

इसी बीच ट्रम्प ने यह भी कह दिया है, की सीरिया पर हमला करने के लिए टर्की के खिलाफ जल्द बहुत बड़े प्रतिबन्ध लगाए जाने वाले है.

पता नहीं, ट्रम्प साहब को किस चीज़ का इंतजार है, उत्तरी सीरिया में सेफ जोन बन जाने के बाद अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का क्या प्रभाव होगा, ये उन्हें ही ज्यादा अच्छे से पता होगा.

जैसा की आपको अंदाज़ा लग गया होगा, सीरिया में उथल पुथल के हालत बने हुए है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दवाजी होगी.

लेकिन भारत के लिए एक अच्छी खबर सीरिया से आयी है, भारत में सीरिया के राजदूत ने टर्की के खिलाफ भारत के स्टेटमेंट का कुछ दिनों बाद ही सही स्वागत किया है, 

सीरिया ने भारत के stand को सही बताकर, यह बात भी ध्यान में रखी है, की विस्वा समुदाय में भारत की आवाज़ अब बहुत मजबूत हो चली है.

जबकि सीरिया को पलड़ा अपने पक्ष में झुकता लग रहा है, विस्वास के साथ सीरिया ने आज भारत के लिए ऐसा स्टेटमेंट जारी किया है.

टर्की के सीरिया के ऊपर आक्रमण की इस पृष्ठ भूमि में हमें यह याद रखना चाहिए, की ऐतिहासिक रूप से भारत और सीरिया के बीच सम्बन्ध अच्छे रहे हैं.

जबकि भारत ने गोलन hights के ऊपर सीरिया के दावे का समर्थन किया था, तो सीरिया ने भी कश्मीर बिबाद को भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा स्वीकार किया था.

जबकि सीरिया और हमारे समबन्ध बहुत पुराने है, और इन दोनों देशो के बीच व्यापार भी फल फूल रहा था. लेकिन आपको पता है, सीरिया में फैली हुई अनिश्चितता के कारण भारत और सीरिया के सम्बन्ध और मजबूत नहीं हो पाए.

यह बात आपको इसी फैक्ट से समझ आ जाएगी, की लास्ट बार भारत के कॉमर्स मिनिस्टर ने सीरिया की यात्रा वर्ष 2010  में करि थी.

इसी बीच आपको पता होगा, सीरिया और टर्की के बीच 36 का आंकड़ा है. और भारत भी टर्की से हिसाब बराबर करने की फ़िराक़ में है.

आपको याद होगा, UN जनरल असेंबली में भाग लेने गए मोदी जी ने टर्की के दुसमन सायप्रस, ग्रीस और अर्मेनिआ के नेताओं से मुलाक़ात करि थी.

संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान का साथ देने के लिए भारत ने टर्की को पहले ही 16 हज़ार करोड़ के इंडियन नेवी के project से अनौपचारिक रूप से तो बहार निकल ही दिया है.

और अब भारत और सीरिया के बीच खुले में दिखता हुआ, समन्वय टर्की की नींद हराम करने के लिए काफी है.

टर्की भारत के खिलाफ कुछ भी कहता और करता रहे, और भारत मुँह पर उगली धरकर बैठा रहेगा, लगता है, टर्की की ऐसी गलत फहमी अब दूर हो चली होगी.

जैसा की सीरिया के राष्ट्रपति असाद ने वर्ष 2007 में आह्वाहन किया था, की भारत ने मिडिल ईस्ट पीस प्रोसेस में शक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.

बात यह है, की हमें सैन्य रूप से इन विवाद में उलझने की जरूरत नहीं है, लेकिन कूट नीति के छेत्र में पर भारत को अपना रोल आगे बढ़कर निभाना चाहिए. 

और अब ऐसा लगता है, की  भारत मिडिल ईस्ट में बिछी शतरंज की बिसात पर अपने मौहरे अच्छे से चलने की कोसिस करने लगा है. उम्मीद है, भारत के एक्टिव हो जाने से सीरिया और सायप्रस जैसे देशों को राहत तो पाकिस्तान के प्यारे टर्की की रातों की नींद हराम भी होने लगेगी.

लेकिन अंत में हम फिर भी यही कहना चाहेंगे, की सीरिया में हालत बहुत नाजुक है, इसलिए हमें निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले धैर्य रखना होगा.

आजका बेहद आसान सवाल है, की आक्रामक टर्की के खिलाफ दिए गए भारतीय स्टेटमेंट का किस देश ने स्वागत किया है?

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  नथमल कोठारी.


और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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