JNU में विरोध प्रदर्शन चालू क्यों हो गए??
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Reference -
जैसा की आपको पता लग गया होगा, की JNU छात्रों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन चालू कर दिया है.
यूनिवर्सिटी के अंदर 28 अक्टूबर को चालू हुए यह प्रोटेस्ट आज सडकों पर फ़ैल गए, और इसे आल इंडिया लेवल की न्यूज़ बना दिया गया.
इसलिए सवाल खड़ा होता है, की आखिर ये प्रोटेस्ट हो क्यों रहे हैं.
जैसा की मीडिया में रिपोर्ट किया जा रहा है, हॉस्टल चार्जेज में यूनिवर्सिटी ने बेतहासा बढ़ोतरी करि है, इसलिए छात्र सडको पर आ गए हैं.
सिंगल रूम के लिए रेंट को 20 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया.
और डबल शेयरिंग रूम के लिए रेंट 10 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया.
हमारी तरह आपको भी यह कई गुना बढ़ोतरी लगेगी, लेकिन आपको यह जानकर भी हैरानी होगी, की पिछले 19 सालों से JNU की fees revise नहीं की गयी है.
इसलिए fees में उछाल अगर आज बहुत अधिक लग रहा है, तो उसका कारण यह है, की इसे 19 सालों बाद किया जा रहा है.
यहाँ पर ध्यान रखना होगा, की फीस को बढ़ाने का प्रस्ताव पहले भी लाया गया था, लेकिन छात्र यूनियन ने उसे वापस करवाने में सफलता प्राप्त करि थी.
अब यदि 19 सालों में हम सभी को फीस में उछाल बहुत अधिक लग रहा है, तो उसका जिम्मेदार यूनिवर्सिटी है, अथवा स्टूडेंट यूनियन की पॉलिटिक्स ?
प्रदर्शनकारी छात्रों का यह भी विरोध है, की उन्हें पहले सर्विस चार्ज नहीं देना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें 1700 रुपये प्रतिमाह का सर्विस चार्ज भी देना होगा.
आप यह बताएं, की यदि सर्विस चार्ज स्टूडेंट पे नहीं करेंगे, तो क्या किसी को भी यह पे नहीं करना होगा.
JNU यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के मुताबिक 10 करोड़ सालाना खर्चा पानी बिजली और सर्विस पर होता है, जिसे अभी UGC के जनरल फण्ड से भरा जाता है.
अगर छात्र जिन सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, वह उनके लिए पे भी करेंगे, तो जो पैसा बचेगा, उसका प्रयोग यूनिवर्सिटी में सुविधाओं के विस्तार और विकास में किया जा सकेगा?
लेकिन छात्रों का यह भी कहना सही है, की JNU में 40 फ़ीसदी छात्र आर्थिक रूप से कमजोर तपके से आते हैं, और वह यह ऊँची फी नहीं भर पाएंगे.
हम इस बात से सहमत हैं, की जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें या तो फीस में ढिलाई मिलनी चाहिए, अथवा यूनिवर्सिटी और बैंक्स को उनके लिए ज्यादा लोन की बेहतर व्यवस्था करवानी चाहिए.
लेकिन JNU यूनिवर्सिटी के प्रदर्शन कारी छात्रों से कोई यह क्यों नहीं कह रहा है, की उनके ही तर्क के मुताबिक शेष 60% छात्र तो ऊँची फीस अदा कर सकते है, आखिर उन्हें क्या दिक्कत है?
कहीं ऐसा तो नहीं, गरीब छात्रों का बहाना बनाकर अमीर छात्र भी मलाई उड़ाने की कोसिस कर रहे हैं.
और यदि JNU के छात्रों को अपनी हॉस्टल फीस बहुत अधिक लग रही है, तो IIT दिल्ली के हॉस्टल और अन्य होस्टल्स के चार्जेज भी वह गूगल पर सर्च कर सकते हैं. तो उन्हें JNU के नए हॉस्टल चार्ज भी कम लगने लगेंगे.
JNU छात्रों के विरोध के अन्य कारण यह भी हैं, की उन पर हॉस्टल में नई pavandiyan लगायी जा रही है, और ड्रेस कोड उन पर थोपा जा रहा है.
आप में से कई लोगों को हॉस्टल में रहने का शोभाग्य मिला होगा, आप ही बताएं, भले ही आपको अच्छे ना लगे हों, लेकिन आपको भी हॉस्टल के नियम कायदों का पालन करना पड़ा होगा.
लेकिन जहाँ हॉस्टल के नए नियमो और ड्रेस कोड का सवाल है, ये साइड इशू जान पड़ते हैं. स्टूडेंट यूनियन और यूनिवर्सिटी प्रशासन साथ बैठकर एक दूसरे के विचारो को समझकर बीच का रास्ता भी निकाल सकते हैं.
हम सभी स्टूडेंट रहे हैं, आजादी हम सभी को पसंद है, उम्मीद है, आजादी की मांग करते हुए, JNU के छात्र भी सोचेंगे, की आखिर यूनिवर्सिटी में ड्रेस कोड लागु करने की जरूरत क्यों आन पड़ी, और हॉस्टल के नियम कड़े क्यों करने पड़े.
छात्रों का यह कहना सही जान पड़ता है, की जब विरोध प्रदर्शन 28 अक्टूबर से चल रहे थे, फिर भी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया.
हो सकता है, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह अनुमान लगाकर गलती की, जब हॉस्टल रूम का रेंट दसकों में पहली बार बढ़ाया जा रहा है, तो समझदार स्टूडेंट इस बढ़ोतरी को पचा जायेंगे.
आपको तो पता है, JNU को अधिकारों की लड़ाई के लिए जाना जाता है, इसलिए हॉस्टल फी hike के मौके को हवा देकर आज आग में तब्दील कर दिया गया.
उम्मीद है, यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी कम्युनिकेशन गैप रखने की गलतियों से सीखेगा, और पूरी जानकारी हम सभी को उपलब्ध कराएगा. क्योकि अब यह पूरा विवाद राष्ट्रीय स्तर के विवाद में तब्दील किया जा चुका है.
जहाँ तक JNU हॉस्टल फी hike का सवाल है, हमारा तो साफ़ तौर पर मानना है. आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट की वैकल्पिक सहायता की व्यवस्था होनी ही चाहिए.
लेकिन इक्वलिटी का प्रिंसिपल कहता है, की शेष 50 60 फीसदी छात्रों को महगी दिल्ली के हिसाब से हॉस्टल फी अदा करनी चाहिए. एक और विकल्प के तौर पर, हो सके तो गरीब छात्रों की फीस के बदले इन छात्रों की और फीस बड़ाई जा सकती है.
बात साफ़ है, आर्थिक रूप से सक्छम स्टूडेंट अपने कमजोर सहपाठियों की आर्थिक मदद भी कर सकते हैं.
JNU को समाजबाद के लिए जाना जाता है, उम्मीद है, JNU के स्टूडेंट यूनिवर्सिटी की तरफ देखने के बजाय, एक दूसरे की मदद के लिए हाथ आगे बड़ा सकते हैं.
आपको तो पता है, यह आईडिया किसी को पसंद नहीं आने वाला, वैसे भी जिन्हे विरोध प्रदर्शन करने की आदत लगी हो, उन्हें समाधान निकालने का समय कहाँ मिल पता है.
इसी बीच अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हताश और निराश हुई लिबरल मीडिया में JNU के प्रोटेस्ट ने ऊर्जा और फूर्ति का संचार तो कर ही दिया है.
लेकिन अच्छी बात अभी तक यह रही, की मोदी साहेब को इस विवाद में अभी तक नहीं घसीटा गया. लेकिन आपको अंदाजा तो होगा , इसकी तैयारियां जोरों शोरों से चल रही होंगी.
आजका बेहद आसान सवाल है, किस यूनिवर्सिटी में हॉस्टल फी hike को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए?
पिछले वीडियो में पूछे गए सवाल के लिए आज के लकी विनर हैं, विजय कुमार
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद..
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