भारत ने चीन के 70 प्रतिनिधियों को वीसा देने से किया इनकार


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जैसा की आपको पता है, कुछ ही दिनों पहले भारत सर्कार ने बड़ी मुश्किल से RCEP के जाल से जान छुड़ाई है.

जबकि चीन की तरफ से अभी भी ऐसे स्टेटमेंट आ रहे हैं, की वह RCEP के अन्य सदस्य देशों को भारत की चिंताओं का निराकरण करने के लिए मनाने की कोसिस करेगा.

पता नहीं, चीन अपने आपको बेहद शातिर समझता है, अथवा भारत की जनता को बेवक़ूफ़.

अगर चीन ने सच में चाहा होता, तो ऐसा कैसे हो गया, की RCEP ने भारत के हितों की रक्षा करने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किया? 

कोई बात नहीं, चीन को जो बातें मीडिया को देना है, देता रहे, लेकिन उसको ध्यान रखना चाहिए, की अब होम मिनिस्ट्री में अमित शाह जी बैठे हैं.

लगता है, चीन को इस बात का अंदाजा अब लग गया होगा, क्योकि इस साल होने वाली इंडिया चीन बिज़नेस फोरम में भाग लेने के लिए 70 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भारत आने वाला था.

और चीनियों ने भारत के वीसा के लिए कई सप्ताह पहले आवेदन दे भी दिया था. लेकिन विदेश मंत्रालय चाइनीस डेलीगेट्स को वीसा इशू नहीं कर पाया, क्योकि उसे होम मिनिस्टरी से अप्रूवल नहीं मिला था.

अब जबकि चीन से बारात आने की सम्भावना ही ख़तम हो गई, तो इंडिया चीन बिज़नेस फोरम को कैंसिल कर दिया गया.

जब चेन्नई में मोदी साहेब ने चीन के राष्ट्रपति को नारियल पानी पिलाया था, तो हम सभी को लगा था, की एक बार फिर  चीन के राष्ट्रपति की मीठी मीठी बातों का नशा भारत पर चढ़ जायेगा.

लेकिन इस बार होम मिनिस्ट्री सही आदमी सम्हाल रहा है, नहीं तो पिछले साल तो इंडिया चीन बिज़नेस फोरम में भाग लेने के लिए 200 चाइनीस भारत आये थे.

बहुत हुआ, भारत में आकर चीनी अजेंडे को आगे बढ़ाना अब नहीं चलने वाला.

जब पिछले सालों की इंडिया चीन बिज़नेस फोरम से कुछ हासिल नहीं हुआ, तो इस साल फिर तमाशे का आयोजन क्यों किया जाये.

वैसे भी चीन से 70 लोग आये या 700 लोग आएं, सभी निर्णय लेने चीन के एक तानाशाह को ही है. 

आप सभी को अच्छे से पता है, एक और जहाँ पाकिस्तान भारत को अफ़ग़ानिस्तान बनाना चाहता है, तो दूसरी और चीन भारत को पाकिस्तान बनाने की फ़िराक़ में है

इन दोनों देशो के नेताओं से अपनी जनता तो सम्हल नहीं रही है, लेकिन फिर भी चले हैं भारत को बदलने. 

होम मिनिस्ट्री ने अंगद की तरह पाँव जमीं पर क्या रखा, चीन के प्रतिनिधियों के भारत में सैर सपाटे पर सवालिया निसान लग गया.

इसी बीच 11 बे ब्रिक्स शिखर सम्मलेन में भाग लेने के लिए मोदी साहेब ब्राजील की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं. 

मोदी जी की इस यात्रा में क्या कुछ खास होगा, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी.

लेकिन आज ब्रिक्स देशों के ट्रेड मिनिस्टर्स की मीटिंग हुई, जिसमे भारत से पियूष गोयल जी ने भाग लिया, और उन्होंने ब्रिक्स देशो के बीच ट्रेड और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया.

साथ ही उन्होंने नॉन Tariff बैरियर्स का मुद्दा भी उठाया. और ब्रिक्स देशों को समझाने की कोसिस करि, की यह बैरियर्स भारत जैसे देश में छोटे उद्योगों के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं.

आप सभी को पता है, यहाँ पर इशारा किस देश की और है, चीन को दुनिया भर में नॉन Tariff बैरियर्स के लिए जाना जाता है.

चीन यदि कस्टम ड्यूटी जैसे Tariff हटा भी देता है, तो नियमो कानूनों के रूप में नॉन Tariff बैरियर की दिवार चीन में इतनी ऊंची है, की भारत जैसे अन्य देशो की कंपनियां उसे लाँघ ही नहीं सकती है.
और यही कारण है, चीन पूरी दुनिया के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने को हमेसा तैयार बैठा रहता है. 

लेकिन अब चीन का छलावा और नहीं चलने वाला.

ब्राज़ील में ब्रिक्स देशों के ट्रेड मिनिस्टर से मुलाक़ात के बाद गोयल साब अमेरिका की यात्रा पर चले गए हैं.

अमेरिका में वह अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेन्टेटिव से मिलेंगे, देखते हैं, अमेरिका इंडिया के बीच पहले चरण की फ्री एंड फेयर ट्रेड डील की बात कितना आगे बढ़ती है.

लेकिन चाहे अमेरिका हो अथवा चीन हो, सबको अपना स्वार्थ दिखता है, इसलिए हमारे ट्रेड मिनिस्टर मजबूती के साथ मोलभाव करेंगे, इसी विस्वास के साथ हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.

आज का बेहद आसान सवाल है, इस साल इंडिया चीन बिज़नेस फोरम में भाग लेने के लिए कितने चाइनीस प्रतिनिधि भारत आने वाले थे?

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, महादेव सदाय

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद..

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