भारत आने के पहले श्रीलंकन राष्ट्रपति ने चीन को 440 वोल्ट का झटका दिया
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Reference -
https://en.wikipedia.org/wiki/Magampura_Mahinda_Rajapaksa_Port
https://menafn.com/1099333554/Re-negotiating-Hambantota-port-lease-Was-China-in-the-know
http://www.colombopage.com/archive_19B/Nov26_1574748396CH.php
https://thediplomat.com/2019/11/will-gotabaya-revisit-sri-lankas-hambantota-debt-trap-with-china/
https://www.bloomberg.com/news/articles/2019-11-26/credible-deficit-plan-to-help-sri-lanka-sell-3-billion-annually
https://en.wikipedia.org/wiki/Magampura_Mahinda_Rajapaksa_Port
https://menafn.com/1099333554/Re-negotiating-Hambantota-port-lease-Was-China-in-the-know
http://www.colombopage.com/archive_19B/Nov26_1574748396CH.php
https://thediplomat.com/2019/11/will-gotabaya-revisit-sri-lankas-hambantota-debt-trap-with-china/
https://www.bloomberg.com/news/articles/2019-11-26/credible-deficit-plan-to-help-sri-lanka-sell-3-billion-annually
हम्बनटोटा पोर्ट लेकर चीन ने श्री लंका को दिए 1.4 बिलियन डॉलर, जिसका इस्तेमाल श्री लंका को चीन का कर्ज लौटाने में करना था.
लेकिन जब से श्री लंका ने हम्बनटोटा पोर्ट चीन के हवाले किया, तभी से हम्बनटोटा होमटाउन से आने वाली राजपक्षे फॅमिली ने इस डील का जमकर विरोध किया.
हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद, राजपक्षे फॅमिली फिर सत्ता में आ गयी.
जबकि राजपक्षे फॅमिली ने अपने चुनाव घोसणा पत्र में साफ़ लिखा था, की वह हम्बनटोटा पोर्ट को लेकर चीन के साथ किये गए 2017 के एग्रीमेंट में चेंज करवाएगी, ताकि नयी डील से दोनों देशो को बराबर लाभ मिल सके.
सामान्यतः हम सभी को उम्मीद रहती है, की घोसणा पत्र में जो लिखा जाता है, वह केवल चुनाव जीतने के उद्देस्य से लिखा जाता है, और उस पर अमल कम ही किया जाता है.
लेकिन श्री लंका के नए राष्ट्रपति ने अब साफ़ कर दिया है, की वह 2017 की हम्बनटोटा डील को एक गलती के रूप में देखते हैं, क्योकि यह डील साल दो साल के लिए नहीं वल्कि 99 सालों के लिए की गयी थी, जिसका प्रभाव आगे आने वाली पीडियों पर पड़ना तय है.
इसलिए चीन के साथ हम्बनटोटा पोर्ट की डील को लेकर बातचीत और मोलभाव फिर से किया जायेगा.
लेकिन जबकि हम्बनटोटा पोर्ट की डील के खिलाफ राष्ट्रपति गोटाबय राजपक्षे विचार प्रकट कर रहे हैं, सवाल यह उठता है, की उनके बड़े भाई और श्री लंका के प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे के विचार इस डील को लेकर क्या है?
जैसा की आपने सायद नोटिस किया हो, गोटाबय राजपक्षे के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मोदी साहेब ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, और विदेश मंत्री को उनसे तुरंत मिलने के लिए श्री लंका भेज दिया, और अब गोटाबय राजपक्षे अपनी पहली विदेश यात्रा के तौर पर 29 नवंबर को भारत आने वाले हैं.
इसके ठीक बिपरीत चीन की तरफ से बड़े ही बेमन के साथ राजपक्षे फॅमिली के सत्ता में लौटने का स्वागत करा गया.
लेकिन पिछले साल अक्टूबर 2018 में जब महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की सपथ दिलाई गयी थी.
तो चीन की खुसी का ठिकाना नहीं था. पूरी दुनिया ने तब महिंदा राजपक्षे के द्वारा तख्तापलट की कोसिस को गलत माना था, लेकिन चीन ने अपने राजदूत को तुरंत उनसे मिलने के लिए भेजकर शुभ कामनाये दी थी.
इसलिए ऐसा हो सकता है, की महिंदा राजपक्षे अभी भी चीन के प्यारे होंगे, लेकिन उनके छोटे भाई गोटाबय राजपक्षे के द्वारा हम्बनटोटा पोर्ट के डील को खोले जाने के कारण, चीन को आधी खुसी और आधी गम ही मिल पाया है.
हम्बनटोटा पोर्ट की डील पर पुनर्विचार होगा, या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन चीन के साथ डील पर दोबारा मोलभाव करने वाला श्री लंका कोई पहला देश नहीं होने वाला है.
आप सभी को अच्छे से याद होगा, मलेशिया, मालदीव्स और पाकिस्तान सभी इस जुगाड़ में लगे हैं, की कहीं से चीन के साथ पुरानी डील्स पर नया मोलभाव हो जाये.
लेकिन मुद्दे की बात यह है, की मोल भाव करने में इन देशो को कोई खास सफलता हांसिल नहीं हुई है, क्योकि भले ही सत्ता बदल जाये, पूरा देश तो चीन के कर्ज के जाल में फंसा हुआ है.
इसलिए अभी गलती से की गयी हम्बनटोटा पोर्ट की डील के ऊपर पुनर्विचार को लेकर श्री लंका के राष्ट्रपति के बयानों को सुनकर हमें अच्छा लग सकता है, लेकिन सच्चाई हमारे सामने है, की श्री लंका की आर्थिक हालत अभी भी कोई अच्छी नहीं है.
वैसे भी श्री लंका की सर्कार ने अपनी चादर से लम्बे पैर पसारे हुए हैं, विकास दर पिछले पांच सालों में सबसे निचले स्टर पर हैं.
ऊपर से चुनाव जीतने के लिए राजपक्षे फॅमिली ने किसानो की सब्सिडी बढ़ाने और टैक्स में कटौती के बादे किये हुए हैं.
इसलिए हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए, की श्री लंका की सर्कार मोल भाव करके कोई बेहतरीन डील चीन से हांसिल कर लेगी.
लेकिन फिर भी यह देखना रोचक होगा, की आर्थिक शक्ति के बिना राजपक्षे फॅमिली कैसे चीन के साथ हम्बनटोटा पोर्ट को लेकर मोल भाव चालू करती है.
अभी तो हम सभी को भारत यात्रा पर आने वाले श्री लंका के राष्ट्रपति का स्वागत करना चाहिए.
आज का बेहद आसान सवाल है, वर्ष 2017 में श्री लंका ने कितने वर्षो के लिए हम्बनटोटा पोर्ट चीन को लीज पर दे दिया था?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, VK Saini
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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