भारत बलोचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद कैसे कराएगा??
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Reference -
हाल के कुछ वर्षो में बलोचिस्तान को लेकर हम भारतियों के बीच जागरूकता बहुत बड़ी है.
बलोचिस्तान पाकिस्तान से अलग होकर एक आजाद मुल्क बने, इस डिमांड का आप में से ज्यादातर लोग सपोर्ट करते होंगे.
लेकिन इस वीडियो में हम जल्दी से इस बात की चर्चा करेंगे, की भारत ने बलोचिस्तान को कैसे खो दिया?
आपको सायद पता हो, वर्ष 1947 में बलोचिस्तान चार प्रिंसली स्टेट्स से मिलकर बना हुआ था, जिनमे से तीन प्रिंसली स्टेट्स मकरान, लॉस बेला और खारन ने पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय ले लिया था.
ध्यान रखने वाली बात यह है, की बलोचिस्तान की सबसे बड़ी प्रिंसली स्टेट कलात के लॉयर जिन्नाह ने वर्ष में ही 1946 अग्रेजों से डिमांड करि थी, की भौगोलिक कारणों से कलात को ब्रिटिश इंडिया से अलग कर दिया जाना चाहिए.
इसी दौरान जबकि जिन्नाह कलात को आजाद होने में मदद कर रहे थे, हमारी कांग्रेस पार्टी को इस आईडिया में डाउट था, की कलात एक आजाद देश कैसे हो सकता है? और इसी सम्बन्ध में कलात के राजा वर्ष 1946 में कांग्रेस पार्टी के लीडर अब्दुल कलाम आज़ाद के संपर्क में रहे थे.
इस बैकग्राउंड में चौथी सबसे बड़ी प्रिंसली स्टेट कलात ने आजाद रहने का निश्चय लिया, और 12 अगस्त 1947 से 27 मार्च 1948 के बीच स्टेट ऑफ़ कलात आजाद भी रही. 30 मार्च 1948 में ही स्टेट ऑफ़ कलात पाकिस्तान में शामिल हुआ.
इसलिए सवाल उठता है, जब कलात आजाद था , तब उन 10 महीनो के दौरान क्या हुआ?
शुरुआत में कलात आजाद जरूर था, लेकिन 27 मार्च को आल इंडिया रेडियो पर मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टेट्स के सेक्रेटरी VP मेनन की प्रेस कांफ्रेंस का प्रसारण हुआ.
आप सभी को याद होगा, 565 प्रिंसली स्टेट्स को मिलाकर भारत का निर्माण करने में मेनन साहब ने सरदार पटेल के साथ कंधे से कन्धा मिलाया था.
इसलिए जो बात मेनन साहब ने कही, उसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है, उन्होंने रेडियो पर साफ़ तौर पर कहा था, की खान ऑफ़ कलात यानी की कलात के राजा भारत में शामिल होने के लिए आग्रह कर रहे हैं. लेकिन भारत को कलात से कुछ लेना देना नहीं है.
उसी के एक दिन बाद भारत के गृह मंत्री सरदार पटेल ने क्लैरिफिकेशन जारी कर दिया, की कलात की तरफ से ऐसी कोई रिक्वेस्ट नहीं आयी है.
लेकिन यदि हम ब्रिटैन के फॉरेन पालिसी सेण्टर की माने तो वर्ष 1947 में खान ऑफ़ कलात ने भारत में शामिल होने के लिए इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन पर हस्ताक्षर कर दिए थे, लेकिन भारत के प्रधान मंत्री नेहरू ने साइंड इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन के पेपर्स लौटा दिए.
इसलिए आपको समझ आ रहा होगा, 28 मार्च 1948 में सरदार पटेल को क्लैरिफिकेशन जारी करना क्यों पड़ गया होगा.
लेकिन जबकि भारत में असमंजस का खेल चल रहा था, 27 मार्च 1947 को आल इंडिया रेडियो पर हुए प्रसारण से पाकिस्तानी सेना के कान खड़े हो गए, और उसने कलात पर हमला करके 30 मार्च 1947 तक कलात को अपने पाकिस्तान में शामिल करवा लिया. और इस दौरान भारत तमाशा ही देखता रह गया.
लेकिन जब खान ऑफ़ कलात यानि के कलात के राजा अहमद यार खान ने 27 मार्च को ही पाकिस्तान के साथ इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन पर साइन कर दिए थे, तब भी उनके छोटे भाई प्रिंस आघा अब्दुल करीम बलोच ने बगावत कर दी, और उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में रहकर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी.
उस दौरान उन्हें शेष बलोचिस्तान से कोई ज्यादा सपोर्ट नहीं मिला, और वर्ष 1950 में उन्होंने हथियार डाल दिए.
जबकि कलात पाकिस्तान में वर्ष 1948 में शामिल हो गया था, फिर भी वर्ष 1955 तक ही प्रिंसली स्टेट बना रहा, इस प्रकार कलात का पाकिस्तान के साथ एकीकरण वर्ष 1955 में ही हो पाया.
लेकिन पाकिस्तान के द्वारा किये गए विस्वास घात से आहत हुए अहमद यार खान ने फिर अपने आपको खान ऑफ़ कलात वर्ष 1958 में घोसित कर दिया. तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें जेल में ढूंस दिया.
और तभी से बलोचिस्तान की आजादी की आग धधक रही है.
आज हमारे नेता और एक्सपर्ट जो कश्मीर से धरा 370 हटाए जाने पर रोते बिलखते रहते हैं, सायद ही कभी उन्होंने कलात को लेकर आंसू बहाए होंगे.
अब आप बलोचिस्तान के घंटनाक्रम को कश्मीर से जोड़ कर देखें, जबकि कलात भारत के साथ जुड़ने के लिए तैयार था, तभी 22 अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जे के लिए हमला बोल दिया.
भारत और पाकिस्तान के इस पहले युद्ध में सीज़ फायर का ऐलान 31 दिसंबर 1948 को हुआ, और लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल अस्तित्व में आ गयी.
इसलिए सवाल उठता है, की जब भारत पाकिस्तान से कश्मीर को डिफेंड कर रहा था, तो भारत ने कलात को कब्जे में लेकर पाकिस्तान के खिलाफ offensive लांच क्यों नहीं किया.
और जबकि कलात भारत में शामिल होने के लिए तैयार था, कलात पर नियंत्रण होते ही, जैसा की आप इस मैप को देखकर भांप सकते हैं, पूरा बलोचिस्तान भारत में शामिल हो जाता..
भारत के बड़े बड़े डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं, की 1948 की लड़ाई में भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को पीछे नहीं धकेल पाती, क्योकि LOC के उस पार पाकिस्तान मजबूत हालत में था.
भारत के नेता लोग डिफेंसिव क्यों थे, यह समझ में आ सकता है, क्योकि भारत के पास हमेसा से खोने के लिए बहुत कुछ था. लेकिन हमारे एक्सपर्ट लोगों की सोच आज तक इतनी बोनी और डरपोक क्यों रही है??
आप ही बताएं, उस समय यदि भारत ने मोर्चा बलोचिस्तान में खोल दिया होता, तो क्या पाकिस्तान अपनी पूरी ऊर्जा कश्मीर पर केंद्रित कर पाटा ?
इन फैक्ट 1965 में भारत ने पंजाब में मोर्चा खोलकर ही पाकिस्तान को सबक सिखाया था, नहीं तो 1965 में ही कश्मीर हमारे हाथों से चला गया होता?
बात साफ़ है, हमने कश्मीर को डिफेंड किया, और परिणाम हमारे सामने है, आज जम्मू कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है.
लेकिन तब यदि भारत ने aggresive खेल खेला होता, तो आज कम से कम बलोचिस्तान और पूरा जम्मू और कश्मीर हमारे पास होता.
आप भारत वर्ष का पूरा इतिहास उठा करके देख लीजिये, जबसे हमने डिफेंसिव होना चालू किया, हम लगातार सिकुड़ते ही चले जा रहे हैं.
अब आप कह सकते हैं, की मौका गुजर जाने के बाद हर कोई होशियारी दिखाता है. इस वीडियो के माध्यम से हम सिर्फ यह कहना चाह रहे हैं, की हमें इतिहास से कुछ सीखना चाहिए, ताकि हम इतिहास की गलतियों को भविष्य में बार बार दोहराते नहीं रहें.
आप जानते होंगे, की नेहरू जी ने कलात के भारत में शामिल होने को तबज्जो सिर्फ इसलिए नहीं दी, की वह भारत से बहुत दूर है. जब उन्होंने कलात के भारत में शामिल होने को लेकर साइंड इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन के पेपर लौटाए, तो सायद कोई उनसे यह भी पूछ लेता, की पूर्वी पाकिस्तान पश्चिमी पाकिस्तान से कितना दूर है, फिर भी इन दोनों हिस्सों को भारत से एक साथ अलग करके पाकिस्तान क्यों बनाया गया?
बात साफ़ है, 1947 में पाकिस्तान ने जिस दूरदृस्टि को दिखाकर भारत के लिए समस्याएं पैदा करि, उस समय हम अपनी सूझ बूझ का इस्तेमाल करके पैदा होने के पहले ही इन समस्यायों को मार नहीं पाए.
परिणाम हमारे सामने है, 70 साल से भी अधिक होने के बाद पाकिस्तान कहता है, की कश्मीर पार्टीशन का unfinished एजेंडा है, और हम विस्वास के साथ यह तक नहीं कह पाते हैं, की बलोचिस्तान के आजाद होने के बाद ही 1947 में चालू हुए पार्टीशन का एजेंडा पूरा होगा.
बलोचिस्तान आजाद कैसे होगा, इसका जवाब हमें तभी मिलेगा, जब हम यह समझ पाएंगे, की आखिर वह पाकिस्तान का गुलाम कैसे बना?
अंत में इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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