नेपाली प्रधानमंत्री के सख्त तेवर-भारत को दी कालापानी छोड़ने की धमकी
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Reference -
https://timesofindia.indiatimes.com/india/govt-releases-new-political-map-of-india-showing-uts-of-jk-ladakh/articleshow/71867468.cms
जैसा की आपको पता होगा, 2 नवम्बर को भारत का नया मैप जारी होने के वाद पाकिस्तान और चीन की तरफ से उसका विरोध किया गया.
हालाँकि भारत के नए मानचित्र का विरोध करने में नेपाल सबसे पीछे रहा, अब ऐसा लगता है, की मामले को सबसे ज्यादा तूल नेपाल ही दे रहा है.
१० दिनों पहले नेपाल ने आधिकारिक तौर पर कालापानी पर अपना दवा पेश करते हुए, यह कहा था, की डिप्लोमेटिक तरीकों से भारत नेपाल सीमा विवाद को सुलझाया जाना चाहिए.
जिसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर कह दिया था, की भारत के नए मानचित्र में पुरानी सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है. और दोनों देश इस विवाद को सुलझाने की कोसिस करते रहेंगे.
ideally मामला तब सार्वजानिक बयानवाजी से हटकर बंद कमरों में कूटनीतिक तरीके से कैसे सुलझाया जाये, इसके लिए दोनों पक्षों को बात करनी चाहिए थी.
लेकिन अब नेपाल के प्रधान मंत्री ने फिर आग को हवा देकर यह सवाल खड़ा कर दिया है, की क्या वह सीमा विवाद को सुलझाने में रूचि रखते हैं, अथवा इस विवाद की आग में अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकना ही उनका एक मात्र उद्देस्य है.
नेपाल के सम्माननीय प्रधानमंत्री जी की बातों को जरा ध्यान से सुनिए, उनके अनुसार उनकी सर्कार किसी को भी नेपाल की एक इंच जमीं तक पर कब्ज़ा नहीं करने देगी, इसलिए भारत ने कालापानी एरिया से अपनी सेना तुरंत वापस बुला लेनी चाहिए.
आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा, की राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय अखंडता के लिए सभी नेपाल की सर्कार का सपोर्ट करते हैं. इसलिए में सभी लोगों को उनके सपोर्ट के लिए धन्यवाद् देता हूँ. लेकिन उन्होंने आशा करि की, देशभक्ति के नाम पर अभद्र काम नहीं किये जाने चाहिए, और सभी समस्याओं का समाधान कूटनीति से निकाला जायेगा.
उम्मीद है, भारतियों को हमेसा भला बुरा कहने वाले हमारे नेपाली भाई अपने ही प्रधानमंत्री की बातें सुनेंगे.
लेकिन बड़ा पॉइंट है, की जिस नेपाल के कम्पलीट सपोर्ट के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री धन्यवाद दे रहे थे, उसको कहीं भारत के खिलाफ दुश्मनी और गुस्से को फैलाकर पैदा तो नहीं किया गया है?
नेपाल के प्रधानमंत्री जी का कहना है, की वह अपने एक एक इंच की रक्षा करेंगे, यह तो उन्होंने बहुत ही सही बात कही. लेकिन अच्छा होगा, की वह नेपाल के ही अख़बार खबर हब में 11 नवंबर को छपी खबर पड़ लें.
जिसमे साफ़ साफ़ लिखा गया है, की चीन ने नेपाल की 36 हेक्टेयर लैंड पर कब्ज़ा कर लिया है.
ऐसा नहीं हो सकता है, की नेपाल के प्रधानमंत्री जी को यह पता नहीं हो, लेकिन यह बोलना उनकी राजनीति को सूट कहाँ करता है.
क्या यह अच्छा नहीं होता, की १ १ इंच के लिए लड़ने की बातें कहने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री कम से कम यही कह देते, की नेपाल के अख़बारों में 36 हेक्टेयर पर चीन के कब्जे की खबर सरासर झूठ है?
आप ही बताएं,जब भारत के खिलाफ नफरत की खेती करके नेपाल में वोट और चीन से नोट मिलते हों, तो ऐसी फसल को सूखने कौन देगा.
हमारे कई दर्शको का साफ़ तौर पर कहना था, की भारत ने नेपाल के साथ ऐतिहासिक दोस्ती को ध्यान में रखते हुए, सीमा विवाद को ले दे कर समाप्त कर लेना चाहिए.
हम भी यही विचार रखते है . लेकिन आप ही बताएं, जब समाधान की जगह समस्या से ज्यादा स्वार्थ साधा जा सकता है, तो ऐसी समस्या को कौन सुलझाएगा.
नेपाल के हमारे दर्शक इस वीडियो को देखकर भी गुस्से से आग बबूला ही होंगे, लेकिन नेपाल के लोगों को ठन्डे दिमाग से सोचना चाहिए, की जब वह १ १ इंच के लिए लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो भारतीय लोग उस समय क्या कर रहे होंगे?
चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी की गर्म गोद नेपाल को मुबारक, उम्मीद है, चीन के प्यार और दोस्ती की सच्चाई उन्हें देर सवेर पता लग जाएगी.
लेकिन हमें असंतोष इस बात का जरूर है, की नेपाल की तरफ से आ रहे ऐसे बयानों के जवाब में, हमारे देश ने आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया तो दी, लेकिन हर मुद्दे पर अपना मुँह खोलने वाले हमारे नेताओं और मीडिया के मुँह में दही क्यों जमा हुआ है?
आज का बेहद आसान सवाल है, नेपाल के ही अख़बार के मुताबिक, चीन ने नेपाल की कितने हेक्टेयर भूमि हड़प ली है?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं,गगन खन्ना
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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