अयोध्या निर्णय पर भारत ने बीमारू पाकिस्तान को दिया करारा जवाब!!


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
कल हम सभी का ध्यान अयोध्या विवाद के ऊपर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर था.

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के हमेसा के लिए निपटारे हेतु एक निर्णय दिया है, जिससे पुरे भारत ने चैन की सांस ली है. लेकिन पाकिस्तान की जलन तभी से बेतहासा बढ़ गयी है.

सबसे पहले अपनी भड़ास निकलने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री सामने आये, जिन्होंने सवाल किया, क्या सुप्रीम कोर्ट निर्णय सुनाने में कुछ दिनों के लिए इंतजार नहीं कर सकता था? उन्हें लगता है, की करतार पुर कॉरिडोर के उद्घाटन के शुभ मौके पर लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा किया है.

जहाँ तक हम समझ सकते हैं, अयोध्या मसले पर फैसले का दिन और कोई अच्छा हो ही नहीं सकता था, क्योकि परम पूज्य बाबा नानक ने हम सभी को पाठ पढ़ाया था, की इस्वर एक है, और हम सभी को हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बाद में, सबसे पहले इंसान बनना चाहिए.

करतार पुर कॉरिडोर को खोलने के पहले यदि पाकिस्तान अपने दिमाग के दरवाजे खोलकर बाबा नानक की सीख पढ़ लेता, तो ज्यादा अच्छा होता.

कोई बात नहीं, जिस आदमी की जैसी सोच होती है, वैसे ही उसके बोल होते हैं. सुप्रीम कोर्ट कब कौन सा निर्णय सुनाएगा, इसका निर्णय करने का अधिकार सिर्फ भारत के सुप्रीम कोर्ट को है. हमने अपनी सम्प्रभुता अभी भी पाकिस्तान में गिरबी नहीं रखी है.  इसलिए सुप्रीम कोर्ट से सम्बंधित भारत के आतंरिक मामलों में पाकिस्तान के स्टेटमेंट तो बर्दास्त किये ही नहीं जा सकते हैं.

फिर घड़ियाली आंसू बहाते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री को भारत के मुसलमानो की याद आयी, और उन्होंने कहा, की उन पर पहले से ही बहुत दवाब है, और अब सुप्रीम कोर्ट ने उन पर pressure और बड़ा दिया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री लगता है, केवल भारत की लिबरल मीडिया को ही सुनते हैं, कभी टाइम मिले तो अख़बारों में यह भी पढ़ लें, की लाखों की संख्या में मुस्लमान चीन में जेलों में बंद हो कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के प्रति वफादारी का गुण कैसे सीख रहे हैं.

लेकिन चीन में चल रहे इस दमन चक्र को लेकर दुनिया में मुसलमानो का सबसे बड़ा लीडर पाकिस्तान रेत में अपना सर गाड़ लेता है.

और वैसे भी माइनॉरिटीज को कैसे ट्रीट करना है, इसका उपदेश देने का हक़ कम से कम पाकिस्तान को तो नहीं है.

जहाँ तक भारत का सवाल है, तो दुनिया में यह केवल भारत में ही हो सकता है, की मेजोरिटी ने अपने सबसे प्रमुख आराध्य के जन्म स्थान पर मंदिर फिर से बनवाने के लिए 1528 से 2019 तक 491 सालों तक  इंतजार किया.

अयोध्या के निर्णय के ऊपर पाकिस्तान के Science and टेक्नोलॉजी minister Fawad Hussain ने भी कमेंट किया, अब जिन्हे खुद पाकिस्तान सीरियसली नहीं लेता, उसकी बातों पर हम भारतीय क्यों अपना समय बर्बाद करें?

पाकिस्तान के नेता और एक्सपर्ट कुछ भी कहते रहे, हम पर कोई असर नहीं पड़ता, हद तो तब हो गई, जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के सन्दर्भ में स्टेटमेंट जारी किया.

पाकिस्तान के अनुसार उन्हें बड़ी चिंता हो रही है, की सुप्रीम कोर्ट ने न्याय की मांग को पूरा नहीं किया है.

पाकिस्तान ने फिर यूनाइटेड नेशंस को इस मसले में घसीटते हुए, कहा है,  की जिस प्रकार जम्मू कश्मीर में मानव अधिकारों की रक्षा करने में सुप्रीम कोर्ट ने स्लो प्रतिक्रिया दी, उसी तरह अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से सिद्ध हो जाता है, की सुप्रीम कोर्ट भारतीय माइनॉरिटीज के अधिकारों के रक्षा नहीं कर पा रहा है.

सायद पाकिस्तान यह भूल गया, की यूनाइटेड नेशंस की ही सिक्योरिटी कौंसिल में इसी साल अगस्त महीने में दोनों चीन और पाकिस्तान को रिलीजियस माइनॉरिटीज के दमन के खिलाफ खुले में खरी खोटी सुनाई गई थी.

भारत के सुप्रीम कोर्ट को भारत के 130 करोड़ लोगों के मानव अधिकारों की रक्षा कर पाने को लेकर ना तो पाकिस्तान से कोई सर्टिफिकेट चाहिए, और ना ही ही यूनाइटेड नेशंस से.

भारत का सुप्रीम कोर्ट पूज्य बाबा साहेब अम्बेडकर के द्वारा बनाये गए संविधान के अंतर्गत काम करता है,और करता रहे, हमारे लिए और पूरी दुनिया के लिए यही काफी होना चाहिए.

लेकिन पाकिस्तान की तरफ से आये ऐसे स्टेटमेंट का भारत की तरफ से आधिकारिक जवाब दिया जाना भी बहुत जरूरी था,

इसलिए भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ़ कर दिया, की अयोध्या वर्डिक्ट को लेकर पाकिस्तान ने जो स्टेटमेंट दिया, है उसकी ना तो जरूरत थी, और ना ही उसके पीछे कोई वैलिड कारण था.

अयोध्या का निर्णय सिद्ध करता है, की कानून के आगे सभी नागरिक समान है, और पाकिस्तान ने इस निर्णय को समझ पाने में जो गलती करि है, वह सिद्ध करती है, की पाकिस्तान को भारत के आतंरिक मामलो में दखल देने की बीमारी लगी हुई है .

अगर आप गौर से देखें, तो पाकिस्तान की तरफ से जो कमेंट आ रहे हैं, वैसे ही विचार भारत के लिबरल एक्सपर्ट और मीडिया में पड़ने को और सुनते  दिखाई पढ़ रहे हैं.

ऐसा क्यों होता है, की हर बार हर मसले पर हमारे लिबरल एक्सपर्ट के विचारों से पाकिस्तानी स्टेटमेंट की खनक आती है??

Anyway पाकिस्तान जैसे फालतू देश पर स्टेटेमेंट जारी करने के पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने अयोध्या के निर्णय को लेकर ऐतिहासिक बैकग्राउंड को  भारत में दुनिया के बिभिन्न देशों के राजदूतों को समझाने की बहुत ही अच्छी कोसिस करि है.

जबकि अयोध्या विवाद भारत का आतंरिक मामला है, लेकिन दुनिया को सही ढंग से सन्दर्भ को समझाने की जिम्मेदारी हमारी ही है.

क्योकि आप तो जानते हैं, चाहे भारत की हो, अथवा दुनिया की लिबरल मीडिया हो, वह भारत में फूट डालने की भरपूर कोसिस करेगी, और सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को पाकिस्तान के चश्मे से दुनिया को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

उम्मीद है, इस बार भारतीय विदेश मंत्रालय की इस कोसिस से हमें इंटरनेशनल नैरेटिव को भारत के पक्ष में सेट करने में मदद मिलेगी.

आज का बेहद आसान सवाल है,  रिलीजियस माइनॉरिटीज के दमन के लिए अगस्त महीने में UN सिक्योरिटी कॉउन्सिल में किन दो देशो को निशाने पर लिया गया?

पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, Simran Singh
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

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