मोदी जी ने टर्की के यात्रा क्यों कैंसिल कर दी??


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आप सभी सम्माननीय दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जैसा की आपको पता लग गया होग़ा, की प्रधान मंत्री मोदी जी की आगामी टर्की की यात्रा को कैंसिल कर दिया गया है.

अभी कुछ ही दिनों पहले हमने चर्चा करि थी, किस प्रकार UN जनरल असेंबली और FATF  में पाकिस्तान का साथ देने की कीमत टर्की को अदा करनी पड़ रही है.

UN जनरल असेंबली में पाकिस्तान से पड़े पढाये राग को अलापने के बदले में टर्की को इंडियन नेवी के 16000 करोड़ के प्रोजेक्ट से अनौपचारिक तौर पर  निकाल दिया गया.

एक और मोदी जी ने टर्की के पड़ोसियों सायप्रस, ग्रीस और अर्मेनिआ के साथ सम्बन्धो को और मजबूत करने की कोसिस UN जनरल असेंबली में भी जारी रखी.

और फिर बाद में जब टर्की ने सीरिया पर offensive लांच किया, तो भारत ने कड़े शब्दों में टर्की के आक्रमण की आलोचना करि. जिसका कश्मीर पर भारत का साथ देते हुए सीरिया ने स्वागत भी किया था.

लेकिन फिर भी टर्की की अकल ठिकाने पर नहीं आयी, और उसने FATF में पाकिस्तान को बचाने की भरपूर कोसिस करि. और हाल फिलहाल पाकिस्तान को अगले चार महीनो की मोहलत भी मिल गयी है.

और अब ऐसी खबरें आ रही हैं, की मोदी जी ने इस महीने के अंत में टर्की जाने का प्लान ही कैंसिल कर दिया है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने डिप्लोमेटिक अंदाज़ में कहा, की जब मोदी जी की यह यात्रा फाइनल ही नहीं हुई थी, तो इसे अब कैंसिल कैसे माना जा सकता है.

लेकिन इस घटना क्रम के बारे में भारत में टर्की के राजदूत ने क्या कहा, इस बात की चर्चा करना बहुत जरूरी है.

जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने मोदी जी की टर्की की यात्रा की सम्भावना को ख़तम कर दिया है, टर्की को अभी भी आशा है, की मोदी जी की टर्की यात्रा की डेट्स उसे मिल जाएँगी.

जहाँ तक टर्की को इंडियन नेवी के प्रोजेक्ट से निकाले जाने का सवाल है, टर्की भारत को उपदेश दे रहा है, की भारत को कमर्शियल और स्ट्रेटेजिक इश्यूज को एक दूसरे के साथ मिलाना नहीं चाहिए.

चुकी मोदी जी ने टर्की के राष्ट्रपति से मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटी के आईडिया के ऊपर बातचीत करि थी, इसलिए मानो भारत पर उपकार करने के लिए टर्की इंडियन नेवी के प्रोजेक्ट में भाग लेने के लिए भी तैयार है.

और जहाँ तक टर्की के राष्ट्पति के कश्मीर राग का सवाल है, तो टर्की के राजदूत ने अपना असली रूप दिखलाते हुए कहा, की भारत टर्की को blame नहीं कर सकता है, क्योकि टर्की के खिलाफ काम करने वाले संगठन भारत में भी शक्रिय है.

इसलिए जब टर्की इन संघटनो के  कारण दोनों देशों के सम्बन्ध को प्रभावित नहीं होने देता, तो भारत ने भी कश्मीर पर टर्की के स्टेटमेंट को सुनकर भी अनसुना कर देना चाहिए.

पाकिस्तान की तरह टर्की को भी भारत के साथ झूठी बराबरी करने की लत लग गयी है, और तो और अपनी हरकतों के लिए माफ़ी मांगने के बजाये, अब दुस्ट टर्की चाहता है, की भारत जैसा चीन के साथ व्यवहार करता है, वैसा ही उसे टर्की के साथ भी करना चाहिए.

क्योकि जिस तरह टर्की पाकिस्तान के पीछे खड़ा है, उसी तरह चीन भी पाकिस्तान को पाल पोश रहा है.

इसलिए इन सबके बाबजूद यदि मोदी साब चीन के राष्ट्रपति के साथ चेन्नई में नारियल पानी पि सकते हैं, तो मोदी जी अंकारा में टर्की के राष्ट्रपति के साथ बैठ क्यों नहीं सकते हैं?

वैसे ऐसी बातें करते समय टर्की के राजदूत ने सिद्ध कर दिया है, की वह भारत की जनता की भावनाओ को समझते ही नहीं है.


क्योकि मोदी जी भले ही चीन के राष्ट्रपति के साथ फोटो खींचा रहे हों, हम सभी को पता था, की यह तमाशा ही है.

लेकिन टर्की में ऐसा तमाशा देखने की हमारी कोई इच्छा नहीं है.

वैसे भी भौगोलिक सत्य हमारे सामने है, चीन हमारा पडोसी देश है, इसलिए टर्की को इस गफलत में नहीं रहना चाहिए, की भारत उसे चीन के समान सम्मान देगा.

और वैसे भी हम में से ज्यादातर लोगों का मानना है, और आज टर्की के राजदूत का यह स्टेटमेंट हमारी थिंकिंग को सही ठहराता है, की चीन खुद भारत की मेहमान नवाजी का हक़दार नहीं है. और इन पाकिस्तान, टर्की, मलेशिया जैसे छोटे छोटे देशों पर समय बर्बाद करने के बजाये, भारत इन सभी लोमड़ियों के रिंग लीडर चीन से पहले निपटे.

क्योकि यदि हम चीन को आइना दिखा देंगे, तो ये छोटे मोटे देश भारत को आखें दिखाने के पहले दस बार सोचेंगे.

कोई बात नहीं, 70 सालों बाद ही सही, भारत ने पाकिस्तान को लेकर अपनी रण निति बदल ली है, हमें उम्मीद है, एक दिन भारत चीन को लेकर भी फ्रंट फुट पर खेलेगा.

आज का बेहद आसान सवाल है, की इस महीने के अंत में मोदी जी ने किस देश की यात्रा को कैंसिल कर दिया है.

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  सुधांशु कुमार सिन्हा.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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