होन्ग कोंग में प्रदर्शनकारियों ने चीनी एजेंसी का ऑफिस आग में फूंका!


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
आपको अच्छे से पता है, पिछले पांच महीनो से होन्ग कोंग धधक रहा है. 

जुलाई महीने में होन्ग कोंग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में चीन के ऑफिस पर अंडे फेंके गए थे, लेकिन कल बात बहुत आगे निकल गयी, लोकतंत्र के समर्थन में चल रहे विरोध प्रदर्शन के खिलाफ पुलिस ने tear गैस के गोले छोड़  कर होन्ग कोंग को धुआँ धुआँ कर दिया.

तो प्रदर्शन कारियों ने भी चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी सिन्हुआ का ऑफिस आग के हवाले कर दिया.

जिसके जवाब में सिन्हुआ की तरफ से स्टेटमेंट भी आ गया है, और उसने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करि है.

साफ़ तौर पर, आग लगी तो हांगकांग में सिन्हुआ के ऑफिस में हैं, लेकिन इसकी आंच बेजिंग तक पहुंच चुकी होगी.

अब आप देखिये, पाकिस्तान जैसे फ़र्ज़ी देश में आज़ादी मार्च का तमाशा चल रहा है, और हमारी पूरी मीडिया उसको कवर करने में इतनी व्यस्त है, की उसे होन्ग कोंग में 22 सप्ताह से चल रहे प्रो डेमोक्रेसी प्रोटेस्ट को अच्छे से कवर करने का समय नहीं मिल पता है.

Anyways , आपको पता होगा, की जून महीने में जिस प्रस्ताव को लेकर यह विरोध भड़क उठा था, उसे हाल ही में बापस ले लिया गया था.

तब दुनिया भर में ऐसी उम्मीद थी, की अब होन्ग कोंग के विरोध प्रदर्शन ठंडे पड़ जायेंगे.

इसलिए सवाल खड़ा होता है, आखिर अचानक से ऐसा क्या हुआ, की कल चीन की सर्कार के विरोध प्रदर्शन के लिए १ लाख लोग सड़कों पर आ गए.

आज सिन्हुआ एजेंसी अपने ऑफिस के जलने का दोष प्रदर्शन कारियों को दे रही है, लेकिन क्या उसे इस बात की खबर है, की इन विरोध प्रदर्शनों की आग में घी डालने का काम किसने किया?

अभी कुछ ही दिनों पहले की बात है, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी खुले में मिला करती थी, और चीन के राजा घंटो तक उसमे ज्ञान बांटते रहते थे.

अब कम्युनिस्ट पार्टी की मीटिंग गुप् चुप होने लगी हैं, लेकिन स्टेटमेंट तो सार्वजनिक करना ही पड़ेगा.

इसलिए १ नवंबर को स्टेटमेंट आया , की होन्ग कोंग में किसी भी तरह का मतभेद चीन को बर्दास्त नहीं होगा.

आपको पता होगा, होन्ग कोंग में चीन से अलग डेमोक्रेटिक सिस्टम चलता आया है. इसे दुनिया में  one कंट्री two  सिस्टम्स के नाम से जाना जाता है.

अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी कह रही है, की यदि इस one कंट्री two  सिस्टम्स को चुनौती दी जाएगी, तो यह चीन को सहन नहीं होगा.

पता नहीं, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी किस दुनिया में रहती है, या फिर वह चीन की जनता को बेवक़ूफ़ बनाना चाहती है.

क्योकि one कंट्री two  सिस्टम्स को अगर किसी से खतरा है, तो वह तो केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना से है.

अगर चीन के तानाशाह ने होंग कोंग में one कंट्री two  सिस्टम्स को चुनौती देने का ख्वाब जून महीने में ना देखा होता , तो आज होन्ग कोंग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से उनकी नींद नहीं टूटती.

लेकिन आज जो होन्ग कोंग में हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी सभी लोकतान्त्रिक देशों के सर पर भी आती है, अगर उन्होंने चीन से आने वाले सस्ते माल को खरीदकर इस चाइनीस ड्रैगन को पाला पोसा नहीं होता, तो आज यह पूरी दुनिया पर आग नहीं उगल रहा होता.

इसलिए आज यदि सिन्हुआ का ऑफिस आग की लपटों के हवाले कर दिया गया, तो इसके लिए पेट्रोल की व्यवस्था भी चीन के राजा ने ही करि थी.

और तो और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है, की देश की एकता अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ विदेशी तागतों का हस्तक्षेप उसे बर्दाश्त नहीं होगा.

देखिये सो चूहे खाके चीनी बिली हज को चली. दुनिया की नंबर one न्यूज़ एजेंसी बनने का सपना देखने वाली सिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी को दुनिया में न्यूज़ बांटने का बड़ा शौक है, क्या वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को यह बतलायेगी, की साउथ चाइना सी, अक्साई चिन और POK में चीन अपनी टांग क्यों फसाये हुए है?

सायद चीन के राष्ट्रपति आइना देखने से कतराते हैं, कोई बात नहीं, होन्ग कोंग के नौजवान उन्हें आइना दिखा के ही दम लेंगे.

हाल में लद्दाख के यूनियन टेरिटरी बन जाने पर, चीन के पेट में बड़ा दर्द हुआ था, तब भारत ने अक्साई चिन पर चीन के कब्जे का हवाला देकर चीन को करारा जवाब दिया था.

अब देखना होगा, की आखिर कब तक दुनिआ का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत होन्ग कोंग में चल रहे लोक तांत्रिक विरोध प्रदर्शन को देखकर मुँह पर उगली धरे बैठा रहेगा.

आज का बेहद आसान सवाल है, कितने महीनो से होन्ग कोंग में विरोध चल रहा है?

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, मानवेन्द्र सिंह राठोड


और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद..

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