मोदी जी ASEAN साउथ कोरिया & जापान के साथ बदलेंगे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
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Reference -
https://www.livemint.com/news/india/fingers-burnt-in-ftas-india-now-stays-out-of-rcep-11572890408722.htmlhttps://en.wikipedia.org/wiki/ASEAN%E2%80%93India_Free_Trade_Area
https://orissadiary.com/india-exploring-trade-agreements-usa-ftas-japan-korea-no-trade-agreements-hurry-says-piyush-goyal/
https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/india-gained-755-million-in-additional-exports-to-us-due-to-us-china-trade-war-unctad/articleshow/71934393.cms
https://commerce-app.gov.in/eidb/Default.asp
https://www.outlookindia.com/newsscroll/exploring-trade-deals-with-us-eu-goyal/1656189
आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं. भारत के RCEP से बहार रहने के निर्णय से हमारे किसानो और व्यापारियों ने जहाँ राहत की सांस ली है, तो दूसरी और भारत के एक्सपर्ट टेंशन में आ गए हैं, वह सभी हमें यह बताने की कोसिस कर रहे हैं, की भारत ने RCEP को ज्वाइन न करके कितनी बड़ी गलती कर ली है. अब आप देखिये, जबकि RCEP का एग्रीमेंट कंक्लूड कर लिया गया है, लेकिन सिर्फ भारत के शामिल ना होने से इसको लेकर ग़म का माहौल बना हुआ है. इससे अंदाज़ा तो लग ही जाता है, की इस एग्रीमेंट में भारत के शामिल होने की क्या इम्पोर्टेंस थी. सरल शब्दों में, चीन ने भारत से एग्रीमेंट करने के लिए RCEP का चक्रव्यूह रचा था, जिसमे भारतीय अभिमन्यु का प्रवेश वर्ष 2012 में कराया गया. तब से लगातार बातचीत और मोलभाव का नाटक चलता रहा. वोह तो भला हो भारत की जनता का, जिसने अर्जुन के हाथों में सत्ता की कमान 2019 में फिर से सौप दी, और भारतीय अभिमन्यु को चीन के द्वारा बुने हुए RCEP के चक्रव्यूह से बिना मरे बहार निकाला जा सका. कई विद्वानों का यह कहना सही है, की भारत में व्यापर करना मुश्किल है, लोजिस्टिक्स कॉस्ट बहुत ज्यादा है, इसलिए भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का लाभ नहीं उठा पाता है. यह बात तो सही है, लेकिन ये विद्वान कहते हैं, की भारत ने पहले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन कर लेने चाहिए, और फिर बाद में भारत में रिफार्म करने चाहिए, ताकि भारत में व्यापर करना आसान और सस्ता हो सके. एक आम आदमी के दिमाग और बिद्वान के दिमाग में सिर्फ इतना ही फ़र्क़ है, की आम आदमी के कॉमन सेंस के मुताबिक भारत ने पहले व्यापर को आसान और सस्ता करना चाहिए, और फिर बाद में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने चाहिए. एक्सपर्ट के दिमाग की जगह अगर भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की आसान राह ना चुनी होती. तो आज भारत का व्यापारिक घाटा 184 बिलियन डॉलर के कमर तोड़ स्तर तक नहीं पहुँचता. और ना ही इतनी बेरोजगारी फैलती anyways अब जबकि भारत RCEP से बहार हो गया है, तो चीन को RCEP से मिलने वाला मजा किरकिरा हो चुका है. अब चीन की तरफ से आधिकारिक स्टेटमेंट भी आ गया है, जिसमे चीन ने जताया है, की वह भारत की चिंताओं का निराकरण करने की पूरी कोसिस करता रहेगा, और उसे उम्मीद है, भारत जल्द RCEP में शामिल होगा. अगर चीन को भारत के हितों की इतनी ही रक्षा करनी थी, तो उसने आठ सालों के RCEP के मोलभाव में लचीलापन क्यों नहीं दिखाया? और तो और चीन का कहना है, की वह जान भूझकर भारत के साथ व्यापर में लाभ नहीं कमाना चाहता है. सायद चीन के अधिकारी भारतीय लोगों को उल्लू समझते हैं. कोई बात नहीं, चीन को जो समझना हो अब, वह समझता रहे. भारत के लोगों ने अपनी अक्लमंदी का अहसास RCEP में शामिल ना होकर पूरी दुनिया को तो करा ही दिया है. आगे बढ़ते हुए, आपको सायद पता हो, भारत ने 10 ASEAN देशो के साथ वर्ष 2010 में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया था. तब भारत को इन देशों के साथ व्यापार करने से सालाना 8 बिलियन डॉलर का घाटा होता था, जो पिछले साल बढ़कर 22 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच गया. इस प्रकार, सिर्फ 9 सालों के भीतर ASEAN देशों के भारत के साथ ब्यापारिक लाभ में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है. इस प्रकार सिद्ध हो जाता है, की भारत के साथ फ्री ट्रैड एग्रीमेंट में ASEAN के देशों ने अकेले मलाई उड़ाई है. जबकि इस बार ASEAN के देश भारत को RCEP में शामिल करवाने की कोसिस कर रहे थे, मोदी जी ने ASEAN का पासा ही पलट दिया. अब भारत ASEAN के साथ वर्ष 2010 के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर renegotiation चालू करेगा. ताकि भारत और ASEAN देशों के बीच व्यापार को संतुलन में रखा जा सके. जबकि मोदी जी की थाईलैंड की यात्रा के दौरान हमारा पूरा ध्यान RCEP पर ही केंद्रित बना रहा, मोदी जी ने ASEAN FTA पर बातचीत का पिटारा खोलकर खेल ही पलट दिया . ASEAN के हमारे बातों के दोस्तों को अब मित्रता भारत के साथ व्यापार में भी दिखानी होगी. साथ ही ऐसी भी ख़बरें आ रही है, की भारत साउथ कोरिया और जापान के साथ भी हमें हानि पहुंचाने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को बदलने की लिए बातचीत चालू करने वाला है. राष्ट्रपति ट्रम्प को धन्यवाद, जो उन्होंने फ्री एंड फेयर ट्रेड एग्रीमेंट का कांसेप्ट हमारे सामने रखा, अब भारत भी पुराने फ्री एंड अनफेयर Trade एग्रीमेंट को कचरे के डब्बे में फेंककर ASEAN जापान और साउथ कोरिया के साथ केवल फ्री एंड फेयर Trade एग्रीमेंट ही करेगा. साथ ही भारत का कहना है, की अब वह अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री एंड फेयर Trade एग्रीमेंट करने की कोसिस कर रहा है. हमारे अख़बारों को लग रहा है, की यह भारत की रणनीति में बहुत बड़ी तबदीली है, लेकिन आप सभी भारत के आम लोग कब से यही कहते चले आ रहे हैं. की भारत को ट्रैड एग्रीमेंट उन देशों से करना चाहिए, जिनके साथ व्यापार करने से भारत को व्यापारिक लाभ और ज्यादा बढ़ सकता है. नहीं तो अभी तक तो भारत सर्कार ने तो ट्रेड एग्रीमेंट केवल उन्ही देशों के साथ किये थे, जिनके साथ व्यापार करने से भारत को व्यापारी घाटा होता था. आगे बढ़ते हुए, पिछले दो सालों से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चल रही है, लेकिन सवाल यही था, की क्या भारत इस ट्रेड वॉर का लाभ उठा पा रहा है. अब इस साल के पहले छह महीनो के लिए आंकड़े अमेरिका से आ रहे हैं, जिसके अनुसार इस ट्रेड वॉर के कारण भारत के निर्यात में 755 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. इस प्रकार भारत को लाभ तो हो रहा है, लेकिन इस ट्रेड वॉर में अभी तक पूरी की पूरी चांदी काटी तो साउथ ईस्ट एशिया के देशों ने है. अब आप देखिये, की पहले छह महीनो में चीन से लगभग 21 बिलियन डॉलर का व्यापार चला गया, लेकिन भारत को १ बिलियन डॉलर से भी कम लाभ हुआ. इस प्रकार डाटा कन्फर्म करता है, की भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करना चाहिए, ताकि इतने बड़े अवसर को दूसरे देशों की तरफ जाने से रोका जा सके. जैसा की दिखाई पढ़ रहा है, दूसरे कार्यकाल में मोदी सर्कार ने सही रास्ता पकड़ लिया है, उम्मीद है, आगे आने वाले 5 सालों में भारत का व्यापारिक घाटा सुरसा के मुँह की तरह बढ़ने के बजाय सिकुड़ना चालू कर देगा. आज का बेहद आसान सवाल है, भारत और ASEAN के बीच किस वर्ष फ्री ट्रेड अग्रीमेंट हुआ था? और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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