अफ़ग़ानिस्तान में पॉजिटिव रोल के लिए अमेरिका ने भारत की प्रशंसा करि!
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Reference -
https://www.hindustantimes.com/india-news/india-finishes-400-social-infrastructure-projects-in-afghanistan-us-praises-effort/story-2HbIlnrxXPmHbmIEkMyPRN.htmlhttps://timesofindia.indiatimes.com/india/us-backs-sustained-indian-role-in-afghanistan/articleshow/72177287.cms
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/pakistans-double-speak-on-afghanistan-us-state-dept/articleshow/72152970.cms
https://www.dawn.com/news/1518067/trump-thanks-pm-imran-for-facilitating-western-hostages-release-in-afghanistan
हम सभी को बहुत अच्छे से पता है, अफ़ग़ानिस्तान में पॉजिटिव चेंज लाने में भारत ने समय, ऊर्जा और पैसा तीनो ही लगाया है.
वर्ष 2001 से लेकर आज तक भारत ने 21 हज़ार करोड़ रुपये अफ़ग़ानिस्तान में निवेश किये है. जिससे अफ़ग़ानिस्तान में 400 सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स को कम्पलीट किया जा चुका है, और 150 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
अफ़ग़ानिस्तान के प्रति भारत के इसी कमिटमेंट को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान को भारत की सहायता और निवेश का स्वागत किया है.
अमेरिका में अफ़ग़ानिस्तान अफेयर्स देखने वाले वरिष्ठ अधकारी ने भारत की सकारात्मक भूमिका की एक ओर प्रशंसा करि, तो दूसरी और उन्होंने यह भी अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका एक ऐसा सोलुशन खोज रहा है, जिससे अमेरिका और भारत ने जो इन्वेस्टमेंट आज तक अफ़ग़ानिस्तान में किया, उसकी रक्षा करि जा सके.
अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा कहीं जाने वाली यह बातें सुनने में अच्छी लगती है. लेकिन आज हम एक और बात की ओर आपका ध्यान लाना चाहते हैं.
भारत के अमेरिका में राजदूत ने कहा है, की भारत के 550 प्रोजेक्ट ने अफ़ग़ानिस्तान के सभी 34 राज्यों को कवर किया है. इस प्रकार से कहा जा सकता है, की भारत की पहुंच पुरे १०० % अफ़ग़ानिस्तान में रही है.
लेकिन आपने कई बारे सुना होगा, की तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के 40 से 70 फीसदी तक हिस्से को कण्ट्रोल करता है. इसलिए सवाल उठता है, की मीडिया को ये नंबर कहाँ से मिलते हैं, और जहाँ से भी ये आंकड़े उन्हें मिलते हों, उन्हें ईस्वरीय सत्य मानकर बार बार रिपीट क्यों किया जाता है.
क्या ऐसे आकंड़ों को हवा देकर तालिबान की नैरेटिव को मजबूत करने की जाने अनजाने में कोसिस नहीं होती है.
हम यह नहीं कह रहे हैं, की तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान में बिलकुल भी कण्ट्रोल नहीं है, हम सिर्फ यह कहना चाह रहे हैं, की लिबरल मीडिया में जो आंकड़े प्रस्तुत किये जाते हैं, वह हमेसा सही नहीं होते है.
आगे बढ़ते हुए, अमेरिका के बरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा, की तालिबान को हमेसा यह विस्वास रहा है, की अमेरिका लम्बे समय तक लड़ नहीं सकता है. लेकिन उन्हें समझ लेना चाहिए, अमेरिकियों के हितों की रक्षा के लिए अमेरिका हमेसा लड़ता रहेगा.
हमें अच्छे से याद है, आप में से कई लोग ऐसा हमेसा से कहते रहे हैं, की अमेरिका को तालिबान का यह भ्रम तोडना ही होगा.
आप सभी जानते हैं. चाहे तालिबान हो अथवा पाकिस्तान हो, हर शुक्रवार को उन्हें यही लगता है , की अगले शुक्रवार के पहले अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से और भारत कश्मीर से भाग खड़ा होगा.
लेकिन भारत ने धारा 370 को हटा कर पत्थर पर लिख दिया, की भारत कश्मीर से कभी पीछे नहीं हटेगा, उम्मीद है, अमेरिका भी ऐसा ही कोई फंडामेंटल कदम उठाएगा, जिसका अंदाज़ा ना तो पाकिस्तान को है, और ना ही तालिबान को है.
लेकिन इसी बीच, राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच टेलीफोन पर बात हुई, जिसमे ट्रम्प ने खान साहेब को थैंक यू बोला, क्योकि तालिबान के साथ बंदियों को रिहा करवाने में पाकिस्तान ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करि.
लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प के थैंक यू की वैल्यू आपको इसी फैक्ट से समझ आ जाएगी, की अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के टोटल २ बन्दियाँओ के बदले में 3 आतंकियों को रिहा कराया गया.
राष्ट्रपति ट्रम्प को आर्ट ऑफ़ डील के लिए जाना जाता है, इस डील को देखकर तो लगता है, की उनकी डील मेकिंग की पूरी इमेज ही फर्जी थी.
कोई बात नहीं, इमरान खान ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति के प्रति अपना कमिटमेंट और कश्मीर की हालत को लेकर फिर वही घिसा पिटा रिकॉर्ड राष्ट्रपति ट्रम्प को सुना दिया
जब राष्ट्रपति ट्रम्प ओर इमरान खान के बीच टेलीफोन कॉल लगाया जा रहा था, उसके पहले अच्छा होता, की राष्ट्रपति ट्रम्प अपने ही स्टेट डिपार्टमेंट के द्वारा तैयार की गयी वर्ष 2018 की कंट्री रिपोर्ट पढ़ लेते, जिसमे साफ़ साफ़ इंग्लिश में लिखा है.
की एक ओर पाकिस्तान की कथनी में अफ़ग़ानिस्तान में शांति को समर्थन सुनाई देता रहा , तो दूसरी ओर पाकिस्तान की करनी ने तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क को पाकिस्तान में हमेशा सुरक्षित स्वर्ग निश्चित किया.
आप ही देख लीजिये, अमेरिका खुद अपनी ही रिपोर्ट को कितना सीरियसली लेता है, यही कारण है, पाकिस्तान अपने 22 बे बेलआउट की मलाई उड़ा रहा है, लेकिन अमेरिका आज भी अफ़ग़ानिस्तान बेलआउट के लिए तड़प रहा है.
और इसी बीच रास्ट्रपति ट्रम्प का चार सालों का कार्यकाल भी समाप्त होने के कगार पर आ चुका है, और रावलपिंडी में बैठे Generals के लिए इससे बड़ी सफलता और क्या हो सकती है?
आज का बेहद आसान सवाल है, भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में कितने प्रोजेक्ट आज तक कम्पलीट कर लिए हैं.
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, शुभब्रता दास
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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