अमेरिकी अटॉर्नी ने मोदी जी की तुलना राष्ट्रपति लिंकन से क्यों करि?


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 आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.




जैसा की आपको पता  चल गया होगा, की भारतीय मूल के अमेरिकी अटॉर्नी ने प्रधान मंत्री मोदी जी की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से करि है.




आपको सायद जानकारी हो, गरीब परिवार में जन्मे अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 वे राष्ट्रपति थे, और उन्हें आज भी पब्लिक, पक्ष और विपक्ष के पॉलिटिशियन और एक्सपर्ट के द्वारा अमेरिका का सबसे महान राष्ट्रपति माना जाता है.




इसलिए सवाल उठता है, की क्या मोदी जी की तुलना अब्राहम लिंकन से करना सही है?




सबसे पहले तो हमें ध्यान रखना होगा, की राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने वर्ष 1861 से 1865 के बीच अपना कार्यकाल पूरा किया.




और इसी दौरान अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा गृह युद्ध लड़ा गया, जिसमे राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका को यूनाइटेड रखने में अबूत पूर्व सफलता प्राप्त करि.




और इसी बीच जून 1863 में उन्होंने अमेरिका में गुलामी की व्यवस्था समाप्त करवाई. राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने कानून में बदलाव करके 35 लाख अमेरिकियों को एक ही झटके में सदियों की गुलामी से आजाद कर दिया.




जब अमेरिका में सिविल वॉर चल रहा था, तब यह कानूनी बदलाव करके, राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने सिद्ध किया, की सही काम करने का यदि राइट टाइम कभी होता है, तो वह केवल अभी वर्तमान में होता है.




बड़े पैमाने पर विषेशज्ञों का मानना है, गुलामी की व्यवस्था का अंत करके राष्ट्रपति लिंकन ने सिविल वॉर जीतने में सफलता प्राप्त करि, क्योकि सरल शब्दों में दक्षिण के राज्य जो अमेरिका से अलग होना चाहते थे, वहां पर गुलामी की प्रथा का चलन बहुत अधिक था.




हो सकता है, सिविल वॉर को जीतना राष्ट्रपति लिंकन का शुरुआत में लक्स्य रहा भी हो, लेकिन फिछले 150 सालों ने सिद्ध किया है, की राष्ट्रपति लिंकन ने जो किया, वह युद्ध जीतने के लिए नहीं किया था, उनके उस एक डिसिशन ने मानव जाती का इतिहास बदल कर रख दिया.




आपको सायद यह भी पता हो, सिविल वॉर जीतने के साथ, अब्राहम लिंकन ने दूसरा कार्यकाल भी जीता, लेकिन फिर अमेरिका के दक्षिणी राज्यों के अलगाववाद का समर्थन करने वाले एक व्यक्ति ने ही, गोली मारकर राष्ट्रपति लिंकन की हत्या कर दी.




बात हम यह कहना चाह रहे हैं, की जबकि राष्ट्रपति लिंकन ने मानव जाती के कल्याण के लिए महानतम काम किया, फिर भी उस समय उन्हें जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा.






अब अगर मोदी जी की बात करें, तो यह बात सही लग सकती है, की अपने कार्यकाल में जीतनी दिक्कतों का सामना राष्ट्रपति लिंकन को करना पड़ा, उतना बड़ा गृह युद्ध मोदी जी के पहले कार्य काल में नहीं हुआ.




लेकिन यह बात भी जमीनी सत्य है, की चीन के द्वारा समर्थित और पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजित आतंकवाद भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या है.




अब्राहम लिंकन की ही तरह, मोदी जी ने भी समस्या का साहस के साथ सामना किया, और सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रणनीत को मूल भूत तरीके से ही बदल दिया.




हलाकि आतंकवाद पर पूर्ण विजय प्राप्त करना अभी वाकी है, लेकिन प्रेजिडेंट लिंकन को गृह युद्ध का सामना करना पड़ा था, वह किसी विदेशी शक्ति के द्वारा सीधे तौर पर लगातार उकसाया नहीं जा रहा था.




इसलिए मौटे तौर पर कहा जा सकता है, की मोदी जी इस पैमाने पर लिंकन साहब से अभी थोड़ा सा पीछे हैं. लेकिन विस्वाश के साथ हमें उम्मीद है, की मोदी जी जिस राह पर निकल पड़े हैं, उस पर वह जल्द ही आतंकवाद पर असंभव जीत को हांसिल कर लेंगे.




आगे बढ़ते हुए, मोदी जी ने अगस्त महीने में कश्मीर के ऊपर से धारा 370 की काली छाया को हटा दिया, और इसके लिए  उन्हें राष्ट्रपति लिंकन की तरह अपनी और विधायी शक्ति का प्रयोग करना पड़ा.




राष्ट्रपति लिंकन ने जहाँ 35 लाख लोगों को आजाद कराया था, तो मोदी जी ने जम्मू और कश्मीर राज्य में रहने वाले सवा करोड़ से भी अधिक लोगों को भारत के अन्य लोगों की तरह समान अधिकार और आजादी दे दी है.




आतंकवाद मानव अधिकारों का सबसे बड़ा दुसमन है, यदि मोदी जी का यह कदम आतंकवाद को समाप्त करने में सफलता प्राप्त करेगा, तो मोदी जी भी मानव अधिकारों के सबसे बड़े रक्षको में गिने जायेंगे.




साथ ही जिस प्रकार अब्राहम लिंकन के कदमो का पूरी दुनिया पर प्रभाव पड़ा, हो सकता है, मोदी जी की आतंकवाद से सीधे लड़ने की रणनीति को पूरी दुनिया अपनाने लगे.




अंत में ऐसा लगता है, की मोदी जी की लिंकन से तुलना करना तो  सही है, लेकिन हमें ध्यान रखना होगा, की पिछले 150 सालों के अनुभव के बाद यह सिद्ध हुआ है, की राष्ट्रपति लिंकन अमेरिका के महानतम राष्ट्रपति थे .




उसी प्रकार मोदी जी को भारत के महानतम  प्रधान मंत्री के तौर पर स्वीकारने का मौका हमें आगे आने वाले समय को देना चाहिए.




 गरीब परिवार में जन्मे और विषम परिस्थितियों में पले बड़े  अब्राहम लिंकन और मोदी जी की तुलना करने का मौका इतिहास को जरूर मिलेगा. हमें आशा है, मोदी जी इस तुलनात्मक अध्ययन में अवल्ल जरूर होंगे.




आजका बेहद आसान सवाल है, अमेरिका में गुलामी की प्रथा को किस राष्ट्रपति ने समाप्त किया था?




पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,  विजय जादव.





और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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