अमेरिकन नेवी ने साउथ चाइना सी में इंडियन नेवी को सप्लाई मुहैया करवाई


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं. आपको याद होगा, की दस सालों तक भारत और अमेरिका ने लोजिस्टिक्स एग्रीमेंट को लेकर आपस में बातचीत और मोल भाव किया, तब जाकर वर्ष 2016 में दोनों देशों ने Logistics Exchange Memorandum of एग्रीमेंट को साइन किया. कई वर्षो तक इस समझौते का विरोध सिर्फ इसलिए होता रहा, क्युकी तब की भारत सर्कार को डर था, की ऐसा करके भारत की सप्रभुता को खतरा हो सकता है. लेकिन समय आज सवाल करता है, की तब की भारत सर्कार को भारत की सम्प्रभुता को लेकर अमेरिका से खतरे का डर था, या उस समय भारत चीन का तुस्टीकरण करने की नीति पर चल रहा था. कहने की जरूरत नहीं है, भारत की कम्युनिस्ट पार्टियां जो उस समय बहुत ताकतवर हुआ करती थी, उन्होंने इन एग्रीमेंट का विरोध करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था. कोई बात नहीं, देर आये दुरुस्त आये. अब भारत और अमेरिका के बीच Logistics Exchange Memorandum of Agreement का कमाल चीन को साउथ चाइना सी में दिखने लगा है. आप सभी का हमेसा से मानना रहा है , की यदि भारत ने साउथ चाइना सी में चीन को चुनौती नहीं दी, तो हमें चीन का सामना हिन्द महासागर में करना होगा. लगता है, भारत सर्कार आपके विचारों पर अमल कर रही है. इंडियन नेवी के दो जंगी जहाज पिछले महीने कुछ सप्ताहों तक गल्फ ऑफ़ थाईलैंड और साउथ चाइना सी में घूम रहे थे, और उन्होंने आस पास के मित्र देशों जैसे फ़िलीपीन्स,मलेशिया और कम्बोडिया के बंदरगाहों की भी यात्रा करि. लेकिन आपको अंदाज़ा होगा, इतनी लम्बी यात्रा पर जाने के लिए सप्लाई की व्यवस्था करनी होती है. इसलिए मदद का हाथ बढ़ाया अमेरिका की मर्चेंट मरीन वेसल ने. इस प्रकार पहली बार अमेरिका के जहाजों ने लम्बी दूरी वाले मिशन पर गए इंडियन नेवी के शिप को साउथ चाइना सी में सप्लाई मुहैया करवाई. इस ऑपरेशन को Replenishment at सी कहा जाता है. इस ऑपरेशन का महत्व सिर्फ इसी से समझ आ जाता है, की यह दोनों देशो की नौ सेनाओं के बीच तालमेल और कोआर्डिनेशन को स्थापित करता है, और आगे आने वाले समय में दोनों देश जरूरत पड़ने पर साउथ चाइना सी में किसी भी चैलेंज का सामना कर सकते हैं. वैसे भी कहा जाता है, की आप शांति के समय में तैयारी के दौरान जितना पसीना बहाते हैं, युद्ध के समय आपको उतना ही कम खून बहाना पड़ता है. आपको तो पता है, भारत और अमेरिका के बीच साउथ चाइना सी में बढ़ता तालमेल चीन की रातों की नींद हराम करने के लिए काफी है. इसी घमंडी नींद में सोया हुआ चीन पुरे साउथ चाइना सी को हथियाने के सपने देख रहा है. इसी बीच आपको यह भी याद होगा, इस साल मई महीने में भारत के दो युद्ध पोतों ने चीन में फ्लीट रिव्यु में भाग लिया था, तो चीन बड़ा खुस हुआ था, की भारत चीन के मेले में भीड़ बढ़ाने का काम कर रहा है. लेकिन लौटते हुए रस्ते में भारत के जंगी जहाजों ने अमेरिका जापान और फिलीपीन्स के साथ मिलकर पहली बार साउथ चाइना सी में एक साथ सैर करि. 4 देशो के 6 जंगी जहाज को साउथ चाइना सी में एक साथ घूमता हुआ, देखकर भी चीन कुछ नहीं कर पाया. एक जुट लोकतान्त्रिक देशो की यही तागत होती है. की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना चु तक नहीं कर पायी. इस सप्ताह भारत और अमेरिका के बीच साउथ चाइना सी में हुआ रेप्लेनिशमेंट at सी उसी दिशा में उठाया एक मजबूत कदम है. हमें विस्वास है, भविस्य में भी भारत और अमेरिका मिलकर इंडो पसिफ़िक छेत्र में अपना प्रभाव और मजबूत करते रहेंगे. आज का बेहद आसान सवाल है, किस देश ने साउथ चाइना सी में दो भारतीय जंगी जहाजों को सप्लाई मुहैया करवाई? पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, NARENDRA SHARMA और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

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