कालापानी को लेकर भारत ने नेपाल को दिया करारा जवाब.


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Reference -
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/what-if-we-enter-kalapani-kashmirchina-to-india/articleshow/59972866.cms?from=mdr
https://en.wikipedia.org/wiki/Kalapani_territory#:~:targetText=Kalapani%20is%20a%20territory%20disputed,district%20in%20the%20Uttarakhand%20state.&targetText=Although%20claimed%20by%20Nepal%20as,1962%20border%20war%20with%20China.
https://www.tribuneindia.com/news/nation/india-nepal-spar-over-new-map/857805.html
https://timesofindia.indiatimes.com/india/govt-releases-new-political-map-of-india-showing-uts-of-jk-ladakh/articleshow/71867468.cms
https://www.indiatoday.in/india/story/nepal-objects-kalapani-inclusion-new-india-map-jammu-and-kashmir-article-370-1616458-2019-11-07
https://www.jagranjosh.com/current-affairs/kalapani-territory-all-you-need-to-know-why-nepal-objects-its-inclusion-in-new-indian-map-1573112411-1
https://www.quora.com/India-hasnt-tried-to-annex-Nepal-in-65-years-except-Kalapani-and-Susta-Why-would-the-Nepalese-and-others-believe-India-will-annex-parts-of-Nepal
https://www.quora.com/What-is-the-strategic-importance-of-Kalapani-territory-disputed-between-India-and-Nepal-for-India

आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं. जैसा की आपको पता है, 2 नवम्बर को भारत ने अपना नया पोलिटिकल मैप जारी किया था, तो अपेक्षा के अनुसार पाकिस्तान और चीन ने उसका विरोध किया. लेकिन कल नेपाल ने भी आधिकारिक तौर पर विरोध जता दिया, की कालापानी नेपाल का हिस्सा है, और नेपाल अपनी सीमा की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ में नेपाल का यह भी मानना है, की ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों को ध्यान में रख कर कूटनीतिक तरीकों से इस तरह के सीमा विवाद को निपटाना चाहिए. आपको जानकारी होगी, कालापानी सदियों से भारत का हिस्सा है, और नेपाल उस पर अपना दावा पेस करता है, लेकिन इस मुद्दे को जीतनी घंभीरता से लिया जाना चाहिए, उसका अभी तक कम से कम मीडिया में तो आभाव ही जान पड़ता है. लेकिन अच्छी बात यह है, की भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कल नेपाल को जवाब दे दिया.की नए मानचित्र ने भारत और नेपाल के बीच की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है. और यह मैप भारत के सम्प्रभुत्व वाले छेत्र को हमेसा की तरह साफ़ और सही तरीके से दिखलाता है. और इसी के साथ भारत ने यह भी कह दिया, की नेपाल और भारत के बीच सीमा के निर्धारण के लिए मैकेनिज्म का पहले ही विकास किया जा चुका है, और दोनों देशो के बीच दोस्ती को ध्यान में रखते हुए, सीमा विवाद को सुलझाने की कोसिस की जाती रहेगी. देखा जाये, तो जो बात नेपाल ने कही, वही बात भारत भी कह रहा है. और जबकि नए मैप में भारत और नेपाल की सीमा से कोई भी छेड़ छाड़ नहीं की गयी है, फिर भी नेपाल एक सप्ताह के बाद बौखला उठा है. आपको सायद पता हो, कालापानी का यह विवाद भारत और नेपाल के बीच वर्ष 1998 से धधक रहा है. जबकि नेपाल का ही कहना है, की 1962 के भारत चीन युद्ध में नेपाल ने भारत को कालापानी और नेपाल की अन्य जगहों पर भारतीय सेना तैनात करने की अनुमति दी थी. युद्ध समाप्त हो जाने के बाद, भारत ने अन्य सभी नेपाली पोस्ट को खाली कर दिया, लेकिन ऐसा ही कालापानी के साथ नहीं किया गया,और वहां आज इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस तैनात है. जबकि भारत के पास भी वर्ष 1830 से लेकर ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो सिद्ध करते हैं, की कालापानी को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत एडमिनिस्टर किया जाता रहा है. दोनों देशों के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशो के विदेश सचिवों को जिम्मेदारी दी गयी है, जबकि हाल के कुछ वर्षों में डिप्लोमेटिक तरीकों से इस विवाद के निपटारे में कोई प्रगति नहीं हुई है, लेकिन नेपाल के तरफ से आ रहे वयानो से इस विवाद को सुलझाने में वैसे भी कोई मदद नहीं मिल रही है. यहाँ पर ध्यान रखना जरूरी है, की कालापानी के इलाके का भारत की चीन के प्रति रणनीति में बड़ा महत्व है. कालापानी रिवर का भारतीय कण्ट्रोल का इलाका स्ट्रेटेजिक और सिक्योरिटी के लिहाज से भारत के लिए इम्पोर्टेन्ट है .यहाँ तक की डोकलाम विवाद के दौरान चीन ने भारत को धमकी देते हुई अपने इरादे यह कहकर साफ़ कर दिए थे, की चीन भी भारत और नेपाल के बीच विवादित इलाके में घुस सकता है. हालाँकि चीन के एक्सपर्ट यह भी कहते हैं, की यह इलाका उनकी भारत के खिलाफ रणनीति में ज्यादा हेल्प नहीं करेगा, उनका काम तो अक्साई चिन से ही चल सकता है. लेकिन आपको भी पता है, चीन जमीं तो छोड़िये समुद्र तक के लिए कितना भूखा है? अब आप देखिये, 1962 के युद्ध में जब नेपाल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के बीच सम्बन्ध अच्छे नहीं थे, तब नेपाल ने भारतीय सेना को नेपाल में तैनात करवाया था. लेकिन वर्ष 1998 जबसे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल ने माओइस्ट रेवोलुशन को लीड किया है, तभी से नेपाल कालापानी पर नजर गड़ाए हुए है. जब नेपाल को भारत से हेल्प चाहिए थी , तब उसने अपना काम बना लिया, और अब वही नेपाल भारत के कब्जे वाली जमीं के लिए आँखें दिखा रहा है. नेपाल अपने लिए भारत के खिलाफ बयां जारी कर रहा है, अथवा वह चीन के तरफ से बोल रहा है. यह सवाल अभी भी खड़ा हुआ है,की नेपाल के गुब्बारे में हवा भर कौन रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं, की नेपाल कालापानी से भारत को हटाकर किसी न किसी तरह से चीन को देकर बड़े जैकपोट को जीतने की फ़िराक में है?? इसलिए कालापानी के इस विवाद को सिर्फ भारत और नेपाल के बीच विवाद के तौर पर देखना हमारी बड़ी भूल हो सकती है. साथ में यह भी हो सकता है, की नेपाल और भारत के बीच सम्बन्ध अच्छे ना हो, यह नेपाल के कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के लिए बहुत जरूरी है, इसलिए यह आग हमेसा सुलग़ती रहे, इसकी व्यवस्था की जा रही है. यहाँ तक की भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इन निजी स्वार्थो की तरफ इशारा किया, और आशा की, दोनों देशो के बीच संबधों को और बिगड़ने से रोका जायेगा. भारत और नेपाल के बीच कालापानी के विवाद से चीन को जब लाभ होगा तब होगा, लेकिन नेपाल में भारत को दुसमन बताकर यदि वोटों की खेती तो की ही जा सकती है, सायद हाल फिलहाल यही हो रहा है. वैसे भी आजकल नेपाल की बातों में पाकिस्तान और चीन की बातों की खनक तो हमें सुनाई देती ही है. इसलिए नेपाल पर हमें ध्यान देने की जरूरत तो है, लेकिन नेपाल के बारे में चिंता नहीं करना है. हमें नेपाल को समय देना चाहिए. क्योकि कुछ बातें जैसे चीन और पाकिस्तान की दोस्ती का सच नेपाल को केवल गुजरने वाला वक़्त ही समझा सकता है. साथ में हमें यह भी ध्यान रखना होगा, की नेपाल और भारत के बीच इस आग में पेट्रोल कौन डाल रहा है. आज का बेहद आसान सवाल है, किस वर्ष से नेपाल ने कालापानी के ऊपर अपना दावा मजबुती से पेश करना चालू किया? पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, अंजना बेहेरा और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

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