India gifts Afghanistan two attack Helicopters & 75000 Ton Wheat.
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Reference -
https://www.thehindubusinessline.com/opinion/wheat-diplomacy/article10012274.ece
https://www.news18.com/news/world/we-have-nothing-against-india-and-need-its-help-to-reconstruct-afghanistan-says-taliban-envoy-2345419.html
https://www.news18.com/news/world/we-have-nothing-against-india-and-need-its-help-to-reconstruct-afghanistan-says-taliban-envoy-2345419.html
आप सभी स्मार्ट देश भक्त दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जैसा की अपने हाल ही में सुना होगा, की तालिबान का कहना है, की भारत को उससे डरने की जरूरत नहीं है. और उसे अफ़ग़ानिस्तान के पुनर निर्माड़ में भारत समेत अन्य देशो की मदद चाहिए.
इस स्टेटमेंट को कहते हैं, सो चूहे खाके बिल्ली हज को चली.
आप सभी स्मार्ट लोग हैं, पिछले साल से एक्सपर्ट लोग भारत को उपदेश दे रहे थे, की अमेरिका की तरह हमें भी तालिबान से बातचीत चालू कर देनी चाहिए.
जब उनकी दाल नहीं गल पायी. तो अब तालिबान भी मीठी मीठी बातें करके अपनी इमेज चमकाने की कोसिस में लगा हुआ है, ताकि हिस्ट्री को भूलकर भारत उसके प्रति फ्यूचर में पॉजिटिव रुख अख्तियार कर ले.
लेकिन आप सभी दर्शकों का साफ़ तौर यह मानना था, की किसी भी हालत में भारत को तालिबान की प्यार भरी बातों के जाल में नहीं फसना चाहिए, और लगातार अफ़ग़ानिस्तान की लोक तांत्रिक सर्कार को समर्थन जारी रखना चाहिए.
आप सभी ने देखा होगा, पहले तो तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत का तमाशा क़तर में आयोजित किया जाता था, लेकिन इसके लिए दिवालिये पाकिस्तान को हर बार तालिबान के नेताओं की दोहा तक हवाई यात्रा के लिए स्पेशल एयर क्राफ्ट की व्यवस्था करनी होती थी.
आप देख लीजिये, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री खुद तो कमर्शियल एयरलाइन में धक्के खाते घूमते हैं, लेकिन तालिबान के नेताओं को उड़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती थी.
इसलिए अब ऐसा लगता है, पाकिस्तान ने अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत अपने देश में करवाने का निर्णय ले लिया है. वैसे भी सबको पता है ही, की पाकिस्तानी ऑक्सीजन के बिना तालिबान एक मिनट तक जिन्दा नहीं रह सकता है.
चूँकि ग्राउंड पर सिचुएशन नहीं बदली है, तो भारत ने अपनी रणनीति क्यों बदल लेना चाहिए.
इस बारे में आप सभी दर्शको की सलाह पर काम करते हुए, भारत ने अभी भी अफ़ग़ानिस्तान के वर्तमान प्रशाशन के पीछे मजबूती से खड़े रहने का निर्णय लिया है.
अगर भारत के लिए कोई नेगेटिव खबर होती, तो उसे बड़े पैमाने पर मीडिया में कवर किया जाता है, लेकिन दुर्भाग्य वश जब भारत के अच्छे कामो की चर्चा भारत में ही नहीं होती, तो भला पाकिस्तान क्यों इन बातों को सीरियसली लेने लगा.
आपको याद होगा, वर्ष 2017 में भारत ने चाबहार पोर्ट के रास्ते से पहली बार गेंहू अफ़ग़ानिस्तान भेजा था, तब से भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को 11 लाख टन गेंहू गिफ्ट के तौर पर दिया है.
एक समय था, जब अफ़ग़ानिस्तान के गेंहू के मार्किट पर पाकिस्तान का एक छत्र राज्य था, लेकिन पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी गेंहू के आटे की सप्लाई ना हो पाने के कारण, 800 पाकिस्तानी आटे की मिलें बंद हो गयी थी.
और अब इस साल भारत ने 75 हज़ार मीट्रिक टन गेंहू गिफ्ट के तौर पर अफ़ग़ानिस्तान को निर्यात करने का निर्णय ले लिया है.
सबसे पहली बात यह है, की कोई भारत सर्कार गिफ्ट नहीं कर रही है, ये हम भारतीय लोगों के पेशों से भारत में FCI के द्वारा पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ख़रीदा गया गेंहू था. इसलिए यह गेंहू हम भारतीयों की तरफ से अफ़ग़ान भाइयो को गिफ्ट है.
लेकिन हमें यहाँ पर याद रखना चाहिए, की भारतीय किसान वीरों की मेहनत का कमाल है, की हमारे खाद्य भंडार भरे पड़े हैं.
कुछ ही दिनों पहले भारत सर्कार के खाद्य विभाग ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया था, की भारत ने हमारी जरूरत से ज्यादा गेंहू और चावल मानवता के आधार पर योग्य मित्र देशों को दे देना चाहिए.
ऐसा लगता है, की इसी के बाद फॉरेन मिनिस्ट्री ने 75 हज़ार टन गेंहू अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट करने का फैसला लिया होगा.
दोस्तों, ऐसा नहीं है, की भारत का अफ़ग़ानिस्तान को सहयोग केवल गेहू गिफ्ट करने तक ही सीमित है, कल ही भारत ने दो Mi 24 लड़ाकू हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट किये हैं.
आपको याद होगा, इसी साल मई महीने में भारत 2 Mi 24 लड़ाकू हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट कर चूका था.
वर्ष 2015 और 2016 के बीच भारत ने अफ़ग़ानिस्तान एयर फाॅर्स को चार अटैक हेलीकाप्टर गिफ्ट किये थे, लेकिन स्पेयर पार्ट्स के आभाव में उन्हें ग्राउंड कर दिया गया. इन ही चार ग्राउंडेड अटैक हेलीकाप्टर के रिप्लेसमेंट के लिए इस साल भारत ने चार refurbished Mi 24 अटैक हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को दिए हैं.
इस प्रकार से सिद्ध हो जाता है, की अफ़ग़ान एयर फाॅर्स को मजबूत बनाये रखने के लिए भारत अपने संसाधनों की सीमा में रहकर मित्र अफ़ग़ानिस्तान की लगातार मदद करने की पूरी कोसिस कर रहा है.
यहाँ पर फिर वही बात, इन पुराने अटैक हेलीकाप्टर को refurbished करने का खर्चा भी हम भारतीय टैक्स पयेर्स ने उठाया है, इसलिए भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच आपसी सहयोग को सरकारों के स्तर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
हम सभी भारतीय एक खुस हाल और शक्तिशाली अफ़ग़ानिस्तान के निर्माण में हर संभव मदद करते रहेंगे.
लेकिन हमें पता है, अफ़ग़ानिस्तान को बर्बाद करने के बाद पाकिस्तान इसी कोसिस में लगा रहता है, की जल्द से जल्द कैसे हिन्दोस्तान को अफ़ग़ानिस्तान की तरह राख में तब्दील किया जाये .
आइये देखते हैं, इस बार भारत और अफ़ग़ानिस्तान की निर्माण की शक्ति जीतेगी, अथवा पाकिस्तान की विनाश की तागत.
अंत में इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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जैसा की अपने हाल ही में सुना होगा, की तालिबान का कहना है, की भारत को उससे डरने की जरूरत नहीं है. और उसे अफ़ग़ानिस्तान के पुनर निर्माड़ में भारत समेत अन्य देशो की मदद चाहिए.
इस स्टेटमेंट को कहते हैं, सो चूहे खाके बिल्ली हज को चली.
आप सभी स्मार्ट लोग हैं, पिछले साल से एक्सपर्ट लोग भारत को उपदेश दे रहे थे, की अमेरिका की तरह हमें भी तालिबान से बातचीत चालू कर देनी चाहिए.
जब उनकी दाल नहीं गल पायी. तो अब तालिबान भी मीठी मीठी बातें करके अपनी इमेज चमकाने की कोसिस में लगा हुआ है, ताकि हिस्ट्री को भूलकर भारत उसके प्रति फ्यूचर में पॉजिटिव रुख अख्तियार कर ले.
लेकिन आप सभी दर्शकों का साफ़ तौर यह मानना था, की किसी भी हालत में भारत को तालिबान की प्यार भरी बातों के जाल में नहीं फसना चाहिए, और लगातार अफ़ग़ानिस्तान की लोक तांत्रिक सर्कार को समर्थन जारी रखना चाहिए.
आप सभी ने देखा होगा, पहले तो तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत का तमाशा क़तर में आयोजित किया जाता था, लेकिन इसके लिए दिवालिये पाकिस्तान को हर बार तालिबान के नेताओं की दोहा तक हवाई यात्रा के लिए स्पेशल एयर क्राफ्ट की व्यवस्था करनी होती थी.
आप देख लीजिये, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री खुद तो कमर्शियल एयरलाइन में धक्के खाते घूमते हैं, लेकिन तालिबान के नेताओं को उड़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती थी.
इसलिए अब ऐसा लगता है, पाकिस्तान ने अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत अपने देश में करवाने का निर्णय ले लिया है. वैसे भी सबको पता है ही, की पाकिस्तानी ऑक्सीजन के बिना तालिबान एक मिनट तक जिन्दा नहीं रह सकता है.
चूँकि ग्राउंड पर सिचुएशन नहीं बदली है, तो भारत ने अपनी रणनीति क्यों बदल लेना चाहिए.
इस बारे में आप सभी दर्शको की सलाह पर काम करते हुए, भारत ने अभी भी अफ़ग़ानिस्तान के वर्तमान प्रशाशन के पीछे मजबूती से खड़े रहने का निर्णय लिया है.
अगर भारत के लिए कोई नेगेटिव खबर होती, तो उसे बड़े पैमाने पर मीडिया में कवर किया जाता है, लेकिन दुर्भाग्य वश जब भारत के अच्छे कामो की चर्चा भारत में ही नहीं होती, तो भला पाकिस्तान क्यों इन बातों को सीरियसली लेने लगा.
आपको याद होगा, वर्ष 2017 में भारत ने चाबहार पोर्ट के रास्ते से पहली बार गेंहू अफ़ग़ानिस्तान भेजा था, तब से भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को 11 लाख टन गेंहू गिफ्ट के तौर पर दिया है.
एक समय था, जब अफ़ग़ानिस्तान के गेंहू के मार्किट पर पाकिस्तान का एक छत्र राज्य था, लेकिन पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी गेंहू के आटे की सप्लाई ना हो पाने के कारण, 800 पाकिस्तानी आटे की मिलें बंद हो गयी थी.
और अब इस साल भारत ने 75 हज़ार मीट्रिक टन गेंहू गिफ्ट के तौर पर अफ़ग़ानिस्तान को निर्यात करने का निर्णय ले लिया है.
सबसे पहली बात यह है, की कोई भारत सर्कार गिफ्ट नहीं कर रही है, ये हम भारतीय लोगों के पेशों से भारत में FCI के द्वारा पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ख़रीदा गया गेंहू था. इसलिए यह गेंहू हम भारतीयों की तरफ से अफ़ग़ान भाइयो को गिफ्ट है.
लेकिन हमें यहाँ पर याद रखना चाहिए, की भारतीय किसान वीरों की मेहनत का कमाल है, की हमारे खाद्य भंडार भरे पड़े हैं.
कुछ ही दिनों पहले भारत सर्कार के खाद्य विभाग ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया था, की भारत ने हमारी जरूरत से ज्यादा गेंहू और चावल मानवता के आधार पर योग्य मित्र देशों को दे देना चाहिए.
ऐसा लगता है, की इसी के बाद फॉरेन मिनिस्ट्री ने 75 हज़ार टन गेंहू अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट करने का फैसला लिया होगा.
दोस्तों, ऐसा नहीं है, की भारत का अफ़ग़ानिस्तान को सहयोग केवल गेहू गिफ्ट करने तक ही सीमित है, कल ही भारत ने दो Mi 24 लड़ाकू हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट किये हैं.
आपको याद होगा, इसी साल मई महीने में भारत 2 Mi 24 लड़ाकू हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को गिफ्ट कर चूका था.
वर्ष 2015 और 2016 के बीच भारत ने अफ़ग़ानिस्तान एयर फाॅर्स को चार अटैक हेलीकाप्टर गिफ्ट किये थे, लेकिन स्पेयर पार्ट्स के आभाव में उन्हें ग्राउंड कर दिया गया. इन ही चार ग्राउंडेड अटैक हेलीकाप्टर के रिप्लेसमेंट के लिए इस साल भारत ने चार refurbished Mi 24 अटैक हेलीकाप्टर अफ़ग़ानिस्तान को दिए हैं.
इस प्रकार से सिद्ध हो जाता है, की अफ़ग़ान एयर फाॅर्स को मजबूत बनाये रखने के लिए भारत अपने संसाधनों की सीमा में रहकर मित्र अफ़ग़ानिस्तान की लगातार मदद करने की पूरी कोसिस कर रहा है.
यहाँ पर फिर वही बात, इन पुराने अटैक हेलीकाप्टर को refurbished करने का खर्चा भी हम भारतीय टैक्स पयेर्स ने उठाया है, इसलिए भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच आपसी सहयोग को सरकारों के स्तर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
हम सभी भारतीय एक खुस हाल और शक्तिशाली अफ़ग़ानिस्तान के निर्माण में हर संभव मदद करते रहेंगे.
लेकिन हमें पता है, अफ़ग़ानिस्तान को बर्बाद करने के बाद पाकिस्तान इसी कोसिस में लगा रहता है, की जल्द से जल्द कैसे हिन्दोस्तान को अफ़ग़ानिस्तान की तरह राख में तब्दील किया जाये .
आइये देखते हैं, इस बार भारत और अफ़ग़ानिस्तान की निर्माण की शक्ति जीतेगी, अथवा पाकिस्तान की विनाश की तागत.
अंत में इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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